दिल्ली-एनसीआर समेत पूरे उत्तर भारत को गर्मी से राहत मिली है. पिछले दो तीन दिनों से रुक-रुककर बारिश का दौर जारी है. बेमौसम बारिश से ठंड की वापसी भी हुई है. पारा 7 डिग्री तक गिर गया है. अगले कुछ दिनों तक भारी बारिश का अलर्ट है. मार्च के महीने में आखिर में बारिश होना सामान्य बात नहीं है. हाल के दिनों में मौसम के पैटर्न काफी अप्रत्याशित हो गए हैं और यह घटना पूरे भारत में बदलते जलवायु पैटर्न का एक बड़ा संकेत भी है. आखिर क्यों अचानक मौसम इतना अनिश्चित हो गया है?
🔴फिलहाल दिल्ली और उत्तर-पश्चिम भारत में हो रही बारिश का मुख्य कारण एक सक्रिय पश्चिमी विक्षोभ है. यह ऊपरी हवा का एक साइक्लोनिक सर्कुलेशन है जो फिलहाल उत्तरी पाकिस्तान के ऊपर बना हुआ है. इस सिस्टम के कारण न केवल बारिश हो रही है, बल्कि 40-80 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से तेज हवाएं चल रही हैं.कई राज्यों में ओले भी गिरे हैं.
🔴आमतौर पर पश्चिमी विक्षोभ सर्दियों के महीने यानी दिसंबर-फरवरी में आते हैं, जो भूमध्य सागर से उठते हैं और उत्तर-पूर्व की ओर बढ़ते हुए बर्फबारी और शीत लहर लाते हैं. लेकिन इस बार का सिस्टम खास है. यह एक सीधी ट्रफ के रूप में है, जिसने भारत, पाकिस्तान और अफगानिस्तान के ऊपर करीब 1,000 किमी लंबी बारिश की पट्टी बना दी है. मार्च के अंत में जेट स्ट्रीम कमजोर होकर उत्तर की ओर खिसक जाती है, जिससे ऐसे सिस्टम दुर्लभ हो जाते हैं. लेकिन इस बार यह काफी सक्रिय है. इस सिस्टम को नमी समुद्रों से मिल रही है. इसके मुख्य स्रोत भूमध्य सागर, कैस्पियन सागर, काला सागर और फारस की खाड़ी है. जब यह सिस्टम भारत की ओर बढ़ता है, तो अरब सागर से उठने वाली नमी इसे और अधिक शक्तिशाली बना देती है.
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