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24 घंटे में हत्या का खुलासा: साथी गार्ड ही निकला कातिल, 29 हजार के लिए कुचला सिर
जयपुर। गलतागेट थाना क्षेत्र में पार्किंग गार्ड की निर्मम हत्या के मामले का पुलिस ने महज 24 घंटे में खुलासा कर दिया। इस सनसनीखेज वारदात में मृतक का साथी गार्ड ही कातिल निकला, जिसे पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है।
पुलिस के अनुसार 23 मार्च 2026 को प्रमोद सिंह की पत्थर से सिर कुचलकर हत्या कर दी गई थी। मामले में मृतक के बेटे रंजीत कुमार ने थाने में रिपोर्ट दर्ज करवाई, जिस पर पुलिस ने तत्परता से कार्रवाई करते हुए जांच शुरू की।
जांच के दौरान पुलिस ने मृतक के मोबाइल की कॉल डिटेल (CDR) और बैंक ट्रांजेक्शन खंगाले। इसमें सामने आया कि घटना वाले दिन सुबह 4:39 बजे मृतक के खाते से ₹29,000 ऑनलाइन ट्रांसफर किए गए थे। यह राशि एक UPI आईडी पर गई, जो उसके साथी गार्ड प्रदीप कुमार यादव उर्फ कन्हैया की निकली।
पुलिस ने तकनीकी साक्ष्यों के आधार पर आरोपी को हिरासत में लेकर पूछताछ की, जिसमें उसने अपना जुर्म कबूल कर लिया।
पूछताछ में सामने आया कि आरोपी प्रदीप कुमार यादव को क्रिकेट में ऑनलाइन सट्टा खेलने की लत थी और वह कुछ दिन पहले करीब ₹5000 हार गया था। उसने मृतक से ₹2000 उधार मांगे, लेकिन मना करने पर उसने हत्या की साजिश रच डाली।
23 मार्च की अलसुबह करीब 4 बजे गार्ड रूम में सो रहे प्रमोद सिंह के सिर पर पत्थर से वार कर उसकी हत्या कर दी। इसके बाद आरोपी ने मृतक का मोबाइल लेकर उसके अंगूठे की मदद से फोन अनलॉक किया और ₹29,000 अपने खाते में ट्रांसफर कर लिए।
वारदात को छिपाने के लिए आरोपी ने मृतक के फोन से सिम निकालकर पानी की टंकी में फेंक दी और मोबाइल छुपा दिया। इतना ही नहीं, शक से बचने के लिए वह खुद पुलिस जांच में शामिल होकर सामान्य व्यवहार करता रहा।
हालांकि पुलिस की तकनीकी जांच और बैंक डिटेल के आधार पर सच्चाई सामने आ गई और आरोपी को गिरफ्तार कर लिया गया।
इस कार्रवाई में पुलिस उपायुक्त जयपुर उत्तर के निर्देशन में अतिरिक्त पुलिस उपायुक्त, सहायक पुलिस आयुक्त और गलतागेट थाना पुलिस की टीम ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। विशेष रूप से हेड कांस्टेबल प्रदीप सिंह का इस मामले के खुलासे में अहम योगदान रहा।
पुलिस अब आरोपी से आगे की पूछताछ कर रही है।
भारत की ऊर्जा शक्ति को लेकर एक ऐसी खबर सामने आई है जिसने पूरी दुनिया को चौंका दिया है। एक तरफ जहां दुनिया के कई देश तेल और गैस के संकट से जूझ रहे हैं, वहीं भारत ने चुपचाप एक ऐसा मास्टरस्ट्रोक खेला है जो आने वाले समय में 'गेम चेंजर' साबित हो सकता है।
देश की दिग्गज सरकारी ऑयल कंपनी ओएनजीसी (ONGC) ने अपने 1 अरब डॉलर के महाप्रोजेक्ट से गैस की सप्लाई शुरू कर दी है, और सबसे बड़ी बात यह है कि इसे रिकॉर्ड समय में पूरा किया गया है।
क्या है ओएनजीसी का 'दमन अपसाइड' प्रोजेक्ट?
