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मुंबई में फूड सेफ्टी को लेकर प्रशासन की सख्ती का असर अब रेस्टोरेंट की रसोई तक दिखाई देने लगा है।

चिकन लॉलीपॉप, मंचूरियन जैसी डिश में इस्तेमाल होने वाले चटख कृत्रिम रंगों को लेकर कई रेस्टोरेंट संचालक सावधानी बरत रहे हैं। बताया जा रहा है कि FDA की सख्ती और अधिकारी तुकाराम मुंढे की कार्रवाई के डर से कई जगह इन रंगों का इस्तेमाल बंद या कम किया गया है।

यह बदलाव भले ही छोटा दिखाई दे, लेकिन इसका सीधा संबंध लोगों की सेहत से है। खाने में अनावश्यक और नियमों के खिलाफ इस्तेमाल होने वाले रंगों पर रोक लगे तो इसका फायदा सीधे ग्राहकों को मिलता है।

सख्त प्रशासन का असर यही होना चाहिए कि नियम सिर्फ कागजों पर न रहें, बल्कि उनका असर लोगों की थाली में भी दिखाई दे।

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कांग्रेस सांसद शशि थरूर ने संसद में विपक्ष की ओर से लगातार किए जा रहे हंगामे और कार्यवाही बाधित करने पर सवाल खड़े किए हैं। उन्होंने कहा कि बार-बार सदन ठप करने से विपक्ष को ही नुकसान उठाना पड़ता है, क्योंकि इससे संसद का बहुमूल्य समय और संसाधन व्यर्थ चले जाते हैं।
थरूर का कहना है कि विपक्ष को हंगामे के बजाय संसद के मंच का इस्तेमाल सरकार से सवाल पूछने, जनता से जुड़े अहम मुद्दे उठाने और सत्ता पक्ष को जवाबदेह बनाने के लिए करना चाहिए। उन्होंने संसदीय लोकतंत्र में सार्थक चर्चा, सवाल-जवाब और प्रभावी जांच की जरूरत बताते हुए कहा कि संसद को बाधित करने के बजाय उसका बेहतर तरीके से इस्तेमाल किया जाना चाहिए।

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मुंबई के कई रेस्टोरेंट मालिकों ने चि"कन लॉ@लीपॉप और मंचूरियन जैसी डिश में न@कली और केमिकल वाले रंग मिलाना बंद कर दिया है। उन्हें डर है कि आईएएस अधिकारी तुकाराम मुंडे फूड-सेफ्टी नियमों को लेकर उनके खि"लाफ कोई सख्त का"रवाई कर सकते हैं। कचि"कन लालापाप आार मचूरियन परास रह हो
यह बदलाव भले ही छोटा लगे, लेकिन इसका असर बहुत बड़ा है। यह साफ तौर पर दिखाता है कि अगर प्रशासन खाने-पीने के नियमों को लेकर सख्ती दिखाए, तो हमारी थाली तक पहुंचने वाला खाना काफी सुरक्षितऔर सेहतमंद हो सकता है।

