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भगवान स्वामिनारायण ने दो शताब्दी पूर्व वसंत पंचमी के दिन 'शिक्षापत्री' की रचना की और मानव समाज को सम्मान में चलने के लिए प्रेरित किया। स्वामिनारायण मंदिर जिसे उन्होंने 1822 में गांधीनगर में स्थापित किया था, शिक्षापत्री के 200 वर्ष पूर्ण होने के अवसर पर मनाए जाने वाले 'समैयो महोत्सव' में शिक्षापत्री के दर्शन करने का सौभाग्य प्राप्त हुआ।
हर युवा को इस एजुकेशन कार्ड को पढ़ना चाहिए और इसका पालन करना चाहिए।

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भगवान स्वामिनारायण ने दो शताब्दी पूर्व वसंत पंचमी के दिन 'शिक्षापत्री' की रचना की और मानव समाज को सम्मान में चलने के लिए प्रेरित किया। स्वामिनारायण मंदिर जिसे उन्होंने 1822 में गांधीनगर में स्थापित किया था, शिक्षापत्री के 200 वर्ष पूर्ण होने के अवसर पर मनाए जाने वाले 'समैयो महोत्सव' में शिक्षापत्री के दर्शन करने का सौभाग्य प्राप्त हुआ।
हर युवा को इस एजुकेशन कार्ड को पढ़ना चाहिए और इसका पालन करना चाहिए।

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भगवान स्वामिनारायण ने दो शताब्दी पूर्व वसंत पंचमी के दिन 'शिक्षापत्री' की रचना की और मानव समाज को सम्मान में चलने के लिए प्रेरित किया। स्वामिनारायण मंदिर जिसे उन्होंने 1822 में गांधीनगर में स्थापित किया था, शिक्षापत्री के 200 वर्ष पूर्ण होने के अवसर पर मनाए जाने वाले 'समैयो महोत्सव' में शिक्षापत्री के दर्शन करने का सौभाग्य प्राप्त हुआ।
हर युवा को इस एजुकेशन कार्ड को पढ़ना चाहिए और इसका पालन करना चाहिए।

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जय मां वैष्णोदेवी मां 🙏 🙏 अपने समस्त भक्तों की मनोकामना पूर्ण करना मां 🙏 🙏

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ਗੁਰਦਾਸਪੁਰ 'ਚ ਵੱਡੀ ਵਾ.ਰਦਾ.ਤ, ਮੈਡੀਕਲ ਸਟੋਰ ਦੇ ਮਾਲਕ ਦਾ ਗੋ/ਲੀਆਂ ਮਾ/ਰ ਕੇ ਕ.ਤ.ਲ

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ਹੈੱਡ ਕਾਂਸਟੇਬਲ ਅਮਨਦੀਪ ਸਿੰਘ ਦੇ ਕ.ਤ.ਲ ਦਾ ਮਾਮਲਾ
#headconstable #amandeepsingh #latestnews #punjabnews #dailypostpunjabi

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ਕੇਂਦਰੀ ਰੱਖਿਆ ਮੰਤਰੀ ਰਾਜਨਾਥ ਸਿੰਘ ਨੇ ਮਹਾਰਾਸ਼ਟਰ ਦੇ ਉਪ ਮੁੱਖ ਮੰਤਰੀ ਅਜੀਤ ਪਵਾਰ ਦੇ ਦਿ/ਹਾਂਤ 'ਤੇ ਜਤਾਇਆ ਦੁੱਖ
#uniondefenceminister #rajnathsingh

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Jay Shri Ram

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लोकसभा के 550 सांसदों में से सिर्फ़ राघव चड्डा ने हवाई अड्डों पर महंगी बिसलेरी 500 बिस्किट और महंगे भोजन जैसे आम जनता से जुड़े मुद्दों को उठाया।..

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झारखंड के एक रिमोट विलेज से CISF की वर्दी तक!
19 वर्षीय रोशनी वर्मा झारखंड के रांची ज़िले के एक दूरदराज़ गाँव से आती हैं। सीमित संसाधनों और आर्थिक मुश्किलों के बीच पढ़ाई जारी रखने और फुटबॉल खेलने के लिए उन्होंने कम उम्र में घरेलू काम भी किया। स्कूल की फीस और फुटबॉल किट जुटाना उनके लिए आसान नहीं था, लेकिन खेल के प्रति जुनून ने उन्हें कभी रुकने नहीं दिया।
रोशनी ने 9 साल की उम्र में फुटबॉल खेलना शुरू किया। स्थानीय मैदानों पर अभ्यास करते हुए उन्होंने धीरे-धीरे अपनी पहचान बनाई और आगे चलकर झारखंड राज्य का राष्ट्रीय स्तर पर प्रतिनिधित्व किया। यह सफ़र मेहनत, अनुशासन और लगातार अभ्यास का नतीजा रहा।
आज वही रोशनी केंद्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल (CISF) में स्पोर्ट्स कोटे के तहत चयनित होकर हेड कॉन्स्टेबल बनी हैं। वे CISF के अब तक के सबसे बड़े स्पोर्ट्स बैच की पासिंग-आउट परेड का हिस्सा रहीं, जो बल के इतिहास में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि मानी जा रही है।
कम उम्र, बड़ा सपना और कड़ी मेहनत रोशनी वर्मा की कहानी बताती है कि प्रतिभा को अगर सही मौका मिले, तो हालात चाहे जैसे भी हों, किस्मत बदली जा सकती है।
#fblifestyle

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