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जाब की तलवंडी साबो के पावर प्लांट (Talwandi Sabo power plant) की दूसरी यूनिट भी रविवार को खराब होने के कारण660 मेगावाट बिजली उत्पादन (660 MW power generation) ठप हो गया, जिससे सूबे में बिजली का संकट और बढ़ गया है. इस संकट से बिजली के उपयोग पर उद्योगों पर लगाए गए प्रतिबंधों को हटाने पर भी सवालिया निशान लग गए है. मध्य और उत्तरी क्षेत्रों में स्थित औद्योगिक इकाइयां (Industrial units) तीन दिनों से बंद हैं और आज बिजली उत्पादन की स्थिति बिगड़ने के साथ अब प्रतिबंधों को और बढ़ाया जा सकता है.





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राज्य भर में घरेलू और वाणिज्यिक उपभोक्ताओं ने भी दो से चार घंटे तक की अनिर्धारित बिजली कटौती की शिकायत की है. पीएसपीसीएल के अधिकारियों का कहना है कि इस कटौती का कारण तलवंडी साबो में 660 मेगावाट के संयंत्र के बॉयलर ट्यूब में रिसाव है और संयंत्र को चालू होने में दो से तीन दिन लगेंगे. एक अन्य इकाई (660 मेगावाट) खराबी के कारण कुछ समय के लिए बंद पड़ी है और इस महीने के अंत तक ही उत्पादन शुरू होने की उम्मीद है. जैसे-जैसे कृषि क्षेत्र में मांग बढ़ती जा रही है पंजाब स्टेट पावर कॉरपोरेशन लिमिटेड (Punjab State Power Corporation) ने मांग को पूरा करने के लिए कड़ी मेहनत कर रही है. वर्तमान में राज्य में कुल बिजली की मांग 12280 मेगावाट है. भारत सरकार द्वारा राज्य की खरीद क्षमता को 400 मेगावाट बढ़ाकर 7800 मेगावाट करने के बाद राज्य ने पावर एक्सचेंज से क्रय शक्ति में वृद्धि की है. पिछले साल राज्य की खरीद क्षमता 6400 मेगावाट थी, जिसे इस साल बढ़ाकर 7400 मेगावाट कर दिया गया है.

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Importance of Modi US Visit: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अगले महीने अमेरिका जाने वाले हैं। खास बात यह है कि मोदी अमेरिका के राष्ट्रपति जो बाइडेन के बुलावे पर जा रहे हैं और यह स्टेट विजिट होगी यानी इसे राजकीय यात्रा का दर्जा दिया गया है। मोदी अब तक महज तीसरे ऐसे भारतीय नेता हैं, जिन्हें अमेरिका ने राजकीय यात्रा का न्योता दिया है। अमेरिका में आगामी राष्ट्रपति चुनाव के पहले दुनिया के सबसे बड़े लोकतंत्र के प्रधानमंत्री की यह यात्रा कई मायनों में अहम मानी जा रही है। इसके साथ ही सबकी नजरें इस बात पर भी लगी हैं कि इस यात्रा में मोदी और बाइडेन की कैसी केमिस्ट्री दिखेगी क्योंकि अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप के साथ मोदी के करीबी रिश्तों की बात किसी से छिपी नहीं है।
क्या है मोदी और चीनी राष्ट्रपति शी जिनफिंग के हाथ मिलाने का मतलब?

मोदी की यह यात्रा दोनों देशों के रिश्तों को और मजबूत बनाएगी, ऐसी उम्मीद की जा रही है। यह यात्रा यूक्रेन युद्ध के साये में हो रही है। अमेरिका ने काफी दबाव बनाया था कि यूक्रेन युद्ध में भारत खुलकर रूस का विरोध करे। यह दबाव भी डाला गया कि भारत रूस से कच्चे तेल का आयात बंद कर दे जिससे रूस को आर्थिक नुकसान हो, लेकिन भारत ने ऐसा कुछ नहीं किया।

हालांकि इस एक नुक्ते को छोड़ दें तो भारत और अमेरिका के संबंध हाल के वर्षों में मजबूत ही हुए हैं। क्वॉड से लेकर आई2यू2 (I2U2) तक, हर मंच पर दोनों देश कंधे से कंधा मिलाकर चले हैं। क्वॉड भारत-प्रशांत क्षेत्र में चीन की बढ़ती हरकतों से निपटने के लिए बनाया गया संगठन है। इसमें भारत और अमेरिका के अलावा जापान और ऑस्ट्रेलिया शामिल हैं। वहीं I2U2 में इंडिया, इजरायल, अमेरिका और यूएई हैं।

