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उत्तर प्रदेश के मथुरा में मानवता को शर्मसार करने वाली एक घटना सामने आई है। थाना फरह क्षेत्र के एक गांव में 15 वर्षीय किशोर द्वारा 5 साल की मासूम बच्ची के साथ दु/ष्कर्म किए जाने का सनसनीखेज मामला प्रकाश में आया है। आरोपी किशोर टॉफी दिलाने के बहाने बच्ची को अपने साथ ले गया था।
जानकारी के अनुसार, मंगलवार की दोपहर 5 वर्षीय मासूम अपने घर के बाहर खेल रही थी। इसी दौरान गांव का ही रहने वाला 15 वर्षीय किशोर विष्णु, पुत्र भगवान सिंह वहां पहुंचा। उसने मासूम को टॉफी खिलाने का लालच दिया और उसे बहला-फुसलाकर पास ही स्थित एक सुनसान खाली प्लॉट में ले गया। मासूम को इस बात का अंदाजा भी नहीं था कि जिसे वह 'भैया' समझ रही है, वह किसी दरिं/दे की तरह घात लगाए बैठा है।

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🌞 Happy Makar Sankranti 🌾🪁

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The sound of courage, the rhythm of pride, and the emotions of our sol****rs is now yours

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जब दिन खराब हो तो ट्रक से गिरो या नाले में जाओ, शिकारी तैयार बैठा है।😂

गलत वक्त पर गलत जगह गिरना इसे ही कहते हैं।देखिए अंत में क्या हुआ। 👇

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बांग्लादेश के फेनी ज़िले में एक और हिंदू युवक की बेरहमी से हत्या का मामला सामने आया है. 28 वर्षीय समीर चंद्र, जो पेशे से रिक्शा चालक था, की 11 जनवरी की रात पीट-पीटकर हत्या कर दी गई. घटना डागनभुइयां इलाके की बताई जा रही है. हमलावर समीर का CNG ऑटो-रिक्शा, जो उसकी रोज़ी-रोटी का एकमात्र साधन था, लेकर फरार हो गए. स्थानीय पुलिस के मुताबिक प्रथम दृष्टया यह लूट और हत्या का मामला है. समीर का शव उपज़िला अस्पताल के पास मिला.

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जिस चोटी पर ईगल भी नहीं उड़ सकता, वहां बाना सिंह तिरंगा फहरा आए!"
भारतीय सेना के नायब सूबेदार बाना सिंह ने 21,000 फीट की ऊंचाई पर 90 डिग्री की सीधी बर्फ की दीवार चढ़कर दुश्मन को खत्म किया जो एक चमत्कार से कम नहीं है। उनके सम्मान में भारत सरकार ने उस पोस्ट का नाम 'बाना टॉप' रख दिया।
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91 साल की उम्र में, अपने पति की जान बचाने की कोशिश करने पर उन्हें गिरफ्तार किया गया।
91 वर्ष की उम्र में, एक महिला को मजबूरी में किए गए एक कदम के कारण हिरासत में लिया गया। वह एक ऐसी दवा हासिल करने की कोशिश कर रही थीं, जिसकी कीमत 50 डॉलर से बढ़कर 950 डॉलर हो गई थी। वही दवा उनके पति की जान बचाने का एकमात्र इलाज थी। उनके पति लगभग 90 साल के थे और जीवित रहने के लिए उसी दवा पर निर्भर थे।
उनका नाम हेलेन है। उनके पास कोई मेडिकल बीमा नहीं था और जीवनभर की जमा पूंजी भी उस जरूरी दवा का खर्च उठाने के लिए पर्याप्त नहीं थी, जो उनके जीवनसाथी जॉर्ज की सेहत के लिए बेहद जरूरी थी। जब सारे रास्ते बंद हो गए, तो उन्होंने एक ऐसा फैसला लिया जिसकी कोई कल्पना भी नहीं कर सकता—उन्होंने बिना पैसे चुकाए दवा ले जाने की कोशिश की।
इस कदम का नतीजा गिरफ्तारी के रूप में सामने आया, जिसने इस कहानी को जानने वाले सभी लोगों को झकझोर कर रख दिया। अदालत में, जज ने उनके हाथों से हथकड़ियाँ हटाने का आदेश दिया और सभी आरोप खारिज कर दिए। उन्होंने इसमें कोई अपराध नहीं देखा, बल्कि एक ऐसे सिस्टम की झलक देखी जो बुजुर्गों को बुनियादी दवाओं तक पहुँच से वंचित कर देता है।
यह मामला वायरल हो गया और एक दर्दनाक याद दिलाने वाला उदाहरण बन गया कि कैसे बुढ़ापा, प्रेम और स्वास्थ्य सेवाओं की कमी सबसे कमजोर लोगों को भी बेहद कठोर फैसले लेने पर मजबूर कर सकती है।

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