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70 साल के मौलाना ने 26 साल की लड़की को बना लिया बेगम । पाकिस्तान के रावलपिंडी के एक जाने-माने 70 वर्षीय मौलाना हाकिम ने हाल ही में अपने से 44 साल छोटी एक महिला से प्रेम निकाह किया है, निकाह के बाद मौलाना ने 'कपल फोटोशूट' कराया, जिसकी तस्वीरें और वीडियो अब हर तरफ वायरल हो रही हैं । जिसमें मौलाना अपनी मासूका की गोदी में सर रख कर जन्नत की सैर करते हुए नज़र आ रहे हैं ।
मौलाना का कहना है कि वे इस उम्र में जवान और खूबसूरत बीवी से इसलिए निकाह कर रहे हैं क्योंकि मरने के बाद उन्हें जन्नत में 72 हूरों के दर्शन होंगे ।
बिहार के शिवान जिला में रहने वाले राकेश मंडल ने अपनी विधवा भाभी के साथ में शादी कर ली। दरअसल राकेश मंडल के बड़े भाई का 1 साल पहले एक एक्सीडेंट में स्वर्गवास गया था जिसके बाद वह अपनी जवान भाभी के साथ घर में अकेले रहता था।
इसलिए गाँव और मोहल्ले के लोग देवर और भाभी के बीच रिश्ते को लेकर गलत बातें कर रहे थे, इसलिए जब उसकी शादी की बात आई तब उसने फैसला किया कि वह अपनी विधवा भाभी के साथ में ही शादी करेगा, और उसका सहारा बनेगा। जिसके लिए राकेश के घर वाले भी राजी हो गए और दोनों की गाँव वालों के सामने जयमाला करवाकर आपस में शादी करवा दी गई ।।
आपके हिसाब से राकेश मंडल ने अपनी विधवा भाभी से शादी करके सही किया या गलत ? कमेंट बॉक्स में जरूर बताएं ।
नसबंदी होने के बाद भी महिला हुई गर्भवती । उत्तर प्रदेश के जालौन जिले से एक अनोखा मामला सामने आया है जिसमे महिला के पति भानुप्रताप ने अपनी 2 साल पहले अपनी पत्नी भूरी सिंह की सरकारी अस्पताल में नसबंदी करवाई थी क्योंकि वह अब और बच्चे नहीं चाहता था ।
वह पूरी तरह से स्वतंत्र था और वह रोज पिच पर जबरदस्त बैटिंग कर रहा था । लेकिन उसके साथ उल्टा हो गया ।
स्वास्थ्य विभाग की लापरवाही के कारण उसकी पत्नी फिर से प्रेग्नेंट हो गई और बच्चे को जन्म दे दिया । जिसके बाद महिला के पति ने सरकार की लापरवाही के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है और वह भरण पोषण के लिए सरकार से आर्थिक मुआवजा की माँग कर रहा है ।
इस अनोखी घटना पर पर आपकी क्या राय है कमेंट बॉक्स में जरूर बताएं ।।
जिंदगी कभी-कभी ऐसे इम्तिहान लेती है कि अच्छे-अच्छे टूट जाते हैं। लेकिन जो इंसान मौत को मात देकर वापस लौट आए, उसे कोई परीक्षा नहीं हरा सकती। अथिरा सुगाथन की कहानी उन लाखों युवाओं के लिए सबसे बड़ी प्रेरणा है, जो छोटी-छोटी असफलताओं से निराश हो जाते हैं।
एक भयानक सड़क दुर्घटना ने अथिरा की जिंदगी पूरी तरह बदल दी थी। इस हादसे के बाद उन्हें 2 साल तक गंभीर मेमोरी लॉस का सामना करना पड़ा। वे अपनी पढ़ाई तक भूल चुकी थीं और व्हीलचेयर पर आ गई थीं। ऐसे हालात में ज्यादातर लोग हार मान लेते हैं, लेकिन अथिरा फौलाद की बनी थीं।
उन्होंने अपनी याददाश्त वापस पाई, दोबारा उठ खड़ी हुईं और अपनी BDS (डेंटिस्ट्री) की पढ़ाई पूरी की। इसके बाद उन्होंने देश की सबसे कठिन परीक्षा UPSC CSE की तैयारी शुरू की और अपने चौथे प्रयास में ऑल इंडिया 483वीं रैंक (AIR 483) हासिल कर एक नया इतिहास रच दिया।
अथिरा का यह फौलादी सफर साबित करता है कि अगर इंसान के हौसले बुलंद हों, तो तकदीर भी अपना फैसला बदलने पर मजबूर हो जाती है।
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