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“10 दिन में नोटिस, 20 दिन में आखिरी चेतावनी... फिर 31वें दिन नौकरी खत्म मानी जाएगी”, CM सम्राट चौधरी का अफसरों को सख्त संदेश
बिहार में कानून-व्यवस्था और प्रशासनिक जवाबदेही को लेकर मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने बड़ा और सख्त संदेश दिया है। राजधानी पटना के गांधी मैदान में आयोजित बिहार अग्निशमन सेवा के विशेष कार्यक्रम में मुख्यमंत्री ने साफ कहा कि अब लापरवाही करने वाले अधिकारियों को किसी भी कीमत पर बख्शा नहीं जाएगा। उन्होंने चेतावनी दी कि शिकायतों के निपटारे में देरी होने पर पहले 10 दिन में नोटिस, फिर 20 दिन में अंतिम चेतावनी दी जाएगी और इसके बाद भी कार्रवाई नहीं हुई तो 31वें दिन संबंधित अधिकारी स्वतः निलंबित माने जाएंगे।
मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार अब “सहयोग कार्यक्रम” के जरिए सीधे जमीनी स्तर पर सरकारी कामकाज की समीक्षा करेगी। उन्होंने बताया कि वह खुद भी एक प्रखंड में जाकर कार्यालयों की व्यवस्था और शिकायतों के समाधान की स्थिति देखेंगे। सरकार का मकसद प्रशासनिक व्यवस्था को जवाबदेह और पारदर्शी बनाना है, ताकि आम लोगों को समय पर राहत मिल सके।
कानून-व्यवस्था को लेकर भी मुख्यमंत्री का रुख बेहद सख्त दिखा। उन्होंने मंच से साफ कहा कि बिहार पुलिस को अपराधियों के खिलाफ कार्रवाई के लिए “खुली छूट” दी गई है। सरकार किसी भी हालत में राज्य की कानून-व्यवस्था बिगड़ने नहीं देगी। मुख्यमंत्री ने चेतावनी भरे अंदाज में कहा कि अगर अपराधी गोली चलाएंगे तो गोली खाएंगे भी। उन्होंने दोहराया कि सरकार अपराध और भ्रष्टाचार के खिलाफ जीरो टॉलरेंस नीति पर काम कर रही है।
मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने बिहार के औद्योगिक विकास को लेकर भी बड़ा दावा किया। उन्होंने कहा कि राज्य अब तेजी से उद्योग और रोजगार के क्षेत्र में आगे बढ़ रहा है। कई बड़े उद्योगपति बिहार में निवेश के लिए रुचि दिखा रहे हैं। मुख्यमंत्री ने बिहार से बाहर रह रहे लोगों से भी अपील की कि वे वापस लौटें और राज्य में उद्योग स्थापित करें।
गांधी मैदान में आयोजित इस कार्यक्रम में बिहार अग्निशमन विभाग को भी बड़ी सौगात मिली। विभाग की ओर से 80 अत्याधुनिक अग्निशमन वाहनों का लोकार्पण किया गया। साथ ही आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस यानी AI तकनीक आधारित कंट्रोल रूम की शुरुआत भी की गई। कार्यक्रम में अपर गृह सचिव अरविंद चौधरी, डीजी फायर शोभा आहोटकर समेत कई वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे।
मुख्यमंत्री ने अग्निशमन विभाग के अधिकारियों और जवानों की सराहना करते हुए उन्हें “वीर योद्धा” की संज्ञा दी। उन्होंने कहा कि ये जवान अपनी जान जोखिम में डालकर दूसरों की जिंदगी बचाते हैं, इसलिए समाज में उनका सम्मान सबसे अलग होना चाहिए।
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“बिहार में भी बनेगा नोएडा जैसा इलाका...” सोनपुर से CM सम्राट चौधरी के बड़े ऐलान, जमीन पर 4 गुना मुआवजा देने का वादा
