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India's daughters have turned the iconic Lord's into a stage of history.
A phenomenal Test victory over England is not just another win—it is a statement of courage, resilience and excellence. Every session, every partnership and every wicket reflected the spirit of a team determined to create history.
Congratulations to our incredible Women's Cricket Team for this unforgettable triumph. May this landmark victory inspire countless young girls to chase their dreams with confidence and bring greater glory to the nation.
#engvind #teamindia #womeninblue #indiancricket

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सुरभि भवन जयपुर में राजस्थान गोसेवा समिति की प्रदेश कार्यकारिणी की महत्वपूर्ण मीटिंग की गई जिसमे प्रदेश की 38 गोशालाओ के समक्ष आई समस्या पर गहनता से विचार विमर्श हुआ।

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सुरभि भवन जयपुर में राजस्थान गोसेवा समिति की प्रदेश कार्यकारिणी की महत्वपूर्ण मीटिंग की गई जिसमे प्रदेश की 38 गोशालाओ के समक्ष आई समस्या पर गहनता से विचार विमर्श हुआ।

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सुरभि भवन जयपुर में राजस्थान गोसेवा समिति की प्रदेश कार्यकारिणी की महत्वपूर्ण मीटिंग की गई जिसमे प्रदेश की 38 गोशालाओ के समक्ष आई समस्या पर गहनता से विचार विमर्श हुआ।

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सुरभि भवन जयपुर में राजस्थान गोसेवा समिति की प्रदेश कार्यकारिणी की महत्वपूर्ण मीटिंग की गई जिसमे प्रदेश की 38 गोशालाओ के समक्ष आई समस्या पर गहनता से विचार विमर्श हुआ।

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शोक संदेश
अत्यंत दुःख के साथ सूचित किया जाता है कि हमारे पूज्य श्री केशरी चंद मालू जी का आज हृदय गति रुक जाने के कारण स्वर्गवास हो गया है।
अंतिम यात्रा
दिनांक 14 जुलाई 2026 (मंगलवार) को अपराह्न 4:30 बजे
निवास स्थान से
मालू हाउस, 18–19, शांतिपथ, पार्श्वनाथ कॉलोनी, निर्माण नगर, से प्रस्थान कर पुरानी चुंगी मोक्षधाम जाएगी।
शोकाकुल :
भाई : निर्मल कुमार मालू (एडवोकेट)
पुत्र : हेमजीत मालू, प्रसनजीत मालू, अजित मालू, अभिषेक मालू

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राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के चतुर्थ सरसंघचालक, परम श्रद्धेय प्रो. राजेन्द्र सिंह 'रज्जू भैया' जी की पुण्यतिथि पर उन्हें विनम्र श्रद्धांजलि एवं कोटि-कोटि नमन।
राष्ट्रसेवा, संगठन सशक्तिकरण, सादगी, समर्पण एवं उत्कृष्ट नेतृत्व से परिपूर्ण उनका प्रेरणादायी जीवन हम सभी के लिए सदैव आदर्श एवं पथप्रदर्शक रहेगा। उनके राष्ट्रनिष्ठ विचार और जीवन-मूल्य आने वाली पीढ़ियों को निरंतर प्रेरित करते रहेंगे।

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बिहार का गौरव, अब कॉमनवेल्थ मंच पर!
बिहार के पूर्वी चंपारण के होनहार फेंसर शिवम कुमार का चयन अंडर-23 कॉमनवेल्थ फेंसिंग चैंपियनशिप 2026 की फॉइल स्पर्धा में भारत का प्रतिनिधित्व करने के लिए हुआ है।
यह प्रतिष्ठित चैंपियनशिप 9 से 19 अगस्त 2026 तक लागोस, नाइजीरिया में आयोजित होगी, जहाँ राष्ट्रमंडल देशों के शीर्ष फेंसर अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन करेंगे।
खेल विभाग, बिहार एवं बिहार राज्य खेल प्राधिकरण की ओर से शिवम कुमार को हार्दिक शुभकामनाएं।
#shivamkumar #fencing #commonwealthfencing #bssa #dilsekhelomilkejeeto

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#bajiprabhudeshpande
शूरवीर बाजीप्रभु देशपाण्डे / बलिदान दिवस - 13 जुलाई

शिवाजी महाराज द्वारा स्थापित हिन्दू पद-पादशाही की स्थापना में जिन वीरों ने नींव के पत्थर की भांति स्वयं को विसर्जित किया, उनमें बाजीप्रभु देशपाण्डे का नाम प्रमुखता से लिया जाता है।

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राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के चतुर्थ सरसंघचालक प्रो. राजेन्द्र सिंह (रज्जू भैया)
पूण्य तिथि -14 जुलाई 2003
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के चतुर्थ सरसंघचालक प्रो. राजेन्द्र सिंह का जन्म 29 जनवरी, 1922 को ग्राम बनैल (जिला बुलन्दशहर, उत्तर प्रदेश) के एक सम्पन्न एवं शिक्षित परिवार में हुआ था। उनके पिता कुँवर बलबीर सिंह अंग्रेज शासन में पहली बार बने भारतीय मुख्य अभियन्ता थे। इससे पूर्व इस पद पर सदा अंग्रेज ही नियुक्त होते थे। राजेन्द्र सिंह को घर में सब प्यार से रज्जू कहते थे। आगे चलकर उनका यही नाम सर्वत्र लोकप्रिय हुआ।
रज्जू भैया बचपन से ही बहुत मेधावी थे। उनके पिता की इच्छा थी कि वे प्रशासनिक सेवा में जायें। इसीलिए उन्हें पढ़ने के लिए प्रयाग भेजा गया; पर रज्जू भैया को अंग्रेजों की गुलामी पसन्द नहीं थी। उन्होंने प्रथम श्रेणी में एम-एस.सी. उत्तीर्ण की और फिर वहीं भौतिक विज्ञान के प्राध्यापक हो गये।
उनकी एम-एस.सी. की प्रयोगात्मक परीक्षा लेने नोबेल पुरस्कार विजेता डा. सी.वी.रमन आये थे। वे उनकी प्रतिभा से बहुत प्रभावित हुए तथा उन्हें अपने साथ बंगलौर चलकर शोध करने का आग्रह किया; पर रज्जू भैया के जीवन का लक्ष्य तो कुछ और ही था।
प्रयाग में उनका सम्पर्क संघ से हुआ और वे नियमित शाखा जाने लगे। संघ के तत्कालीन सरसंघचालक श्री गुरुजी से वे बहुत प्रभावित थे। 1943 में रज्जू भैया ने काशी से प्रथम वर्ष संघ शिक्षा वर्ग का प्रशिक्षण लिया। वहाँ श्री गुरुजी का ‘शिवाजी का पत्र, जयसिंह के नाम’ विषय पर जो बौद्धिक हुआ, उससे प्रेरित होकर उन्होंने अपना जीवन संघ कार्य हेतु समर्पित कर दिया। अब वे अध्यापन कार्य के अतिरिक्त शेष सारा समय संघ कार्य में लगाने लगे। उन्होंने घर में बता दिया कि वे विवाह के बन्धन में नहीं बधेंगे।

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