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राज्यपाल लेफ्टिनेंट जनरल गुरमीत सिंह (से नि ) आज अपने पैतृक गांव जलाल उस्मान, अमृतसर (पंजाब) पहुंचे। इस अवसर पर उनका ग्रामवासियों द्वारा अत्यंत आत्मीय स्वागत किया गया। अपने गांव आकर राज्यपाल भावुक हो गए और उन्होंने कहा कि यह स्थान उनके जीवन की प्रेरणा का आधार है।
राज्यपाल ने गुरुद्वारा बाबा श्री चंद जी और गुरुद्वारा श्रीनानक साहिब में माथा टेककर अरदास की और देश-प्रदेश की खुशहाली की कामना की। उन्होंने कहा कि उनका इस गांव से गहरा जुड़ाव है, क्योंकि यहीं उनके परिवार और उनका जन्म हुआ। उन्होंने यह भी कहा कि आज जिस पद पर वह हैं, उसमें इस भूमि के आशीर्वाद का बड़ा योगदान है।
इस दौरान राज्यपाल ने ग्रामवासियों से आत्मीय संवाद किया और उनके सुझावों एवं अपेक्षाओं को ध्यानपूर्वक सुना। उन्होंने गांव की सरलता, आत्मीयता और संस्कारों को जीवन का वास्तविक आधार बताया।
राज्यपाल ने गवर्नमेंट सीनियर सेकेंडरी स्कूल, जलाल उस्मान का भी भ्रमण किया। उन्होंने बच्चों से बातचीत की और उन्हें बड़े सपने देखने और मेहनत करने के लिए प्रेरित किया। उन्होंने कहा कि आज के बच्चे देश का भविष्य हैं और उन्हें अच्छे विचार और मजबूत चरित्र के साथ आगे बढ़ना चाहिए। उन्होंने पंजाब की वीरता और देशभक्ति की परंपरा का उल्लेख करते हुए बच्चों को अपने संस्कारों से जुड़े रहने की सलाह दी। साथ ही गुरु नानक देव जी, गुरु तेग बहादुर जी और गुरु गोविंद सिंह जी के जीवन से प्रेरणा लेने का संदेश दिया।
विद्यालय की सुविधाओं को बेहतर बनाने के लिए राज्यपाल ने कंप्यूटर दिए और लाइब्रेरी के लिए 108 किताबें भेंट कीं। उन्होंने कहा कि पढ़ाई के साथ-साथ किताबों का अध्ययन बच्चों के विकास के लिए बहुत जरूरी है। राज्यपाल ने स्कूल के मेधावी बच्चों को प्रशस्ति पत्र देकर सम्मानित भी किया।
राज्यपाल ने कहा कि गांव और शिक्षा से उनका जुड़ाव केवल भावनात्मक नहीं, बल्कि उनकी जिम्मेदारी भी है। उन्होंने विश्वास जताया कि गांव के बच्चे आगे बढ़कर अपने परिवार, राज्य और देश का नाम रोशन करेंगे।
Lt Gen Gurmit Singh

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राज्यपाल लेफ्टिनेंट जनरल गुरमीत सिंह (से नि ) आज अपने पैतृक गांव जलाल उस्मान, अमृतसर (पंजाब) पहुंचे। इस अवसर पर उनका ग्रामवासियों द्वारा अत्यंत आत्मीय स्वागत किया गया। अपने गांव आकर राज्यपाल भावुक हो गए और उन्होंने कहा कि यह स्थान उनके जीवन की प्रेरणा का आधार है।
राज्यपाल ने गुरुद्वारा बाबा श्री चंद जी और गुरुद्वारा श्रीनानक साहिब में माथा टेककर अरदास की और देश-प्रदेश की खुशहाली की कामना की। उन्होंने कहा कि उनका इस गांव से गहरा जुड़ाव है, क्योंकि यहीं उनके परिवार और उनका जन्म हुआ। उन्होंने यह भी कहा कि आज जिस पद पर वह हैं, उसमें इस भूमि के आशीर्वाद का बड़ा योगदान है।
इस दौरान राज्यपाल ने ग्रामवासियों से आत्मीय संवाद किया और उनके सुझावों एवं अपेक्षाओं को ध्यानपूर्वक सुना। उन्होंने गांव की सरलता, आत्मीयता और संस्कारों को जीवन का वास्तविक आधार बताया।
राज्यपाल ने गवर्नमेंट सीनियर सेकेंडरी स्कूल, जलाल उस्मान का भी भ्रमण किया। उन्होंने बच्चों से बातचीत की और उन्हें बड़े सपने देखने और मेहनत करने के लिए प्रेरित किया। उन्होंने कहा कि आज के बच्चे देश का भविष्य हैं और उन्हें अच्छे विचार और मजबूत चरित्र के साथ आगे बढ़ना चाहिए। उन्होंने पंजाब की वीरता और देशभक्ति की परंपरा का उल्लेख करते हुए बच्चों को अपने संस्कारों से जुड़े रहने की सलाह दी। साथ ही गुरु नानक देव जी, गुरु तेग बहादुर जी और गुरु गोविंद सिंह जी के जीवन से प्रेरणा लेने का संदेश दिया।
विद्यालय की सुविधाओं को बेहतर बनाने के लिए राज्यपाल ने कंप्यूटर दिए और लाइब्रेरी के लिए 108 किताबें भेंट कीं। उन्होंने कहा कि पढ़ाई के साथ-साथ किताबों का अध्ययन बच्चों के विकास के लिए बहुत जरूरी है। राज्यपाल ने स्कूल के मेधावी बच्चों को प्रशस्ति पत्र देकर सम्मानित भी किया।
राज्यपाल ने कहा कि गांव और शिक्षा से उनका जुड़ाव केवल भावनात्मक नहीं, बल्कि उनकी जिम्मेदारी भी है। उन्होंने विश्वास जताया कि गांव के बच्चे आगे बढ़कर अपने परिवार, राज्य और देश का नाम रोशन करेंगे।
Lt Gen Gurmit Singh