बिहार के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने सोनपुर के डुमरी बुजुर्ग पंचायत में आयोजित सहयोग शिविर के दौरान विकास, शिक्षा, स्वास्थ्य और उद्योग को लेकर कई बड़े ऐलान किए। उन्होंने दावा किया कि आने वाले समय में सोनपुर बिहार के सबसे विकसित क्षेत्रों में शामिल होगा। मुख्यमंत्री ने कहा कि उनका “सोनपुर को गोद लेने” का सपना अब जमीन पर उतरता दिखाई दे रहा है।
सीएम ने सोनपुर के लिए कई महत्वाकांक्षी परियोजनाओं की घोषणा करते हुए कहा कि यहां पटना के मरीन ड्राइव की तर्ज पर “गंगा अंबिका पथ” बनाया जाएगा। इसके साथ बाबा हरिहरनाथ कॉरिडोर, आधुनिक टाउनशिप और शहरी सुविधाओं के विस्तार पर भी काम होगा। उन्होंने साफ कहा कि सरकार बिहार में नोएडा जैसी व्यवस्था खड़ी करना चाहती है।
जमीन अधिग्रहण को लेकर लोगों की चिंता दूर करने की कोशिश करते हुए सम्राट चौधरी ने कहा कि विकास कार्यों के लिए जमीन देने वालों को बाजार मूल्य से चार गुना तक मुआवजा दिया जाएगा। उन्होंने लोगों से घबराने की बजाय सरकार पर भरोसा रखने की अपील की। मुख्यमंत्री ने कहा कि मुआवजा प्राप्त करने के लिए जिलाधिकारी को आवेदन देना होगा और जमीन से जुड़ी पूरी जानकारी उपलब्ध करानी होगी।
मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार गांव-गांव तक विकास और न्याय पहुंचाने के उद्देश्य से “सहयोग शिविर” चला रही है, ताकि लोग सीधे अपनी समस्याएं प्रशासन के सामने रख सकें। उन्होंने अधिकारियों को चेतावनी देते हुए कहा कि अगर 30 दिनों के भीतर किसी शिकायत का समाधान नहीं हुआ, तो संबंधित अधिकारी स्वतः निलंबित माना जाएगा। चाहे मामला अंचल, ब्लॉक या थाना स्तर का हो, लापरवाही बिल्कुल बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
स्वास्थ्य सेवाओं को लेकर भी मुख्यमंत्री ने सख्त संदेश दिया। उन्होंने कहा कि अब मामूली बीमारी में मरीजों को सीधे पीएमसीएच रेफर नहीं किया जाएगा। यदि बिना जरूरत मरीजों को पटना भेजा गया तो संबंधित सिविल सर्जन पर कार्रवाई होगी। सरकार की कोशिश है कि लोगों को जिला और अनुमंडल स्तर पर ही बेहतर इलाज मिल सके।
शिक्षा को लेकर सम्राट चौधरी ने ऐलान किया कि जुलाई से उन सभी प्रखंडों में डिग्री कॉलेज खोले जाएंगे, जहां अभी कॉलेज नहीं हैं। उन्होंने यह भी कहा कि बिहार में ऐसे सरकारी स्कूल तैयार किए जाएंगे, जहां नेताओं और अधिकारियों के बच्चों के एडमिशन के लिए भी पैरवी करनी पड़े।
मुख्यमंत्री ने कहा कि बिहार में उद्योगों को बढ़ावा देने पर विशेष जोर दिया जा रहा है ताकि युवाओं का पलायन रुके। उन्होंने बताया कि जीविका समूहों के जरिए बिहार की महिलाएं आज करीब 1 लाख 20 हजार करोड़ रुपये का कारोबार कर रही हैं, जो राज्य की आर्थिक ताकत का बड़ा उदाहरण है।
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आधुनिक भारत के निर्माता और भारतीय पुनर्जागरण के अग्रदूत, राजा राममोहन राय जी की जयंती पर कोटि-कोटि नमन।
समाज में तार्किक सोच और शिक्षा की अलख जगाने वाला उनका व्यक्तित्व युगों-युगों तक वंदनीय रहेगा।
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बिहार में पंचायत सचिवों का बड़ा ऐलान : 25 मई से राज्यव्यापी आंदोलन की चेतावनी, कामकाज ठप करने की तैयारी...
