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अहमदाबाद: गुजरात के अहमदाबाद में एक युवती ने अपने शादीशुदा प्रेमी के चक्कर में पड़कर करोड़ों रुपए के गहने चोरी किए। लेकिन प्रेमी ने धोखा दे दिया और गहने लेकर फरार हो गया. अब पुलिस ने युवती को गिरफ्तार कर लिया है।
➡️निकोल इलाके में पिछले सप्ताह एक ज्वेलरी शोरूम में काम करने वाली हर्षिदा शेट्टी नाम की एक सेल्स गर्ल ने करोड़ों रुपये के गहने चुरा लिए। अब इस मामले में एक हैरान करने वाला खुलासा हुआ है। हर्षिदा ने अपने शादीशुदा प्रेमी के साथ रहने के लिए यह चोरी की थी। चोरी करने के बाद दोनों अलग-अलग राज्यों में साथ रहने लगे। हालांकि इसी दौरान हर्षिदा के साथ एक बड़ा घोखा हुआ। जब हर्षिदा नहाने गई, तो उसका प्रेमी गहने लेकर फरार हो गया।
#gujarat #ahmedabad #crimenews | Gujarat | Ahmedabad |
कई बच्चों के लिए, शिव तांडव स्तोत्रम जैसी संस्कृत रचना को याद करना और सुनाना अपने आप में असीम समर्पण और अभ्यास की मांग करता है। कर्नाटक के सिरसी के आठ वर्षीय ओम एन ने अब अंतर्राष्ट्रीय अभिलेख पुस्तिका में अपना नाम दर्ज करा लिया है,
क्योंकि उन्होंने दीवार के सहारे बिना हाथों का सहारा लिए शीर्षासन करते हुए शिव तांडव स्तोत्रम का पाठ किया - यह एक ऐसा कारनामा है जिसके लिए एकाग्रता, संतुलन और अनुशासन की आवश्यकता होती है, और वह भी इतनी कम उम्र में।
इंटरनेशनल बुक ऑफ रिकॉर्ड्स द्वारा साझा किए गए विवरण के अनुसार, ओम ने 15 फरवरी, 2026 को 3 मिनट और 47 सेकंड में यह प्रदर्शन पूरा किया।
इस चुनौती में कठिन योगासन को बनाए रखते हुए लयबद्ध संस्कृत पाठ को बिना किसी रुकावट के जारी रखना शामिल था। दोनों को एक साथ करने के लिए श्वास नियंत्रण, शारीरिक स्थिरता और मानसिक एकाग्रता की आवश्यकता होती है।
महज आठ साल और दो दिन की उम्र में, ओम ने दीवार के सहारे बिना हाथों का इस्तेमाल किए शीर्षासन में उल्टा रहते हुए यह प्रयास सफलतापूर्वक पूरा किया और इस प्रक्रिया में एक नया विश्व रिकॉर्ड बनाया।
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#karnatka
#headstand
“तेल बचाने” का नया मॉडल सामने आया है… 😄
सम्राट के मंत्री जी ने बड़े गर्व से ऐलान किया कि अब वो पेट्रोल-डीज़ल की बचत के लिए ✨वंदे भारत✨ से सफर करेंगे।
सुनने में लगा कि चलो, कोई तो जनता के पैसों और देश के संसाधनों की चिंता कर रहा है। 🚄⛽
लेकिन कहानी में असली ट्विस्ट तो उसके बाद आया…
मंत्री जी खुद ट्रेन से निकले जरूर,
पर उससे पहले सुरक्षा, स्टाफ, लगेज, स्वागत, व्यवस्था और “प्रोटोकॉल” के नाम पर गाड़ियों का पूरा काफिला सड़क मार्ग से पहले ही रवाना कर दिया गया। 🚙🚔🚘🚨
अब जनता सोच में पड़ गई…
जब दर्जनों गाड़ियाँ पहले ही दौड़ गईं,
तो फिर बचा क्या?
तेल… या सिर्फ बयान? 🤔
आजकल राजनीति में दिखावे का दौर ऐसा चल रहा है कि
असल काम कम और कैमरे के लिए “सादगी” ज्यादा दिखाई जाती है।
फोटो में ट्रेन की सीट दिखेगी,
वीडियो में हाथ हिलाते नेता दिखेंगे,
कैप्शन आएगा —
“देशहित में बड़ा फैसला” 🇮🇳
लेकिन पर्दे के पीछे वही पुराना सिस्टम…
पूरा लाव-लश्कर,
VIP इंतज़ाम,
सरकारी खर्च और जनता को ज्ञान। 😅
जनता भी अब समझदार हो चुकी है।
उसे पता है कि
अगर सच में बचत करनी होती,
तो पूरा प्रोटोकॉल सीमित होता,
अनावश्यक गाड़ियों पर रोक लगती,
और सिर्फ सोशल मीडिया पोस्ट के लिए “सादगी का शो” नहीं किया जाता।
आज हालत ये है कि
नेता AC कमरा छोड़कर 5 मिनट सड़क पर चल लें तो “त्याग” कहलाता है,
और ट्रेन में सफर कर लें तो “क्रांति” 😄
देश को दिखावे वाली नहीं,
ईमानदार बचत चाहिए।
ऐसी बचत जो फाइलों और कैमरों में नहीं,
जमीन पर दिखाई दे।
वरना जनता यही कहेगी —
🚄 मंत्री जी वंदे भारत से चले,
🚘 काफिला पहले निकल गया,
⛽ तेल भी जल गया,
📸 और PR भी बन गया…!