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राज्यपाल लेफ्टिनेंट जनरल गुरमीत सिंह (से नि ) आज अपने पैतृक गांव जलाल उस्मान, अमृतसर (पंजाब) पहुंचे। इस अवसर पर उनका ग्रामवासियों द्वारा अत्यंत आत्मीय स्वागत किया गया। अपने गांव आकर राज्यपाल भावुक हो गए और उन्होंने कहा कि यह स्थान उनके जीवन की प्रेरणा का आधार है।
राज्यपाल ने गुरुद्वारा बाबा श्री चंद जी और गुरुद्वारा श्रीनानक साहिब में माथा टेककर अरदास की और देश-प्रदेश की खुशहाली की कामना की। उन्होंने कहा कि उनका इस गांव से गहरा जुड़ाव है, क्योंकि यहीं उनके परिवार और उनका जन्म हुआ। उन्होंने यह भी कहा कि आज जिस पद पर वह हैं, उसमें इस भूमि के आशीर्वाद का बड़ा योगदान है।
इस दौरान राज्यपाल ने ग्रामवासियों से आत्मीय संवाद किया और उनके सुझावों एवं अपेक्षाओं को ध्यानपूर्वक सुना। उन्होंने गांव की सरलता, आत्मीयता और संस्कारों को जीवन का वास्तविक आधार बताया।
राज्यपाल ने गवर्नमेंट सीनियर सेकेंडरी स्कूल, जलाल उस्मान का भी भ्रमण किया। उन्होंने बच्चों से बातचीत की और उन्हें बड़े सपने देखने और मेहनत करने के लिए प्रेरित किया। उन्होंने कहा कि आज के बच्चे देश का भविष्य हैं और उन्हें अच्छे विचार और मजबूत चरित्र के साथ आगे बढ़ना चाहिए। उन्होंने पंजाब की वीरता और देशभक्ति की परंपरा का उल्लेख करते हुए बच्चों को अपने संस्कारों से जुड़े रहने की सलाह दी। साथ ही गुरु नानक देव जी, गुरु तेग बहादुर जी और गुरु गोविंद सिंह जी के जीवन से प्रेरणा लेने का संदेश दिया।
विद्यालय की सुविधाओं को बेहतर बनाने के लिए राज्यपाल ने कंप्यूटर दिए और लाइब्रेरी के लिए 108 किताबें भेंट कीं। उन्होंने कहा कि पढ़ाई के साथ-साथ किताबों का अध्ययन बच्चों के विकास के लिए बहुत जरूरी है। राज्यपाल ने स्कूल के मेधावी बच्चों को प्रशस्ति पत्र देकर सम्मानित भी किया।
राज्यपाल ने कहा कि गांव और शिक्षा से उनका जुड़ाव केवल भावनात्मक नहीं, बल्कि उनकी जिम्मेदारी भी है। उन्होंने विश्वास जताया कि गांव के बच्चे आगे बढ़कर अपने परिवार, राज्य और देश का नाम रोशन करेंगे।
Lt Gen Gurmit Singh