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छोटे से गांव में पले-बढ़े, कम उम्र में संभालना पड़ा परिवार; फिर इस जज्बे से बनाई 'सबसे बड़ी अगरबत्ती कंपनी'नई दिल्ली। भारत अगरबत्ती बनाने के मामले में दुनिया में काफी आगे है। भारत के मुख्य प्रोडक्शन हब कर्नाटक (बेंगलुरु और मैसूर), गुजरात और मध्य प्रदेश में हैं। बड़े पैमाने पर उत्पादन करने वाली कई प्रमुख कंपनियां भारत में मौजूद हैं। पर जिस कंपनी का नाम इस लिस्ट में टॉप पर आता है, वो साइकिल प्योर अगरबत्ती (Cycle Pure Agarbatti) I
साइकिल प्योर की गिनती भारत की सबसे पुरानी अगरबत्ती कंपनियों में भी होती है। पर क्या आप जानते हैं कि इस कंपनी की शुरुआत किसने की थी ? आइए जानते हैं।78 साल पहले हुई थी शुरुआत
1948 में मैसूर में एन. रंगा राव ने साइकिल प्योर अगरबत्ती की शुरुआत की थी। 1948 में राव ने एक छोटे से स्थानीय कारोबार से शुरुआत की थी, जो अब बढ़कर ₹1,700 करोड़ से अधिक के सालाना रेवेन्यू वाले ग्लोबल साम्राज्य में बदल गया है। जमीनी स्तर पर स्मार्ट मार्केटिंग, इन-हाउस खुशबू इनोवेशन और पर्यावरण के अनुकूल पैकेजिंग का इस्तेमाल करके, यह दुनिया के सबसे बड़े अगरबत्ती ब्रांड में से एक बन गया। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार इसकी मार्केट हिस्सेदारी 15 फीसदी से अधिक है।खुद का बिजनेस शुरू करना चाहते थे
राव मदुरै के पास वथिराईरुप्पु नाम के एक छोटे से गाँव में पले-बढ़े। कम उम्र से ही उन्हें अपने परिवा की जिम्मेदारी उठानी पड़ी। 1935 में शादी होने के बाद अरवनागाड की कॉर्डाइट फैक्टरी में उन्होंने बुककीपर के तौर पर काम शुरू किया। फिर आया 1947, जब भारत आजाद हुआ। भारत की आजादी से प्रेरित होकर, वे अपना खुद का कुछ शुरू करना चाहते थे।
उन्होंने 1947 में ही मैसूर प्रोडक्ट्स एंड जनरल ट्रेडिंग शुरू की और घर से काम शुरू किया, जो फैक्ट्री की भी भूमिका निभाता था।ऐसे हुआ 'ब्रांड साइकिल' का जन्म
असंगठित क्षेत्र में राव ने भविष्य को ध्यान में रखते हुए अपने बिजनेस को एक "ब्रांड" के तौर पर स्थापित करने का सोचा, जो अपने समय से काफी आगे की सोच थी। इस तरह 'ब्रांड साइकिल' का जन्म हुआ। फिर उन्होंने डिजाइन कॉपीराइट भी हासिल कर लिए। इसके बाद राव के बेटे आर गुरू अपने पिता का साथ देने के लिए बिजनेस में शामिल हुए, जिससे दूसरी पीढ़ी की एंट्री उनके कारोबार में हुई।1960-69 तक क्या-क्या किया ?
1960-69 के दौरान 'साइकिल रत्न' (Cycle Ratna) लॉन्च किया गया। फिर यह 'वैल्यू-फॉर-मनी' सेगमेंट में अपनी तरह का पहला प्रोडक्ट था। जब बाजार में एक पैक की कीमत 25 पैसे थी, तब 'साइकिल सुगंध मल्लिका' (Cycle Sugandha Mallika) को एक प्रीमियम पैक के तौर पर लॉन्च किया गया, जिसकी कीमत 10 स्टिक्स के लिए एकरुपया थी।
यह प्रोडक्ट सफल रहा, जिससे साबित हुआ कि दुनिया की पहली जीरो कार्बन | न्यूट्रल निर्माता कंपनी
इसके बाद कंपनी ने कई और ब्रांड पेश किए और पिछले दशक में ये दुनिया की पहली जीरो कार्बन /न्यूट्रल निर्माता कंपनी भी बनी। अपने-अपने अलग ब्रांड्स और सेवाओं के चलते आज ये NR GROUP बन गया है, जिसके प्रोडक्ट्स में ऑयल, फ्रेग्रेंस भी शामिल हैं।ग्राहक अच्छी क्वालिटी के लिए अधिक पैसे देने को तैयार हैं। दक्षिण भारत में बड़े पैमाने पर वैन ऑपरेशन शुरू किए। यह अगरबत्ती इंडस्ट्री में एक अहम पड़ाव और फाउंडर की मार्केटिंग सोच का सबूत था।