बिहार में पंचायत सचिवों का आंदोलन अब और तेज होने जा रहा है। बिहार राज्य पंचायत सचिव संघ ने साफ चेतावनी दी है कि अगर 25 मई तक सरकार की ओर से उनकी मांगों पर कोई आधिकारिक आदेश जारी नहीं किया गया, तो पूरे राज्य में बड़ा आंदोलन शुरू किया जाएगा। संघ ने यह भी संकेत दिया है कि मांगें पूरी होने तक कामकाज बाधित रखा जा सकता है।
पंचायत सचिवों का धरना बुधवार को लगातार 44वें दिन भी जारी रहा। पटना के गर्दनीबाग धरना स्थल पर आयोजित सभा में संघ के पदाधिकारियों ने सरकार पर वादाखिलाफी का आरोप लगाया और जल्द निर्णय लेने की मांग की।
संघ के अध्यक्ष वीरेंद्र कुमार ने कहा कि पंचायती राज विभाग पहले ही उनकी कई मांगों को स्वीकार कर चुका है, लेकिन अब तक उससे संबंधित आधिकारिक पत्र जारी नहीं किया गया है। उन्होंने कहा कि स्वीकृति मिलने के बावजूद आदेश जारी करने में हो रही देरी कर्मचारियों में नाराजगी बढ़ा रही है।
संघ की ओर से विशेष रूप से गलत आधार पर निलंबित पंचायत सचिवों के निलंबन वापसी आदेश जारी करने, हड़ताल अवधि को उपार्जित अवकाश में समायोजित करने और लंबित मामलों पर जल्द फैसला लेने की मांग दोहराई गई। पंचायत सचिवों का कहना है कि जब विभाग सहमति दे चुका है, तो आदेश जारी करने में देरी का कोई औचित्य नहीं है।
आंदोलन को और व्यापक बनाने की तैयारी भी शुरू कर दी गई है। संघ ने धरना और आंदोलन से जुड़े प्रस्तावों की जानकारी प्रधानमंत्री, मुख्यमंत्री, उपमुख्यमंत्री, मुख्य सचिव समेत सभी सांसदों और विधायकों को भेजने का फैसला लिया है, ताकि सरकार पर दबाव बनाया जा सके।
पंचायत सचिवों की चेतावनी के बाद अब नजर सरकार के अगले कदम पर टिकी है। यदि 25 मई तक समाधान नहीं निकला, तो राज्यभर में पंचायत स्तर के कामकाज पर इसका असर पड़ सकता है।
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जंजीरों में सड़कों पर उतरे अभ्यर्थी... TRE-4 वैकेंसी की मांग पर पटना में बवाल, छात्र नेता रिंकल समेत 28 हिरासत में
BPSC TRE-4 वैकेंसी जारी करने की मांग को लेकर बुधवार को पटना की सड़कों पर अभ्यर्थियों का गुस्सा फूट पड़ा। पटना यूनिवर्सिटी और पटना कॉलेज के मुख्य गेट के पास बड़ी संख्या में जुटे अभ्यर्थियों ने जोरदार प्रदर्शन किया। प्रदर्शन को देखते हुए प्रशासन पहले से अलर्ट मोड में था और भारी पुलिस बल की तैनाती की गई थी। हालात उस समय और तनावपूर्ण हो गए जब प्रदर्शन शुरू होने से पहले ही पुलिस ने छात्र नेताओं और अभ्यर्थियों को हिरासत में लेना शुरू कर दिया। इसके बाद पूरे इलाके में अफरा-तफरी का माहौल बन गया।
प्रदर्शन के दौरान कई अभ्यर्थी अपने शरीर पर जंजीरें बांधकर पहुंचे थे। वे सरकार से जल्द टीआरई-4 की वैकेंसी जारी करने की मांग कर रहे थे। इसी बीच पुलिस ने कार्रवाई करते हुए पूर्व पीयू छात्रसंघ चुनाव में अध्यक्ष पद के उम्मीदवार और तेजप्रताप यादव के समर्थक छात्र नेता रिंकल यादव को हिरासत में ले लिया। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार पुलिस उन्हें घसीटते हुए गाड़ी तक ले गई। वहीं छात्र नेता खुशबू पाठक को भी कार्यक्रम स्थल तक पहुंचने से पहले ही पकड़ लिया गया।
पुलिस कार्रवाई की जद में महिला अभ्यर्थी भी आईं। महिला पुलिसकर्मियों ने कई छात्राओं और महिला अभ्यर्थियों को जबरन पुलिस वाहनों में बैठाया। इस दौरान मौके पर काफी देर तक धक्का-मुक्की और नारेबाजी होती रही।
