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"उठो, जागो और तब तक मत रुको जब तक लक्ष्य प्राप्त न हो जाए।" स्वामी विवेकानंद जी के इस अमर उद्घोष को चरितार्थ करते हुए, पंजाब विश्वविद्यालय छात्र संघ चुनाव में अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (ABVP) के अध्यक्ष पद के विजयी प्रत्याशी श्री अंकित बिढान जी को इस ऐतिहासिक एवं शानदार विजय पर अनंत बधाई।
यह जीत केवल एक पद की प्राप्ति नहीं, बल्कि परिसर में गूंजते राष्ट्रवाद, छात्र कल्याण और सकारात्मक राजनीति के उस संकल्प की मुहर है, जिस पर आज का युवा अटूट विश्वास करता है। अंकित जी का यह नेतृत्व छात्रहित के नए आयाम गढ़ेगा, ऐसा पूर्ण विश्वास है।
आज कृष्णा हॉस्पिटल में उत्तराखंड मंडी परिषद के अध्यक्ष, आदरणीय श्री अनिल कपूर डब्बू जी की पूज्य माता जी से मिलकर उनका हालचाल जाना। उनका स्नेहिल और आत्मीय प्रेम मुझे सदा ही मिलता रहा है, उनके हाथों से प्रेमपूर्वक बनाई हुई रोटियाँ भी मैंने कई बार खाई हैं।
आज जब अस्पताल में उनसे बातचीत हुई, तो मन को बहुत तसल्ली मिली—आखिरकार मां तो मां ही होती है और मां तो सबकी साझी होती है, माता जी से बात करते हुए मुझे अपनी माँ के साथ बिताए वे पल गहराई से याद आ गए, जब मैं उनके पास बैठकर ऐसे ही बातें किया करता था।
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धीरेंद्र शास्त्री का आरक्षण पर बड़ा बयान, बोले—देश में सिर्फ दो जातियां होनी चाहिए, अमीर और गरीब।
उन्होंने कहा कि अमीरों का आरक्षण खत्म होना चाहिए और गरीबों को आरक्षण दिया जाना चाहिए, चाहे उनकी जाति कोई भी हो। उनके इस बयान के बाद आरक्षण की व्यवस्था और उसके आधार को लेकर एक बार फिर बहस तेज हो गई है।
क्या आरक्षण का आधार जाति होनी चाहिए या आर्थिक स्थिति? इस मुद्दे पर देश में अलग-अलग राय सामने आती रही हैं। धीरेंद्र शास्त्री के बयान ने इसी पुरानी बहस को एक बार फिर चर्चा के केंद्र में ला दिया है।
बस्ती में महिला सिपाही की मौ*त, छुट्टी न मिलने पर उठे गं*भी*र सवाल
उत्तर प्रदेश के बस्ती जिले में सड़क हा*द*से में घा*य*ल महिला सिपाही केसरी वर्मा (3 की हा*द*से के सात दिन बाद शनिवार को मौ*त हो गई। हा*द*से में उनके सिर पर चोट लगी थी और चार टांके भी लगाए गए थे। इलाज कराने के लिए केसरी ने एसपी कार्यालय में छुट्टी के लिए आवेदन दिया था। पति के मुताबिक, आवेदन के साथ सीटी स्कैन की कॉपी और सिर में टांके लगने की जानकारी भी दी गई थी।
केसरी के पति नागेंद्र वर्मा भी पुलिस में सिपाही हैं। उनका आ*रो*प है कि केसरी दो दिनों तक छुट्टी के लिए एसपी कार्यालय के चक्कर लगाती रहीं, लेकिन उन्हें छुट्टी नहीं मिली। नागेंद्र ने बताया कि कार्यालय में तैनात दो कर्मचारियों ने कथित तौर पर कहा कि न EL मिलेगी और न मेडिकल लीव।
पत्नी की मौ*त के बाद पो*स्ट*मॉर्टम हाउस के बाहर नागेंद्र फूट-फूटकर रो पड़े। उन्होंने कहा, “अगर समय पर छुट्टी मिल जाती और इलाज हो जाता तो आज केसरी जिंदा होती।”
इस घ*टना ने घायल पुलिसकर्मियों को समय पर छुट्टी और बेहतर इलाज उपलब्ध कराने की व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।