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ओज क्या है...?
ओज दो प्रकार का होता है - १. पर ओज २. अपर ओज
पर ओज का प्रमाण 8 बिंदु है और वह हृदय में रहता है तथा उसके क्षय हो जाने पर मृत्यु हो जाती है अपर ओज अर्धाञ्जलि प्रमाण होता है और वह सारे शरीर में व्याप्त रहता है। यहां पर अपर ओज के क्षय का ही लक्षण दिया गया है ।
बिभेति दुर्बलोऽभीक्ष्णं ध्यायति व्यथितेन्द्रियः ।
दुश्छायो दुर्मना रूक्षः क्षामश्चैवौजसः क्षये ॥
ओज क्षय के लक्षण – ओज का क्षय होने पर मनुष्य भयभीत रहता है, दुर्बल हो जाता है सदैव चिंतित और ध्यान मग्न रहा करता है, इंद्रियाँ अपने कार्य में असमर्थ सी होती हैं शरीर की कान्ति मलिन हो जाती है मन उदास रहता है शरीर में रूखापन और कृशता आ जाती है।