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28 अक्टूबर को Jio Platforms की शेयर बाज़ार में लिस्टिंग के मौक़े पर पूरा अंबानी परिवार NSE पहुंचा था। वहां भाषणों और भावुक पलों के बीच ईशा अंबानी का एक छोटा सा नेकलेस भी लोगों की नज़र में आ गया, जो क़ीमत से ज़्यादा अपने मतलब की वजह से ख़ास है।

लाल सूट में मुस्कुराती ईशा के गले में एक नाज़ुक सा नेकलेस था। उस पर तीन नाम लिखे हैं: आदिया, कृष्णा और आनंद। आदिया और कृष्णा उनके जुड़वां बच्चे हैं, और आनंद पीरामल उनके पति।

ईशा और आनंद की शादी दिसंबर 2018 में मुंबई में हुई थी। नवंबर 2022 में दोनों जुड़वां बच्चों, बेटी आदिया और बेटे कृष्णा, के माता-पिता बने।

ये नेकलेस किसने बनाया, इसमें हीरे लगे हैं या नहीं और इसकी क़ीमत क्या है, इस पर अंबानी परिवार ने कुछ नहीं कहा है।

इतने बड़े परिवार से होने के बावजूद ईशा ने अपने सबसे क़रीबी रिश्तों को गले से लगाकर रखा है, और लोगों को यही बात सबसे प्यारी लग रही है। ❤️💎

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बॉलीवुड के 'कॉमेडी किंग' कहे जाने वाले जॉनी लीवर का ये मशहूर नाम असल में एक फ़ैक्ट्री की देन है।

आंध्र प्रदेश में जन्मे जॉन प्रकाश राव जनुमाला मुंबई के धारावी इलाक़े में पले-बढ़े। उनके पिता हिंदुस्तान लीवर के प्लांट में operator थे। करीब 18 साल की उम्र में जॉन भी पिता के साथ वहीं काम करने लगे।

फ़ैक्ट्री में काम के साथ-साथ वो mimicry भी करते थे। कंपनी के एक function में उन्होंने कुछ बड़े अफ़सरों की नक़ल उतारी, तो किसी की हंसी नहीं रुकी। उसी दिन से साथी मज़दूरों ने उन्हें "जॉनी लीवर" कहना शुरू कर दिया।

एक पुराने interview में उन्होंने बताया था कि वहां उन्होंने करीब 6 साल काम किया, और "from there, I got the name Lever" (वहीं से मुझे 'लीवर' नाम मिला)। बाद में स्टेज शो से कमाई बढ़ी तो उन्होंने नौकरी छोड़ दी, लेकिन नाम वही रहा।

वो कंपनी आज हिंदुस्तान यूनिलीवर के नाम से जानी जाती है, पर जॉनी लीवर के नाम में पुराना "लीवर" आज भी ज़िंदा है। फ़ैक्ट्री से बॉलीवुड तक का ये सफ़र मेहनत और हुनर की सच्ची मिसाल है। 🙏😄

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NMACC में किताबों का एक नया ठिकाना खुलने जा रहा है, 'द लाइब्रेरी'। इसके launch पर नीता अंबानी बेज कलर के सूट में पहुंचीं, लेकिन सबकी नज़र उनके कोट पर लगे एक चमकीले ड्रैगनफ़्लाई पर जाकर रुक गई।

ये ब्रोच हांगकांग के जाने-माने ज्वेलरी कलाकार वॉलेस चैन की कृति 'Soaring Spirit' है। बताया जाता है कि ये ड्रैगनफ़्लाई उन्हें सपने में दिखी थी, और उसे असल गहने में ढालने में पूरे 10 साल लग गए। इस दौरान उन्होंने कई तरह के मटीरियल और तरीक़े आज़माए, और ज़रूरत पड़ी तो अपने औज़ार भी ख़ुद बनाए। 2017 में ये ब्रोच पहली बार दुनिया के सामने आया था।

इसमें हीरे, रूबी, गुलाबी नीलम और हरे रत्न जड़े गए हैं, और इसकी बॉडी टाइटेनियम से बनी है, जो पहनने वाले के साथ-साथ हिलती है। कलाकार के मुताबिक़ इसके पंख गिनती सिखाने वाले मोतियों के फ्रेम जैसे बनाए गए हैं, क्योंकि उनकी नज़र में ये ड्रैगनफ़्लाई हर बार पंख फड़फड़ाकर वक़्त गिनती है।

सोशल मीडिया पर इसकी क़ीमत को लेकर कई बड़े-बड़े आंकड़े घूम रहे हैं, लेकिन इस ब्रोच की कोई आधिकारिक क़ीमत सामने नहीं आई है।

वैसे किताबों के नए घर के launch पर सपनों से निकली एक कहानी पहनकर पहुंचना, अपने आप में एक ख़ूबसूरत बात है। 📚✨

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घर की जमीन खोदी तो निकला करोड़ों का खजाना...