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पत्नी ने लगाया मेंटेनेंस केस, ल"कवा ग्र"स्त के बाद भी पति को कोर्ट में पेश होना पड़ा कानपुर से सामने आए एक मामले ने न्यायिक प्रक्रिया और पारिवारिक विवादों को लेकर चर्चा छेड़ दी है। गुजारा भ@त्ता (मेंटेनेंस) से जुड़े एक मामले में एक लक@वाग्रस्त युवक को स्ट्रेचर पर अदालत में पेश किया गया। पत्नी ने अदालत मेंदावा किया था कि पति बीमारी का बहाना बनाकर अस्पताल में रह रहा है और गुजारा भत्ता देने से बचना चाहता है। इसके बाद अदालत में उसकी शारीरिक स्थिति प्रस्तुत की गई परिजनों का कहना है कि युवक को ब्रेन हेमरेज के बाद ल@कवा हो गया था और बीते पांच वर्षों से उसका इलाज चल रहा है। उनका यह भी दावा है कि शादी के कुछ समय बाद ही पत्नी अलग हो गई थी और इलाज में कभी सहयोग नहीं किया। परिवार ने अदालत में मेडिकल दस्तावेज भी पेश किए हैं। मामले में दोनों पक्षों के अपने-अपने दावे हैं और अंतिम निर्णय
अदालत द्वारा साक्ष्यों के आधार पर किया जाएगा।

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हवा में अचानक 300 फीट नीचे गिरा Air India का विमान ! ऑटोपायलट हुआ डिस्कनेक्ट, एक साथ 3 हाइड्रोलिक फेलियर से मचा हड़कंपइस घटना में 17 यात्री और क्रू सदस्य घायल हुए। विमान को बाद में सुरक्षित तरीके से दिल्ली में उतार लिया गया।
अब इस मामले की जांच में विमान से जुड़ी कई तकनीकी गड़बड़ियों की जानकारी सामने आई है। रिपोर्ट के मुताबिक, घटना के दौरान ऑटोपायलट डिस्कनेक्ट हो गया था, जिसके बाद को-पायलट ने विमान को मैनुअली संभाला। इसके तुरंत बाद फ्लाइट-कंट्रोल से जुड़ा स्टॉल मैसेज भी सामने आया। विमान में कई इंडिकेटर स्विच भी कुछ समय के लिए बंद हुए और इसी दौरान तकनीकी समस्याओं के साथ तेज हवा/टर्बुलेंस का सामना हुआ।
सबसे चौंकाने वाली जानकारी विमान के हाइड्रोलिक सिस्टम को लेकर सामने आई है। रिपोर्ट के अनुसार विमान में तीन हाइड्रोलिक सिस्टम से जुड़ी गड़बड़ियां हुईं। ये सिस्टम विमान के कई महत्वपूर्ण फंक्शंस, जिसमें फ्लाइट कंट्रोल भी शामिल हैं, के लिए बेहद अहम होते हैं। अब जांचकर्ता यह पता लगाने में जुटे हैं कि इन तकनीकी गड़बड़ियों और अचानक 300 फीट नीचे जाने के बीच क्या संबंध था।
फ्लाइट में उस समय 137 यात्री और 8 क्रू सदस्य सवार थे। अचानक विमान के नीचे की तरफ जाने से केबिन में अफरा-तफरी मच गई और कुछ यात्री अपनी सीटों सेउछलकर ऊपर या गलियारे की तरफ जा गिरे। कुल 17 लोगों को चोट लगने की जानकारी सामने आई है, जिनमें चार क्रू सदस्य भी शामिल हैं। कुछ लोगों को गर्दन और रीढ़ से जुड़ी चोटों के कारण अस्पताल में इलाज की जरूरत पड़ी।
मामले को गंभीरता से लेते हुए DGCA ने इसे 'सीरियस इंसिडेंट' के तौर पर वर्गीकृत किया है और Aircraft Accident Investigation Bureau यानी AAIB इसकी जांच कर रहा है। जांच में विमान के फ्लाइट डेटा, कॉकपिट रिकॉर्डिंग और तकनीकी सिस्टम की जानकारी को देखा जाएगा। Airbus के विशेषज्ञ और फ्रांस की विमान दुर्घटना जांच एजेंसी BEA भी भारतीय जांच टीम की मदद करेंगे।
इस घटना के बाद पायलटों की अनिवार्य जांच भी चर्चा में आई है। DGCA के अनुसार पायलट-इन-कमांड के शुरुआती स्क्रीनिंग टेस्ट का परिणाम ऐसा आया जिसे आगे जांच की जरूरत थी। उसका सैंपल कन्फर्मेटरी टेस्ट के लिए भेजा गया है और अंतिम रिपोर्ट का इंतजार है। शुरुआती स्क्रीनिंग अपने आप में किसी नशीले पदार्थ के सेवन की पुष्टि नहीं करती। फिलहाल दोनों पायलटों को उड़ान ड्यूटी से हटा दिया गया है। अब जांच में सबसे बड़ा सवाल यही है कि 300 फीट की अचानक गिरावट