अमेरिकी राष्ट्रपति ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को अमेरिका की राजकीय यात्रा
मोदी की आगामी यात्रा के बारे में व्हाइट हाउस ने कहा है कि भारत और अमेरिका, दोनों चाहते हैं कि ‘भारत-प्रशांत क्षेत्र सुरक्षित और समृद्ध’ बने और मोदी-बाइडेन की बातचीत से यह सोच और मजबूत होगी। जाहिर है इंडो-पैसिफिक रीजन का हवाला इसलिए दिया गया है क्योंकि अमेरिका इस क्षेत्र में चीन की बढ़ती हरकतें रोकना चाहता है।

ऐसे पस-ए-मंजर के साथ मोदी 21 जून से 24 जून तक अमेरिका की राजकीय यात्रा पर होंगे। इस यात्रा को लेकर जहां तमाम उम्मीदें हैं, वहीं कुछ दुविधा भी है। लेकिन इनके बारे में बात करने से पहले एक नजर डाल लेते हैं अमेरिका की स्टेट विजिट की रस्म पर।

ऐसी स्टेट विजिट केवल अमेरिका के राष्ट्रपति के न्यौते पर ही होती है। यह भी खास बात है कि कोई भी अमेरिकी राष्ट्रपति अपने चार साल के कार्यकाल में किसी विदेशी नेता को दो बार स्टेट विजिट का आमंत्रण नहीं दे सकता। जब कोई नेता अमेरिका की राजकीय यात्रा पर होता है तो उसका परंपरागत रूप से भव्य स्वागत होता है। अमेरिका पहुंचते ही हवाई पट्टी पर ही राजकीय स्वागत होता है। फिर व्हाइट हाउस पहुंचने पर 21 तोपों की सलामी दी जाती है। अमेरिका के राष्ट्रपति परंपरा के अनुसार मोदी के सम्मान में राजकीय भोज का आयोजन भी करेंगे। यह आयोजन 22 जून को होगा। राजकीय यात्रा पर अमेरिका जाने वाले नेताओं को अमेरिकी कांग्रेस को संबोधित करने का न्यौता दिया जाता है। राजकीय मेहमान को अमेरिकी राष्ट्रपति के अतिथि गृह ब्लेयर हाउस में ठहरने का इनविटेशन भी दिया जाता है।

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दिल्‍ली वालों को कश्मीर घूमने जाना हो तो कई बार सोचना पड़ता है। कभी मौसम आड़े आ जाता है तो कभी ट्रैफिक इस कदर रहता है कि जा नहीं सकते। जल्द ही यह दिक्कत दूर होने वाली है। न सिर्फ कश्‍मीर, बल्कि उससे पहले चंडीगढ़, अमृतसर और कटरा तक का सफर बेहद कम वक्‍त में पूरा होने लगेगा। जी हां, दिल्‍ली से कटरा तक नया एक्सप्रेसवे बन रहा है। 620 किलोमीटर लंबा Delhi Amritsar Katra Expressway दिल्‍ली, हरियाणा, पंजाब और जम्मू कश्मीर को कनेक्ट करेगा। आगे इसे NH-44 से जोड़ा जाएगा ताकि श्रीनगर तक सीमलेस कनेक्टिविटी मिले। अगस्त 2022 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने दिल्‍ली-अमृतसर-कटरा एक्सप्रेसवे का शिलान्यास किया था। आइए जानते हैं कि दिल्‍ली अमृतसर कटरा एक्सप्रेसवे से कैसे लंबी दूरी कम वक्‍त में तय होगी।
दिल्‍ली-एनसीआर से कनेक्ट होने वाली सड़कों पर ट्रैफिक का भारी लोड रहता है। सदियों से ग्रैंड ट्रंक रोड कश्मीर तक जाने का रास्‍ता रही है। उसपर ट्रैफिक का भारी दबाव है। एनडीए सरकार ने भारतमाला परियोजना के तहत तय किया कि 10 एक्सप्रेसवे बनाए जाएंगे। इन्‍हीं में से एक एक्‍सप्रेसवे दिल्‍ली को कश्मीर से जोड़ेगा। दिल्‍ली से कटरा के बीच बन रहे एक्सप्रेसवे को डेरा बाबा नानक और करतारपुर कॉरिडोर से भी जोड़ा जाएगा। इस प्रोजेक्ट के लिए पंजाब की करीब 14,000 एकड़ और हरियाणा की 5,000 एकड़ भूमि अधिगृहीत की गई है।

एक्‍सप्रेसवे से चंडीगढ़, अमृतसर, कटरा जाने में कितनानए एक्सप्रेसवे के बन जाने से दिल्‍ली और कटरा के बीच की दूरी 727 किलोमीटर से घटकर 588 किलोमीटर रह जाएगी। दिल्‍ली से कटरा पहुंचने में 14 के बजाय सिर्फ 6 घंटे लगेंगे। वहीं दिल्‍ली से अमृतसर का डिस्‍टेंस भी 405 किलोमीटर रह जाएगा। एक्सप्रेसवे से अमृतसर पहुंचने में सिर्फ 4 घंटे लगेंगे। दिल्‍ली से चंडीगढ़ सिर्फ 2 घंटे में पहुंच जाएंगे।

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