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बिहार के मोकामा में होमगार्ड जवान विकास कुमार ने अदम्य साहस और इंसानियत की मिसाल पेश की है। गंगा नदी की तेज धारा में डूब रही बांका की महिला हिंगला देवी को बचाने के लिए विकास कुमार ने अपनी जान की परवाह किए बिना वर्दी में ही नदी में छलांग लगा दी और महिला को सुरक्षित बाहर निकाल लिया।

बताया जाता है कि घटना मोकामा के तपस्वी घाट की है। महिला गंगा नदी में डूबने लगी थीं। इसी दौरान ड्यूटी पर तैनात विकास कुमार की नजर उन पर पड़ी। उन्होंने बिना देर किए नदी में छलांग लगा दी और अपनी बहादुरी से महिला की जान बचा ली।

इस साहसिक घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो गया। बिहार पुलिस ने भी जवान के अदम्य साहस की सराहना की है। बाढ़ SDPO रामकृष्ण ने विकास कुमार को फोन कर बधाई दी और कहा कि उनके इस कार्य से पूरे पुलिस बल का मान-सम्मान बढ़ा है।

SDPO ने बताया कि विकास कुमार को सम्मानित करने के लिए वरीय पुलिस अधीक्षक से अनुशंसा की गई है। साथ ही उनके असाधारण साहस को देखते हुए अगले वर्ष राष्ट्रपति जीवन रक्षा पदक के लिए भी नामांकन की अनुशंसा की जाएगी।

बता दें कि विकास कुमार बाढ़ अनुमंडल के बेलछी प्रखंड स्थित गोपालपुर गांव के रहने वाले हैं। उनकी बहादुरी की चर्चा अब बिहार ही नहीं, बल्कि देशभर में हो रही है।

वर्दी का फर्ज निभाते हुए इंसानियत की ऐसी मिसाल पेश करने वाले विकास कुमार को सलाम! ❤️

देश-विदेश की हर खबर देखने के लिए देखते रहिए The PM Media।

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बिहार के बेगूसराय से गंगा नदी में हुए नाव हादसे की ऐसी कहानी सामने आई है, जिसे सुनकर किसी का भी दिल भावुक हो सकता है। बुधवार शाम चमथा रजौली दियारा से लौट रही एक नाव अचानक नदी में डूब गई। इस हादसे में लापता दो लोगों के शव गुरुवार को बरामद किए गए। मृतकों में 50 वर्षीय सोगारथ महतो और 12 वर्षीय रीना कुमारी उर्फ रावो शामिल हैं।

बताया जा रहा है कि नाव की क्षमता करीब 15 लोगों की थी, लेकिन उस पर इससे कहीं अधिक लोग सवार थे। नाव कुछ दूर आगे बढ़ी ही थी कि एक युवक के पानी में कूदने के बाद उसका संतुलन बिगड़ गया। नाव एक तरफ झुक गई और धीरे-धीरे उसमें पानी भरने लगा। देखते ही देखते नाव नदी में डूब गई।

इस हादसे में सबसे दर्दनाक कहानी मन्नुता देवी की सामने आई है। उन्होंने बताया कि वह अपने पति और बेटी के साथ दियारा से घर लौट रही थीं। नाव पर अधिक लोगों को बैठाने को लेकर उन्होंने पहले ही आपत्ति जताई थी, लेकिन उनकी बात अनसुनी कर दी गई। हादसे के दौरान उनके पति नाव के नीचे फंस गए। वह उन्हें बचाने के लिए आगे बढ़ना चाहती थीं, लेकिन दूसरे यात्रियों ने उन्हें रोक लिया। इस घटना में उनके पति की जान चली गई, जबकि उनकी बेटी किसी तरह तैरकर किनारे पहुंचने में सफल रही।

दूसरी ओर, बबीता देवी की कहानी भी बेहद दुखद है। वह अपनी बेटी के साथ नाव पर सवार थीं। नाव का संतुलन बिगड़ने पर उन्होंने बेटी को बचाने की कोशिश की, लेकिन दूसरे लोगों ने उन्हें अपनी सुरक्षा का ध्यान रखने की सलाह दी। अगले दिन उनकी बेटी का शव बरामद हुआ।

