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Dinesh Karthik’s wife, Dipika Pallikal, has once again brought pride to India with a truly remarkable achievement. After embracing motherhood and giving birth to twin daughters, she returned to the demanding world of international squash and clinched a gold medal for the nation — a comeback that reflects sheer determination and strength. 🇮🇳
Her journey is far more than a sporting victory. Balancing motherhood with elite competition requires extraordinary discipline, physical endurance, and emotional resilience. Dipika’s success sends a powerful message: becoming a mother does not mean stepping away from ambition. It proves that responsibility and dreams can coexist, and that excellence does not fade with new roles in life.
In a world where headlines often chase glamour, stories like hers sometimes pass quietly — yet they carry far greater meaning. A mother-athlete returning to the international stage and winning gold is not just personal triumph; it is a statement about possibility, perseverance, and belief.
24 साल की श्रीलीला अब सिर्फ फिल्मी पर्दे की स्टार नहीं, बल्कि ऑफिशियली डॉक्टर भी बन चुकी हैं। 🎓✨
छह साल तक फिल्मों में लगातार काम करने के साथ-साथ उन्होंने अपनी मेडिकल की पढ़ाई भी पूरी लगन से जारी रखी। हाल ही में मुंबई की डीवाई पाटिल यूनिवर्सिटी में आयोजित कॉन्वोकेशन समारोह में उन्हें आधिकारिक तौर पर डॉक्टर की डिग्री प्रदान की गई।
अक्सर ग्लैमर और पढ़ाई को साथ लेकर चलना आसान नहीं होता, लेकिन श्रीलीला ने साबित कर दिया कि सही फोकस और अनुशासन हो तो दोनों दुनिया में सफलता पाई जा सकती है।
सिनेमा और स्टेथोस्कोप - दोनों में कमाल करने वाली यह कहानी आज के युवाओं के लिए बड़ी प्रेरणा है।
विरार के एक मिडिल क्लास परिवार से निकले इस युवा खिलाड़ी ने रोज़ 80 किलोमीटर लोकल ट्रेन में सफर कर वानखेड़े स्टेडियम में प्रैक्टिस की। पिता योगेश बैंक की नौकरी के साथ घंटों सफर कर बेटे का साथ देते रहे, फिर उसके सपने के लिए नौकरी तक छोड़ दी।
सिर्फ 18 साल की उम्र में आयुष ने न सिर्फ बड़े रन बनाए, बल्कि अपनी निडर बल्लेबाज़ी, शांत दिमाग और रणनीतिक सोच से भारत की अंडर-19 टीम की कप्तानी संभाली - वही कप्तानी जो कभी विराट कोहली और पृथ्वी शॉ जैसे दिग्गजों ने निभाई थी।
ICC अंडर-19 वर्ल्ड कप 2026 में आयुष ने सिर्फ टीम को लीड नहीं किया, बल्कि कमांड किया। सेमीफाइनल और फाइनल में उनकी अर्धशतकीय पारियां भारत के रिकॉर्ड छठे खिताब की नींव बनीं।
यह कहानी ट्रॉफी की नहीं, त्याग, अनुशासन और अटूट विश्वास की है।
और सच मानिए - यह तो बस शुरुआत है।
BCCI Domestic Indian Cricket Team
#ayushmhatre #u19worldcup #indiancricket #futurestar
When an international athlete comments positively on India’s safety, the reaction spreads quickly, shaped by people’s existing views. Gulbadin Naib’s remark describing India as a safe country was seen by some as genuine appreciation, while others felt it oversimplified a complex reality. Safety is influenced by data, personal experiences, and regional differences, creating a gap between global perception and local realities. While no nation is free of challenges, such international opinions help shape narratives. The discussion should go beyond comparison and focus on deeper questions—how do we assess safety fairly, and can we acknowledge shortcomings without dismissing positive feedback?
#बिड़ला_मंदिर के शिलान्यास के लिए संयुक्त भारत के 360 राजा आए पर मंदिर का शिलान्यास #जाट महाराजा उदय भानु सिंह राणा से ही क्यों करवाया गया
धौलपुर के #जाट महाराजा कर्नल #महाराणा उदय भानु सिंह जी की जयंती पर उनको शत शत नमन!
इनका जन्म 12 फरवरी 1893 को बमरौलिया क्षत्रिय जाट शासक महाराणा निहाल सिंहजी के महल में महारानी हरबंस कौरजी (शेर-ए-पंजाब महाराजा रणजीत सिंहजी की पडपौत्री) की कौख से हुआ था !, महाराणा निहाल सिंह महाराजा सिंघन देव राणा (गोहद रियासत के संस्थापक 1505ई.) के प्रत्यक्ष वंश थे !
महाराणा उदय भानु सिंह महाराणा रामसिंहजी के छोटे भ्राता थे। 1911 ई. में ज्येष्ठ भ्राता के स्वर्गवास होने पर गद्दी पर बैठे, सन् 1913 ई. में राज्यधिकार प्राप्त हुए। महाराणा उदय भानु सिंह केडिट कोर में भी शिक्षा पाई थी।वह अपनी प्रजा वे गरीब जनता के प्रति बड़े ही संवेदनशील रहा करते थे। वह समय-समय पर उनकी सहायता व उनको कार्य प्रदान किया करते थे। व अपना अधिकतम समय जनता को दिया करते थे ! महाराणा अखिल भारतीय क्षत्रिय जाट महासभा के संस्थापकों में से एक थे जिसका प्रथम सम्मेलन मेरठ में हुआ था !
#बिड़ला_मंदिर के शिलान्यास के लिए संयुक्त भारत के 360 राजा आए पर मंदिर का शिलान्यास #जाट महाराजा उदय भानु सिंह राणा से ही क्यों करवाया गया
धौलपुर के #जाट महाराजा कर्नल #महाराणा उदय भानु सिंह जी की जयंती पर उनको शत शत नमन!
इनका जन्म 12 फरवरी 1893 को बमरौलिया क्षत्रिय जाट शासक महाराणा निहाल सिंहजी के महल में महारानी हरबंस कौरजी (शेर-ए-पंजाब महाराजा रणजीत सिंहजी की पडपौत्री) की कौख से हुआ था !, महाराणा निहाल सिंह महाराजा सिंघन देव राणा (गोहद रियासत के संस्थापक 1505ई.) के प्रत्यक्ष वंश थे !
महाराणा उदय भानु सिंह महाराणा रामसिंहजी के छोटे भ्राता थे। 1911 ई. में ज्येष्ठ भ्राता के स्वर्गवास होने पर गद्दी पर बैठे, सन् 1913 ई. में राज्यधिकार प्राप्त हुए। महाराणा उदय भानु सिंह केडिट कोर में भी शिक्षा पाई थी।वह अपनी प्रजा वे गरीब जनता के प्रति बड़े ही संवेदनशील रहा करते थे। वह समय-समय पर उनकी सहायता व उनको कार्य प्रदान किया करते थे। व अपना अधिकतम समय जनता को दिया करते थे ! महाराणा अखिल भारतीय क्षत्रिय जाट महासभा के संस्थापकों में से एक थे जिसका प्रथम सम्मेलन मेरठ में हुआ था !