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एथलीटों ने दिखाया दम, कॉमनवेल्थ और एशियन गेम्स के कटाए टिकट
रांची में 29वीं नेशनल सीनियर एथलेटिक्स फेडरेशन चैम्पियनशिप का समापन
खेलपथ संवाद
रांची। राजधानी रांची के मोरहाबादी स्थित बिरसा मुंडा फुटबॉल स्टेडियम में 22 से 25 मई तक आयोजित 29वीं नेशनल सीनियर एथलेटिक्स फेडरेशन चैम्पियनशिप का समापन सोमवार को रोमांचक मुकाबलों के साथ हुआ। चार दिनों तक चले इस राष्ट्रीय आयोजन में देशभर के शीर्ष एथलीटों ने हिस्सा लिया और कई खिलाड़ियों ने शानदार प्रदर्शन करते हुए कॉमनवेल्थ गेम्स और एशियन गेम्स के लिए अपना टिकट सुरक्षित किया।

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एथलीटों ने दिखाया दम, कॉमनवेल्थ और एशियन गेम्स के कटाए टिकट
रांची में 29वीं नेशनल सीनियर एथलेटिक्स फेडरेशन चैम्पियनशिप का समापन
खेलपथ संवाद
रांची। राजधानी रांची के मोरहाबादी स्थित बिरसा मुंडा फुटबॉल स्टेडियम में 22 से 25 मई तक आयोजित 29वीं नेशनल सीनियर एथलेटिक्स फेडरेशन चैम्पियनशिप का समापन सोमवार को रोमांचक मुकाबलों के साथ हुआ। चार दिनों तक चले इस राष्ट्रीय आयोजन में देशभर के शीर्ष एथलीटों ने हिस्सा लिया और कई खिलाड़ियों ने शानदार प्रदर्शन करते हुए कॉमनवेल्थ गेम्स और एशियन गेम्स के लिए अपना टिकट सुरक्षित किया।

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पंजाब के हॉकी सितारों का भगवंत मान ने किया सम्मान
मुख्यमंत्री ने 14 खिलाड़ियों को दिया महाराजा रणजीत सिंह अवॉर्ड
पंजाब सरकार ने खेल जगत में राज्य का नाम रोशन करने वाले खिलाड़ियों को सम्मानित करने के अपने वादे को पूरा करते हुए आज एक भव्य समारोह का आयोजन किया। चंडीगढ़ में आयोजित इस राज्य स्तरीय कार्यक्रम में पंजाब के मुख्यमंत्री श्री भगवंत मान ने भारतीय हॉकी टीम के कप्तान हरमनप्रीत सिंह सहित 14 दिग्गज हॉकी खिलाड़ियों को प्रतिष्ठित 'महाराजा रणजीत सिंह पुरस्कार' से नवाजा।
समारोह के दौरान मुख्यमंत्री ने खिलाड़ियों की पीठ थपथपाई और उन्हें राज्य का गौरव बताया। कप्तान हरमनप्रीत सिंह के साथ-साथ टोक्यो ओलंपिक में पदक जीतने वाली टीम के प्रमुख सदस्यों हार्दिक सिंह, मनदीप सिंह और जरमनप्रीत सिंह को भी इस प्रतिष्ठित पुरस्कार से सम्मानित किया गया। ट्रॉफी हाथ में लिए इन सितारों की चमक ने कार्यक्रम की शोभा बढ़ा दी।
पुरस्कार पाने वाले अन्य खिलाड़ियों में शमशेर सिंह, दिलप्रीत सिंह, वरुण कुमार और गोलकीपर कृष्ण पाठक शामिल रहे। इनके अलावा हॉकी के क्षेत्र में निरंतर शानदार प्रदर्शन करने वाले रुपिंदरपाल सिंह, गुरजंत सिंह, आकाशदीप सिंह, सिमरनजीत सिंह, रमनदीप सिंह और गुरिंदर सिंह को भी मुख्यमंत्री ने सम्मानित किया।
इस अवसर पर मुख्यमंत्री भगवंत मान ने कहा, हमारी सरकार पंजाब को फिर से खेलों में नंबर एक राज्य बनाने के लिए प्रतिबद्ध है। महाराजा रणजीत सिंह पुरस्कार केवल एक सम्मान नहीं है, बल्कि यह आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा है। उन्होंने खिलाड़ियों को दी जाने वाली खेल सुविधाओं और बुनियादी ढांचे में और सुधार करने का भी आश्वासन दिया।समारोह में खेल मंत्री और कई पूर्व ओलंपियन भी मौजूद रहे, जिन्होंने पंजाब के खेल भविष्य पर अपनी खुशी व्यक्त की।

