3 лет - перевести

दोस्तों हाइड्रो पावर प्लांट (Hydro power plant in Hindi) में हम पानी की स्थिति ऊर्जा का उपयोग बिजली पैदा करने में करते हैं। इसमें हम नदियों में स्थित पानी को बांध बनाकर एक जगह पर इकट्ठा कर लेते हैं। जिसे हम वाटर हेड बनाना भी बोलते हैं। जब नदी का पानी इकट्ठा हो जाता है तो हम उसे धीरे-धीरे करके पानी को छोड़ते हैं। चुकी हम पानी एक जगह पर इकट्ठा करते हैं तो पानी का वाटर हेड अत्यधिक होता है। यानी पानी की स्थितिज ऊर्जा बहुत अधिक होती है। यही कारण है कि जब पानी को हम छोड़ते हैं तो वह पानी तेज गति से बहता है। और उसी पानी के दबाव को हम टरबाइन लगाकर मैकेनिकल एनर्जी में बदल लेते हैं। और अगले स्टेप में हम टरबाइन से अल्टरनेटर लगाकर मैकेनिकल एनर्जी को इलेक्ट्रिकल एनर्जी में बदल लेते हैं।

हाइड्रो पावर प्लांट को सबसे पुराना पावर प्लांट माना जाता है। साथ ही यह प्रदूषण रहित भी होता है। अगर भारत में देखा जाए तो सबसे पहला हाइड्रो प्लांट दार्जिलिंग, पश्चिम बंगाल में बना था। तथा उसी पावर प्लांट के समकालीन कर्नाटक के सरावती जिले में भी बनाया गया था।

image

image
3 лет - перевести

जाब की तलवंडी साबो के पावर प्लांट (Talwandi Sabo power plant) की दूसरी यूनिट भी रविवार को खराब होने के कारण660 मेगावाट बिजली उत्पादन (660 MW power generation) ठप हो गया, जिससे सूबे में बिजली का संकट और बढ़ गया है. इस संकट से बिजली के उपयोग पर उद्योगों पर लगाए गए प्रतिबंधों को हटाने पर भी सवालिया निशान लग गए है. मध्य और उत्तरी क्षेत्रों में स्थित औद्योगिक इकाइयां (Industrial units) तीन दिनों से बंद हैं और आज बिजली उत्पादन की स्थिति बिगड़ने के साथ अब प्रतिबंधों को और बढ़ाया जा सकता है.





Ads by
राज्य भर में घरेलू और वाणिज्यिक उपभोक्ताओं ने भी दो से चार घंटे तक की अनिर्धारित बिजली कटौती की शिकायत की है. पीएसपीसीएल के अधिकारियों का कहना है कि इस कटौती का कारण तलवंडी साबो में 660 मेगावाट के संयंत्र के बॉयलर ट्यूब में रिसाव है और संयंत्र को चालू होने में दो से तीन दिन लगेंगे. एक अन्य इकाई (660 मेगावाट) खराबी के कारण कुछ समय के लिए बंद पड़ी है और इस महीने के अंत तक ही उत्पादन शुरू होने की उम्मीद है. जैसे-जैसे कृषि क्षेत्र में मांग बढ़ती जा रही है पंजाब स्टेट पावर कॉरपोरेशन लिमिटेड (Punjab State Power Corporation) ने मांग को पूरा करने के लिए कड़ी मेहनत कर रही है. वर्तमान में राज्य में कुल बिजली की मांग 12280 मेगावाट है. भारत सरकार द्वारा राज्य की खरीद क्षमता को 400 मेगावाट बढ़ाकर 7800 मेगावाट करने के बाद राज्य ने पावर एक्सचेंज से क्रय शक्ति में वृद्धि की है. पिछले साल राज्य की खरीद क्षमता 6400 मेगावाट थी, जिसे इस साल बढ़ाकर 7400 मेगावाट कर दिया गया है.

