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*⛳जय भारत🌞वन्दे मातरम्⛳*
*🪂संस्कृति अपनी एक चिरन्तन🪂।*

*जगदम्ब विचित्रमत्र किं परिपूर्णा करुणास्ति चेन्मयि।*
*अपराधपरम्परापरं न हि माता समुपेक्षते सुतम्।।*

*हे जगदम्बा! आप मेरे प्रति करुणा से परिपूर्ण हैं तो इसमें आश्चर्य की क्या बात है, क्योंकि माता अपराध में संलग्न पुत्र की कभी उपेक्षा नहीं करती।*

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महाराष्ट्र की पावन भूमि पर जन्मे विनायक रामचंद्र उर्फ अण्णासाहेब पटवर्धन एक ऐसे युगपुरुष थे, जिन्होंने राष्ट्रवाद, आयुर्वेद और अध्यात्म का एक अनूठा संगम प्रस्तुत किया।
क्रांति के गुप्त सूत्रधार: उन्होंने भारत की स्वतंत्रता के लिए गुप्त क्रांतिकारी गतिविधियों को न केवल नैतिक बल्कि आर्थिक रूप से भी सशक्त किया।लोकमान्य तिलक के मार्गदर्शक: बहुत कम लोग जानते हैं कि लोकमान्य बाल गंगाधर तिलक हर बड़े राजनीतिक और सामाजिक संकट में अण्णासाहेब से ही मार्गदर्शन लेते थे।
चिकित्सा और समाज सेवा: उन्होंने आयुर्वेद और एलोपैथी दोनों का गहन अध्ययन किया और अपना संपूर्ण जीवन समाज के गरीब और पीड़ित लोगों की निःशुल्क सेवा में समर्पित कर दिया।अध्यात्म के शिखर: जीवन के अंतिम पड़ाव में उन्होंने संन्यास मार्ग अपनाया और योग साधना के माध्यम से आध्यात्मिक चेतना जागृत की।आज देश के इस महान सपूत के विचार और राष्ट्रभक्ति हम सभी के लिए प्रेरणास्रोत हैं।
जयंती पर शत शत नमन।
#maharshiannasahebpatwardhan #lokmanyatilak #indianhistory #socialreformer #nationalism #ayurveda #inspirational

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मां गंगा का आशीर्वाद गंगोत्री से गंगा सागर तक मां गंगापुत्र श्री नरेंद्र मोदी जी का सेवा समर्पण और विकास की अविरल धारा
Narendra Modi Nitin Nabin #blsantosh Amit Shah Rajnath Singh Sunil Bansal Vinod Tawde Pankaj Chaudhary Dharampal Singh

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प्रसिद्ध क्रांतिकारी प्रफुल्ल चंद्र चाकी ने खुदीराम बोस के साथ मिलकर ब्रिटिश अधिकारी किंग्स्फोर्ड की बग्घी पर बम फेंका। जिसके बाद उन्हें पुलिस ने घेर लिया था और ऐसे में उन्होंने ख़ुद को गोली मार ली और शहीद हो गये।
पुण्यतिथि पर सादर नमन 🙏💐

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#पश्चिम_बंगाल की अभूतपूर्व विजय के नायक, #भाजपा के राष्ट्रीय महामंत्री, माननीय श्री Sunil Bansal जी को #jhalmuri देते हुए...
जय भाजपा, तय भाजपा!

