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कब्र पर माँ को नंबर दिखाने पहुँचा मासूम, वीडियो वायरल!
सोशल मीडिया पर पेरू का एक पुराना वीडियो दोबारा वायरल हो रहा है, जिसमें 'जीजस' नाम का एक बच्चा अपनी मृत माँ की कब्र पर अपनी स्कूल रिपोर्ट कार्ड दिखाने पहुँचा। जीजस ने माँ से अच्छे नंबर लाने का वादा किया था और वह अक्सर उनसे मिलने कब्रिस्तान आता है। वीडियो के अंत में एक अजनबी शख्स बच्चे को सहारा देकर साथ ले जाता है। 'Exitosa Noticias' के अनुसार, बच्चे की माँ का निधन 2005 में हुआ था। यह वीडियो माँ-बेटे के पवित्र रिश्ते की एक भावुक झलक है।
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केंद्रीय रक्षा मंत्री Rajnath Singh ने पाकिस्तान के बयान पर तीखी प्रतिक्रिया दी।पाकिस्तान के रक्षा मंत्री ने जो बयान दिया है उसके बारे में इतना कहूंगा कि उन्हें ये नहीं भूलना चाहिए कि 55 साल पहले 1971 में पाकिस्तान ने एक बार बंगाल की तरफ नजर उठाने की कोशिश की थी तो पाकिस्तान के दो टुकड़े हो गए एक पाकिस्तान और दूसरा बांग्लादेश बन गया #rajnathsingh #indiapakistan #1971war #defencenews #geopolitics— in India.
⚖️👮कोर्ट ने 9 पुलिसकर्मियों को मौत की सजा सुनाई है।
पुलिस थाने में टॉर्चर के कारण बाप-बेटे की हिरासत में मौत हो गई थी।😮🔥⚖️⚠️
मदुरै कोर्ट ने कस्टोडियल डेथ केस में 9 पुलिसकर्मियों को मौत की सजा सुनाई है। यह मामला उस दर्दनाक घटना से जुड़ा है। जिसमें थाने में टॉर्चर के कारण बाप-बेटे की हिरासत में मौत हो गई थी।
कोर्ट ने इसे ‘रेयरेस्ट ऑफ रेयर’ मानते हुए साफ कहा कि कानून के रखवालों द्वारा की गई ऐसी बर्बरता और सत्ता का दुरुपयोग बर्दाश्त नहीं किया जा सकता। इस फैसले को न्याय की दिशा में एक मजबूत कदम माना जा रहा है, जो यह संदेश देता है कि कानून से ऊपर कोई नहीं है। चाहे वह पुलिस ही क्यों न हो। ⚖️🔥
जब रिटायरमेंट के बाद भी सेवा नहीं रुकी!
88 वर्ष की उम्र में, जब ज़्यादातर लोग आराम की रफ्तार पकड़ लेते हैं, तब इंदरजीत सिंह सिद्धू हाथ में झाड़ू लेकर सड़कों पर निकल पड़ते हैं।
हर सुबह ठीक 6 बजे, पूर्व आईपीएस अधिकारी और कभी डिप्टी इंस्पेक्टर जनरल रहे सिद्धू चंडीगढ़ की सड़कों पर खुद कचरा उठाते हैं। यह न तो उनकी नौकरी है, न ही किसी ने उनसे कहा—बस उन्हें अपने शहर की गरिमा टूटती देखी नहीं गई।
रिटायरमेंट के बाद उन्होंने पहले प्रशासन से शिकायत की। जब कोई बदलाव नहीं हुआ, तो उन्होंने शिकायत की जगह खुद पहल की। एक थैले के साथ अकेले सफाई शुरू की। लोग हँसे, किसी ने उन्हें “पागल” कहा, लेकिन वे रुके नहीं।
धीरे-धीरे उनकी यह ख़ामोश कोशिश एक आंदोलन बन गई। पड़ोसी जुड़े, परिवार आगे आया। एक व्यक्ति की जिम्मेदारी सामूहिक चेतना में बदल गई। “सिटी ब्यूटीफुल” चंडीगढ़ को उसका सबसे सच्चा और निस्वार्थ प्रहरी मिल गया।
सिद्धू सादगी से कहते हैं:
“सफाई में कोई शर्म नहीं, स्वच्छता ही ईश्वर की सेवा है”
इसी भावना और आजीवन जनसेवा के लिए इस गणतंत्र दिवस पर भारत सरकार ने उन्हें पद्म श्री (Unsung Heroes श्रेणी) से सम्मानित किया।
यह कहानी याद दिलाती है कि पद रिटायर हो सकते हैं, वर्दी उतर सकती है लेकिन उद्देश्य कभी नहीं।
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