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राजकुमारी अमृत कौर: वह महिला जिसने AIIMS का सपना देखा और उसे साकार किया
भारत के इतिहास में कुछ ऐसे व्यक्तित्व हैं जिनका योगदान इतना बड़ा है कि उनका प्रभाव पीढ़ियों तक दिखाई देता है। ऐसी ही एक महान महिला थीं Rajkumari Amrit Kaur। उन्हें भारत की पहली स्वास्थ्य मंत्री, स्वतंत्रता सेनानी, महिला अधिकारों की प्रबल समर्थक और AIIMS की प्रमुख स्थापक के रूप में याद किया जाता है। आज जब AIIMS देश का सबसे प्रतिष्ठित चिकित्सा संस्थान माना जाता है, तो उसके पीछे जिस महिला का सबसे बड़ा योगदान था, वह थीं राजकुमारी अमृत कौर।
राजघराने में जन्म, लेकिन जीवन देश को समर्पित
राजकुमारी अमृत कौर का जन्म 2 फरवरी 1887 को लखनऊ में एक समृद्ध शाही परिवार में हुआ था। उनके पिता राजा हरनाम सिंह कपूरथला राजघराने से जुड़े थे। परिवार में वैभव और सुविधाओं की कोई कमी नहीं थी, लेकिन अमृत कौर का मन केवल शाही जीवन में नहीं लगा।
उन्होंने इंग्लैंड के प्रतिष्ठित विद्यालयों में शिक्षा प्राप्त की और आगे उच्च शिक्षा भी वहीं से हासिल की। विदेश में पढ़ाई के दौरान उन्होंने आधुनिक शिक्षा, सामाजिक सुधार और लोकतांत्रिक मूल्यों को करीब से देखा। भारत लौटने के बाद उन्होंने महसूस किया कि देश को स्वतंत्रता और सामाजिक सुधार दोनों की आवश्यकता है।
महात्मा गांधी से मुलाकात ने बदल दी जिंदगी
भारत लौटने के बाद अमृत कौर की मुलाकात Mahatma Gandhi से हुई। गांधीजी के विचारों ने उन्हें गहराई से प्रभावित किया। उन्होंने शाही सुख-सुविधाओं को त्यागकर स्वतंत्रता आंदोलन में भाग लेने का निर्णय लिया।
वह कई वर्षों तक गांधीजी की सहयोगी और सचिव रहीं। नमक सत्याग्रह, सविनय अवज्ञा आंदोलन और भारत छोड़ो आंदोलन में उन्होंने सक्रिय भूमिका निभाई। इसके कारण उन्हें कई बार जेल भी जाना पड़ा।
महिलाओं के अधिकारों की योद्धा
राजकुमारी अमृत कौर केवल स्वतंत्रता सेनानी नहीं थीं, बल्कि महिलाओं के अधिकारों की सबसे मुखर आवाजों में से एक थीं। उन्होंने बाल विवाह, पर्दा प्रथा और महिलाओं के साथ होने वाले भेदभाव का विरोध किया।
उन्होंने 1927 में All India Women's Conference की स्थापना में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। उनका मानना था कि जब तक महिलाओं को शिक्षा और समान अधिकार नहीं मिलेंगे, तब तक भारत का विकास अधूरा रहेगा।
स्वतंत्र भारत की पहली स्वास्थ्य मंत्री