सशस्त्र बलों में नारी शक्ति का कीर्तिमान
भारतीय वायुसेना (IAF) में नारी शक्ति ने एक नया और स्वर्णिम इतिहास रच दिया है। वरिष्ठ अधिकारी शक्ति शर्मा को एयर वाइस मार्शल (AVM) के टू-स्टार पद पर पदोन्नत किया गया है। इसके साथ ही उन्होंने वायुसेना मुख्यालय में सहायक वायुसेना प्रमुख (शिक्षा) के रूप में पदभार संभाला है।
इस प्रतिष्ठित और उच्च सैन्य पद तक पहुंचने वाली वह एजुकेशन ब्रांच की पहली महिला अधिकारी बन गई हैं। अपने शानदार करियर के दौरान शक्ति शर्मा ने वायुसेना की शैक्षणिक नीति, ट्रेनिंग और प्रशासनिक व्यवस्था को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। टू-स्टार रैंक हासिल करने की उनकी यह ऐतिहासिक उपलब्धि न सिर्फ भारतीय सशस्त्र बलों के लिए गर्व का क्षण है, बल्कि देश की लाखों बेटियों के लिए रक्षा क्षेत्र में ऊंचे मुकाम हासिल करने का नया हौसला भी है।
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पत्नी के अफेयर को रिकॉर्ड करना जब सही है, तो प्राइवेसी (निजता) का उल्लंघन करना कैसे गलत हो सकता है? ताइवान से सामने आई वायरल खबर को लेकर इंटरनेट ने यही बहस छेड़ दी है। जिसे लेकर अब जनता भी जमकर रिएक्शन दे रही है। आइए जानते हैं पूरा मामला क्या है?

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सरकारी बैठकों में बदलेगा नाश्ते का मेन्यू!

महाराष्ट्र के सरकारी और अर्ध-सरकारी संस्थानों की बैठकों, ट्रेनिंग, कॉन्फ्रेंस, सरकारी कार्यक्रमों और कैंटीन में अब समोसा-पकौड़े जैसे ऑयली स्नैक्स की जगह हेल्दी और पौष्टिक भोजन को बढ़ावा दिया जाएगा।

मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट बैठक में इस पहल पर जोर दिया गया। नए हेल्दी मेन्यू में मौसमी फल, केला, सेब, अमरूद, पपीता, उबले अंडे, उबली दालें, पोहा और इडली-सांभर जैसे विकल्प शामिल किए जाएंगे।

इस फैसले को आईएएस तुकाराम मुंढे की फूड सेफ्टी ड्राइव से भी जोड़कर देखा जा रहा है।

अब सरकारी बैठकों में स्वाद के साथ सेहत पर भी जोर रहेगा।

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स्वरा भास्कर ने दीपिका पादुकोण की फिल्म ‘पद्मावत’ में दिखाए गए जौहर के दृश्य पर सवाल उठाते हुए इसकी प्रस्तुति की आलोचना की थी। उनका कहना था कि ब@ला@त्का@र जैसी हिं@सा को महिला के जीवन और सम्मान का अंत मानने वाली सोच पर सवाल उठना चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि अगर कोई ब@ला@त्का@र पी@ड़िता या सर्वाइवर यह फिल्म देखे, तो उसे ऐसा महसूस नहीं होना चाहिए कि उसने अपनी ‘इज्जत’ बचाने के लिए आ@त्म@ह@त्या नहीं की, इसलिए वह कायर है।

स्वरा की आ@पत्ति मूल रूप से उस संदेश को लेकर थी, जो जौहर के दृश्य से दर्शकों तक पहुंच सकता है। इस मुद्दे ने फिल्म की कहानी, ऐतिहासिक जौहर की परंपरा और महिलाओं की गरिमा को लेकर काफी ब@ह@स छेड़ी। ‘पद्मावत’ में जौहर को जिस तरह सिनेमाई रूप दिया गया, उसे लेकर उस समय समर्थन और विरोध—दोनों तरह की प्रतिक्रियाएं सामने आई थीं।

इस ब@ह@स का सबसे महत्वपूर्ण पहलू यही है कि किसी भी यौन हिंसा के लिए पीड़िता जिम्मेदार नहीं होती और ऐसी घट@ना उसके जीवन, सम्मान या भविष्य का अंत नहीं है। किसी सर्वाइवर की हिम्मत इस बात से तय नहीं होती कि उसने कैसी प्रतिक्रिया दी, बल्कि यह समझना जरूरी है कि उसके साथ हुई हिंसा उसकी गलती नहीं थी।

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