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महान सिख योद्धा और महाराणा रणजीत सिंह के सेनाध्यक्ष हरि सिंह नलवा का जन्म 28 अप्रैल 1791 को हुआ। वह भारत के महान शूरवीरों में से एक थे।
महाराजा रणजीत सिंह के निर्देश के अनुसार हरि सिंह नलवा ने सिख साम्राज्य की भौगोलिक सीमाओं को पंजाब से लेकर काबुल के बीचों बीच तक विस्तार किया था।
महाराजा रणजीत सिंह सिख साम्राज्य को पश्चिम में काबुल तक फैलाना चाहते थे. उन्होंने हरि सिंह को इसकी जिम्मेदारी दी. 16 साल की उम्र में पहली लड़ाई लड़ते हुए हरि सिंह ने कसूर को सिख साम्राज्य में मिलाया. 1827 तक आते- आते वो अटॉक को जीत चुके थे. लेकिन पेशावर पर अब भी काबुल के शासक दोस्त मुहम्मद का कब्ज़ा था.
तब तक हरि सिंह की ख्याति इतनी फ़ैल चुकी थी कि जब उन्होंने पेशावर ओर हमला किया तो अफ़ग़ान सिपाहियों ने बिना लड़े ही हथियार डाल दिए. अपनी जिंदगी में उन्होंने 20 से ज्यादा लड़ाइयों में सेना का नेतृत्व किया. और 1813 में अटक, 1814 में कश्मीर, 1816 में महमूदकोट, 1818 में मुल्तान, 1822 में मनकेरा, 1823 में नौशहरा को सिख साम्राज्य में मिलाया.