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इक्ष्वाकु वंशी महाराज युवनाश्व संतान प्राप्ति की कामना के लिए वन में तपस्या करने गए, जहाँ उनकी भेंट च्यवन ऋषि से हुई। ऋषि ने उनके लिए एक विशाल 'इष्टि यज्ञ' किया और अंत में एक कलश में अभिमंत्रित जल रखा, जिसे पीकर महारानी को गर्भ धारण करना था।
किन्तु, नियति को कुछ और ही मंजूर था। रात्रि के समय प्यास से व्याकुल महाराज युवनाश्व ने अनजाने में वही अभिमंत्रित जल स्वयं पी लिया, जिसके फलस्वरूप वे स्वयं गर्भवती हो गए। समय पूर्ण होने पर देवताओं के वैद्य अश्विनीकुमारों ने राजा की कोख को चीरकर एक तेजस्वी बालक को बाहर निकाला।
बालक के पोषण की समस्या उत्पन्न होने पर देवराज इंद्र ने अपनी तर्जनी उँगली उसे चूसने के लिए दी, जिससे दिव्य दुग्ध प्रवाहित हो रहा था। इंद्र ने कहा— "मम धाता" (अर्थात् मैं इसकी माता हूँ), जिससे बालक का नाम मान्धाता पड़ा। यही बालक आगे चलकर एक महान चक्रवर्ती राजा बना।
हर पिता अपनी ज़िंदगी का सबसे भारी बोझ मुस्कुराते हुए उठाता है...
लेकिन उसको सबसे बड़ी तकलीफ़ उस दिन होती है,
जब उसका अपना बच्चा उसके संघर्ष को प्यार नहीं,
सिर्फ़ "फ़र्ज़" समझने लगता है।
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देहरादून की प्रसिद्ध वैकल्पिक चिकित्सा एवं हीलिंग विशेषज्ञ डॉ. हरलीन कौर को लंदन स्थित ब्रिटिश संसद (हाउस ऑफ कॉमन्स) में आयोजित भव्य समारोह में World Book of Records London द्वारा प्रतिष्ठित Certificate of Excellence से सम्मानित किया गया।
यह सम्मान उन्हें वैकल्पिक चिकित्सा, हीलिंग, आध्यात्मिक शिक्षा और मानव सेवा के क्षेत्र में उनके उत्कृष्ट योगदान के लिए प्रदान किया गया। पिछले 23 वर्षों से डॉ. हरलीन कौर हजारों लोगों को हीलिंग, कौशल विकास और आध्यात्मिक मार्गदर्शन के माध्यम से सशक्त बना रही हैं। उनके कार्यों ने देश ही नहीं, बल्कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी सकारात्मक प्रभाव छोड़ा है।
वर्ष 2003 में उन्होंने देहरादून में Healing Energy Institute of Cosmic Sciences की स्थापना की थी। अब तक वे 5000 से अधिक विद्यार्थियों और प्रशिक्षुओं को प्रशिक्षण एवं मार्गदर्शन दे चुकी हैं। रैकी हीलिंग, मेडिटेशन, एनर्जी हीलिंग, स्पिरिचुअल काउंसलिंग, टैरो और अन्य वैकल्पिक चिकित्सा पद्धतियों में उनकी विशेष पहचान है।
ब्रिटिश संसद में मिला यह अंतरराष्ट्रीय सम्मान न केवल डॉ. हरलीन कौर की उपलब्धि है, बल्कि देहरादून, उत्तराखंड और पूरे भारत के लिए गौरव का विषय है। उनकी यह सफलता उन सभी लोगों के लिए प्रेरणा है जो सेवा, समर्पण और निरंतर मेहनत के दम पर दुनिया में अपनी अलग पहचान बनाना चाहते हैं। 🇮🇳❤️
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सफलता का रास्ता हमेशा सीधा नहीं होता। कई बार असफलताएँ ही हमें सबसे बड़ी मंज़िल तक पहुँचने की ताकत देती हैं। राजस्थान के जयपुर के रहने वाले गौरव अग्रवाल इसकी बेहतरीन मिसाल हैं।
गौरव ने IIT कानपुर से कंप्यूटर साइंस में बी.टेक की पढ़ाई की, लेकिन इंजीनियरिंग के दौरान एक सेमेस्टर में फेल हो गए। इसके कारण उनकी डिग्री पूरी होने में अतिरिक्त समय लगा। इसके बाद उन्होंने IIM लखनऊ से MBA किया और गोल्ड मेडल हासिल किया। पढ़ाई पूरी करने के बाद वे हांगकांग में लगभग तीन साल तक इन्वेस्टमेंट बैंकर के रूप में कार्यरत रहे।