हालांकि इस हादसे में कुछ लोगों ने अपनी सूझबूझ और हिम्मत से जान बचाई। नाव पर सवार करीना नाम की बच्ची ने बताया कि जब नाव डूबने लगी तो उसने भी नदी में छलांग लगा दी। तैरते हुए वह कम गहराई वाले हिस्से तक पहुंची और एक खंभे का सहारा लेकर सुरक्षित बच गई।

इस घटना के बाद गांव के लोगों में नाराजगी है। ग्रामीणों का कहना है कि चमथा रजौली के लोगों को खेती और मजदूरी के लिए रोजाना गंगा पार दियारा जाना पड़ता है। लेकिन सुरक्षित आवागमन के लिए अब तक पक्के पुल की व्यवस्था नहीं हो सकी है। चुनाव के दौरान पुल बनाने के वादे जरूर किए जाते हैं, लेकिन ग्रामीणों के मुताबिक उनकी समस्या आज भी बनी हुई है।

ग्रामीणों ने मृतकों के परिवारों को उचित मुआवजा देने और दियारा क्षेत्र में पुल निर्माण कराने की मांग की है।

NDRF-SDRF के अभियान में मिले दोनों शव

हादसे के बाद बुधवार शाम SDRF की टीम ने तलाश अभियान शुरू किया था। अंधेरा होने के कारण पहले दिन दोनों लापता लोगों का पता नहीं चल सका। गुरुवार सुबह NDRF की टीम भी पहुंची। इसके बाद संयुक्त अभियान चलाकर दोनों के शव बरामद किए गए।

यह घटना सिर्फ एक नाव हादसा नहीं, बल्कि उन लोगों की रोजमर्रा की परेशानी भी सामने लाती है, जिन्हें अपनी रोजी-रोटी के लिए हर दिन नदी पार करनी पड़ती है। अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या इस हादसे के बाद दियारा के लोगों को सुरक्षित आवागमन की सुविधा मिल पाएगी?

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बिहार के मुजफ्फरपुर जिले से सरकारी योजना की राशि में कथित गड़बड़ी का मामला सामने आया है। गायघाट प्रखंड की शिवदाहा पंचायत के वार्ड संख्या-2 में हर घर नल-जल योजना के तहत आवंटित राशि से संबंधित मामले में पुलिस ने पूर्व वार्ड सदस्य बृजनंदन पासवान को गिरफ्तार किया है। उन पर लाखों रुपये की राशि उपलब्ध होने के बावजूद योजना का काम पूरा नहीं कराने का आरोप है।

मिली जानकारी के अनुसार, वर्ष 2017 से 2020 के बीच शिवदाहा पंचायत के वार्ड संख्या-2 में नल-जल योजना की दो यूनिट स्थापित की जानी थीं। इसके लिए वार्ड क्रियान्वयन एवं प्रबंधन समिति को कुल ₹21 लाख 22 हजार 800 रुपये उपलब्ध कराए गए थे। आरोप है कि राशि मिलने के बावजूद योजना का काम पूरा नहीं कराया गया।

इस मामले में तत्कालीन पंचायत सचिव अशोक कुमार प्रभाकर ने 18 अगस्त 2023 को गायघाट थाने में प्राथमिकी दर्ज कराई थी। शिकायत में तत्कालीन वार्ड सदस्य बृजनंदन पासवान और वार्ड सचिव मोहम्मद खुर्शीद को आरोपी बनाया गया था।

प्राथमिकी दर्ज होने के बाद से पूर्व वार्ड सदस्य की तलाश की जा रही थी। पुलिस को उसके घर पर मौजूद होने की सूचना मिलने के बाद छापेमारी की गई और उसे गिरफ्तार कर लिया गया।

पुलिस के अनुसार, गिरफ्तार आरोपी को मंगलवार को अदालत में पेश किया गया, जहां से उसे न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया गया। मामले में वार्ड सचिव मोहम्मद खुर्शीद को भी कुछ दिन पहले गिरफ्तार कर जेल भेजा जा चुका है।

हर घर नल-जल योजना का उद्देश्य ग्रामीण परिवारों तक स्वच्छ पेयजल पहुंचाना है। ऐसे में योजना के लिए उपलब्ध कराई गई राशि और काम पूरा नहीं होने के आरोप ने सरकारी योजनाओं की निगरानी और जवाबदेही को लेकर सवाल खड़े किए हैं।

हालांकि, राशि के कथित गबन से जुड़े आरोपों पर अंतिम निष्कर्ष जांच और न्यायिक प्रक्रिया के आधार पर ही निकलेगा।

