image

image
3 лет - перевести

हरियाणा जिला रोहतक के मशहूर महम #चौबीसी में ऐतिहासिक चबूतरे पर पूरे देश से आयी #सर्वखाप पंचायत जल्द लेगी कोई बड़ा फेसला🙏🏻

image

image
3 лет - перевести

अलीगढ़ जिला के गांव सिरसा (अतरौली) के लाडले भारतीय सेना के जवान हवलदार गुलवीर सिंह का डबल गोल्ड धमाका !
बहुत खुशी हो रही है कि खेल सुविधाओं के अभाव में भी एथेलेटिक्स में हमारे पश्चिमी उत्तरप्रदेश के खिलाड़ी शानदार प्रदर्शन कर रहें है।
बहुत बहुत शुभकामनाएं फौजी भाई को गोल्ड जीतने और एशियन चैंपियनशिप में क्वालीफाई के लिए !

image
3 лет - перевести

कब चली देश में पहली ट्रेन
इन सारे प्रयासों के बाद देश में पहली ट्रेन आज से 170 साल पहले यानि 16 अप्रैल, 1853 में शुरू हुई. देश में पहली ट्रेन तत्कालीन बंबई के बोरीबंदर से लेकर ठाणे के बीच चली थी. ये ट्रेन दोपहर 3 बजकर 35 मिनट पर मुंबई से निकली और 4 बजकर 45 मिनट पर ठाणे पहुंची.

image
3 лет - перевести

ये तस्वीर हरियाणा की है. इस महिला नेता का नाम सोनिया दुहन है.
सोनिया 500 महिलाओं का जत्था लेकर जंतर मंत्र आ रही थीं
देखिए कितनी बेरहमी से हिरासत में लिया गया है.
.

image
3 лет - перевести

जगन्नाथ मन्दिर, पुरी

यह लेख आज का आलेख के लिए निर्वाचित हुआ है। अधिक जानकारी हेतु क्लिक करें।
श्री जगन्नाथ मंदिर
Temple-Jagannath.jpg
धर्म संबंधी जानकारी
सम्बद्धता सनातन हिन्दू धर्म
देवता भगवान जगन्नाथ
अवस्थिति जानकारी
अवस्थिति पुरी, ओडिशा
वास्तु विवरण
शैली कलिंग वास्तु
निर्माता कलिंग राजा अनंतवर्मन् चोडगंग देव
जीर्णोद्धारक - 1174 ई. में ओडिआ शासक अनंग भीम देव
स्थापित 12वीं शताब्दी
पुरी का श्री जगन्नाथ मन्दिर एक हिन्दू मन्दिर है, जो भगवान जगन्नाथ (श्रीकृष्ण) को समर्पित है। यह भारत के ओडिशा राज्य के तटवर्ती शहर पुरी में स्थित है। जगन्नाथ शब्द का अर्थ जगत के स्वामी होता है। इनकी नगरी ही जगन्नाथपुरी या पुरी कहलाती है।[1][2] इस मन्दिर को हिन्दुओं के चार धाम में से एक गिना जाता है। यह वैष्णव सम्प्रदाय का मन्दिर है, जो भगवान विष्णु के अवतार श्री कृष्ण को समर्पित है।[3] इस मन्दिर का वार्षिक रथ यात्रा उत्सव प्रसिद्ध है। इसमें मन्दिर के तीनों मुख्य देवता, भगवान जगन्नाथ, उनके बड़े भ्राता बलभद्र और भगिनी सुभद्रा तीनों, तीन अलग-अलग भव्य और सुसज्जित रथों में विराजमान होकर नगर की यात्रा को निकलते हैं। श्री जगन्नथपुरी पहले नील माघव के नाम से पुजे जाते थे। जो भील सरदार विश्वासु के आराध्य देव थे। अब से लगभग हजारों वर्ष पुर्व भील सरदार विष्वासु नील पर्वत की गुफा के अन्दर नील माघव जी की पुजा किया करते थे [4] । मध्य-काल से ही यह उत्सव अतीव हर्षोल्लास के साथ मनाया जाता है। इसके साथ ही यह उत्सव भारत के ढेरों वैष्णव कृष्ण मन्दिरों में मनाया जाता है, एवं यात्रा निकाली जाती है।[5] यह मंदिर वैष्णव परम्पराओं और सन्त रामानन्द से जुड़ा हुआ है। यह गौड़ीय वैष्णव सम्प्रदाय के लिये खास महत्व रखता है। इस पन्थ के संस्थापक श्री चैतन्य महाप्रभु भगवान की ओर आकर्षित हुए थे और कई वर्षों तक पुरी में रहे भी थे।[

image
3 лет - перевести

मेहंदीपुर बालाजी मंदिर का इतिहास Mehandipur balaji temple history in hindi

मेहंदीपुर बालाजी यह भगवान हनुमान जी का एक मंदिर है, यह मंदिर भारत में राजस्थान के दौसा जिले में स्थित है. यह मंदिर भगवान हनुमान जी को समर्पित है जोकि न सिर्फ़ हिन्दू के ही देवता है, बल्कि इनकी चमत्कारी शक्ति की वजह से सभी इनकी पूजा अर्चना करते है और इनमे आस्था रखते है. बालाजी भगवान हनुमान जी का दूसरा नाम है, भारत के कुछ भाग में बालाजी नाम से भी इनको बुलाया जाता है. बालाजी उनके बचपन का नाम है, इसका संस्कृत और हिंदी में भी उपयोग होता है. अन्य धार्मिक स्थानों की तरह यह शहर में स्थित है. बाला जी की मूर्ति में छाती के बाये तरफ एक छोटा सा छेद है, जिसमे से हमेशा पानी की एक पतली धारा बहते रहती है. इस पानी को एक टैंक में इकठ्ठा करके भगवान बाला जी के चरणों में रख कर लोगो में वितरित किया जाता है और सभी लोग इसे प्रसाद की तरह लेते है.

image
3 лет - перевести

IPL 2023(16वां) -विजेता (चेन्नई सुपरकिंग्स-5वीं बार)💐

image