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हमारी मान्यताओं और हमारी आस्था का विस्तार ही हमें हमारी परंपराओं की डोर से बंधे हुए है. हिंदू मान्यताओं में कुछ दिन उत्सव के होते हैं. कुछ दिन व्रत के होते हैं. कुछ दिन शुभ कामों के लिए निर्धारित होते हैं, तो कुछ समय के लिए शुम कामों की मनाही होती है. देवशयनी एकादशी से लेकर देवोत्थान एकादशी तक चार महीने ऐसे होते हैं जब कोई भी शुभ कार्य नहीं किए जाते. इस साल 29 जून को देवशयनी एकादशी है और इसी दिन से चातुर्मास शुरू हो रहा है. लेकिन इस साल चातुर्मास चार नहीं पांच महीनों का होगा क्योंकि 19 साल बाद ऐसा संयोग है कि सावन में अधिक मास है. जिस कारण सावन 58 दिन का रहेगा. ज्योतिषाचार्य शैलेन्द्र पांडेय जी का कहना है कि सावन, भाद्रपद, आश्विन और कार्तिक- इन महीनों को साथ में चातुर्मास कहते हैं.

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एक ट्रेन द्रुत गति से दौड़ रही थी। ट्रेन अंग्रेजों से भरी हुई थी। उसी ट्रेन के एक डिब्बे में अंग्रेजों के साथ एक भारतीय भी बैठा हुआ था।
डिब्बा अंग्रेजों से खचाखच भरा हुआ था। वे सभी उस भारतीय का मजाक उड़ाते जा रहे थे। कोई कह रहा था, देखो कौन नमूना ट्रेन में बैठ गया, तो कोई उनकी वेश-भूषा देखकर उन्हें गंवार कहकर हँस रहा था।कोई तो इतने गुस्से में था कि ट्रेन को कोसकर चिल्ला रहा था, एक भारतीय को ट्रेन मे चढ़ने क्यों दिया ? इसे डिब्बे से उतारो।
किँतु उस धोती-कुर्ता, काला कोट एवं सिर पर पगड़ी पहने शख्स पर इसका कोई प्रभाव नही पड़ा।वह शांत गम्भीर भाव लिये बैठा था, मानो किसी उधेड़-बुन मे लगा हो।
ट्रेन द्रुत गति से दौड़े जा रही थी औऱ अंग्रेजों का उस भारतीय का उपहास, अपमान भी उसी गति से जारी था।किन्तु यकायक वह शख्स सीट से उठा और जोर से चिल्लाया "ट्रेन रोको"।कोई कुछ समझ पाता उसके पूर्व ही उसने ट्रेन की जंजीर खींच दी।ट्रेन रुक गईं।
अब तो जैसे अंग्रेजों का गुस्सा फूट पड़ा।सभी उसको गालियां दे रहे थे।गंवार, जाहिल जितने भी शब्द शब्दकोश मे थे, बौछार कर रहे थे।किंतु वह शख्स गम्भीर मुद्रा में शांत खड़ा था। मानो उसपर किसी की बात का कोई असर न पड़ रहा हो। उसकी चुप्पी अंग्रेजों का गुस्सा और बढा रही थी।
ट्रेन का गार्ड दौड़ा-दौड़ा आया. कड़क आवाज में पूछा, "किसने ट्रेन रोकी"।
कोई अंग्रेज बोलता उसके पहले ही, वह शख्स बोल उठा:- "मैंने रोकी श्रीमान"।
पागल हो क्या ? पहली बार ट्रेन में बैठे हो ? तुम्हें पता है, अकारण ट्रेन रोकना अपराध हैं:- "गार्ड गुस्से में बोला"
हाँ श्रीमान ! ज्ञात है किंतु मैं ट्रेन न रोकता तो सैकड़ो लोगो की जान चली जाती।
उस शख्स की बात सुनकर सब जोर-जोर से हंसने लगे। किँतु उसने बिना विचलित हुये, पूरे आत्मविश्वास के साथ कहा:- यहाँ से करीब एक फरलाँग की दूरी पर पटरी टूटी हुई हैं।आप चाहे तो चलकर देख सकते है।
गार्ड के साथ वह शख्स और कुछ अंग्रेज सवारी भी साथ चल दी। रास्ते भर भी अंग्रेज उस पर फब्तियां कसने मे कोई कोर-कसर नही रख रहे थे।
किँतु सबकी आँखें उस वक्त फ़टी की फटी रह गई जब वाक़ई , बताई गई दूरी के आस-पास पटरी टूटी हुई थी।नट-बोल्ट खुले हुए थे।अब गार्ड सहित वे सभी चेहरे जो उस भारतीय को गंवार, जाहिल, पागल कह रहे थे।वे उसकी और कौतूहलवश देखने लगे, मानो पूछ रहे हो आपको ये सब इतनी दूरी से कैसे पता चला ??..
गार्ड ने पूछा:- तुम्हें कैसे पता चला , पटरी टूटी हुई हैं ??.
उसने कहा:- श्रीमान लोग ट्रेन में अपने-अपने कार्यो मे व्यस्त थे।उस वक्त मेरा ध्यान ट्रेन की गति पर केंद्रित था। ट्रेन स्वाभाविक गति से चल रही थी। किन्तु अचानक पटरी की कम्पन से उसकी गति में परिवर्तन महसूस हुआ।ऐसा तब होता हैं, जब कुछ दूरी पर पटरी टूटी हुई हो।अतः मैंने बिना क्षण गंवाए, ट्रेन रोकने हेतु जंजीर खींच दी।
गार्ड औऱ वहाँ खड़े अंग्रेज दंग रह गये. गार्ड ने पूछा, इतना बारीक तकनीकी ज्ञान ! आप कोई साधारण व्यक्ति नही लगते।अपना परिचय दीजिये। महाराणा प्रताप सिंह
शख्स ने बड़ी शालीनता से जवाब दिया:- श्रीमान मैं भारतीय #इंजीनियर #मोक्षगुंडम_विश्वेश्वरैया...
जी हाँ ! वह असाधारण शख्स कोई और नही "डॉ विश्वेश्वरैया" थे।