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उत्तर प्रदेश के अमेठी जिले से एक गंभीर मामला सामने आया है। रामनगर स्थित मलिक मोहम्मद जायसी की मजार पर झाड़-फूंक कराने गई एक नाबालिग दलित किशोरी के साथ कथित छेड़छाड़ का आरोप लगा है। मामले में पुलिस ने आरोपी मौलवी मोइनुद्दीन को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया है।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, घटना 27 अक्टूबर 2026 की शाम करीब 6 बजे की है। बताया जा रहा है कि किशोरी अपनी 8 वर्षीय रिश्तेदार के साथ भैंस की झाड़-फूंक कराने मजार पर गई थी। इसी दौरान वहां मौजूद मौलवी मोइनुद्दीन पर किशोरी के साथ कथित छेड़छाड़ करने का आरोप लगा।

आरोप है कि किशोरी ने शोर मचाया तो आसपास लोगों को आता देख आरोपी ने उसे छोड़ दिया। इसके बाद बच्ची घर पहुंची और अपनी मां को पूरी घटना बताई।

बेटी की बात सुनने के बाद उसके पिता और परिवार के अन्य सदस्य मजार पर पहुंचे। आरोप है कि वहां मौलवी और उसके दो बेटों ने परिजनों के साथ गाली-गलौज की और लाठी लेकर उन्हें दौड़ाया। साथ ही जान से मारने की धमकी देने का भी आरोप लगाया गया है।

परिजनों की शिकायत पर अमेठी पुलिस ने मामला दर्ज कर कार्रवाई शुरू की। हिन्दुस्तान की रिपोर्ट के अनुसार, पुलिस ने पॉक्सो एक्ट के तहत मुकदमा दर्ज कर आरोपी को गिरफ्तार किया और जेल भेज दिया है।

अमेठी के क्षेत्राधिकारी श्वेताभ भास्कर ने भी आरोपी की गिरफ्तारी और मामले की जांच की जानकारी दी है। 29 अक्टूबर को प्रकाशित रिपोर्ट में आरोपी को न्यायालय में पेश किए जाने की बात भी कही गई है।

अब इस मामले में सबसे जरूरी है कि पीड़िता को न्याय मिले और जांच निष्पक्ष तरीके से पूरी हो। यदि आरोप साबित होते हैं तो दोषी के खिलाफ कानून के अनुसार सख्त कार्रवाई होनी चाहिए।

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बिहार के 19 वर्षीय युवा मोनू राज चौहान इन दिनों अपनी अनोखी संकल्प यात्रा को लेकर चर्चा में हैं। मां के प्रति उनका प्रेम और भगवान भोलेनाथ के प्रति अटूट आस्था लोगों के दिलों को छू रही है।

दरअसल, जब मोनू की मां लालती देवी गंभीर रूप से बीमार थीं, तब उन्होंने भगवान शिव से मन्नत मांगी थी कि अगर उनकी मां स्वस्थ हो जाती हैं, तो वह देश के सभी 12 ज्योतिर्लिंगों और चारों धाम की यात्रा दौड़कर पूरी करेंगे।

मां की सेहत में सुधार होने के बाद मोनू ने अपना वादा निभाने का संकल्प लिया और 15 मार्च 2026 को अपनी यात्रा शुरू कर दी। उनका लक्ष्य हजारों किलोमीटर की दूरी तय करते हुए 12 ज्योतिर्लिंगों और चारों धाम के दर्शन करना है।

इस यात्रा के दौरान मोनू प्रतिदिन करीब 50 किलोमीटर दौड़ने का प्रयास कर रहे हैं। अब वह बिहार से निकलकर महाराष्ट्र के नासिक जिले पहुंच चुके हैं, जहां स्थानीय लोगों ने उनका गर्मजोशी से स्वागत किया।

मोनू की इस कठिन यात्रा में उनके परिजन भी सहयोग कर रहे हैं। मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, वह अब तक हजारों किलोमीटर की दूरी तय कर चुके हैं और कई ज्योतिर्लिंगों के दर्शन भी कर चुके हैं।

एक तरफ मां से किया वादा निभाने का जुनून और दूसरी तरफ महादेव के प्रति अटूट विश्वास। मोनू की यह यात्रा साबित करती है कि जब इरादे मजबूत हों तो मुश्किल रास्ते भी आसान हो जाते हैं।

एक मां की दुआ, एक बेटे का वादा और हजारों किलोमीटर का सफर... बिहार के इस लाल के जज्बे को दिल से सलाम! ❤️

भगवान भोलेनाथ मोनू राज चौहान की यात्रा सफल करें और उन्हें सुरक्षित रखें।

हर हर महादेव! 🚩🙏

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