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नीट का रिजल्ट आ चुका है। NEET 2026 में 690+ अंक लाने वाले टॉप 138 विद्यार्थियों में 23 बनिये हैं। यानी लगभग 16.67%!
और सबसे मज़ेदार बात... AIR 1, AIR 2, AIR 3 और AIR 4... चारों स्थान भी बनियों ने ही हासिल किए हैं।
मेरे सारे दोस्त कहते हैं; बनिया खर्च भी हिसाब से करता है।
बात सही भी है। पर मुझे मेरे पापा ने यही सिखाया है कि, हिसाब भी सही जगह लगाना चाहिए। देश, धर्म और परिवार पर हिसाब लगाया नहीं जाता...उनका कर्ज चुकाया जाता हैं❤️🙏
और अंत में वही हुआ जिसका अंदेशा हम सभी को था...! सोनम वांगचुक के स्वास्थ्य की चिंता पूरे देश को थी, उन्हें तो अस्पताल ले जाना ही था। अब कम से कम उनके सेहत को लेकर तसल्ली होगी।
पर अब वह हुआ जो स्क्रिप्ट लिए डिप्के भारत आए थे...एयरपोर्ट पर उनकी गिरफ्तारी होगी! न भी हुई तो मारपीट होगी। पर नहीं हुई।
अनशन के दौरान मारपीट होगी...पुलिस द्वारा धमकाया जाएगा...पर ऐसा कुछ न हुआ।
कचोरी समोसा खा खाकर उकताए अभिजीत डिप्के...सोनम को छोड़कर रोज की तरह जब वो किसी दोस्त के घर फ्रेश होने गए, पुलिस उनके स्वास्थ्य को देखते हुए सोनम को ले गई।
अब डिप्के कह रहे हैं उनके साथ मारपीट हुई...कभी कह रहे हैं गला द बाया...कभी कह रहे मुझे घसीटा तो कभी कह रहे मुझे धमकाया गया। यह सब कब हुआ.. कैसे हुआ वो डिटेल भी वो सोच कर मीडिया को बताएंगे।
वैसे न्यूज़ के अनुसार;
बीती शाम हुई दिल्ली पुलिस के टॉप अफसरों की मीटिंग में ये प्लान बना था।
ऑपरेशन जंतर मंतर के लिए एक कोड तय हुआ ' सफेद चादर ' ! दिल्ली पुलिस के कुछ जवानों को सफेद टीशर्ट में जंतर मंतर भेजा गया....करीब दस जवान मंच पर पहुंचते ही चादर को फैलाते हैं, और सोनम से अस्पताल चलने की रिक्वेस्ट करते हैं।
सोनम वांगचुक इधर उधर एक सेकंड देखते हैं। उन्हें अभिजीत और दाहिया कहीं दिखते तक नहीं। तीन चार लेफ्ट की कार्यकर्ता हंगामा करने की कोशिश करती हैं। पर उन्हें तुरंत मेडिकल इमरजेंसी में ले जाया गया।
वे फिलहाल सफदरजंग में हैं...स्टेबल हैं और होश में हैं।
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इधर अभिजीत और दूसरे कॉकरोच भी अनशन शुरू करने की कोशिश में हैं। वे सारे युवाओं और स्टूडेंट्स को सड़कों पर उतरकर 'शांतिपूर्ण' आंदोलन के लिए उकसा रहे हैं। आखिरकार उन्हें हीरो बनने का यह अंतिम अवसर मिला है।
देखते हैं क्या होता है?
रुबिया लियाकत ने एक बहुत सुंदर बात कही हैं;
इतिहास नायकों को याद रखता हैं, मोहरों को नहीं!
बाकी तो...
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टीशा
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सुप्रीम कोर्ट ने एक महत्वपूर्ण फैसले में स्पष्ट किया है कि वसीयतकर्ता (Testator) की मृत्यु के तीन वर्ष के भीतर ही प्रोबेट (Probate) के लिए आवेदन करना अनिवार्य नहीं है। कोर्ट ने कहा कि प्रोबेट के लिए आवेदन करने का अधिकार तब उत्पन्न होता है, जब वसीयत के आधार पर बनी कानूनी स्थिति को चुनौती दी जाती है या प्रोबेट की वास्तविक आवश्यकता पैदा होती है, न कि केवल वसीयतकर्ता की मृत्यु की तारीख से।
यह फैसला जस्टिस संजय करोल और जस्टिस विपुल एम. पंचोली की खंडपीठ ने Sanjay Sharma @ Sanjay Bhardwaj v. Krishnadhan Khaware & Ors. मामले में सुनाया।
मामले में वसीयत 15 अप्रैल 1995 को बनाई गई थी और वसीयतकर्ता का निधन 7 जून 1995 को हुआ था। प्रोबेट के लिए आवेदन 31 अगस्त 2005 को दायर किया गया। प्रतिवादियों ने यह कहते हुए आवेदन को चुनौती दी कि यह तीन वर्ष की सीमा अवधि के बाद दायर किया गया है। हालांकि, सुप्रीम कोर्ट ने माना कि प्रोबेट की आवश्यकता 8 अगस्त 2005 को उत्पन्न हुई, जब वसीयतकर्ता की पत्नी ने General Power of Attorney निष्पादित की। इसलिए 31 अगस्त 2005 को दायर किया गया प्रोबेट आवेदन समय-सीमा के भीतर था।
कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि Indian Succession Act, 1925 में प्रोबेट आवेदन के लिए कोई विशेष समय-सीमा निर्धारित नहीं है। ऐसे मामलों में Limitation Act, 1963 के प्रावधान लागू होंगे, लेकिन तीन वर्ष की अवधि की गणना उस दिन से होगी, जब प्रोबेट की वास्तविक आवश्यकता उत्पन्न होती है। साथ ही, कोर्ट ने P. Kumarakurubaran v. P. Narayanan, 2025 LiveLaw (SC) 509 के फैसले का हवाला देते हुए कहा कि यदि लिमिटेशन का प्रश्न विवादित तथ्यों पर आधारित हो, तो उसे Order VII Rule 11 CPC के स्तर पर सरसरी तौर पर खारिज नहीं किया जा सकता।
इस फैसले के साथ सुप्रीम कोर्ट ने ट्रायल कोर्ट और झारखंड हाईकोर्ट के आदेशों को रद्द करते हुए मामले को आगे की सुनवाई के लिए संबंधित सिविल कोर्ट को वापस भेज दिया।
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