image

image

image

image

image

image

image
3 лет - перевести

Importance of Modi US Visit: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अगले महीने अमेरिका जाने वाले हैं। खास बात यह है कि मोदी अमेरिका के राष्ट्रपति जो बाइडेन के बुलावे पर जा रहे हैं और यह स्टेट विजिट होगी यानी इसे राजकीय यात्रा का दर्जा दिया गया है। मोदी अब तक महज तीसरे ऐसे भारतीय नेता हैं, जिन्हें अमेरिका ने राजकीय यात्रा का न्योता दिया है। अमेरिका में आगामी राष्ट्रपति चुनाव के पहले दुनिया के सबसे बड़े लोकतंत्र के प्रधानमंत्री की यह यात्रा कई मायनों में अहम मानी जा रही है। इसके साथ ही सबकी नजरें इस बात पर भी लगी हैं कि इस यात्रा में मोदी और बाइडेन की कैसी केमिस्ट्री दिखेगी क्योंकि अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप के साथ मोदी के करीबी रिश्तों की बात किसी से छिपी नहीं है।
क्या है मोदी और चीनी राष्ट्रपति शी जिनफिंग के हाथ मिलाने का मतलब?

मोदी की यह यात्रा दोनों देशों के रिश्तों को और मजबूत बनाएगी, ऐसी उम्मीद की जा रही है। यह यात्रा यूक्रेन युद्ध के साये में हो रही है। अमेरिका ने काफी दबाव बनाया था कि यूक्रेन युद्ध में भारत खुलकर रूस का विरोध करे। यह दबाव भी डाला गया कि भारत रूस से कच्चे तेल का आयात बंद कर दे जिससे रूस को आर्थिक नुकसान हो, लेकिन भारत ने ऐसा कुछ नहीं किया।

हालांकि इस एक नुक्ते को छोड़ दें तो भारत और अमेरिका के संबंध हाल के वर्षों में मजबूत ही हुए हैं। क्वॉड से लेकर आई2यू2 (I2U2) तक, हर मंच पर दोनों देश कंधे से कंधा मिलाकर चले हैं। क्वॉड भारत-प्रशांत क्षेत्र में चीन की बढ़ती हरकतों से निपटने के लिए बनाया गया संगठन है। इसमें भारत और अमेरिका के अलावा जापान और ऑस्ट्रेलिया शामिल हैं। वहीं I2U2 में इंडिया, इजरायल, अमेरिका और यूएई हैं।

अमेरिकी राष्ट्रपति ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को अमेरिका की राजकीय यात्रा
मोदी की आगामी यात्रा के बारे में व्हाइट हाउस ने कहा है कि भारत और अमेरिका, दोनों चाहते हैं कि ‘भारत-प्रशांत क्षेत्र सुरक्षित और समृद्ध’ बने और मोदी-बाइडेन की बातचीत से यह सोच और मजबूत होगी। जाहिर है इंडो-पैसिफिक रीजन का हवाला इसलिए दिया गया है क्योंकि अमेरिका इस क्षेत्र में चीन की बढ़ती हरकतें रोकना चाहता है।

ऐसे पस-ए-मंजर के साथ मोदी 21 जून से 24 जून तक अमेरिका की राजकीय यात्रा पर होंगे। इस यात्रा को लेकर जहां तमाम उम्मीदें हैं, वहीं कुछ दुविधा भी है। लेकिन इनके बारे में बात करने से पहले एक नजर डाल लेते हैं अमेरिका की स्टेट विजिट की रस्म पर।

ऐसी स्टेट विजिट केवल अमेरिका के राष्ट्रपति के न्यौते पर ही होती है। यह भी खास बात है कि कोई भी अमेरिकी राष्ट्रपति अपने चार साल के कार्यकाल में किसी विदेशी नेता को दो बार स्टेट विजिट का आमंत्रण नहीं दे सकता। जब कोई नेता अमेरिका की राजकीय यात्रा पर होता है तो उसका परंपरागत रूप से भव्य स्वागत होता है। अमेरिका पहुंचते ही हवाई पट्टी पर ही राजकीय स्वागत होता है। फिर व्हाइट हाउस पहुंचने पर 21 तोपों की सलामी दी जाती है। अमेरिका के राष्ट्रपति परंपरा के अनुसार मोदी के सम्मान में राजकीय भोज का आयोजन भी करेंगे। यह आयोजन 22 जून को होगा। राजकीय यात्रा पर अमेरिका जाने वाले नेताओं को अमेरिकी कांग्रेस को संबोधित करने का न्यौता दिया जाता है। राजकीय मेहमान को अमेरिकी राष्ट्रपति के अतिथि गृह ब्लेयर हाउस में ठहरने का इनविटेशन भी दिया जाता है।

image