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राजपूताना जिसे राजस्थान भी कहा जाता है। राजपूतों की राजनीतिक सत्ता आयी तथा ब्रिटिशकाल में यह राज्य/क्षेत्र/प्रदेश नाम से जाने जाना लगा।[1] इस प्रदेश का आधुनिक नाम राजस्थान है, जो उत्तर भारत के पश्चिमी भाग में अरावली की पहाड़ियों के दोनों ओर फैला हुआ है। इसका अधिकांश भाग मरुस्थल है। यहाँ वर्षा अत्यल्प और वह भी विभिन्न क्षेत्रों में असमान रूप से होती है। यह मुख्यत: वर्तमान राजस्थान राज्य की भूतपूर्व रियासतों का समूह है, जो भारत का एक महत्त्वपूर्ण हिस्सा है।
कवि चंदबरदाई के कथनानुसार राजपूतों की 36 जातियाँ थी। उस समय में क्षत्रिय वर्ण के अंतर्गत सूर्यवंश और चंद्रवंश के राजघरानों का बहुत विस्तार हुआ। राजपूतों में मेवाड़ के महाराणा प्रताप और पृथ्वीराज चौहान का नाम सबसे ऊंचा है।
क्षत्रिय राजपूत के बारें में : सबसे पहले तो हम आपको ये बता दे की राजपूत का मतलब है "राजा का पुत्र" इसके अलावा क्षत्रिय का मतलब है - "जागिरदार"। यह भारतीय उपमहाद्वीप से उत्पत्ति वाले वंशों की वंशावली है जिसमें विचारधारा और सामाजिक स्थिति के साथ स्थानीय समूह और जातियों की विशाल बहुघटकी समूह शामिल हैं।
आपकी बेहतर जानकारी के लिए बता दे की राजपूत उत्तर भारत का एक क्षत्रिय कुल है, जो कि राजपुत्र का अपभ्रंश है। राजस्थान में राजपूतों के अनेक वंश हैं। राजस्थान को ब्रिटिशकाल मे राजपूताना भी कहा गया है। पुराने समय में आर्य जाति में केवल चार वर्णों की व्यवस्था थी, किन्तु बाद में इन वर्णों के अंतर्गत अनेक जातियाँ बन गईं।
क्षत्रिय वर्ण की अनेक जातियों और उनमें समाहित कई देशों की विदेशी जातियों को कालांतर में राजपूत जाति कहा जाने लगा। कवि चंदबरदाई के कथनानुसार राजपूतों की 36 जातियाँ थी। उस समय में क्षत्रिय वर्ण के अंतर्गत सूर्यवंश और चंद्रवंश के राजघरानों का बहुत विस्तार हुआ। राजपूतों में मेवाड़ के महाराणा प्रताप और पृथ्वीराज चौहान का नाम सबसे ऊंचा है।
राजपूतों की उत्पत्ति :
राजपूत वंश की उत्पत्ति के विषय में विद्धानों के दो मत प्रचलित हैं- एक का मानना है कि राजपूतों की उत्पत्ति विदेशी है, जबकि दूसरे का मानना है कि राजपूतों की उत्पत्ति भारतीय है। 12वीं शताब्दी के बाद के उत्तर भारत के इतिहास को टॉड ने 'राजपूत काल' भी कहा है। कुछ इतिहासकारों ने प्राचीन काल एवं मध्य काल को 'संधि काल' भी कहा है। इस काल के महत्वपूर्ण राजपूत वंशों में राष्ट्रकूट वंश, दहिया वन्श, डांगी वंश, चालुक्य वंश, चौहान वंश, चंदेल वंश, सैनी, परमार वंश एवं गहड़वाल वंश आदि आते हैं।
सूर्य वन्श की शाखायें :
कछवाह
राठौड
मौर्य
सिकरवार
सिसोदिया
गहलोत
गौर
गहलबार
रेकबार
बडगूजर
कलहश
चन्द्र वंश की शाखायें :
जादौन
भाटी
तन्वर
चन्देल
छोंकर
होंड
पुण्डीर
कटैरिया
दहिया
अग्निवंश की शाखायें :
चौहान
सोलंकी
परिहार
पमार
बिष्ट
ऋषिवंश की बारह शाखायें :
सेंगर
दीक्षित
दायमा
गौतम
अनवार (राजा जनक के वंशज)
विसेन
करछुल
हय
अबकू तबकू
कठोक्स
द्लेला
भारत का महान लोकतंत्र आज सच्चे अर्थों में गौरवभूषित हुआ है।
आदरणीय प्रधानमंत्री श्री Narendra Modi जी द्वारा आज लोक सभा में प्रस्तुत किया गया 'नारी शक्ति वंदन अधिनियम' महिला सशक्तिकरण की दिशा में एक युगांतरकारी कदम है।
समूची मातृशक्ति को हार्दिक बधाई!
देश की आधी आबादी को उनका हक देने तथा भारतीय लोकतंत्र को और अधिक मजबूत व सहभागी बनाने वाला यह कालजयी निर्णय 'विकसित भारत' के निर्माण में बड़ी भूमिका निभाएगा।
हार्दिक आभार प्रधानमंत्री जी!