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२२ अप्रैल
#अमरप्रहरी
स्वर्णाक्षर में अंकित होता,
वीरों का बलिदान…
- बाबा बैद्यनाथ झा
अर्देशिर गोदरेज भारत के उन शुरुआती उद्यमियों में से थे जिन्होंने ‘मेड इन इंडिया’ को वैश्विक पहचान दिलाने की दिशा में काम किया। पहले वकील बनने की कोशिश असफल होने के बाद उन्होंने 1895 में सर्जिकल उपकरण और फिर ताले बनाने का व्यवसाय शुरू किया।
साबुन निर्माण में उनकी रुचि तब जागी जब उन्होंने देखा कि उस समय सभी साबुन पशु चर्बी से बनते थे, जिससे कई लोगों की धार्मिक भावनाएँ आहत होती थीं। इसी समस्या के समाधान के लिए उन्होंने 1919 में दुनिया का पहला शाकाहारी साबुन वनस्पति तेल से बनाया, जिसे ‘छवि’ नाम दिया गया। बाद में उन्होंने ‘गोदरेज No. 1’ ब्रांड लॉन्च किया, जो आज भी बेहद लोकप्रिय है और हर साल करोड़ों यूनिट्स बिकते हैं। महात्मा गांधी, रवींद्रनाथ टैगोर और अन्य नेताओं ने उनके स्वदेशी प्रयासों का समर्थन किया। अर्देशिर का मानना था कि भारतीय उत्पाद सिर्फ स्वदेशी ही नहीं, बल्कि गुणवत्ता में भी विश्वस्तरीय होने चाहिए।
Balen Shah के नाम से एक बयान सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है, जिसमें दावा किया जा रहा है कि उन्होंने India सरकार के साथ सहयोग के लिए “रामराज” लागू करने की शर्त रखी है। साथ ही यह भी कहा जा रहा है कि नेपाल जल्द ही “जिहादी मानसिकता” से पूरी तरह मुक्त होगा और हमेशा एक हिंदू राष्ट्र बना रहेगा।
हालांकि, इस बयान की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। न तो Nepal सरकार और न ही बालेन शाह की ओर से ऐसा कोई प्रमाणिक बयान सामने आया है। ऐसे में यह दावा भ्रामक या बढ़ा-चढ़ाकर पेश किया गया हो सकता है।
गौरतलब है कि नेपाल पहले एक हिंदू राष्ट्र था, लेकिन 2008 में इसे आधिकारिक रूप से धर्मनिरपेक्ष देश घोषित कर दिया गया था। इसके बाद से समय-समय पर नेपाल में हिंदू राष्ट्र की बहाली को लेकर राजनीतिक और सामाजिक बहस होती रही है।
फिलहाल, इस वायरल दावे को लेकर लोगों को सतर्क रहने और बिना पुष्टि के ऐसी खबरों पर विश्वास न करने की सलाह दी जा रही है।
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आज पूर्ण विधि-विधान एवं वैदिक मंत्रोच्चार के साथ भू-वैकुंठ श्री बदरीनाथ धाम के कपाट श्रद्धालुओं के लिए खोल दिए जाएंगे।
भगवान बदरी विशाल की कृपा से समस्त भक्तजनों के जीवन में सुख, शांति और समृद्धि का संचार हो। यह पावन अवसर सभी के लिए आध्यात्मिक ऊर्जा, आस्था और सकारात्मक शुरुआत का संदेश लेकर आए।
आप सभी का पवित्र चारधाम यात्रा - 2026 में हार्दिक स्वागत एवं अभिनंदन।
टॉयलेट सीट लेकर बेटी का नाम लिखाने स्कूल पहुंचा पिता? 67 सालों से यहां लड़कियों की है नो इंट्री I
बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ के दावों के बीच बस्ती का एक सरकारी इंटर कॉलेज 67 साल से बेटियों के लिए बंद है. शौचालय के बहाने दाखिला रोका जा रहा है, जबकि हकीकत में प्रबंधन पर निजी स्कूल को फायदा पहुंचाने का आरोप है I