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उन्होंने पूरी ज़िंदगी विद्यार्थियों को पढ़ाने में बिताई। अब अपनी जीवनभर की कमाई भी शिक्षा और ज्ञान के भविष्य के नाम कर दी।
सेवानिवृत्त प्रोफेसर डॉ. नंदिता भट्टाचार्य गोस्वामी और डॉ. पन्नालाल गोस्वामी ने असम के कुमार भास्कर वर्मा संस्कृत एवं प्राचीन अध्ययन विश्वविद्यालय को अपनी जीवनभर की बचत में से ₹1 करोड़ दान दिए हैं।
इस राशि से विश्वविद्यालय में एक विशेष अकादमिक चेयर स्थापित की जाएगी, जो असमिया भाषा, संस्कृत, संस्कृति और प्राचीन ज्ञान पर शोध और अध्ययन को बढ़ावा देगी। इससे आने वाली पीढ़ियों के छात्रों और शोधकर्ताओं को भी लाभ मिलेगा।
आज जब लोग अपनी संपत्ति बढ़ाने को सबसे बड़ी उपलब्धि मानते हैं, तब इस प्रोफेसर दंपति ने दिखाया है कि सबसे बड़ी विरासत वह होती है, जो समाज और आने वाली पीढ़ियों के लिए छोड़ी जाए!
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🌉 दुनिया बदलने वाला इंजीनियरिंग का चमत्कार!
अब बनने जा रहा है ऐसा हाईटेक ब्रिज, जिसके ट्रैक होंगे पूरी तरह स्मार्ट और भविष्य की तकनीक से लैस। 🚄⚡
बताया जा रहा है कि यह दुनिया का पहला ऐसा ब्रिज होगा जहां ट्रैक खुद मौसम, कंपन और भार की जानकारी रियल टाइम में मॉनिटर करेंगे। यानी सुरक्षा और स्पीड दोनों का नया दौर शुरू होने वाला है।
इस ब्रिज की खासियत सिर्फ इसकी मजबूती नहीं, बल्कि इसकी एडवांस टेक्नोलॉजी है। तेज हवाएं हों, भूकंप के झटके हों या भारी ट्रैफिक — सिस्टम पहले ही खतरे का अलर्ट दे देगा। 😲
इंजीनियरों का दावा है कि यह प्रोजेक्ट आने वाले समय में रेलवे और ट्रांसपोर्ट की तस्वीर बदल सकता है। लोग इसे “भविष्य का ब्रिज” कह रहे हैं। 🌍✨
भारत समेत पूरी दुनिया की नजर अब इस मेगा प्रोजेक्ट पर टिक गई है। अगर यह सफल हुआ, तो आने वाले सालों में इसी तकनीक पर कई और ब्रिज बनाए जा सकते हैं। 🚆🔥

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