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शारदा देवी का जन्म 22 दिसम्वर 1853 को बंगाल प्रान्त स्थित जयरामबाटी नामक ग्राम के एक गरीब ब्राह्मण परिवार में हुआ। उनके पिता रामचन्द्र मुखोपाध्याय और माता श्यामासुन्दरी देवी कठोर परिश्रमी, सत्यनिष्ठ एवं भगवद् परायण थे।
केवल 5 वर्ष की उम्र में इनका विवाह श्री रामकृष्ण से कर दिया गया था। उनका विवाह संबंध अलौकिक था। रामकृष्ण देव हमेशा शारदा देवी को माँ के रूप में ही देखते थे। एक दिन रामकृष्ण देव की मन:स्थिति जानने हेतु माँ शारदा ने उनसे पूछा: 'बताईये तो मैं आपकी कौन हूँ?' रामकृष्ण ने बिना विलंब उत्तर दिया कि, 'जो माँ काली मूर्ति में विराजमान है वहीं माँ आपके रूप में मेरी सेवा कर रही हैं। उनके भक्त मानते हैं कि माँ शारदा और रामकृष्ण देव कई जन्मों से एक दूसरे के सहचारी थे।
सुरों की देवी, विदुषी गंगूबाई हंगल जी की पुण्यतिथि पर विनम्र श्रद्धांजलि। 🎶शास्त्रीय संगीत की दुनिया में जब भी कड़े संघर्ष, अडिग साधना और बेमिसाल गायकी का ज़िक्र होगा, गंगूबाई हंगल जी का नाम सबसे ऊपर लिया जाएगा। तमाम सामाजिक रूढ़ियों को तोड़कर उन्होंने किराना घराने की गायकी को देश-दुनिया के कोने-कोने तक पहुँचाया।आज उनकी पुण्यतिथि पर हम संगीत के प्रति उनके समर्पण और उनकी दिव्य आवाज़ को याद करते हुए उन्हें नमन करते हैं। 💐👉 "संगीत मेरा जीवन है, और मेरी सांसें संगीत से ही चलती हैं।" - गंगूबाई हंगल#gangubaihangal
जहाँ आस्था अटल है, वहीं विराजते हैं प्रथम ज्योतिर्लिंग श्री सोमनाथ महादेव। 🙏
समुद्र की लहरों के बीच अडिग खड़ा यह दिव्य धाम हमें सिखाता है कि सत्य और श्रद्धा कभी पराजित नहीं होते।
महादेव की कृपा आप और आपके परिवार पर सदैव बनी रहे।
हर हर महादेव! 🚩
#भोले_के_सरकारी_भक्त