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देहरादून के आकाश राणा का भारतीय सेना में ऑफिसर बनने का सफर किसी फिल्मी कहानी से कम नहीं है। एक समय प्रोफेशनल MMA फाइटर के रूप में अपनी पहचान बनाने वाले आकाश ने नेशनल टाइटल जीता और सुपर फाइट लीग में भी अपनी दमदार मौजूदगी दर्ज कराई।

हालांकि, उनका सपना सिर्फ खेल तक सीमित नहीं था। कई बार असफलता और रिजेक्शन झेलने के बाद भी उन्होंने हार नहीं मानी। अपने लक्ष्य की ओर बढ़ते हुए वे सबसे पहले भारतीय सेना में क्लर्क के रूप में भर्ती हुए, लेकिन उनका सपना था वर्दी में अधिकारी बनना।

ड्यूटी के साथ लगातार मेहनत और समर्पण के बल पर उन्होंने आर्मी कैडेट कॉलेज (ACC) की परीक्षा पास की और इसके बाद इंडियन मिलिट्री एकेडमी (IMA), देहरादून पहुंचे। यहां उन्होंने अपनी प्रतिभा और अनुशासन से सबको प्रभावित किया और ‘चीफ ऑफ आर्मी स्टाफ गोल्ड मेडल’ अपने नाम किया। साथ ही उन्हें ‘मिस्टर IMA 2024’ का खिताब भी मिला।

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Naina Devi Temple in 1905 & 2026 🌺

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उत्तराखंड के चमोली जिले के रानो गांव में जन्मे सुरजन सिंह भंडारी की वीरता और बलिदान की कहानी देशभक्ति की एक ऐसी मिसाल है, जिसे कभी भुलाया नहीं जा सकता।
24 सितंबर 2002 को गुजरात के अक्षरधाम मंदिर पर हुए आतंकी हमले ने पूरे देश को झकझोर दिया था। उस कठिन घड़ी में NSG (नेशनल सिक्योरिटी गार्ड) के कमांडो सुरजन सिंह भंडारी भी ऑपरेशन का हिस्सा थे। गढ़वाल स्काउट्स से NSG में डेपुटेशन पर आए सुरजन सिंह ने बिना अपनी जान की परवाह किए आतंकियों से सीधे मोर्चा लिया।
मुठभेड़ के दौरान आतंकियों की गोली उनके सिर में लगी, जो ब्रेन स्टेम में फंस गई। वे गंभीर रूप से घायल हो गए, लेकिन उनकी बहादुरी की वजह से सैकड़ों निर्दोष लोगों की जान बचाई जा सकी। इस हमले में कई लोग शहीद हुए, लेकिन NSG कमांडोज ने आतंकियों को मार गिराकर ऑपरेशन को सफल बनाया।
घायल अवस्था में उन्हें पहले अहमदाबाद के सिविल अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां कई जटिल सर्जरी हुईं। बाद में उन्हें AIIMS दिल्ली शिफ्ट किया गया। वहां वे लंबे समय तक वेंटिलेटर पर रहे और करीब 600 दिनों तक कोमा में जिंदगी और मौत के बीच संघर्ष करते रहे।
उनकी बहादुरी और अदम्य साहस को देखते हुए भारत सरकार ने उन्हें कीर्ति चक्र से सम्मानित किया—यह देश का दूसरा सबसे बड़ा शांतिकालीन वीरता पुरस्कार है। यह सम्मान उन्हें कोमा में रहते हुए ही प्रदान किया गया था।
उस समय देश के बड़े नेताओं—तत्कालीन प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी, राष्ट्रपति डॉ. ए.पी.जे. अब्दुल कलाम, और गुजरात के मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी—ने उनके इलाज और सम्मान में विशेष रुचि दिखाई।
लगभग दो साल तक जिंदगी से जंग लड़ने के बाद, 19 मई 2004 को AIIMS दिल्ली में उन्होंने अंतिम सांस ली। उस समय उनकी उम्र मात्र 25 वर्ष थी। उनके पार्थिव शरीर के पास तिरंगा रखा गया था—जो उनके बलिदान और सम्मान का प्रतीक था।
आज भी सुरजन सिंह भंडारी की कहानी NSG, भारतीय सेना और पूरे देश के लिए प्रेरणा है। उनका जीवन हमें सिखाता है कि कर्तव्य, साहस और देशभक्ति सबसे ऊपर होती है।
🇮🇳 जय हिंद, वीर सपूत को शत-शत नमन
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