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शीश कर खग को समर्पित
नभ को चली क्षत्राणियां
केसरी श्रृंगार कर
रण को रणबंके सजे!!1!!
रक्त से रंगे थे हाथ
जिन से थे वे पले बड़े
दिल्ली थी आज दोगली
मरण मंगल से रखी माँ ने लाज!!2!!
दुर्ग सा मजबूत दुर्गा
हिमालय सा ह्रदय जिसका
देह पावन गंग जैसी
प्रण था जिसे प्राणों से प्यारा!!3!!
थी लड़ाई मान की
अजीत के जान की
धरा के सम्मान की
राठौड़ो के स्वाभिमान की!!4!!
दिल्ली का था दिल दहलता
दहाड़ से दुर्गेश की
रक्त से खेली थी होली
लाज रखने पचरंगे की!!5!!
गगन गुंजा
धरा दहली
ओरंग का अभिमान टूटा
मरुधर नरेश दिल्ली से छुटा!!6!!
जय जय दुर्गादास महान
तूने रखी मरुधरा की आन
हिन्द धरा की तू ही शान
जय जय दुर्गादास महान
जय जय दुर्गादास महान!!7!!
~ भोपाल सिंह झलोड़ा