❣️ #रुस के राष्ट्रपति #पुतिन ने कहा, 🇮🇳#भारत देश #सौभाग्यशालि है कि उनके पास #प्रधानमंत्रि मोदी है.!!❣️ 🙏 जय हिंद 🙏🇮🇳🙏जय भारत🙏
❣️ #fbviralpost2026 #fbreels2026 #foryou
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आज हरिद्वार के गायत्री तीर्थ ‘शांतिकुंज’ में पवित्र अखंड ज्योति के दर्शन किए। लगातार 100 वर्षों से प्रज्ज्वलित यह ज्योति राष्ट्रनिर्माण के अनेक कार्यों और सांस्कृतिक पुनर्जागरण के संकल्पों की प्रेरणा रही है। यह ज्योति पं श्री राम शर्मा आचार्य जी और माता भगवती देवी शर्मा जी के उस अखंड संकल्प का प्रतीक है, जिसने व्यक्ति-निर्माण को राष्ट्रनिर्माण का मूल माना और करोड़ों देशवासियों के जीवन में परिवर्तन लाया।
आज हरिद्वार के गायत्री तीर्थ ‘शांतिकुंज’ में पवित्र अखंड ज्योति के दर्शन किए। लगातार 100 वर्षों से प्रज्ज्वलित यह ज्योति राष्ट्रनिर्माण के अनेक कार्यों और सांस्कृतिक पुनर्जागरण के संकल्पों की प्रेरणा रही है। यह ज्योति पं श्री राम शर्मा आचार्य जी और माता भगवती देवी शर्मा जी के उस अखंड संकल्प का प्रतीक है, जिसने व्यक्ति-निर्माण को राष्ट्रनिर्माण का मूल माना और करोड़ों देशवासियों के जीवन में परिवर्तन लाया।
आज हरिद्वार के गायत्री तीर्थ ‘शांतिकुंज’ में पवित्र अखंड ज्योति के दर्शन किए। लगातार 100 वर्षों से प्रज्ज्वलित यह ज्योति राष्ट्रनिर्माण के अनेक कार्यों और सांस्कृतिक पुनर्जागरण के संकल्पों की प्रेरणा रही है। यह ज्योति पं श्री राम शर्मा आचार्य जी और माता भगवती देवी शर्मा जी के उस अखंड संकल्प का प्रतीक है, जिसने व्यक्ति-निर्माण को राष्ट्रनिर्माण का मूल माना और करोड़ों देशवासियों के जीवन में परिवर्तन लाया।

राजुला और मालूशाही-पहाड़ की सबसे चर्चित प्रेम कहानी ❤️
पहाड़ों की ठंडी हवा, गधेरों की कलकल और झोड़ा–न्योली की करुण तान…
इन सबके बीच आज भी जब प्रेम की बात होती है, तो सबसे पहले नाम आता है — राजुला और मालूशाही।
यह कहानी सिर्फ़ दो दिलों की नहीं, बल्कि समाज, सत्ता और स्त्री-सम्मान से टकराते प्रेम की अमर गाथा है।
अब AI बोलेगा गढ़वाली में भी!
उत्तराखंड के दो IT इंजीनियरों ने रच दिया इतिहास 🏔️🤖
उत्तराखंड के दो होनहार IT इंजीनियर युवाओं ने वो कर दिखाया है, जिस पर हर पहाड़ी को गर्व होगा।
सुमितेश नैथानी और आदित्य नौटियाल ने मिलकर एक ऐसा पहाड़ी AI मॉडल तैयार किया है, जो किसी भी भाषा में सवाल पूछने पर जवाब गढ़वाली में देता है।
आज जब AI पूरी दुनिया में छाया हुआ है, उसी दौर में इन युवाओं ने गढ़वाली जैसी लोकभाषा को तकनीक से जोड़कर उसे नई पहचान दी है। यह AI न सिर्फ भाषा को समझता है, बल्कि पहाड़ी संस्कृति, भाव और बोलचाल को भी ज़िंदा रखता है।
👉 यह पहल सिर्फ टेक्नोलॉजी नहीं,
👉 अपनी मातृभाषा और संस्कृति को बचाने का प्रयास है।
पहाड़ की बोली अब डिजिटल दुनिया में भी गूंजेगी।
यही है असली Make in Uttarakhand, Make for Uttarakhand 🇮🇳🏔️