हंगामे का असर पटना यूनिवर्सिटी परिसर पर भी पड़ा। उस समय यूनिवर्सिटी और पटना कॉलेज में विभिन्न परीक्षाएं चल रही थीं। सुरक्षा कारणों से पटना कॉलेज के मुख्य गेट बंद कर दिए गए। बाहर पुलिस और अभ्यर्थियों के बीच जारी खींचतान के कारण अशोक राजपथ पर लंबा जाम लग गया और यातायात व्यवस्था पूरी तरह प्रभावित हो गई।
टाउन डीएसपी-1 ने बताया कि बिना अनुमति प्रदर्शन करने और कानून-व्यवस्था प्रभावित करने के आरोप में कुल 28 लोगों को हिरासत में लिया गया। इनमें छात्र नेता रिंकल यादव समेत कई प्रमुख चेहरे शामिल थे। पुलिस का कहना है कि यूनिवर्सिटी परिसर में चल रही परीक्षाओं को बाधित होने से बचाने के लिए यह कार्रवाई की गई। हालांकि देर शाम सभी हिरासत में लिए गए अभ्यर्थियों और छात्र नेताओं को मुचलके पर रिहा कर दिया गया।
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अब मनमानी नहीं चलेगी! बिहार में बिना रजिस्ट्रेशन कोचिंग चलाने पर 1 लाख जुर्माना, फीस और पढ़ाई के समय पर भी सख्त नियम
बिहार में तेजी से बढ़ते निजी कोचिंग संस्थानों पर अब सरकार सख्ती की तैयारी में है। शिक्षा विभाग ने ‘बिहार कोचिंग संस्थान (नियंत्रण एवं विनियमन) विधेयक 2026’ का ड्राफ्ट जारी कर दिया है, जिसके लागू होने के बाद राज्य में बिना रजिस्ट्रेशन कोई भी कोचिंग संस्थान नहीं चल सकेगा। सरकार ने इस प्रस्तावित कानून पर छात्रों, अभिभावकों और कोचिंग संचालकों से 7 जून तक सुझाव मांगे हैं। नया कानून लागू होने के बाद वर्ष 2010 का पुराना अधिनियम प्रभावहीन हो जाएगा।
ड्राफ्ट में साफ किया गया है कि स्कूल और कॉलेज के समय में कोचिंग नहीं चलेंगी, ताकि छात्रों की नियमित पढ़ाई प्रभावित न हो। यह नियम उन संस्थानों पर लागू होगा जहां 25 से अधिक छात्रों को पढ़ाया जाता है या 10 से ज्यादा छात्रों के लिए आवासीय सुविधा उपलब्ध कराई जाती है।
सरकार ने कोचिंग संस्थानों के रजिस्ट्रेशन, फीस, आधारभूत सुविधाओं, मानसिक स्वास्थ्य और भ्रामक विज्ञापनों तक के लिए विस्तृत नियम तय किए हैं। अब कोचिंग संस्थानों को फीस संरचना, शिक्षकों की योग्यता और अन्य जरूरी जानकारी सार्वजनिक करनी होगी। रैंक या सफलता की गारंटी देने वाले भ्रामक विज्ञापन भी प्रतिबंधित होंगे।
ड्राफ्ट के मुताबिक हर छात्र के लिए कम-से-कम दो वर्गफुट जगह देना अनिवार्य होगा। साथ ही किसी भी यौन अपराध में दोषी व्यक्ति को कोचिंग संस्थान में नियुक्त नहीं किया जा सकेगा। छात्रों के मानसिक दबाव को कम करने के लिए काउंसलिंग व्यवस्था भी जरूरी की गई है।
सरकार ने पढ़ाई के समय को लेकर भी सीमा तय की है। किसी छात्र को एक दिन में चार घंटे से ज्यादा कोचिंग नहीं कराई जा सकेगी। सप्ताह में एक दिन छुट्टी देना अनिवार्य होगा और टाइम-टेबल ऐसा बनाना होगा जिससे छात्रों को आराम और परिवार के साथ समय मिल सके।
ड्राफ्ट में शिक्षकों को लेकर भी सख्त प्रावधान रखे गए हैं। स्नातक से कम योग्यता वाले शिक्षक नहीं रखे जा सकेंगे और सरकारी शिक्षक कोचिंग में पढ़ा नहीं सकेंगे। संस्थानों को इसके लिए शपथ पत्र देना होगा।
फीस वसूली के नियम भी बदले जाएंगे। कोचिंग संस्थान पूरे कोर्स की फीस एकमुश्त नहीं ले सकेंगे। अभिभावकों को कम-से-कम चार किस्तों में फीस जमा करने का विकल्प देना होगा। यदि कोई छात्र बीच में कोर्स छोड़ता है तो बची हुई फीस 10 दिनों के भीतर लौटानी होगी। हॉस्टल और मेस फीस वापसी का प्रावधान भी ड्राफ्ट में शामिल किया गया है।
सरकार का मानना है कि नए नियम लागू होने के बाद कोचिंग संस्थानों में पारदर्शिता बढ़ेगी और छात्रों पर बढ़ते दबाव को कम करने में मदद मिलेगी।
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