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🚨 जम्मू-कश्मीर | किश्तवाड़ से बड़ी खबर 🚨
🏔️ 12,000 फीट की ऊंचाई पर जैश का ‘मिनी किला’ ध्वस्त!
दुर्गम और बर्फीले पहाड़ों में सुरक्षा बलों ने जैश-ए-मोहम्मद के आ@तंकियों का एक कारगिल-स्टाइल फोर्टिफाइड बंकर नष्ट कर दिया। यह ठिकाना पाकिस्तानी कमांडर सैफुल्लाह और उसके साथी आदिल का था, जहां वे महीनों से छिपे हुए थे।
🍜 अंदर मिला हैरान करने वाला सामान

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उत्तर प्रदेश स्थित प्रयागराज में माघ मेला 2026 के दौरान शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद, प्रशासन और मेला प्राधिकरण में ठन गई है. 19 जनवरी, सोमवार को प्रशासन ने एक नोटिस चस्पा कर दिया और पूछा कि 24 घंटे में उन्हें बताया जाए कि अविमुक्तेश्वरानंद शंकराचार्य कैसे हैं?
इस नोटिस के संदर्भ में सुप्रीम कोर्ट का हवाला दिया गया और कहा गया कि स्वयं के नाम के आगे और माघ मेले में आवंटित स्थान पर लगे पोस्टर्स पर शंकराचार्य शब्द का इस्तेमाल कर के आदेश की अवहेलना हो रही है.
वहीं स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद के आश्रम में मीडिया मामले देखने वाले योगीराज ने बताया कि सुप्रीम कोर्ट के निर्णय से पहले ही पट्टाभिषेक हो गया था. इन सबके बीच यह सवाल उठ रहा है कि आखिर शंकराचार्य कैसे बनते हैं और कौन बन सकता है?
शंकराचार्य कौन बन सकता है?
अखाड़े की परंपरा को आगे बढ़ाने के लिए मठाम्नाय महानुशासनम् ग्रंथ में विस्तृत नियम निर्धारित किए गए हैं, जिनमें आचार्य शंकर द्वारा संत बनने से लेकर शंकराचार्य पद तक की स्पष्ट मर्यादाएं बताई गई हैं. इस ग्रंथ के अनुसार शंकराचार्य बनने के लिए संन्यासी होना अनिवार्य है और संन्यासी बनने के लिए गृहस्थ जीवन का पूर्ण त्याग आवश्यक माना गया है.
शंकराचार्य वही बन सकता है जो दंडी संन्यासी हो, दंडी संन्यासी का तन-मन से पवित्र, जितेंद्रिय अर्थात इंद्रियों पर पूर्ण नियंत्रण रखने वाला होना जरूरी है. साथ ही उसका चारों वेदों और छह वेदांगों का विद्वान होना आवश्यक बताया गया है.
नियमों के अनुसार शंकराचार्य वही हो सकता है जिसने कभी समुद्र पार न किया हो, अर्थात जिसने विदेश यात्रा न की हो. गुरु की कृपा, प्रतिष्ठित संतों की सभा की सहमति और काशी विद्वत परिषद की मुहर के बाद ही शंकराचार्य की पदवी मिलती है.
शंकराचार्य बनने का सबसे पहला नियम क्या?
शंकराचार्य चयन का सबसे पहला और अहम नियम यह है कि गुरु स्वयं अपने उत्तराधिकारी की घोषणा करता है और वही तय करता है कि उसके बाद अगला शंकराचार्य कौन होगा. देश की चारों शंकराचार्य पीठों के लिए अलग-अलग नियम निर्धारित हैं और चारों शंकराचार्यों को अपनी-अपनी पीठ के अनुसार अलग-अलग वेद के संरक्षण का दायित्व सौंपा गया है.।

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राम मंदिर स्थापना दिवस की हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएं...!
जय श्री राम 🙏🚩

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जय श्री राम 🚩
श्रद्धा, आस्था और संस्कार का प्रतीक —
श्रीराम लला की प्राण प्रतिष्ठा की द्वितीय वर्षगांठ पर
समस्त रामभक्तों को हार्दिक शुभकामनाएं।
राम नाम ही जीवन का आधार है 🙏✨
#shriramlalla
#rammandir
#ayodhyadham
#pranpratishtha
#rambhakt
#sanatandharma

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राम मंदिर उस विचार की पुनर्स्थापना है, जहां शासन नहीं, सेवा सर्वोपरि होती है।

22 जनवरी, 2024 को भगवान श्रीराम की प्राण-प्रतिष्ठा के साथ जिस भावना का उदय हुआ, आज उसके दो वर्ष पूरे हो रहे हैं। ये दो वर्ष केवल आस्था के नहीं रहे, बल्कि करुणा, कर्तव्य और जनकल्याण के प्रतीक बने हैं।

इन वर्षों में देशवासियों ने सेवा को जमीन पर उतरते देखा, कहीं राशन के रूप में, कहीं इलाज के रूप में, कहीं पक्के मकान बनकर, तो कहीं स्वच्छ पीने के पानी के रूप में। बीते दो वर्षों में मोदी सरकार के निर्णयों ने न सिर्फ सुविधाएं बढ़ाईं, बल्कि जनता के भीतर अभिमान और आत्मविश्वास भी जगाया।

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जय श्री राम 🚩
श्रद्धा, आस्था और संस्कार का प्रतीक —
श्रीराम लला की प्राण प्रतिष्ठा की द्वितीय वर्षगांठ पर
समस्त रामभक्तों को हार्दिक शुभकामनाएं।
राम नाम ही जीवन का आधार है 🙏✨
#shriramlalla

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जय श्री राम 🚩
श्रद्धा, आस्था और संस्कार का प्रतीक —
श्रीराम लला की प्राण प्रतिष्ठा की द्वितीय वर्षगांठ पर
समस्त रामभक्तों को हार्दिक शुभकामनाएं।
राम नाम ही जीवन का आधार है 🙏✨
#shriramlalla
#rammandir

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नरेंद्र मोदी, योगी आदित्यनाथ, अमित शाह, राजनाथ सिंह, जेपी नड्डा राम की पूजा करते हुए 👏👏

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