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पदकों की भूख, खेलों की बदहाली, कैसे बजे खेल मंचों पर ताली
खिलाड़ियों को बुनियादी सुविधाएं और सुरक्षित भविष्य मिले
सचिन शुक्ला
रायबरेली। जब भारतीय खिलाड़ी अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में पदक जीतते हैं, तो पूरा देश गर्व से भर उठता है। बधाइयों का दौर शुरू होता है, सम्मान समारोह आयोजित होते हैं और पुरस्कारों की घोषणाएं होने लगती हैं। सरकारें, खेल संगठन और अनेक संस्थाएं भी इन उपलब्धियों का श्रेय लेने में पीछे नहीं रहतीं। लेकिन जब यही खिलाड़ी अपेक्षित सफलता हासिल नहीं कर पाते, तो सवालों के घेरे में सबसे पहले खिलाड़ी ही खड़े दिखाई देते हैं। ऐसे में एक बुनियादी सवाल उठना स्वाभाविक है- क्या देश को केवल पदक चाहिए, या ऐसी खेल व्यवस्था भी चाहिए जो खिलाड़ियों को पदक जीतने योग्य बनाए?
पदकों की भूख, खेलों की बदहाली, कैसे बजे खेल मंचों पर ताली
खिलाड़ियों को बुनियादी सुविधाएं और सुरक्षित भविष्य मिले
सचिन शुक्ला
रायबरेली। जब भारतीय खिलाड़ी अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में पदक जीतते हैं, तो पूरा देश गर्व से भर उठता है। बधाइयों का दौर शुरू होता है, सम्मान समारोह आयोजित होते हैं और पुरस्कारों की घोषणाएं होने लगती हैं। सरकारें, खेल संगठन और अनेक संस्थाएं भी इन उपलब्धियों का श्रेय लेने में पीछे नहीं रहतीं। लेकिन जब यही खिलाड़ी अपेक्षित सफलता हासिल नहीं कर पाते, तो सवालों के घेरे में सबसे पहले खिलाड़ी ही खड़े दिखाई देते हैं। ऐसे में एक बुनियादी सवाल उठना स्वाभाविक है- क्या देश को केवल पदक चाहिए, या ऐसी खेल व्यवस्था भी चाहिए जो खिलाड़ियों को पदक जीतने योग्य बनाए?
पदकों की भूख, खेलों की बदहाली, कैसे बजे खेल मंचों पर ताली
खिलाड़ियों को बुनियादी सुविधाएं और सुरक्षित भविष्य मिले
सचिन शुक्ला
रायबरेली। जब भारतीय खिलाड़ी अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में पदक जीतते हैं, तो पूरा देश गर्व से भर उठता है। बधाइयों का दौर शुरू होता है, सम्मान समारोह आयोजित होते हैं और पुरस्कारों की घोषणाएं होने लगती हैं। सरकारें, खेल संगठन और अनेक संस्थाएं भी इन उपलब्धियों का श्रेय लेने में पीछे नहीं रहतीं। लेकिन जब यही खिलाड़ी अपेक्षित सफलता हासिल नहीं कर पाते, तो सवालों के घेरे में सबसे पहले खिलाड़ी ही खड़े दिखाई देते हैं। ऐसे में एक बुनियादी सवाल उठना स्वाभाविक है- क्या देश को केवल पदक चाहिए, या ऐसी खेल व्यवस्था भी चाहिए जो खिलाड़ियों को पदक जीतने योग्य बनाए?

जगत जननी माता दुर्गा के पंचम स्वरूप माँ स्कंदमाता के चरणों में कोटि-कोटि वंदन।
नवरात्रि के पाँचवे दिन माँ स्कंदमाता की आराधना से भक्तों को यश, धन, ऐश्वर्य और मोक्ष की प्राप्ति होती है।
माँ स्कंदमाता, भगवान कार्तिकेय की जननी, प्रेम, करुणा और मातृत्व की प्रतीक हैं।
उनकी कृपा से मन, वाणी और कर्म की शुद्धि होती है।
प्रभु से प्रार्थना है कि माँ स्कंदमाता सभी भक्तों पर अपनी कृपा दृष्टि बनाए रखें और हर घर में सुख, शांति और समृद्धि का वास हो।
महान वैज्ञानिक, मिसाइल मैन और भारत के पूर्व राष्ट्रपति 'भारत रत्न' डॉ. ए.पी.जे. अब्दुल कलाम जी की जयंती पर कोटि-कोटि नमन।
राष्ट्र उत्थान, विज्ञान और शिक्षा के क्षेत्र में उनका अमूल्य योगदान सदैव प्रेरणा देता रहेगा। उनका जीवन परिश्रम, समर्पण और देशभक्ति की अद्भुत मिसाल है, जो हर भारतीय को “महान बनने का साहस” सिखाता है।
डॉ. कलाम जी के विचार — “सपना वो नहीं जो आप नींद में देखते हैं, सपना वो है जो आपको सोने नहीं देता” — आज भी हर युवा को एक सशक्त, शिक्षित और गौरवशाली भारत के निर्माण की प्रेरणा देता है।
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