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🌿 पंचनद धाम में विकसित “तुलसी वाटिका” — जहां आस्था की धड़कन और इतिहास की सांसें आज भी जीवित हैं 🌿
पंचनद धाम की यह पावन भूमि केवल एक स्थान नहीं, बल्कि श्रद्धा, विश्वास और सदियों पुरानी भक्ति का जीवंत अनुभव है। यहां की मिट्टी में संतों की तपस्या की सुगंध है, और हर हवा के झोंके में एक अलौकिक शांति का एहसास होता है।
यही वह दिव्य धाम है जहां पांच पवित्र नदियां — यमुना, चंबल, सिंध , कुआरी और पहुंज नदी — एक-दूसरे से मिलकर भक्ति का महासंगम रचती हैं।
इन पांचों नदियों का कल-कल करता निर्मल जल, जब एक साथ बहता है, तो उसकी मधुर ध्वनि कानों को इतनी सुकून देने वाली लगती है कि मन स्वतः ही मुग्ध हो उठता है। ऐसा प्रतीत होता है मानो प्रकृति स्वयं ईश्वर का गुणगान कर रही हो, और हर लहर अपने साथ शांति और सकारात्मक ऊर्जा लेकर आ रही हो।
मान्यता है कि इस तपोभूमि को महान संत मुकुंदवन महाराज की कृपा ने और भी पवित्र बना दिया। यहां खड़ा लगभग 500 वर्ष पुराना पीपल का वृक्ष आज भी उस युग की कहानियां अपने पत्तों की सरसराहट में सुनाता है—मानो समय ठहर गया हो, और इतिहास स्वयं बोल उठता हो।
मंदिर के पास स्थित प्राचीन कुआं, जिसका जीर्णोद्धार किया गया है, केवल एक जलस्रोत नहीं, बल्कि उन अनगिनत आस्थाओं की याद है, जिन्होंने यहां आकर अपनी श्रद्धा अर्पित की।
आज “तुलसी वाटिका” का विकास इस भाव के साथ किया जा रहा है कि पुरातन की आत्मा को सहेजते हुए, वर्तमान को संवारकर भविष्य को समृद्ध बनाया जाए। यहां आधुनिक सुविधाएं जोड़ी गई हैं, लेकिन इस पावन स्थल की शांति, पवित्रता और आध्यात्मिक ऊर्जा को पूरी श्रद्धा के साथ संरक्षित रखा गया है।

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🌿 पंचनद धाम में विकसित “तुलसी वाटिका” — जहां आस्था की धड़कन और इतिहास की सांसें आज भी जीवित हैं 🌿
पंचनद धाम की यह पावन भूमि केवल एक स्थान नहीं, बल्कि श्रद्धा, विश्वास और सदियों पुरानी भक्ति का जीवंत अनुभव है। यहां की मिट्टी में संतों की तपस्या की सुगंध है, और हर हवा के झोंके में एक अलौकिक शांति का एहसास होता है।
यही वह दिव्य धाम है जहां पांच पवित्र नदियां — यमुना, चंबल, सिंध , कुआरी और पहुंज नदी — एक-दूसरे से मिलकर भक्ति का महासंगम रचती हैं।
इन पांचों नदियों का कल-कल करता निर्मल जल, जब एक साथ बहता है, तो उसकी मधुर ध्वनि कानों को इतनी सुकून देने वाली लगती है कि मन स्वतः ही मुग्ध हो उठता है। ऐसा प्रतीत होता है मानो प्रकृति स्वयं ईश्वर का गुणगान कर रही हो, और हर लहर अपने साथ शांति और सकारात्मक ऊर्जा लेकर आ रही हो।
मान्यता है कि इस तपोभूमि को महान संत मुकुंदवन महाराज की कृपा ने और भी पवित्र बना दिया। यहां खड़ा लगभग 500 वर्ष पुराना पीपल का वृक्ष आज भी उस युग की कहानियां अपने पत्तों की सरसराहट में सुनाता है—मानो समय ठहर गया हो, और इतिहास स्वयं बोल उठता हो।
मंदिर के पास स्थित प्राचीन कुआं, जिसका जीर्णोद्धार किया गया है, केवल एक जलस्रोत नहीं, बल्कि उन अनगिनत आस्थाओं की याद है, जिन्होंने यहां आकर अपनी श्रद्धा अर्पित की।
आज “तुलसी वाटिका” का विकास इस भाव के साथ किया जा रहा है कि पुरातन की आत्मा को सहेजते हुए, वर्तमान को संवारकर भविष्य को समृद्ध बनाया जाए। यहां आधुनिक सुविधाएं जोड़ी गई हैं, लेकिन इस पावन स्थल की शांति, पवित्रता और आध्यात्मिक ऊर्जा को पूरी श्रद्धा के साथ संरक्षित रखा गया है।

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🌿 पंचनद धाम में विकसित “तुलसी वाटिका” — जहां आस्था की धड़कन और इतिहास की सांसें आज भी जीवित हैं 🌿
पंचनद धाम की यह पावन भूमि केवल एक स्थान नहीं, बल्कि श्रद्धा, विश्वास और सदियों पुरानी भक्ति का जीवंत अनुभव है। यहां की मिट्टी में संतों की तपस्या की सुगंध है, और हर हवा के झोंके में एक अलौकिक शांति का एहसास होता है।
यही वह दिव्य धाम है जहां पांच पवित्र नदियां — यमुना, चंबल, सिंध , कुआरी और पहुंज नदी — एक-दूसरे से मिलकर भक्ति का महासंगम रचती हैं।
इन पांचों नदियों का कल-कल करता निर्मल जल, जब एक साथ बहता है, तो उसकी मधुर ध्वनि कानों को इतनी सुकून देने वाली लगती है कि मन स्वतः ही मुग्ध हो उठता है। ऐसा प्रतीत होता है मानो प्रकृति स्वयं ईश्वर का गुणगान कर रही हो, और हर लहर अपने साथ शांति और सकारात्मक ऊर्जा लेकर आ रही हो।
मान्यता है कि इस तपोभूमि को महान संत मुकुंदवन महाराज की कृपा ने और भी पवित्र बना दिया। यहां खड़ा लगभग 500 वर्ष पुराना पीपल का वृक्ष आज भी उस युग की कहानियां अपने पत्तों की सरसराहट में सुनाता है—मानो समय ठहर गया हो, और इतिहास स्वयं बोल उठता हो।
मंदिर के पास स्थित प्राचीन कुआं, जिसका जीर्णोद्धार किया गया है, केवल एक जलस्रोत नहीं, बल्कि उन अनगिनत आस्थाओं की याद है, जिन्होंने यहां आकर अपनी श्रद्धा अर्पित की।
आज “तुलसी वाटिका” का विकास इस भाव के साथ किया जा रहा है कि पुरातन की आत्मा को सहेजते हुए, वर्तमान को संवारकर भविष्य को समृद्ध बनाया जाए। यहां आधुनिक सुविधाएं जोड़ी गई हैं, लेकिन इस पावन स्थल की शांति, पवित्रता और आध्यात्मिक ऊर्जा को पूरी श्रद्धा के साथ संरक्षित रखा गया है।

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Sri Lanka has reportedly discontinued pensions and several state-funded benefits for politicians, including housing support, allowances, and transport perks, following strong public backlash during economic hardships. The move is being viewed as an effort to cut public expenditure and rebuild public trust.

This development has also sparked discussions in India, where many are questioning whether similar reforms should be explored to address concerns around political privileges and accountability.

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