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🔥🔥 दिल की बात केह दी राजा भईया ने - हर समाज का नेता अपने हक अधिकारों के लिए अपने समाज का मुद्दा उठाता है लेकिन सवर्ण समाज के नेता जब अपने समाज की मुद्दे की बात आती है तो मुंह में दही जम जाता है मैं सिर्फ इलेक्शन के समय अपना समाज याद आता है
#आरक्षण_बिरोधी_मंच आरक्षण विरोधी मंच
#highlight_followers 🔥

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आतंक पर शरारत भरी बातें

यह अत्यंत शर्मनाक है कि हमारे यहाँ ऐसे नेता है, जो आतंकियों के हमले को राजनीतिक विरोधियों पर थोपना चाहते हैं

जो भारतीय स्वयं को एक पंथनिरपेक्ष और लोकतांत्रिक
जीवन शैली का समर्थक मानते हैं, उन्हें उन सभी नेताओं से
सावधान रहना चाहिए, जो लाल किले के निकट हुए आतंकी हमले की स्पष्ट एवं बिना किसी हिचकिचाहट के निंदा करने
से इन्कार कर रहे हैं और मुसलमानों के बीच तथाकथित "असंतोष" को लेकर शरारत भरे तर्क प्रस्तुत कर रहे हैं।

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7 X 11 साईज़ की कोठरी... सीमेंट की पक्की जमीन... ठण्ड हो या गर्मी उसी पर सोना है... इसी कोठरी के एक कोने में खुले में शौच और पेशाब करना है... गले-हाथ और पैरों में बेड़ियाँ लगी रहेंगी... उसी स्थिति में, जो भी और जैसा भी मिले, वैसा भोजन करना है... फिर इसी स्थिति में बैल की तरह कोल्हू में लगकर तेल निकालना पड़ता था...
पूरी जेल में बेहद दुबले-पतले सावरकर एकमात्र ऐसे कैदी थे, जिनके गले में अंग्रेजों ने तांबे की पट्टी लटका रखी थी, जिस पर "D" लिखा हुआ था... D यानी Dangerous... वही एकमात्र कैदी थे, जिसे अंग्रेज अपने लिए "डेंजरस" मानते थे... और यह चक्र चला पूरे 11 साल... जी हाँ!!! पूरे ग्यारह वर्ष तक देश के लिए जेल मे कोल्हू के बैल बने रहे... ..
… ऐसे ही नहीं कोई वीर नहीं बनता …
दूसरी तरफ अंग्रेजो के पिठु दलाल थे जिनको अंग्रेज मलाई खिलाते थे और भारत से जाते समय अपने चमचो को चमचा गिरी का ईनाम भी दे गए....
इस पोस्ट पर आम जन का क्या विचार है कंमेंट् बॉक्स मे पढ़ ले... 🙏

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बेंगलुरु के 22 वर्षीय अंशुल उथैया ने हाल ही में अपनी फुल-टाइम नौकरी को 'बोरिंग' बताकर छोड़ दिया था, जिसका वीडियो सोशल मीडिया पर काफी वायरल हुआ था। अब उन्होंने एक नया अपडेट साझा करते हुए माना है कि उन्हें अपने इस फैसले पर भारी पछतावा है।

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हरियाणा की प्रीति हुड्डा ने तमाम आर्थिक चुनौतियों को हराकर यूपीएससी परीक्षा में सफलता हासिल की है। उनके पिता दिल्ली ट्रांसपोर्ट कॉरपोरेशन (DTC) में बस ड्राइवर हैं। जिस वक्त प्रीति का रिजल्ट आया, उनके पिता ड्यूटी पर बस चला रहे थे। तभी प्रीति ने उन्हें फोन कर खबर दी- "पापा, मैं आईएएस बन गई"।​
यह सुनते ही पिता भावुक हो गए और बस में ही उनकी खुशी का ठिकाना नहीं रहा।​प्रीति ने हिंदी माध्यम से तैयारी कर 2017 की परीक्षा में 288वीं रैंक प्राप्त की।​ इससे पहले परिवार ने आर्थिक तंगी के कारण उन्हें पढ़ाई छोड़ शादी करने की सलाह दी थी, लेकिन उन्होंने जेएनयू से पीएचडी की और अपने पिता का सपना पूरा किया।

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गोरखपुर के खोराबार क्षेत्र के विशाल निषाद को आईपीएल 2026 की नीलामी में पंजाब किंग्स ने 30 लाख रुपये में खरीदा है. राजमिस्त्री का काम करने वाले और हृदय रोगी पिता के बेटे विशाल ने खेतों में अभ्यास कर यह मुकाम हासिल किया है. यूपी टी20 लीग में शानदार प्रदर्शन के बाद उनका आईपीएल चयन हुआ है.​
बेटे की सफलता पर परिवार भावुक है और विशाल ने पिता से अब मजदूरी न करने का आग्रह किया है. कोच कल्याण के अनुसार, विशाल की 'मिस्ट्री स्पिन' गेंदबाजी उनकी सबसे बड़ी ताकत है. विशाल अब भारतीय क्रिकेट टीम का हिस्सा बनने का सपना देख रहे हैं.

