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साक्षी चौधरी को हरा मुक्केबाज पूनम पूनिया ने किया उलटफेर
राष्ट्रीय मुक्केबाजी चैम्पियनशिपः निकहत-लवलीना सेमीफाइनल में पहुंचीं
खेलपथ संवाद
ग्रेटर नोएडा। युवा विश्व चैम्पियनशिप की पूर्व स्वर्ण पदक विजेता पूनम पूनिया ने गुरुवार को 54 किलोग्राम वर्ग में गत चैम्पियन साक्षी चौधरी को शिकस्त दी जिससे राष्ट्रीय मुक्केबाजी चैम्पियनशिप में पहला बड़ा उलटफेर हुआ। रेलवे की 23 वर्षीय मुक्केबाज और अंडर-22 एशियाई चैम्पियन पूनम ने आक्रमकता दिखाते हुए साक्षी पर 4-1 के विभाजित फैसले में जीत दर्ज की और सेमीफाइनल में जगह बनाई।
साक्षी चौधरी को हरा मुक्केबाज पूनम पूनिया ने किया उलटफेर
राष्ट्रीय मुक्केबाजी चैम्पियनशिपः निकहत-लवलीना सेमीफाइनल में पहुंचीं
खेलपथ संवाद
ग्रेटर नोएडा। युवा विश्व चैम्पियनशिप की पूर्व स्वर्ण पदक विजेता पूनम पूनिया ने गुरुवार को 54 किलोग्राम वर्ग में गत चैम्पियन साक्षी चौधरी को शिकस्त दी जिससे राष्ट्रीय मुक्केबाजी चैम्पियनशिप में पहला बड़ा उलटफेर हुआ। रेलवे की 23 वर्षीय मुक्केबाज और अंडर-22 एशियाई चैम्पियन पूनम ने आक्रमकता दिखाते हुए साक्षी पर 4-1 के विभाजित फैसले में जीत दर्ज की और सेमीफाइनल में जगह बनाई।
साक्षी चौधरी को हरा मुक्केबाज पूनम पूनिया ने किया उलटफेर
राष्ट्रीय मुक्केबाजी चैम्पियनशिपः निकहत-लवलीना सेमीफाइनल में पहुंचीं
खेलपथ संवाद
ग्रेटर नोएडा। युवा विश्व चैम्पियनशिप की पूर्व स्वर्ण पदक विजेता पूनम पूनिया ने गुरुवार को 54 किलोग्राम वर्ग में गत चैम्पियन साक्षी चौधरी को शिकस्त दी जिससे राष्ट्रीय मुक्केबाजी चैम्पियनशिप में पहला बड़ा उलटफेर हुआ। रेलवे की 23 वर्षीय मुक्केबाज और अंडर-22 एशियाई चैम्पियन पूनम ने आक्रमकता दिखाते हुए साक्षी पर 4-1 के विभाजित फैसले में जीत दर्ज की और सेमीफाइनल में जगह बनाई।

एलन मस्क ने एक बार फिर दुनिया भर में दौलत को लेकर बहस छेड़ दी है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, उन्होंने सिर्फ़ एक ही दिन में अपनी नेट वर्थ में करीब ₹13.84 लाख करोड़ का इज़ाफ़ा कर लिया, जो कि Tesla और SpaceX की वैल्यूएशन में तेज़ उछाल की वजह से हुआ 😳
यह आंकड़ा सामने आते ही सोशल मीडिया पर तहलका मच गया। कई यूज़र्स ने इस एक दिन की बढ़ोतरी की तुलना भारत के सबसे बड़े कारोबारी घरानों की पूरी ज़िंदगी की कमाई से की और कहा कि यह रकम दशकों में अंबानी परिवार द्वारा बनाई गई संपत्ति के बराबर, बल्कि कुछ मामलों में उससे भी ज़्यादा है। भले ही यह बढ़त ज़्यादातर “काग़ज़ों पर” हो और बाज़ार के उतार-चढ़ाव से जुड़ी हो, लेकिन इसका पैमाना लोगों को हैरान कर गया।
सिर्फ़ बड़ी संख्या ही नहीं, बल्कि यह घटना आधुनिक दौर में दौलत बनने की अजीब और तेज़ रफ़्तार को भी दिखाती है। आज के बाज़ार-आधारित सिस्टम में, शेयरों की एक तेज़ रैली कुछ ही घंटों में उतनी वैल्यू जोड़ सकती है, जितनी कई इंडस्ट्रीज़ सालों में नहीं बना पातीं। मस्क की दौलत निवेशकों के भविष्य की तकनीक पर भरोसे से जुड़ी है, इसलिए इसमें कभी ज़बरदस्त उछाल आता है तो कभी गिरावट—लेकिन हमेशा एक अविश्वसनीय स्तर पर।
इस शुरुआती झटके से आगे देखें तो यह क़िस्सा अरबपतियों की दौड़ में मस्क की अलग पहचान को और साफ़ करता है। टेक्नोलॉजी और सट्टेबाज़ी के इस दौर में दौलत कितनी तेज़ी से बढ़ सकती है, इसे शायद ही कोई और इतनी साफ़ तरह से दिखाता हो। ये बढ़त टिके या न टिके, एक बात तय है—आज अरबपतियों की दौलत धीरे-धीरे नहीं बढ़ती, वह रातों-रात रैंकिंग बदल देती है।