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Harbhajan Singh के आम आदमी पार्टी छोड़कर बीजेपी में जाने के बाद पंजाब की राजनीति में जबरदस्त उबाल देखने को मिल रहा है। उनके घर के बाहर दीवार पर ‘पंजाब का गद्दार’ लिखकर विरोध जताया गया, वहीं AAP कार्यकर्ता काली पट्टी बांधकर सड़कों पर उतर आए। यह विरोध केवल एक नेता के फैसले के खिलाफ नहीं, बल्कि उस राजनीतिक बदलाव के खिलाफ भी माना जा रहा है, जिसने राज्य की सियासत को हिला दिया है।

पंजाब के मुख्यमंत्री Bhagwant Mann ने भी इस पूरे घटनाक्रम पर तीखी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने पार्टी छोड़ने वाले नेताओं को ‘गद्दार’ बताते हुए आरोप लगाया कि बीजेपी डर, लालच और दबाव के जरिए आम आदमी पार्टी को तोड़ने की कोशिश कर रही है। उनका कहना है कि कुछ नेताओं के जाने से न तो पंजाब बदलेगा और न ही पार्टी कमजोर होगी।

मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि बिना जनता के बीच संघर्ष किए बड़े पद पाने वाले कुछ नेताओं ने निजी स्वार्थ के लिए रास्ता बदल लिया। उन्होंने बीजेपी पर क्षेत्रीय दलों को कमजोर करने की रणनीति अपनाने का आरोप लगाते हुए कहा कि पंजाब की जनता इस सबको समझ रही है और सही समय पर जवाब देगी।

#harbhajansingh #aap #bjp #punjabpolitics #bhagwantmann #breakingnews #atcard #aajtaksocial

(Harbhajan Singh Protest, Punjab Politics, AAP vs BJP, Bhagwant Mann's Statement, Defection Controversy, Political Protest)

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Harbhajan Singh के आम आदमी पार्टी छोड़कर बीजेपी में जाने के बाद पंजाब की राजनीति में जबरदस्त उबाल देखने को मिल रहा है। उनके घर के बाहर दीवार पर ‘पंजाब का गद्दार’ लिखकर विरोध जताया गया, वहीं AAP कार्यकर्ता काली पट्टी बांधकर सड़कों पर उतर आए। यह विरोध केवल एक नेता के फैसले के खिलाफ नहीं, बल्कि उस राजनीतिक बदलाव के खिलाफ भी माना जा रहा है, जिसने राज्य की सियासत को हिला दिया है।

पंजाब के मुख्यमंत्री Bhagwant Mann ने भी इस पूरे घटनाक्रम पर तीखी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने पार्टी छोड़ने वाले नेताओं को ‘गद्दार’ बताते हुए आरोप लगाया कि बीजेपी डर, लालच और दबाव के जरिए आम आदमी पार्टी को तोड़ने की कोशिश कर रही है। उनका कहना है कि कुछ नेताओं के जाने से न तो पंजाब बदलेगा और न ही पार्टी कमजोर होगी।

मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि बिना जनता के बीच संघर्ष किए बड़े पद पाने वाले कुछ नेताओं ने निजी स्वार्थ के लिए रास्ता बदल लिया। उन्होंने बीजेपी पर क्षेत्रीय दलों को कमजोर करने की रणनीति अपनाने का आरोप लगाते हुए कहा कि पंजाब की जनता इस सबको समझ रही है और सही समय पर जवाब देगी।

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पंजाब के मुख्यमंत्री Bhagwant Mann ने भी इस पूरे घटनाक्रम पर तीखी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने पार्टी छोड़ने वाले नेताओं को ‘गद्दार’ बताते हुए आरोप लगाया कि बीजेपी डर, लालच और दबाव के जरिए आम आदमी पार्टी को तोड़ने की कोशिश कर रही है। उनका कहना है कि कुछ नेताओं के जाने से न तो पंजाब बदलेगा और न ही पार्टी कमजोर होगी।

मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि बिना जनता के बीच संघर्ष किए बड़े पद पाने वाले कुछ नेताओं ने निजी स्वार्थ के लिए रास्ता बदल लिया। उन्होंने बीजेपी पर क्षेत्रीय दलों को कमजोर करने की रणनीति अपनाने का आरोप लगाते हुए कहा कि पंजाब की जनता इस सबको समझ रही है और सही समय पर जवाब देगी।

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नेपाल सरकार ने प्राइवेट स्कूलों को तय सीमा से ज्यादा फीस लेने के खिलाफ चेतावनी जारी की है। सरकार से अभिभावकों से कई शिकायतें मिली थीं, जिनमें आरोप लगाया गया था कि एक एकेडमिक सेशन के खत्म होने और दूसरे के शुरू होने के समय स्कूल मनमाने तरीके से फीस वसूल कर रहे हैं।

'द काठमांडू पोस्ट' की एक रिपोर्ट के अनुसार, शिक्षा मंत्रालय ने उस सबूतों पर गंभीरता से ध्यान दिया है, जिनसे पता चलता है कि कुछ स्कूल 2026 के एकेडमिक सेशन की औपचारिक शुरुआत से पहले ही छात्रों का एडमिशन कर रहे थे और उनसे भारी फीस वसूल रहे थे।

मंत्रालय ने अब स्कूलों को निर्देश दिया है कि वे छात्रों का एडमिशन एकेडमिक साल शुरू होने के बाद ही करें और 'प्राइवेट स्कूल फीस निर्धारण मानदंड निर्देश, 2015' का सख्ती से पालन करें।

अधिकारियों ने नियमों के उल्लंघन पर सख्त कार्रवाई की चेतावनी दी है, जिसमें अभिभावकों को फीस वापस करना और मौजूदा कानूनों के तहत जुर्माना लगाना शामिल है। स्थानीय सरकारों को यह सुनिश्चित करने का निर्देश दिया गया है कि नियमों का पालन हो।शिकायतों में ऐसे मदों के तहत फीस लेना शामिल है जिन्हें मंजूरी नहीं मिली है, और पहले से ही एडमिशन ले चुके छात्रों से बार-बार एडमिशन फीस वसूलना शामिल है।

इस निर्देश के तहत 14 श्रेणियों में फीस लेने की अनुमति है, जिनमें ट्यूशन, एडमिशन, परीक्षा और ट्रांसपोर्टेशन शामिल हैं, लेकिन इसके लिए स्पष्ट सीमाएं तय की गई हैं।

उदाहरण के लिए, ट्यूशन फीस केवल 12 महीनों के लिए ली जा सकती है, एडमिशन फीस एक महीने की ट्यूशन फीस से ज्यादा नहीं होनी चाहिए और इसे केवल एक बार ही लिया जा सकता है, जबकि सालाना फीस की सीमा दो महीने की ट्यूशन फीस तक तय की गई है।

नियमों का उल्लंघन करने पर 25,000 रुपए तक का जुर्माना लग सकता है और बार-बार उल्लंघन करने पर लाइसेंस भी रद किया जा सकता है। यह सख्त कार्रवाई सुप्रीम कोर्ट के एक अंतरिम आदेश के बाद की गई है, जिसमें स्कूलों को निर्देश दिया गया था कि वे एडमिशन तभी शुरू करें जब एकेडमिक सेशन शुरू हो जाए। कोर्ट ने एकेडमिक कैलेंडर और एडमिशन की उचित प्रक्रिया का पालन करने पर जोर दिया।

#nepal #privateschoolfees

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