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#काकोरी_कांड में शहीद
वीर क्रांतिकारी शहीद #ठाकुर_रोशन_सिंह जी को आज ही के दिन फांसी दी गई थी।
#ठाकुर_रोशन_सिंह एक भारतीय क्रांतिकारी थे जिन्हें 1921-22 के असहकार आंदोलन के समय बरेली शूटिंग केस में सजा सुनाई गयी थी। बरेली सेंट्रल जेल से रिहा होने के बाद 1924 में वे हिंदुस्तान रिपब्लिकन एसोसिएशन में शामिल हो गये।
जबकि #काकोरी हत्या कांड में उनका हाथ नही था लेकिन फिर भी उन्हें गिरफ्तार किया गया और ब्रिटिश सरकार ने उन्हें मौत की सजा सुनाई।

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राष्ट्रपति भवन की गैलरी में एक लंबे कालखंड तक औपनिवेशिक सत्ता के प्रतीक ब्रिटिश सैनिकों के चित्र स्थापित रहे। आज उसी ऐतिहासिक परिसर में माँ भारती के परमवीर चक्र विजेताओं के चित्र देश के शौर्य, बलिदान और स्वाभिमान की अमर गाथा कहते हैं। परमवीर दीर्घा का निर्माण गुलामी की मानसिकता से मुक्ति और भारत की आत्मा व उसके सच्चे नायकों से जुड़ने का सशक्त संकल्प है। कुछ साल पहले केंद्र की मोदी सरकार ने अंडमान-निकोबार द्वीप समूह में कई द्वीपों के नाम भी परमवीर चक्र विजेताओं के नाम पर रखे हैं।
यह परिवर्तन आदरणीय प्रधानमंत्री श्री Narendra Modi जी के दूरदर्शी नेतृत्व में संभव हुआ है, जहाँ भारत अपने गौरवशाली अतीत से प्रेरणा लेते हुए आत्मसम्मान और शौर्य के साथ भविष्य की ओर बढ़ रहा है।
जय हिन्द!

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राष्ट्रपति भवन की गैलरी में एक लंबे कालखंड तक औपनिवेशिक सत्ता के प्रतीक ब्रिटिश सैनिकों के चित्र स्थापित रहे। आज उसी ऐतिहासिक परिसर में माँ भारती के परमवीर चक्र विजेताओं के चित्र देश के शौर्य, बलिदान और स्वाभिमान की अमर गाथा कहते हैं। परमवीर दीर्घा का निर्माण गुलामी की मानसिकता से मुक्ति और भारत की आत्मा व उसके सच्चे नायकों से जुड़ने का सशक्त संकल्प है। कुछ साल पहले केंद्र की मोदी सरकार ने अंडमान-निकोबार द्वीप समूह में कई द्वीपों के नाम भी परमवीर चक्र विजेताओं के नाम पर रखे हैं।
यह परिवर्तन आदरणीय प्रधानमंत्री श्री Narendra Modi जी के दूरदर्शी नेतृत्व में संभव हुआ है, जहाँ भारत अपने गौरवशाली अतीत से प्रेरणा लेते हुए आत्मसम्मान और शौर्य के साथ भविष्य की ओर बढ़ रहा है।
जय हिन्द!

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राष्ट्रपति भवन की गैलरी में एक लंबे कालखंड तक औपनिवेशिक सत्ता के प्रतीक ब्रिटिश सैनिकों के चित्र स्थापित रहे। आज उसी ऐतिहासिक परिसर में माँ भारती के परमवीर चक्र विजेताओं के चित्र देश के शौर्य, बलिदान और स्वाभिमान की अमर गाथा कहते हैं। परमवीर दीर्घा का निर्माण गुलामी की मानसिकता से मुक्ति और भारत की आत्मा व उसके सच्चे नायकों से जुड़ने का सशक्त संकल्प है। कुछ साल पहले केंद्र की मोदी सरकार ने अंडमान-निकोबार द्वीप समूह में कई द्वीपों के नाम भी परमवीर चक्र विजेताओं के नाम पर रखे हैं।
यह परिवर्तन आदरणीय प्रधानमंत्री श्री Narendra Modi जी के दूरदर्शी नेतृत्व में संभव हुआ है, जहाँ भारत अपने गौरवशाली अतीत से प्रेरणा लेते हुए आत्मसम्मान और शौर्य के साथ भविष्य की ओर बढ़ रहा है।
जय हिन्द!

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