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मध्य प्रदेश के सागर में रविवार को रेलवे ट्रैक पर एक बड़ा हादसा होते-होते टल गया। मकरोनिया-गुड़ा रेलवे फाटक के पास माल से लदा एक ट्रक अचानक रेलवे ट्रैक पर बंद हो गया। इसी दौरान मालगाड़ी के आने की सूचना से स्थिति बेहद गंभीर हो गई।
मामले की जानकारी मिलते ही 10वीं वाहिनी विशेष सशस्त्र बल, सागर की QRF कंपनी के जवान तत्काल मौके पर पहुंचे। जवानों ने बिना समय गंवाए स्थिति का आकलन किया और तेजी से कार्रवाई शुरू कर दी। उनकी सूझबूझ और त्वरित प्रतिक्रिया के चलते ट्रक को रेलवे ट्रैक से सुरक्षित दूरी पर हटा दिया गया।
घटना में सबसे महत्वपूर्ण बात यह रही कि जवानों ने कुछ ही समय में उस भारी वाहन को पटरी से हटाकर संभावित रेल हादसे का खतरा टाल दिया। इस पूरी कार्रवाई ने एक बार फिर दिखाया कि आपात स्थिति में कुछ सेकंड की त्वरित प्रतिक्रिया कितनी महत्वपूर्ण हो सकती है।
कभी-कभी जिंदगी के सबसे भावुक पल किसी बड़े समारोह में नहीं, बल्कि बेहद साधारण जगहों पर देखने को मिलते हैं।
Navy में Graduation से पहले एक युवा अधिकारी अपने पिता के पास पहुंचा। पिता स्ट्रीट वेंडर के तौर पर काम करते हैं और वर्षों से मेहनत करके उन्होंने अपने बेटे की पढ़ाई और उसके सपनों को पूरा करने में अपना योगदान दिया।
Navy Officer बनने की दहलीज पर खड़े बेटे के लिए यह सिर्फ वर्दी पहनने की तैयारी नहीं थी। वह अपने उस पिता के पास वापस आया, जिसने उसके सपनों को पूरा करने के लिए दिन-रात मेहनत की थी।
पिता ने बेटे की Navy Uniform को आखिरी बार ठीक किया। वर्दी की छोटी-सी फिटिंग उस पल में एक बड़े भाव में बदल गई—एक पिता के वर्षों के त्याग और एक बेटे की कृतज्ञता का भाव।
बिहार के नवादा जिले के छोटे से गांव गोरिहारी से निकले आलोक राज नारायण की कहानी उन युवाओं के लिए मिसाल है, जो लगातार असफलताओं के बावजूद अपने लक्ष्य को नहीं छोड़ते।
आलोक ने 2015 से UPSC की तैयारी शुरू की। शुरुआती छह प्रयासों में उन्हें सफलता नहीं मिली। दो बार वे इंटरव्यू तक पहुंचे, जबकि अन्य प्रयासों में मुख्य परीक्षा के बाद आगे नहीं बढ़ सके। लेकिन उन्होंने हार मानने के बजाय सातवीं कोशिश तक अपनी तैयारी जारी रखी। आखिरकार Civil Services Examination 2021 के परिणाम में उन्होंने ऑल इंडिया रैंक 346 हासिल की और भारतीय पुलिस सेवा में चयनित हुए।
उनकी इस सफलता के पीछे परिवार का बड़ा त्याग भी था। उनके पिता नरेश प्रसाद यादव, जो सेवानिवृत्त शिक्षक हैं, ने बेटे की पढ़ाई और UPSC की तैयारी के लिए नवादा शहर और गांव की जमीन तक बेच दी, ताकि आर्थिक परेशानी उसके सपने के रास्ते में न आए।
आलोक ने सफलता मिलने तक गांव वापस नहीं लौटने का संकल्प लिया था। इस वजह से करीब 15 साल तक वे अपने गांव से दूर रहे। सरकारी स्कूल से पढ़ाई शुरू करने वाले आलोक ने आगे BTech किया और UPSC की तैयारी के दौरान राजनीति विज्ञान में MA भी किया।
IPS बनने के बाद उन्होंने उत्तर प्रदेश कैडर चुना और पुलिस सेवा में अपनी अलग पहचान बनाई। उनकी कहानी बताती है कि सफलता कई बार पहली कोशिश में नहीं, बल्कि हार न मानने वाली आखिरी कोशिश में मिलती है।
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