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हरिद्वार तक रफ्तार का नया रास्ता! 146 किमी लंबे एक्सप्रेस-वे की तैयारी तेज, अमरोहा के 62 गांवों से होकर गुजरेगा मार्ग 🛣️

उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड की कनेक्टिविटी को मजबूत करने की दिशा में बड़ा कदम उठाया जा रहा है। लगभग 146 किलोमीटर लंबे प्रस्तावित हरिद्वार (गंगा) एक्सप्रेस-वे विस्तार पर तैयारियां तेज हो गई हैं। इस परियोजना के तहत अमरोहा जिले के 62 गांवों से होकर नया मार्ग विकसित किया जाएगा। प्रशासन ने गांवों के राजस्व नक्शों के डिजिटलीकरण और सर्वे की प्रक्रिया भी तेज कर दी है।

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अंतरराष्ट्रीय मंच पर गूंजेगा उत्तराखंड का गौरव, लंदन इंडियन फिल्म फेस्टिवल में चुनी गई चिपको आंदोलन पर आधारित डॉक्यूमेंट्री 🇮🇳🌳

उत्तराखंड के लिए गर्व की बात है कि राज्य की चर्चित डॉक्यूमेंट्री ‘दिस ट्री वोंट फॉल’ (This Tree Won’t Fall) का चयन प्रतिष्ठित लंदन इंडियन फिल्म फेस्टिवल के लिए हुआ है। यह डॉक्यूमेंट्री उत्तराखंड के ऐतिहासिक चिपको आंदोलन और पर्यावरण संरक्षण में महिलाओं की अहम भूमिका को अंतरराष्ट्रीय मंच पर प्रस्तुत करेगी।

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आज फीफा विश्व कप के सेमीफाइनल में इंग्लैंड और अर्जेंटीना आमने-सामने होंगे। यह मुकाबला पुराने फुटबॉल प्रेमियों के लिए कई यादें ताज़ा कर देगा।
1986 मेक्सिको विश्व कप के क्वार्टरफाइनल में भी इन दोनों टीमों की ऐतिहासिक भिड़ंत हुई थी, जिसमें महान डिएगो माराडोना ने ऐसा जादुई खेल दिखाया कि वह मैच फुटबॉल इतिहास का अमर अध्याय बन गया। "हैंड ऑफ गॉड" और "गोल ऑफ द सेंचुरी" आज भी फुटबॉल प्रेमियों की स्मृतियों में जीवंत हैं। आज एक बार फिर दुनिया की नज़र इस ऐतिहासिक प्रतिद्वंद्विता पर टिकी है।
अब सबकी निगाहें लियोनेल मैसी पर होंगी। क्या वह आज माराडोना जैसी यादगार और निर्णायक पारी खेलकर एक बार फिर अर्जेंटीना को फाइनल का टिकट दिला पाएंगे? इसका जवाब मैदान पर ही मिलेगा।

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महान समाज सुधारक, शिक्षाविद और प्रखर विचारक गोपाल गणेश आगरकर की जयंती पर शत-शत नमन! 🙏
14 जुलाई का दिन भारत के, विशेषकर महाराष्ट्र के सामाजिक पुनर्जागरण के इतिहास में एक स्वर्णिम दिन है। आज के ही दिन (14 जुलाई 1856) को सतारा के तेंभु गाँव में एक ऐसी महान आत्मा का जन्म हुआ, जिसने समाज में फैली कुरीतियों और अंधविश्वास पर प्रहार करने के लिए अपना पूरा जीवन समर्पित कर दिया। वैचारिक क्रांति के अग्रदूतगोपाल गणेश आगरकर केवल एक स्वतंत्रता सेनानी नहीं थे, बल्कि वे एक दूरदर्शी समाज सुधारक थे। उनका स्पष्ट मानना था कि "राजनैतिक स्वतंत्रता से पहले सामाजिक स्वतंत्रता और समाज सुधार अधिक महत्वपूर्ण हैं।" यदि हमारा समाज अंदर से रूढ़ियों और भेदभाव में जकड़ा रहेगा, तो राजनैतिक आजादी का कोई मूल्य नहीं रह जाएगा। 'केसरी' से 'सुधारक' तक का सफरवे लोकमान्य बाल गंगाधर तिलक द्वारा शुरू किए गए प्रसिद्ध समाचार पत्र 'केसरी' के पहले संपादक बने।जब समाज सुधार की प्राथमिकताओं को लेकर तिलक जी से वैचारिक मतभेद हुए, तो उन्होंने अपनी राह अलग की और 'सुधारक' नामक साप्ताहिक पत्र की शुरुआत की।'

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3 days to go for 'dastar'

DASTAAR Coming to cinemas on 17th July 2026

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ਰਵਨੀਤ ਬਿੱਟੂ ਦੀ ਜਥੇਦਾਰ ਕੁਲਦੀਪ ਸਿੰਘ ਗੜਗੱਜ ਨੂੰ ਅਪੀਲ
#ravneetsinghbittu

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