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चित्तौड़गढ़ की पावन धरा के रक्षक, अदम्य साहस के प्रतीक और 'चार हाथों वाले लोकदेवता' वीर कल्लाजी राठौड़ के बलिदान दिवस पर उन्हें शत-शत नमन। 🙏🚩
जब मुगलों के खिलाफ युद्ध में जयमल जी घायल हुए, तब कल्लाजी ने उन्हें अपने कंधों पर बिठाकर दो हाथों से खुद और दो हाथों से जयमल जी की तलवारें चलाकर दुश्मनों के छक्के छुड़ा दिए थे। ऐसी वीरता और त्याग की मिसाल दुनिया में कहीं और नहीं मिलती।
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यह हाल है हमारे सवर्ण समाज के नेताओं का,जो UGC काले कानून पर बोलते नहीं, सिर्फ अपनी सीट बचाने के चक्कर में, पर यह भूल गए इनको उस सीट पर बिठाने वाले ही हम है,अगले चुनाव में देखते है कैसे जीतते है।
कितने भाई सहमत है ? कमेंट में अपनी राय जरूर दे।

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महाराष्ट्र के पैठण तालुका के पचोड़ में एक किसान परिवार ने अपने 28 साल पुराने साथी बैल ‘खांड्या’ की मौत के बाद इंसानों की तरह दशक्रिया और तेरहवीं कर अनोखी श्रद्धांजलि दी. किसान ने मुंडन कर रीति-रिवाज निभाए और गांव वालों को भोज भी कराया, जिससे पशु के प्रति उनके गहरे प्रेम का उदाहरण सामने आया. यह घटना खेती में बैल और किसान के अटूट रिश्ते और भावनात्मक जुड़ाव को दर्शाती है.

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