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सन् 1994 की सुपर डुपर हिट मूवी थी दिलवाले जिसमे अजय ने साबित किया की वो सिर्फ एक्शन मूवी ही करने नही आए बल्कि एक्टिंग भी उनके अंदर कूट कूट कर भरी हुई है। संवेदनशील भूमिका मे जान फूँक दी थी उन्होंने। रवीना टंडन ने भी पहली बार इसी फिल्म से सफलता का स्वाद चखा ।सुनील वन साइडेड लवर बने और जचे भी। मामा ठाकुर बने परेश रावल और गाना गाने के लिए उतावले गुलशन ग्रोवर का अंदाज़ भी लोगो को खूब भाया। गीत संगीत भी लाजवाब कितना हसीन चेहरा, मौका मिलेगा तो हम बता देंगे, सातों जन्म मे तेरे, जो तुम्हे चाहे के अलावा एक ऐसी लड़की थी (जो टूटे हुए आशिको का आइडल सोंग ही बन गया) ये सभी सुपरहिट सोंग इसी सिंगल फिल्म मे देखने को मिले। यकीनन दिलवाले लोगो का दिल जीतने मे कामयाब रही।
ट्रेन में एक बुस्लिम महिला की टिकिट कन्फर्म नहीं हुई है, जिसकी वजह से उसे काफी समस्या का सामना करना पड़ रहा है..अब एक जगह पर 6 भाईजान लोग एक ही कंपार्टमेंट में हैं, उस महिला ने उनकी शरण ले ली है, और उन्होंने उसे अपने बीच बैठा लिया है..(महिला काफी खूबसूरत है) और उस महिला के चेहरे पर एकदम खुशी का भाव है..उसे लग रहा है कि अब वह सुरक्षित हाथों में हैं..!!
मैं ये सोच रहा हूं कि जिससे अपनी भाभी, अपनी बहन, अपनी ही साली क्यों न हो..कोई भी सुरक्षित नहीं होती है तो फिर इस महिला की खुशी कोई ढोंग है या उसकी मूर्खता..!!
ये तो हुआ पहला पहलू इस कहानी का..
दूसरा पहलू ये रहा..
हां तो जिस कंपार्टमेंट में ये सारे 5 टाइम के नमाजी बैठे हैं, उसके ठीक पीछे वाले कंपार्टमेंट में इन सभी की खातूने बैठी हुई हैं..जहां पर इन्होंने उन सभी को कुछ ऐसे कैद में बैठाया है की वो नजरें घुमाएं भी तो उन्हें एक दूसरे के चेहरे के अलावा कुछ भी नहीं दिखाई देगा, उसका कारण आप फोटो से समझिए..बीसी परदा लगा दिए हैं कंपार्टमेंट में..!!
मैं ये सोच रहा हूं कि एक तरफ खुद की महिला को कमरे में कैद रखकर सबकी नजरों से बचा रहें हैं वहीं किसी और महिला को अपने बीच बैठा कर उसके सामने अपनी अपनी हांक रहे हैं, वहीं खुदकी महिलाओं को जाने कौन सी किताब दिए हैं की उसमे से भी फरिश्तों और परियों की कहानियां ही सुनाई दे रही हैं...
तीसरा और सबसे जरूरी पहलू –
सबसे पहले तो मैं भारतीय रेल से हाथ जोड़कर विनती करता हूं कि इन्हें एक साथ सीट न दी जाए क्योंकि इन्होंने ट्रैन का पूरा माहौल एकदम नमाज़–नमाज़ कर रखा है बहंचो, ये माहौल फिल्मों में देखे हुए एकदम अलकायदा के ट्रेनिंग सेंटर जैसा लग रहा है..की जाने कब कौन एके 47 निकाल लेगा..ऊपर से मेरा दोस्त बीच बीच में मंदिर वहीं बनाएंगे वाला गाना बजा देता है..जबकि यहां मेरी पहले से गांव फटी पड़ी है कि ये अचानक से "अल्लाह ऊ अकबर" बोलकर फट न जाएं..😐