ओएनजीसी ने आधिकारिक तौर पर एलान किया है कि उसके पश्चिमी समुद्री क्षेत्र (Western Offshore) में स्थित 'दमन अपसाइड डेवलपमेंट प्रोजेक्ट' (DUDP) के प्लेटफॉर्म B124P से गैस का प्रवाह शुरू हो चुका है। सीधे शब्दों में कहें तो इस प्रोजेक्ट से अब उत्पादन और कमाई दोनों शुरू हो गई है। आज के दौर में जहां बड़े-बड़े इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स सालों-साल लटके रहते हैं, वहीं ओएनजीसी ने इस 1 अरब डॉलर के प्रोजेक्ट को महज 2 साल से भी कम समय में पूरा करके एक नया कीर्तिमान रच दिया है।
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भारत की बड़ी जीत! ओएनजीसी ने शुरू की गैस सप्लाई, अब विदेशों के आगे नहीं फैलाना पड़ेगा हाथ
भारत की बड़ी जीत! ओएनजीसी ने शुरू की गैस सप्लाई, अब विदेशों के आगे नहीं फैलाना पड़ेगा हाथ
UPUK Live
4 hrs ago
भारत की ऊर्जा शक्ति को लेकर एक ऐसी खबर सामने आई है जिसने पूरी दुनिया को चौंका दिया है। एक तरफ जहां दुनिया के कई देश तेल और गैस के संकट से जूझ रहे हैं, वहीं भारत ने चुपचाप एक ऐसा मास्टरस्ट्रोक खेला है जो आने वाले समय में 'गेम चेंजर' साबित हो सकता है।
देश की दिग्गज सरकारी ऑयल कंपनी ओएनजीसी (ONGC) ने अपने 1 अरब डॉलर के महाप्रोजेक्ट से गैस की सप्लाई शुरू कर दी है, और सबसे बड़ी बात यह है कि इसे रिकॉर्ड समय में पूरा किया गया है।
क्या है ओएनजीसी का 'दमन अपसाइड' प्रोजेक्ट?
ओएनजीसी ने आधिकारिक तौर पर एलान किया है कि उसके पश्चिमी समुद्री क्षेत्र (Western Offshore) में स्थित 'दमन अपसाइड डेवलपमेंट प्रोजेक्ट' (DUDP) के प्लेटफॉर्म B124P से गैस का प्रवाह शुरू हो चुका है। सीधे शब्दों में कहें तो इस प्रोजेक्ट से अब उत्पादन और कमाई दोनों शुरू हो गई है। आज के दौर में जहां बड़े-बड़े इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स सालों-साल लटके रहते हैं, वहीं ओएनजीसी ने इस 1 अरब डॉलर के प्रोजेक्ट को महज 2 साल से भी कम समय में पूरा करके एक नया कीर्तिमान रच दिया है।
भारत के लिए क्यों है यह ऐतिहासिक जीत?