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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जुलाई में फ्रांस दौरे पर होंगे. वह इस दौरान फ्रांस की सैन्य परेड बैस्टिल डे में बतौर चीफ गेस्ट शामिल होंगे. इसके साथ ही भारतीय सेना का एक दल भी परेड में हिस्सा लेगा. भारतीय वायुसेना (आईएएफ) के तीन राफेल लड़ाकू विमान परेड के दौरान उड़ान भरेंगे. फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुअल मैक्रों ने पीएम मोदी को 14 जुलाई को पेरिस में होने जा रही बैस्टिल परेड के लिए आमंत्रित किया है. मैक्रों ने ट्वीट कर कहा कि प्रिय नरेंद्र, 14 जुलाई को परेड के सम्मानित अतिथि के रूप में आपका पेरिस में स्वागत कर मुझे बहुत खुशी होगी. उनका न्योता स्वीकार करते हुए पीएम मोदी ने कहा कि धन्यवाद मेरे दोस्त मैक्रों. मैं आपके और फ्रांस के लोगों के साथ 14 जुलाई को हमारी रणनीतिक साझेदारी का जश्न मनाने को लेकर उत्साहित हूं.
#pmmodi #emmanuelmacron #chiefguest #parade #iaf

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ये था मुगलों का असली चेहरा। दिल्ली की गद्दी पर आसीन हेमचंद्र जी को पराजित करने के बाद अकबर और बैरम खां ने हेमचंद्र जी के सैनिकों के सिरों की मीनार बनाई थी।
ये चित्र खुद मुगल चित्रकारों ने ही बनाया है और वर्तमान में पानीपत संग्रहालय में इसे रखा गया है।
हेमचंद्र जी ने अपने जीवनकाल में 22 युद्ध जीते थे, परन्तु पानीपत के दूसरे युद्ध में वीरगति को प्राप्त हुए।

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