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लकड़ी का चरखा अंग्रेज़ों के ख़िलाफ़ भारत की आज़ादी की लड़ाई का शक्तिशाली प्रतीक बन गया था. इसे महात्मा गांधी ने भारतीयों में आत्मनिर्भर होने की भावना जगाने के लिए अपनाया था. उन्होंने स्वराज, स्वशासन और ब्रिटिश सामानों के बहिष्कार करने के लिए लोगों से इसे रोज कातने की सलाह दी और प्रोत्साहित किया था.
इस चरखे को मुंबई की मणि भवन से लाया गया है, जो 17 सालों तक महात्मा गांधी के राजनीतिक आंदोलन का मुख्यालय रहा.
ये प्रदर्शनी सीएसएमवीएस, मुंबई और नेशनल म्यूज़ियम दिल्ली और ब्रिटिश म्यूज़ियम लंदन के सहयोग से आयोजित की जा रही है.
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