इस प्रोजेक्ट की सफलता के तीन बड़े मायने हैं। पहला, इससे भारत की घरेलू गैस सप्लाई में भारी बढ़ोतरी होगी। दूसरा, भारत को विदेशों से महंगी गैस खरीदने की जरूरत कम पड़ेगी, जिससे विदेशी मुद्रा की बचत होगी। और तीसरा, यह भारत की एनर्जी सिक्योरिटी (ऊर्जा सुरक्षा) को चट्टान जैसी मजबूती देगा। वर्तमान में भारत अपनी जरूरत का एक बहुत बड़ा हिस्सा विदेशों से आयात करता है। ऐसे में देश के भीतर उत्पादन बढ़ना आत्मनिर्भरता की दिशा में एक क्रांतिकारी कदम है।
संकट के समय सुरक्षित रहेगी सप्लाई
यह सिर्फ एक कमर्शियल प्रोजेक्ट नहीं है, बल्कि भारत की अर्थव्यवस्था को नई ताकत देने वाला कदम है। ओएनजीसी का कहना है कि अभी तो बस गैस का प्रवाह शुरू हुआ है, आने वाले समय में जैसे-जैसे अन्य कुओं से ड्रिलिंग और उत्पादन बढ़ेगा, इस प्रोजेक्ट की पूरी क्षमता दुनिया के सामने आएगी। यानी यह तो सिर्फ शुरुआत है, असली धमाका अभी बाकी है। ओएनजीसी ने यह साबित कर दिया है कि वह न केवल बड़े सपने देखती है, बल्कि ऑफशोर जैसी मुश्किल लोकेशन्स पर भी समय से पहले काम पूरा करने का दम रखती है।
वंदे भारत में परोसा गया ऐसा खाना, खाते ही सूज गए महिला के होंठ, मेडिकल रिपोर्ट ने उड़ाए रेलवे के होश
देश की सबसे प्रीमियम ट्रेनों में गिनी जाने वाली वंदे भारत एक्सप्रेस एक बार फिर खाने की गुणवत्ता को लेकर विवादों में आ गई है. वाराणसी से देवघर जा रही एक महिला यात्री ने आरोप लगाया कि ट्रेन में परोसा गया खाना खाने के बाद उन्हें गंभीर एलर्जी हो गई, जबकि उनके दो साल के बेटे को दस्त हो गए. सोशल मीडिया पर शेयर की गई तस्वीरों और मेडिकल रिपोर्ट ने इस मामले को तूल दे दिया है. इस घटना ने एक बार फिर ट्रेन में मिलने वाले खाने की साफ-सफाई और सुरक्षा पर सवाल खड़े कर दिए हैं. महिला ने बताया कि वह 27 मार्च को ट्रेन नंबर 22500 वंदे भारत एक्सप्रेस से वाराणसी से देवघर जा रही थीं और कोच E1 में सफर कर रही थीं. उन्होंने बताया कि जैसे ही उन्होंने ट्रेन में परोसा गया लंच खाया, कुछ ही देर में उनके होंठ सूज गए और शरीर में एलर्जी के लक्षण दिखने लगे. उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर अपनी हालत की तस्वीरें शेयर कीं, जिसमें उनके होंठ काफी सूजे हुए नजर आए. साथ ही डॉक्टर की पर्ची भी शेयर की, जिसमें इलाज का जिक्र था. महिला का कहना है कि अगर समय पर इलाज नहीं मिलता, तो हालत और बिगड़ सकती थी.
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महिला ने यह भी दावा किया कि उनके साथ यात्रा कर रहा उनका दो साल का बेटा भी इस खाने से बीमार हो गया. बच्चे को सफर के दौरान ही दस्त की शिकायत शुरू हो गई थी, जिससे वह काफी परेशान हो गया. महिला ने बताया कि उन्होंने 24 घंटे के भीतर अस्पताल जाकर इलाज कराया, जिससे दोनों की हालत में सुधार हुआ. इसके अलावा उन्होंने ट्रेन में परोसे गए पीने के पानी पर भी सवाल उठाए और कहा कि उसका स्वाद असामान्य था. इस पूरे घटनाक्रम ने यात्रियों की सुरक्षा और खाने की गुणवत्ता को लेकर चिंता और बढ़ा दी है. इस पूरे मामले पर IRCTC ने सफाई देते हुए कहा कि उस दिन परोसे गए खाने की जांच की गई थी और वह पूरी तरह संतोषजनक पाया गया. IRCTC ने X पर लिखा कि उसी दिन किसी अन्य यात्री से खाने की गुणवत्ता को लेकर कोई शिकायत नहीं मिली. हालांकि, महिला इस जवाब से संतुष्ट नहीं दिखीं और उन्होंने कहा कि भले ही बाकी कोई बीमार नहीं हुआ, लेकिन वह और उनका बेटा प्रभावित हुए हैं. बाद में IRCTC ने उनसे डायरेक्ट मैसेज के जरिए पूरी जानकारी मांगी और जांच का आश्वासन दिया. हाल के महीनों में ऐसे कई मामले सामने आने से रेलवे की फूड क्वालिटी पर सवाल लगातार गहराते जा रहे हैं.
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