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लोकसभा में "नारी शक्ति वंदन अधिनियम" के लिए आवश्यक संविधान संशोधन बिल को #कांग्रेस, #tmc, #dmk और #समाजवादी_पार्टी ने पारित नहीं होने दिया।
देश की आधी आबादी, लगभग 70 करोड़ महिलाओं को इन दलों द्वारा धोखा दिया गया है। महिलाओं को 33% आरक्षण देने के बिल को गिरा देना, यह अत्यन्त ही निंदनीय है।
विपक्ष को ‘महिलाओं का आक्रोश’ हर स्तर, हर चुनाव और हर स्थान पर झेलना पड़ेगा।
राष्ट्र की नारी शक्ति को सम्मान देने का हमारा अभियान जारी रहेगा और हम अधिकार देकर ही रहेंगे।
Narendra Modi

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वो लड़की…
जो कभी अपने मायके की रानी हुआ करती थी,
आज ससुराल में हर रोज़ अपने आँसू छुपाकर जी रही है…

उसकी खामोशी को लोग उसकी कमजोरी समझ बैठे,
और उसके सहने को उसकी आदत…

हर रात वो खुद से एक ही सवाल करती है—
“क्या मेरी गलती सिर्फ इतना है कि मैं लड़की हूँ…?”

जिस भाई ने बचपन में उसके लिए दुनिया से लड़ने की कसम खाई थी,
आज वही भाई… उसकी आँखों के आँसू देखकर भी चुप है…

क्योंकि समाज ने उसे सिखाया है—
“बहन का दर्द नहीं, इज़्ज़त बचानी है…”

और वो लोग…
जो खुद शराब पीकर अपनी ही पत्नी पर हाथ उठाते हैं,
वो ही अपनी बहन के लिए रिश्ता देखते वक्त पूछते हैं—
“लड़का नशा तो नहीं करता…?”

कितनी अजीब है ये दुनिया…
जहाँ दर्द देने वाला भी इज्ज़तदार कहलाता है,
और सहने वाली लड़की… बदनाम हो जाती है…

वो लड़की आज भी वहीं खड़ी है—
एक उम्मीद के साथ…
कि शायद एक दिन कोई तो होगा…
जो उसे समझेगा,
बिना जज किए…

पर सच तो ये है—
उसे अब किसी का सहारा नहीं,
बस खुद की ताकत बनना है… 💔



🔥 Hashtags

#सच #समाजकीसच्चाई #बहन #महिलाएं #इमोशनलस्टोरी #दर्द #रिश्ते #शायरी #हिंदी #लाइफ #रियलिटी #दिलकीबात #respectwomen #stopviolence #truth

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क्या आप कल्पना कर सकते हैं कि आज से 7 करोड़ साल पहले धरती के सबसे विशाल जीव अपनी 'नर्सरी' कहाँ बनाते थे? फ्रांस के 'मेज़' (Mèze) इलाके में हुई एक ताज़ा खोज ने वैज्ञानिकों को हिला कर रख दिया है—यहाँ डायनासोर के सैकड़ों अंडे बिल्कुल सही सलामत मिले हैं!

यह कोई मामूली खोज नहीं है। वैज्ञानिकों को यहाँ एक विशाल 'नेस्टिंग ग्राउंड' मिला है, जहाँ लंबी गर्दन वाले 'टाइटानोसॉर' (Titanosaurs) और कई अन्य प्रजातियाँ अपने अंडे देने आती थीं। सबसे हैरान करने वाली बात यह है कि 72 मिलियन साल बीत जाने, अनगिनत भूकंपों और मौसम के बदलावों के बावजूद, इन अंडों के छिलके (Shells) आज भी वैसे ही सुरक्षित हैं जैसे ये कल ही दिए गए हों।

बाढ़ की मिट्टी में तेज़ी से दब जाने के कारण ये अंडे समय के साथ पत्थर बन गए, जिससे हमें डायनासोर के परिवार और उनके पालन-पोषण के तरीके को समझने का एक 'गोल्डन चांस' मिला है। यह किसी 'टाइम कैप्सूल' से कम नहीं है जो हमें उस दौर में ले जाता है जब इंसानों का नामो-निशान भी नहीं था।

इस ऐतिहासिक पल को यादगार बनाने के लिए स्थानीय म्यूजियम ने इस सप्ताह के अंत में खास टूर भी आयोजित किए हैं, ताकि लोग लैब में ले जाने से पहले इन 'कुदरती अजूबों' को उनकी असली जगह पर देख सकें।

7 करोड़ साल पुराने इन 'डायनासोर अंडों' के बारे में आपकी क्या राय है? क्या आपको लगता है कि हमारी धरती के नीचे अभी ऐसे और भी कितने रहस्य दफन हैं? कमेंट्स में अपनी राय ज़रूर साझा करें।

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अपने बच्चों को बचा लो

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रात के अंधेरे में मासूम बच्चों के साथ दिल्ली पुलिस की हैवानियत,
सोशल मीडिया पर वायरल हो रही वीडियो में दिल्ली पुलिस का हैवानियत भरा रूप आया नज़र