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जो बचपन में स्कूल नहीं जा सकीं, वही आज बिहार की 50 से ज़्यादा महिलाओं की पहली टीचर बन गई हैं। 🌱
गया के एक मज़दूर परिवार में जन्मी मालो देवी बचपन में स्कूल नहीं जा सकीं, क्योंकि गरीबी ने उन्हें स्कूल की जगह मवेशी चराने भेज दिया। पर पढ़ने की ललक कम नहीं हुई। जब भी मौका मिलता, वे गांव के स्कूल के पास रुककर मास्टर जी की बातें सुनतीं, और नदी किनारे रेत पर उंगली से अक्षर बनाकर लिखना सीखतीं।
रावण का किरदार निभाने वाले दलबीर सिंह ने असल ज़िंदगी में ऐसा काम किया, जिसे लोग आज भी याद करते हैं।
20 अक्टूबर 2018 को अमृतसर के जोड़ा फाटक पर दशहरे का जश्न चल रहा था। सैकड़ों लोग रेलवे ट्रैक के पास खड़े होकर रावण दहन देख रहे थे। तभी जालंधर से अमृतसर आ रही तेज़ रफ़्तार ट्रेन को देखकर दलबीर लोगों को आगाह करने और उन्हें पटरी से हटाने दौड़े।
रिपोर्ट्स के मुताबिक, उन्होंने 7–8 लोगों को पटरी से धकेलकर उनकी जान बचाई, लेकिन खुद ट्रेन की चपेट में आ गए। इस दर्दनाक हादसे में 61 लोगों की जान गई।
दलबीर अपने पीछे माँ, पत्नी और 8 महीने की बेटी छोड़ गए। रामलीला में रावण बनने वाले दलबीर ने उस दिन दूसरों की जान बचाने की कोशिश करके इंसानियत की एक ऐसी मिसाल पेश की, जिसे भुलाया नहीं जा सकता।
सच्चा हीरो वही है, जो मुश्किल घड़ी में दूसरों के लिए खड़ा हो जाए। 🙏
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