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आमेर के राजा भगवानदास के पोते आगरा में जहांगीर के महलों के करीब रहा करते थे। जब मेवाड़ के महाराणा अमरसिंह ने मुगलों का विरोध किया, तो इन कछवाहा भाइयों ने महाराणा का साथ देने का इरादा किया।
तुजुक-ए-जहांगीरी में जहांगीर लिखता है "आमेर के कुछ कछवाहों ने मेरे खिलाफ बगावत कर दी। इनके नाम अभयराम, विजयराम, श्यामराम थे। ये राजा भगवानदास के पोते थे। ये अपने परिवार समेत आगरा में रहते थे। अभयराम की एक बात मुझे पता चली कि वो राणा अमर का ताबेदार बनने मेवाड़ जाना चाहता है। इन लोगों ने मेरे एक ख़ास सिपहसालार को भी मार डाला, तो मैंने अपने महल के चौक में अभयराम समेत उन तीनों भाईयों का कत्ल करवा दिया। अभयराम के दो और साथी भी लड़ने आए, जो कत्ल हुए"
सभी वीरों को शत शत नमन.....