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पीएम नरेंद्र मोदी ने अपने आवास पर बछड़ों को खिलाया
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यौन अपराधों पर इटली का सख्त रुख: केमिकल कास्ट्रेशन पर कानून की तैयारी
इटली में यौन अपराधों को लेकर सरकार ने एक बेहद कड़ा और विवादास्पद कदम उठाया है। संसद ने एक समिति बनाने की अनुमति दे दी है, जो ऐसे अपराधियों के लिए हार्मोन-ब्लॉकिंग इलाज को कानूनी रूप देने पर विचार करेगी। इसका उद्देश्य दोबारा अपराध की संभावना को कम करना बताया जा रहा है।
यह पहल प्रधानमंत्री जॉर्जिया मेलोनी की सरकार के उस एजेंडे का हिस्सा है, जिसमें उन्होंने सत्ता में आते ही सुरक्षा को सबसे ऊपर रखा। सरकार का मानना है कि कठोर कानून और कड़ी सज़ाएं समाज को सुरक्षित बनाने का सबसे तेज़ तरीका हैं।
हरियाणा में चली भारत की पहली हाइड्रोजन ट्रेन: ग्रीन ट्रांसपोर्ट की ओर ऐतिहासिक कदम
भारत ने सतत और पर्यावरण–अनुकूल परिवहन की दिशा में एक बड़ा और ऐतिहासिक कदम उठा लिया है। हरियाणा के जींद–सोनीपत रूट पर देश की पहली हाइड्रोजन से चलने वाली ट्रेन का सफल ट्रायल रन किया गया है। इस पायलट प्रोजेक्ट का नेतृत्व नॉर्दर्न रेलवे ने किया, जो भारत को हरित रेल परिवहन के नए युग में ले जाने वाला साबित हो रहा है।
‘हिंदी थोपी तो लात मारूंगा’: राज ठाकरे के बयान ने महाराष्ट्र की राजनीति में फिर लगाई आग
महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (मनसे) के प्रमुख राज ठाकरे ने मुंबई में चुनावी रैली के दौरान एक बार फिर विवादित बयान देकर सियासी माहौल गर्मा दिया है। बृहन्मुंबई महानगरपालिका (BMC) चुनावों से पहले दादर स्थित शिवतीर्थ मैदान में भाषण के दौरान ठाकरे ने कहा कि उत्तर प्रदेश और बिहार से आए लोगों को महाराष्ट्र में हिंदी थोपने की कोशिश नहीं करनी चाहिए, अन्यथा “मैं आपको लात मारूंगा।”
ठाकरे ने स्पष्ट किया कि उन्हें किसी भाषा से “नफरत” नहीं है, लेकिन महाराष्ट्र की मराठी पहचान पर, उसके भाषा और संस्कृति पर किसी भी तरह के दबाव को वह बर्दाश्त नहीं करेंगे। उन्होंने इस मुद्दे को मराठी लोगों की सम्मान और पहचान का मामला बताया और कहा कि यह चुनाव मराठी अस्मिता के लिए निर्णायक है।
राज ठाकरे ने इस दौरान केंद्र सरकार पर भी निशाना साधा और कहा कि कुछ ताकतें अभी भी मुंबई के गुजरात को न मिलने से नाराज़ हैं और अलग-अलग तरीके से महाराष्ट्र की स्थितियों को बदलने की कोशिश कर रही हैं।
उनके इसी बयान पर राजनीतिक हलकों में तीखी प्रतिक्रियाएं आ रही हैं। कई लोगों ने इसे क्षेत्रवाद और असामान्य राजनीति बताया है, जबकि समर्थक इसे मराठी हितों की रक्षा का साहसिक बयान करार दे रहे हैं। कुछ आलोचकों ने इसे सामाजिक सौहार्द और व्यापक राष्ट्रीय एकता के लिए चिंता का विषय बताया है।
राज ठाकरे का यह बयान एक बार फिर यह दिखाता है कि भाषा, पहचान और क्षेत्रीय राजनीति किस तरह से चुनावों के समय तेज़ी से सामने आने वाले मुद्दों में बदल जाते हैं। आगामी चुनावों में इन टिप्पणियों का क्या प्रभाव पड़ेगा, यह समय ही बताएगा।
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