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प्रतापगढ़ से एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है, जहां शादी के 10 साल बाद पति ने अपनी पत्नी की शादी उसके प्रेमी से करा दी। यह शादी गांव के मंदिर में हुई, जिसमें पति और दोनों बच्चे भी मौजूद रहे। मंदिर में प्रेमी ने महिला की मांग में सिंदूर भरा और वरमाला पहनाई। शादी के बाद महिला ने सबके सामने प्रेमी के पैर भी छुए।
मामले की शुरुआत तब हुई, जब पति ने शनिवार रात पत्नी को उसके प्रेमी के साथ आपत्तिजनक हालत में रंगेहाथ पकड़ लिया। इसके बाद पुलिस को सूचना दी गई और घंटों तक थाने व गांव में पंचायत चली। पंचायत में महिला ने साफ कहा कि वह अब पति के साथ नहीं रहना चाहती और प्रेमी के साथ ही जीवन बिताएगी। गांव वालों और यहां तक कि प्रेमी के पिता ने भी उसे समझाने की कोशिश की, लेकिन वह अपने फैसले पर अड़ी रही।
लंबी पंचायत के बाद पति ने आपसी सहमति से पत्नी की शादी उसके प्रेमी से कराने का फैसला किया। हालांकि, शादी के बाद जब महिला ने अपने दोनों बेटों को साथ चलने को कहा, तो बच्चों ने इनकार कर दिया। बच्चों ने कहा कि मां ने उनके पिता को छोड़ दिया है, इसलिए वे मां के साथ नहीं जाएंगे और पिता के साथ ही रहेंगे।
उत्तर प्रदेश के रेलखंड पर गुरुवार को जहरखुरानी और अपहरण की एक रूह कपा देने वाली वारदात सामने आई है। पुरी से नई दिल्ली जाने वाली नंदन कानन एक्सप्रेस के जनरल कोच में एक बेबस मां को नशीला पदार्थ खिलाकर उसके दस माह के मासूम बच्चे को चोरी कर लिया गया। इस घटना ने रेल यात्रियों की सुरक्षा और जहरखुरान गिरोहों की बढ़ती सक्रियता पर गंभीर सवालिया निशान लगा दिए हैं।
अलीगढ़ निवासी मुन्नी अंसारी अपने कलेजे के टुकड़े के साथ कोडरमा की यात्रा कर रही थीं। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, सफर के दौरान एक अज्ञात युवक ने बड़ी आत्मीयता से बातचीत शुरू की और महिला का विश्वास जीत लिया। प्रयागराज के समीप आरोपी ने उसे प्रसाद के रूप में लड्डू खिलाया, जिसे खाते ही महिला अचेत हो गई। ट्रेन के मीरजापुर पहुंचने पर जब महिला की चेतना लौटी, तो उसकी गोद खाली थी। यात्रियों ने बताया कि संदिग्ध युवक बच्चा लेकर पहले ही फरार हो चुका था।
रेल मदद एप के जरिए मिली सूचना के बाद रात करीब 8:30 बजे मीरजापुर स्टेशन पर आरपीएफ और जीआरपी अलर्ट मोड पर दिखे। पीड़ित महिला को तत्काल ट्रेन से उतारकर सहायता प्रदान की गई और जीआरपी थाने में लिखित शिकायत दर्ज की गई है। पुलिस अब स्टेशन और रेल परिसर के सीसीटीवी फुटेज खंगाल रही है ताकि अपहरणकर्ता का सुराग लगाया जा सके।
महाराष्ट्र के सिंधुदुर्ग में सड़क किनारे सब्जी बेचने वाली मां के लिए गर्व और खुशी का पल आया, जब उनके बेटे गोपाल सावंत ने CRPF में चयन की खबर दी। वीडियो में मां और बेटे के खुशी के आंसू सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे हैं।
इस कहानी से यह भी समझा जा सकता है कि मानसिक और भावनात्मक स्वास्थ्य में परिवार का समर्थन और प्रेरणा कितनी अहम भूमिका निभाता है। माता-पिता की खुशियों में शामिल होना और उनके साथ सफलता साझा करना सकारात्मक मानसिक स्थिति को बढ़ावा देता है, जो समग्र मानसिक स्वास्थ्य और भावनात्मक मजबूती के लिए जरूरी है।
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सूनसान सड़क, अंधेरी रात और नशे की हालत में लड़खड़ाती एक युवती—यह मंजर किसी भी बड़ी अनहोनी (Mishap) का संकेत दे सकता था, लेकिन एक अजनबी युवक की 'इंसानियत' ने आज एक बेटी की आबरू और जान दोनों बचा ली। यह घटना उस वक्त की है जब शहर की व्यस्त सड़कें खामोश हो चुकी थीं और लोग पास से गुजरने के बावजूद इस स्थिति को Ignore कर आगे बढ़ रहे थे।
तभी वहां से गुजर रहे एक युवक ने युवती को Critical Condition में देखा। बिना किसी संकोच या सवाल के, उसने युवती को Physical Support दिया और उसका Address पता करने की कोशिश की। कड़ी मशक्कत के बाद जब लोकेशन ट्रैक हुई, तो युवक ने उसे सुरक्षित उसके घर तक पहुँचाया। दरवाजा खुलते ही सामने खड़े लाचार माता-पिता के होश उड़ गए। युवक ने पूरी घटना की जानकारी दी और बिना किसी Recognition या इनाम की चाहत के वहां से चुपचाप चला गया। अपनी बेटी को सुरक्षित देख पिता की आंखों में आंसू और चेहरे पर गहरी शर्मिंदगी थी, क्योंकि एक अजनबी ने उस वक्त जिम्मेदारी निभाई जब समाज की संवेदनहीनता (Insensitivity) चरम पर थी।
सोशल मीडिया पर इस घटना के वायरल होने के बाद अब एक गंभीर बहस (Serious Debate) छिड़ गई है। लोग सवाल उठा रहे हैं कि "क्या हमारी बेटियां आज के समाज में सुरक्षित हैं? और क्या भरोसा अब सिर्फ चंद अजनबियों तक ही सीमित रह गया है?" ऐसे दौर में जहां Crime Rate और स्वार्थ बढ़ता जा रहा है, वहां इस युवक का निस्वार्थ कदम (Selfless Act) एक बड़ी मिसाल पेश करता है। यह मामला साफ संदेश देता है कि समाज का चरित्र आज भी उन चंद लोगों की वजह से बचा हुआ है जो मुश्किल वक्त में 'Humanity' को सर्वोपरि रखते हैं। See less