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कृष्णा नगर कॉलोनी में विकास की नई रफ्तार!
भगवानपुर स्थित कृष्णा नगर कॉलोनी (लेन नं. 1ए, 2ए, 3ए, 4ए) में ₹ 38.02 लाख की लागत से मार्ग निर्माण एवं भूमिगत जलनिकासी कार्यों का विधिवत शिलान्यास सम्पन्न हुआ।
शिलान्यास का पूजन वरिष्ठ नागरिक श्री पुरुषोत्तम पांडेय जी से कराया गया। श्री अभय द्विवेदी जी ने नारियल फोड़ शुभारम्भ किया तथा शिलापट्ट का अनावरण श्रीमती भारती उपाध्याय जी एवं श्री मोहनलाल श्रीवास्तव जी ने संयुक्त रूप से किया।
मेरा संकल्प है भगवानपुर की प्रत्येक गली में मूलभूत सुविधाओं का संयोजन।
उपस्थित सभी वरिष्ठजनों, मातृशक्ति एवं कार्यकर्ताओं का हृदय से अभिनंदन।
कार्यक्रम में प्रमुख रूप से उपस्थित थे मंडल मंत्री रामनगर श्रीमती इंदू सिंह जी, वार्ड अध्यक्ष श्री गोपाल जालान जी, शक्ति केंद्र संयोजक आचार्य श्री अभय द्विवेदी जी, शक्ति केंद्र संयोजक श्री प्रमोद राजभर जी, श्री देवेंद्र उपाध्याय जी, श्री सुभाष श्रीवास्तव जी, श्री राजगृही सिंह जी, श्री आकाश सोनकर जी, श्री कृष्णानंद चतुर्वेदी जी, श्री सुनील सिंह जी, श्री चंद्रमा पटेल जी, श्री दीनबंधु तिवारी जी, श्री अनिल राय जी, श्री अरविन्द तिवारी जी, श्री राजेश पाण्डेय जी, श्री मनोज कुमार सिंह जी व अन्य।
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नासा के हबल स्पेस टेलीस्कोप ने कैरिना नेब्युला में स्थित एक उथल-पुथल भरे तारकीय क्षेत्र की बेहद शानदार तस्वीर कैद की है। करीब 7,500 प्रकाश-वर्ष दूर मौजूद गैस और धूल का यह विशाल स्तंभ नए तारों के निर्माण का केंद्र है। आसपास के युवा और गर्म तारे अपनी तेज़ हवाओं और पराबैंगनी विकिरण से इस संरचना को आकार दे रहे हैं, जबकि इसके घने हिस्सों में लगातार नए तारे जन्म ले रहे हैं। यह ऐतिहासिक तस्वीर हबल टेलीस्कोप की लॉन्चिंग के 20 साल पूरे होने के अवसर पर ली गई थी।
मध्य प्रदेश के नीमच जिले के रानपुर गांव से इंसानियत को झकझोर देने वाली घटना सामने आई है। आंगनवाड़ी केंद्र पर मधुमक्खियों के अचानक हुए हमले के दौरान कंचन बाई मेघवाल ने अपनी जान की परवाह किए बिना करीब 20 मासूम बच्चों को सुरक्षित बाहर निकाला। बच्चों को बचाने के दौरान वे खुद मधुमक्खियों के गंभीर हमले का शिकार हो गईं। उन्हें तुरंत अस्पताल ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया। इस घटना के बाद पूरे गांव में शोक और दहशत का माहौल है, वहीं कंचन बाई का बलिदान पूरे इलाके के लिए मिसाल बन गया है।
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राजस्थान की धरती पर जन्मे पाबूजी महाराज वीरता, वचन और धर्म के ऐसे प्रतीक हैं जिन्हें आज भी लोकदेवता के रूप में पूजा जाता है। उनका जन्म कोलू में राठौड़ वंश में हुआ। उनके पिता धांधल राठौड़ और माता कमलादे थीं। बचपन से ही पाबूजी साहसी, न्यायप्रिय और करुणामय थे।
वचन का बंधन
एक दिन देवल चारण नामक एक गौपालक ने पाबूजी महाराज से अपनी गायों की रक्षा का आग्रह किया। पाबूजी महाराज ने उसे वचन दिया—
“जब तक प्राण हैं, तुम्हारी गायों की रक्षा करूँगा।”
राजस्थान की परंपरा में यह वचन जीवन से भी बड़ा होता है।