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रूस की कैंसर वैक्सीन EnteroMix से जगी नई उम्मीद, लेकिन अभी बाकी है बड़ा इम्तिहान

रूस में कैंसर के इलाज को लेकर विकसित की जा रही प्रायोगिक वैक्सीन EnteroMix चर्चा में है। रूस के नेशनल मेडिकल रिसर्च रेडियोलॉजी सेंटर के अनुसार, इस वैक्सीन पर प्रीक्लिनिकल रिसर्च पूरी हो चुकी है और शुरुआती नतीजों में ट्यूमर की बढ़त को रोकने और उसे कम करने के संकेत मिले हैं।

EnteroMix को लेकर यह भी बताया गया है कि यह एक ऑन्कोलिटिक वैक्सीन है, जिसमें चार वायरस के संयोजन का इस्तेमाल किया गया है। इसका उद्देश्य कैंसर कोशिकाओं को निशाना बनाने के साथ शरीर की प्रतिरक्षा प्रणाली को भी सक्रिय करना है।

हालांकि, यहां सबसे जरूरी बात यह है कि EnteroMix अभी प्रयोगात्मक चरण में है। 2026 में इसके Phase-I मानव क्लिनिकल ट्रायल की जानकारी दर्ज है, जिसमें मुख्य रूप से इसकी सुरक्षा, सहनशीलता और शरीर पर प्रभाव का अध्ययन किया जा रहा है।

इसलिए इसे फिलहाल कैंसर का इलाज या पक्की वैक्सीन कहना जल्दबाजी होगी। बड़े और लंबे क्लिनिकल ट्रायल के बाद ही इसकी असली प्रभावशीलता और सुरक्षा सामने आएगी।

अगर आगे के परीक्षण सफल रहे, तो EnteroMix भविष्य में कैंसर के इलाज की दिशा में एक अहम विकल्प बन सकती है। फिलहाल वैज्ञानिक जगत इसे उम्मीद की एक नई किरण के तौर पर देख रहा है।

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भंवरी देवी हत्याकांड में पुलिस को बड़ी सफलता मिली है। जानकारी के अनुसार, पुलिस ने इस मामले में अज्जू प्रजापत को गुजरात से गिरफ्तार किया है।
पुलिस का दावा है कि जांच में इस आरोपी की भूमिका सामने आने के बाद यह कार्रवाई की गई है। अब उससे पूछताछ जारी है और जांच एजेंसियां मामले से जुड़े अन्य पहलुओं की भी पड़ताल कर रही हैं।
पुलिस का कहना है कि पूछताछ के दौरान इस मामले से जुड़े कई और महत्वपूर्ण खुलासे हो सकते हैं। फिलहाल पूरे घटनाक्रम की जांच जारी है और अधिकारी लगातार साक्ष्य जुटाने में लगे हुए हैं।
जैसे-जैसे पुलिस की ओर से आधिकारिक जानकारी सामने आएगी, आपको सबसे पहले अपडेट दी जाएगी।
🚨 भंवरी देवी हत्याकांड में बड़ा अपडेट!
गुजरात से अज्जू प्रजापत गिरफ्तार। पुलिस की पूछताछ जारी, कई अहम खुलासों की उम्मीद। आधिकारिक अपडेट के लिए जुड़े रहें।

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