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✨ परमार्थ निकेतन में विदेशी सैलानियों का आगमन
💫 आध्यात्मिक, सांस्कृतिक और वैश्विक संवाद का केन्द्र
ऋषिकेश, 8 जनवरी।
परमार्थ निकेतन Parmarth Niketan आज केवल भारत ही नहीं, बल्कि सम्पूर्ण विश्व का एक प्रमुख आध्यात्मिक केंद्र बन चुका है। गंगा तट पर स्थित यह दिव्य आश्रम प्रतिवर्ष हजारों विदेशी सैलानियों, साधकों, शोधार्थियों और योग प्रेमियों को आकर्षित करता है। यहां उनका आगमन केवल पर्यटन नहीं, बल्कि भारत की सनातन संस्कृति, आध्यात्मिक विरासत और मानवीय मूल्यों के वैश्विक प्रसार का सशक्त प्रतीक है।
विदेशी अतिथि यहां योग, ध्यान, प्राणायाम, वेदांत, आयुर्वेद और भारतीय जीवन-दर्शन को आत्मसात करने आते हैं। सत्संग, साधना, गंगा आरती और योग शिविरों के माध्यम से वे आत्मिक शांति, संतुलन और जीवन के वास्तविक अर्थ की खोज करते हैं। परमार्थ निकेतन उनके लिए केवल एक आश्रम नहीं, बल्कि आत्म-परिवर्तन की जीवंत प्रयोगशाला है।
इस आश्रम की सबसे बड़ी विशेषता इसकी समन्वयात्मक दृष्टि है — जहां पूर्व और पश्चिम, विज्ञान और अध्यात्म, परंपरा और आधुनिकता का सुंदर संगम दिखाई देता है। विदेशी सैलानी भारतीय संस्कृति को केवल पढ़ते नहीं, बल्कि उसे जीते हैं। वे सादगी, सेवा, करुणा और प्रकृति के प्रति सम्मान को अपने जीवन का हिस्सा बनाकर लौटते हैं।
विश्वप्रसिद्ध गंगा आरती विदेशी अतिथियों के लिए विशेष आकर्षण का केंद्र है। दीपों की ज्योति, वैदिक मंत्रों की ध्वनि और गंगा की पावन धारा के बीच वे एक ऐसी आध्यात्मिक अनुभूति का अनुभव करते हैं, जिसे शब्दों में बांधना कठिन होता है। अनेक विदेशी अतिथि इसे अपने जीवन का अविस्मरणीय क्षण बताते हैं।
योग और ध्यान के क्षेत्र में परमार्थ निकेतन की भूमिका वैश्विक स्तर पर अत्यंत महत्वपूर्ण है। अंतरराष्ट्रीय योग महोत्सव, रिट्रीट्स और प्रशिक्षण कार्यक्रमों के माध्यम से भारत की योग परंपरा को विश्व मंच पर गौरवपूर्ण पहचान मिलती है और “वसुधैव कुटुम्बकम्” की भावना साकार होती है।
परमार्थ निकेतन पर्यावरण संरक्षण, गंगा स्वच्छता, प्लास्टिक मुक्त अभियान और सेवा कार्यों में भी विदेशी सैलानियों की सक्रिय सहभागिता का प्रेरणास्रोत है। वे “सेवा ही साधना है” के संदेश को अपने देशों तक ले जाते हैं।
इस अंतरराष्ट्रीय सहभागिता से भारत की सॉफ्ट पावर और सांस्कृतिक प्रतिष्ठा और अधिक सुदृढ़ होती है। विदेशी सैलानी भारत को केवल पर्यटन स्थल नहीं, बल्कि आध्यात्मिक शक्ति, सांस्कृतिक मार्गदर्शक और मानवीय मूल्यों के केंद्र के रूप में विश्व के समक्ष प्रस्तुत करते हैं।

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सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे एक वीडियो ने लोगों की आंखें नम कर दी हैं। वीडियो में एक छोटा बच्चा अपने पिता के पैरों के पास जमीन पर सोता हुआ नजर आ रहा है, जबकि पिता पास ही खिलौने बेचकर रोज़ी-रोटी कमाने में जुटे हैं।
यह दृश्य गरीबी, संघर्ष और पिता के त्याग को बिना किसी शब्द के बयां कर देता है। जहां एक ओर पिता मेहनत कर अपने बच्चे के भविष्य के लिए संघर्ष कर रहा है, वहीं दूसरी ओर बच्चा उसी संघर्ष के बीच सुकून की नींद सोता दिखता है।
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आज भारत की दो महान आत्माओं की पुण्यतिथि व बलिदान दिवस है।
वीर शहीद राजा नाहर सिंह जी व दीनबन्धु सर छोटूराम जी
बल्लभगढ़ के राजा नाहर सिंह मात्र 32 साल की उम्र में ही अंग्रेजों के ख़िलाफ़ मैदान में आ गए थे और ब्रिटिश वर्चस्व को अस्वीकार करते हुए बग़ावत कर दी थी।उन्हें 9 जनवरी 1858 को चाँदनी चौक में फाँसी पर लटका दिया था।ऐसे महान स्वतंत्रता के नायक को कोटि कोटि नमन।।
ब्रिटिश शासन में किसानों के अधिकारों के लिए आवाज बुलंद करने वाले एवं किसानों के शोषण को रोकने के लिए कानून बनाने वाले किसान-कमेरे के मसीहा, प्रखर स्वतंत्रता सेनानी, रहबर-ए-आजम 'दीनबंधु' सर छोटूराम जी की पुण्पतिथि पर उन्हें कोटि-कोटि नमन!
#dujatunion

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