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नूंह की शादियों में करोड़ों रुपये की नकदी और नोटों की मालाओं के नाम पर चल रहे भद्दे प्रदर्शन और फिजूलखर्ची पर अब कानून का डंडा चलने वाला है।
दैनिक जागरण द्वारा इस गंभीर सामाजिक बुराई और इसके पीछे छिपे किराए के खेल और पनपते अपराध को प्रमुखता से छापे जाने के बाद नूंह पुलिस प्रशासन ने इस पर बड़ा संज्ञान लिया है।
नूंह पुलिस अधीक्षक डॉ. अर्पित जैन के निर्देश पर अब ऐसी शादियों, इंटरनेट मीडिया वीडियो और झूठी शान दिखाने वाले लोगों पर विशेष निगरानी रखी जाएगी।
दैनिक जागरण द्वारा छापी गई खबर पर नूंह पुलिस ने संज्ञान लेते हुए चेतावनी जारी कर साफ किया है कि बिना रिकार्ड भारी मात्रा में नकदी दिखाने वालों से पैसे का सोर्स पूछा जाएगा।
जवाब न मिलने पर टैक्स चोरी और काले धन के तहत नियमानुसार कार्रवाई होगी। भारी भरकम नोटों की माला किराए पर उपलब्ध कराने वाले और इस धंधे से जुड़े लोगों की जांच होगी।
पुलिस का कहना है कि यह दिखावा युवाओं को मेहनत की बजाय अवैध पैसे की चमक और अपराध की तरफ धकेलता है। पुलिस का कहना है कि कानून से बड़ा कोई नहीं है।
शादियों में अवैध धन का प्रदर्शन और हुड़दंग किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। 19 मई के अपने अंक में क्षेत्र में पनप रही सामाजिक बुराई जैसे करोड़ों रुपयों की नोटों की मालाओं के नाम पर भद्दा प्रदर्शन और फिजूलखर्ची के मुद्दों को प्रमुखता के साथ उठाया था।
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बीमा पॉलिसी लेने के मात्र 25 दिन बाद व्यक्ति की मौत होने और बीमा कंपनी द्वारा कैंसर की बीमारी छिपाने का आरोप लगाकर क्लेम खारिज किए जाने के मामले में पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट ने मृतक की पत्नी को बड़ी राहत दी है। हाई कोर्ट ने परमानेंट लोक अदालत के उस आदेश को बरकरार रखा है, जिसमें बीमा कंपनी को 14.22 लाख रुपये का डेथ बेनिफिट देने के निर्देश दिए गए थे।
मामले की सुनवाई करते हुए जगमोहन बंसल ने स्पष्ट कहा कि बीमा कंपनी यह साबित करने में विफल रही कि बीमित व्यक्ति पहले से कैंसर जैसी गंभीर बीमारी से पीड़ित था और उसने यह तथ्य पॉलिसी लेते समय छिपाया था। अदालत ने कहा कि परमानेंट लोक अदालत ने उपलब्ध रिकॉर्ड का सही मूल्यांकन करते हुए यह निष्कर्ष निकाला कि बीमा कंपनी के आरोप विश्वसनीय साक्ष्यों से सिद्ध नहीं हुए।
मामले के अनुसार, समुंदर सिंह ने 23 मार्च 2018 को भारती एक्सा लाइफ इंश्योरेंस कंपनी से जीवन बीमा पॉलिसी ली थी। पॉलिसी की बीमित राशि 7.11 लाख रुपये थी, जबकि डेथ बेनिफिट 14.22 लाख रुपये निर्धारित था। उन्होंने पहली प्रीमियम राशि 63 हजार 172 रुपये जमा करवाई। इसके बाद 25 अप्रैल 2018 को उनकी अचानक हार्ट अटैक से मौत हो गई।
मौत पॉलिसी जारी होने के केवल 25 दिन बाद हुई थी। इसके बाद बीमा कंपनी ने 31 मार्च 2019 को दावा खारिज करते हुए कहा कि समुंदर सिंह पहले से “स्क्वैमस सेल कार्सिनोमा” यानी कैंसर से पीड़ित थे और फरवरी 2017 से उसका इलाज चल रहा था। कंपनी का आरोप था कि पॉलिसी लेते समय इस बीमारी की जानकारी छिपाई गई।
दावा खारिज होने पर मृतक की पत्नी ने परमानेंट लोक अदालत का दरवाजा खटखटाया। पीएलए ने दो अप्रैल 2025 को महिला के पक्ष में फैसला सुनाते हुए बीमा कंपनी को भुगतान करने का आदेश दिया था। इसी आदेश को चुनौती देते हुए बीमा कंपनी हाई कोर्ट पहुंची थी।
HC ने अपने आदेश में कहा कि बीमा कंपनी जिन मेडिकल दस्तावेजों पर भरोसा कर रही थी, उनमें गंभीर खामियां थीं। अदालत ने पाया कि मेडिकल रिपोर्ट की फोटो कॉपी पर किसी डॉक्टर के हस्ताक्षर नहीं थे और न ही वह संबंधित अस्पताल अथवा सक्षम प्राधिकारी से सत्यापित थी। इतना ही नहीं, रिकॉर्ड में अलग-अलग सीआर नंबर पाए गए, जिससे दस्तावेजों की विश्वसनीयता पर सवाल खड़े हो गए।
अदालत ने यह भी कहा कि बीमा कंपनी यह साबित नहीं कर सकी कि कथित बीमारी का संबंध मृत्यु के वास्तविक कारण से था। रिकॉर्ड के अनुसार समुंदर सिंह की मौत हार्ट अटैक से हुई थी। बीमा कंपनी की ओर से दलील दी कि कैंसर जैसी जानलेवा बीमारी का खुलासा नहीं किया गया था।
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