image
Everlasting Beauty Lounge Onun profil resimlerini değiştirdi
3 yıl

image

image

image
3 yıl - çevirmek

आज 27 कट्स मान कर, 14 मिनट के दृश्य/संवाद बदल कर, ‘A’ सर्टिफिकेट के साथ #omg2 रिलीज होगी।

शिवलिंग को लिंग, दारू को प्रसाद, स्त्री योनि को हवन कुंड जैसे कई छिछले संवाद के साथ भगवान शिव का नाम ले कर जो छल अक्षय कुमार करने चला था, वह सार्वजनिक हो चुका है।

वैसे इस ‘A’ का कोई मतलब नहीं, OTT पर तो यह आ ही जाएगी परंतु जिस तीन सौ करोड़ का ये स्वप्न देख रहे थे, वह पूरा होता नहीं दिखता।
अजीत भारती भैया🙏🏼

image

image
3 yıl - çevirmek

Medical abortion pills by post, UK- 20% discount on all abortion pills

Take advantage of our limited-time Flash Sale! Enjoy an incredible 20% discount on all abortion pills at Abortionpillsrx.com. With our Abortion pills by post service, you can rest assured that your order will be delivered discreetly and securely, right to your doorstep in the UK and USA. You can buy Abortion Pill kit online at a low with Fast Shipping and Overnight delivery.
Visit us:- https://www.abortionpillsrx.com/
#health #healthcare #womenscare #womenshealth #uk #usa #canada #online #pharmacy #services #business #news #flashsale #sale #discount

image
3 yıl - çevirmek

इस संस्कृति ने कभी अपने जीवन मूल्य के सिद्धांत में
' अर्थ ' को स्थान दिया था।
प्राचीन भारतीय संस्कृति अपने इन्हीं चार पुरूषार्थ के केंद्र कि परिधि पर घूमती है।
जितने भी रचनाकार हुये। उन्होंने इसमें से किसी एक को चुना या अन्य के साथ रचना किया। कभी किसी ने एक दूसरे कि निंदा नही किया।
रामायण, महाभारत धर्म कि व्याख्या करते है।
उपनिषद, गीता मोक्ष कि जोर करते है।
कौटिल्य का अर्थशास्त्र, अर्थ के महत्व को बताता है तो वात्सायन का कामसूत्र काम के महत्व को बता रहा है।
कालिदास धर्म, अर्थ के साथ, काम के सौंदर्य को चुनते है।
गोस्वामीजी धर्म और सौंदर्य के भाव को पकड़ते है।
कबीर धर्म और मोक्ष पर जोर देते है।
यह हमारी साहित्यिक यात्रा है। यदि बहुत सूक्ष्मता अध्ययन करें तो सम्पूर्ण साहित्य के केंद्र में यही चार पुरूषार्थ है। जो एक दूसरे के महत्व और सहअस्तित्व को बताते है।
फिर एक समय आया जब दरिद्रता का महिमामंडन किया गया। अर्थ को सभी मानवीय दुर्गुणों का कारण बनाया गया। दरिद्र होना जैसे सभी सद्गुणों का प्रमाण है। वैभवशाली होना सभी दुर्गुणों का कारण बन गया।
प्रेमचंद कि रचनाओं में बनिया, रायसाहब, व्यापारी सभी कुटिल, चोर, अय्याश है। सभी दरिद्र संत, महात्मा है।
प्राचीन भारत के शास्त्र कहते है। मनुष्य बिना सद्गुणों के साथ कर्मशील हुये, अर्थ अर्जित नही कर सकता है।
एक वैभवशाली व्यक्ति अवश्य जीवन कि चुनौतियों को स्वीकार करके कर्मशील रहा होगा।
लेकिन प्रगतिशीलता का मानक यह है कि मनुष्य का अपना चरित्र महत्व नही रखता, व्यवस्था के दोष गौड़ है। अर्थ ही अपराध है।
आप धनी है तो अवश्य ही अपराधी, चोर, भ्र्ष्ट , अत्याचारी होंगें। इसका कारण मनुष्य नही है, धन है।

image
3 yıl - çevirmek

एक अध्ययन से पता चला है कि अफ्रीका में सबसे तेजी से बढ़ने वाला धर्म, हिंदू धर्म है।
2010 में .2% अफ्रीका में हिंदू रहते थे। आज यह 1% हो गया हैं।
ऐसी चीज़ें तो लोग लिखते रहते हैं। लेकिन इसको study IQ ने प्रस्तुत किया है, तो विश्वास योग्य है।
यह अन्य देशों अमेरिका, यूरोप से अलग है। यहां प्रवासी भारतीय बढ़े हैं।
लेकिन अफ्रीका में वहां के मूल निवासी हिंदू धर्म को अपना रहे है।
उसका सबसे बड़ा कारण है अफ्रीका गृहयुद्ध पीड़ित रहा है। हिंदू धर्म का शांति, योग, ध्यान, प्रेम का संदेश लोगों के जीवन को बदल रहा है।
एक पौराणिक तथ्य यह है कि भगवान राम के पुत्र लव और कुश थे। मर्यादापुरुषोत्तम श्रीराम ने कुश को अफ्रीका पर शासन के लिये भेजा था।
अफ्रीका की सबसे प्रमुख जनजाति KUSHITS मानते हैं कि वह भगवान कुश के वंशज हैं।
इसमें ISKON की भूमिका भी महत्वपूर्ण है।
हिंदू धर्म किसी को अपनी पहचान, संस्कृति छोड़ने को नहीं कहता। इसलिये अफ्रीका के लोग आकर्षित हो रहे हैं।
घाना हिंदुओं का केंद्र बनता जा रहा है। 2010 में यहां 12 हजार हिंदू थे। आज तीन लाख हो गये हैं।
अफ्रीका कि शांति, स्थिरता में सनातन धर्म के मूल्य महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।।

3 yıl - çevirmek

महाराज पोरस जब सिकंदर से युद्ध के लिये जा रहे थे,
सेना के सबसे आगे वासुदेव श्रीकृष्ण की मूर्ति लेकर हाथी चल रहे थे।
मेवाड़ के राणा जब भी युद्ध में जाते, एकलिंगी भगवान शिव की आराधना करते।
क्षत्रपति शिवाजी महाराज जब औरंगजेब से मिलने जा रहे थे, सात हाथियों का दल कलश लेकर आगे चल रहा था। पीछे पीछे पुरोहित मंत्रोच्चार कर रहे थे। इसे देखने के लिये पूरे मार्ग में जनसैलाब उमड़ पड़ा था।

क्षत्रियों का युद्धघोष हर हर महादेव, जय भवानी था।
औरों की क्या, स्वयं मर्यादापुरुषोत्तम भगवान श्रीरामचन्द्र जी, रामेश्वरम में शिव आराधना के बाद रावण से युद्ध किये।

धर्मक्षेत्रे कुरूक्षेत्रे ! से महाभारत युद्ध प्रारंभ होता है। कुरुक्षेत्र को धर्मक्षेत्र कहा जा रहा है।

संघर्ष, प्रतिरोध, आत्मरक्षा, युद्ध में कब धर्म की ऊर्जा नहीं थी।
यह झूठ तो अब का है। जो हमें पंगु बना रहा है। धर्म इन सबसे अलग है।

धर्म से ही रक्षा हो सकती है।
तब यह और भी महत्वपूर्ण हो जाता है जब जन्नत की लोभी भीड़ सामने हो।।

image