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मुरैना बीहड़ के चर्चित बागी पान सिंह तोमर के पोते देव प्रभाकर सिंह तोमर ने UPSC सिविल सेवा परीक्षा 2025 में ऑल इंडिया 629वीं रैंक हासिल कर अपने परिवार और क्षेत्र का नाम रोशन किया है।
देव प्रभाकर की सफलता उन लाखों युवाओं के लिए प्रेरणा है, जो विपरीत पारिवारिक और सामाजिक परिस्थितियों के बीच अपने सपनों को पूरा करने के लिए निरंतर संघर्ष कर रहे हैं।
मुश्किलें कितनी भी बड़ी हों, यदि लक्ष्य स्पष्ट हो और मेहनत में निरंतरता हो तो सफलता का रास्ता जरूर निकलता है।
संघर्ष को अपनी ताकत बनाकर सफलता की नई इबारत लिखना ही असली जज़्बा है।
देव प्रभाकर सिंह तोमर को इस शानदार उपलब्धि के लिए हार्दिक बधाई एवं उज्ज्वल भविष्य की शुभकामनाएँ।
यही है संघर्ष, साहस और संकल्प की पहचान।
यही है क्षत्रिय जज़्बा।
भरतपुर में #अंग्रेजों के खून से लाल कर दी थी ब्रज की धरा....
13 बार अंग्रेजी शासन की पगड़ी को पैरों के नीचे कुचला
-------जब जाटों ने किया अंग्रेजों का सूर्यास्त------
भरतपुर का युद्ध(1805) जाट vs अंग्रेज
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कलकत्ता से इंग्लैंड तक टपके अंग्रेजों के आंसू
बात 1805 की है जब भरतपुर के महाराजा रणजीत सिंह जी को यह ज्ञात हुआ कि अंग्रेज भारत में गौ मांस खाते हैं तो उन्होंने तुरंत अंग्रेजों से संधि तोड़ दी और उन्होंने अंग्रेजों से सारे सम्बन्ध तोड़ने के साथ अपने राज्य में बिना आज्ञा घुसने पर प्रतिबंध लगा दिया।
1857 की क्रांति में बलिदान देने वाले जाट राजा....
राजा नाहर सिंह- राजा नाहर सिंह तेवतिया बल्लभगढ़ रियासत के राजा थे। 1857 की क्रांति के दौरान उन्होंने अंग्रेजों के छक्के छुड़ा दिए थे और 134 दिन तक अंग्रेजों को दिल्ली में नहीं घुसने दिया था, इसलिए अंग्रेजों ने उन्हें दिल्ली की लोहे की दीवार के नाम से पुकारा था। बाद में धोखे से बन्दी बनाकर 9 जनवरी 1858 को उन्हें फांसी की सजा दी थी। उन्हें सरेआम चांदनी चौक पर फांसी दी गयी। उनके आखिरी शब्द थे कि भारत माता के लिए उठी इस चिंगारी को बुझने मत देना।
राजा देवी सिंह आर्य- राजा देवी सिंह गोदर टप्पा राया मथुरा के एक पहलवान एवं बजरंग बली के भक्त थे। उन्होंने अंग्रेजों के खिलाफ आवाज उठाई और अपने क्षेत्र को आजाद करके वहां अपना राज स्थापित कर लिया था। दिल्ली के बादशाह बहादुर शाह जफर ने उनकी राजा की उपाधि को मान्यता प्रदान की थी। बाद में अंग्रेजों ने फिर से हमला किया और धोखे से उन्हें बन्दी बना लिया गया। बाद में अंग्रेजों द्वारा उन्हें सरेआम फांसी दी गयी।
राजा बाबा शाहमल सिंह तोमर- ये बागपत से थे इन्होंने 1857 की क्रांति के समय अंग्रेजों को नाको चने चबवा दिए थे। इन्होने अपने क्षेत्र से अंग्रेजी शासन समाप्त करके राजा की उपाधि धारण कर ली थी। बाद में अंग्रेजों के हमले के दौरान उनसे लड़ते हुए वीरगति को प्राप्त हुए।
राजा अमानी सिंह- राजा अमानी सिंह ठकुरैला लग्समा क्षेत्र के राजा थे। इगलास एवं गोंडा इनकी राजधानी रही थी। 1857 में अंग्रेजों ने हमला किया इन्होंने उन्हें हरा दिया और दूसरे हमले के दौरान उनसे धोखाधड़ी करके उन्हें गिरफ्तार कर लिया गया व उन्हें अंग्रेजों ने फांसी दे दी।
इन वीरों ने हमारे लिए अपने प्राणों की बाजी लगा दी लेकिन कितने शर्म की बात है कि आज हम इनके बारे में जानते तक नहीं।
#jatking
शतरंज की बिसात पर अपनी चालों से बिहार का नाम रोशन कर रहे हैं पटना के युवा खिलाड़ी देवांश केशरी। ♟️🇮🇳
मलेशिया में आयोजित पहली राष्ट्रमंडल विद्यालय शतरंज चैंपियनशिप 2026 में देवांश ने शानदार प्रदर्शन करते हुए कुल 4 पदक अपने नाम किए। उन्होंने क्लासिकल और ब्लिट्ज टीम स्पर्धाओं में स्वर्ण, जबकि रैपिड व्यक्तिगत और टीम स्पर्धाओं में रजत पदक जीता।
देवांश की यह उपलब्धि बिहार के उभरते खेल प्रतिभाओं के लिए प्रेरणा है।
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Samrat Choudhary श्रेयसी सिंह DGBssa Department of Sports, Government of Bihar PIB in Bihar