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पंजाब के हॉकी सितारों का भगवंत मान ने किया सम्मान
मुख्यमंत्री ने 14 खिलाड़ियों को दिया महाराजा रणजीत सिंह अवॉर्ड
पंजाब सरकार ने खेल जगत में राज्य का नाम रोशन करने वाले खिलाड़ियों को सम्मानित करने के अपने वादे को पूरा करते हुए आज एक भव्य समारोह का आयोजन किया। चंडीगढ़ में आयोजित इस राज्य स्तरीय कार्यक्रम में पंजाब के मुख्यमंत्री श्री भगवंत मान ने भारतीय हॉकी टीम के कप्तान हरमनप्रीत सिंह सहित 14 दिग्गज हॉकी खिलाड़ियों को प्रतिष्ठित 'महाराजा रणजीत सिंह पुरस्कार' से नवाजा।
समारोह के दौरान मुख्यमंत्री ने खिलाड़ियों की पीठ थपथपाई और उन्हें राज्य का गौरव बताया। कप्तान हरमनप्रीत सिंह के साथ-साथ टोक्यो ओलंपिक में पदक जीतने वाली टीम के प्रमुख सदस्यों हार्दिक सिंह, मनदीप सिंह और जरमनप्रीत सिंह को भी इस प्रतिष्ठित पुरस्कार से सम्मानित किया गया। ट्रॉफी हाथ में लिए इन सितारों की चमक ने कार्यक्रम की शोभा बढ़ा दी।
पुरस्कार पाने वाले अन्य खिलाड़ियों में शमशेर सिंह, दिलप्रीत सिंह, वरुण कुमार और गोलकीपर कृष्ण पाठक शामिल रहे। इनके अलावा हॉकी के क्षेत्र में निरंतर शानदार प्रदर्शन करने वाले रुपिंदरपाल सिंह, गुरजंत सिंह, आकाशदीप सिंह, सिमरनजीत सिंह, रमनदीप सिंह और गुरिंदर सिंह को भी मुख्यमंत्री ने सम्मानित किया।
इस अवसर पर मुख्यमंत्री भगवंत मान ने कहा, हमारी सरकार पंजाब को फिर से खेलों में नंबर एक राज्य बनाने के लिए प्रतिबद्ध है। महाराजा रणजीत सिंह पुरस्कार केवल एक सम्मान नहीं है, बल्कि यह आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा है। उन्होंने खिलाड़ियों को दी जाने वाली खेल सुविधाओं और बुनियादी ढांचे में और सुधार करने का भी आश्वासन दिया।समारोह में खेल मंत्री और कई पूर्व ओलंपियन भी मौजूद रहे, जिन्होंने पंजाब के खेल भविष्य पर अपनी खुशी व्यक्त की।

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पंजाब के हॉकी सितारों का भगवंत मान ने किया सम्मान
मुख्यमंत्री ने 14 खिलाड़ियों को दिया महाराजा रणजीत सिंह अवॉर्ड
पंजाब सरकार ने खेल जगत में राज्य का नाम रोशन करने वाले खिलाड़ियों को सम्मानित करने के अपने वादे को पूरा करते हुए आज एक भव्य समारोह का आयोजन किया। चंडीगढ़ में आयोजित इस राज्य स्तरीय कार्यक्रम में पंजाब के मुख्यमंत्री श्री भगवंत मान ने भारतीय हॉकी टीम के कप्तान हरमनप्रीत सिंह सहित 14 दिग्गज हॉकी खिलाड़ियों को प्रतिष्ठित 'महाराजा रणजीत सिंह पुरस्कार' से नवाजा।
समारोह के दौरान मुख्यमंत्री ने खिलाड़ियों की पीठ थपथपाई और उन्हें राज्य का गौरव बताया। कप्तान हरमनप्रीत सिंह के साथ-साथ टोक्यो ओलंपिक में पदक जीतने वाली टीम के प्रमुख सदस्यों हार्दिक सिंह, मनदीप सिंह और जरमनप्रीत सिंह को भी इस प्रतिष्ठित पुरस्कार से सम्मानित किया गया। ट्रॉफी हाथ में लिए इन सितारों की चमक ने कार्यक्रम की शोभा बढ़ा दी।
पुरस्कार पाने वाले अन्य खिलाड़ियों में शमशेर सिंह, दिलप्रीत सिंह, वरुण कुमार और गोलकीपर कृष्ण पाठक शामिल रहे। इनके अलावा हॉकी के क्षेत्र में निरंतर शानदार प्रदर्शन करने वाले रुपिंदरपाल सिंह, गुरजंत सिंह, आकाशदीप सिंह, सिमरनजीत सिंह, रमनदीप सिंह और गुरिंदर सिंह को भी मुख्यमंत्री ने सम्मानित किया।
इस अवसर पर मुख्यमंत्री भगवंत मान ने कहा, हमारी सरकार पंजाब को फिर से खेलों में नंबर एक राज्य बनाने के लिए प्रतिबद्ध है। महाराजा रणजीत सिंह पुरस्कार केवल एक सम्मान नहीं है, बल्कि यह आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा है। उन्होंने खिलाड़ियों को दी जाने वाली खेल सुविधाओं और बुनियादी ढांचे में और सुधार करने का भी आश्वासन दिया।समारोह में खेल मंत्री और कई पूर्व ओलंपियन भी मौजूद रहे, जिन्होंने पंजाब के खेल भविष्य पर अपनी खुशी व्यक्त की।

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खेल सिर्फ ताकत का नहीं, जुनून, दर्द सहने की क्षमता और हार न मानने वाले हौसले का भी नाम है।
हैदराबाद के Lal Bahadur Stadium में आयोजित “तेलंगाना केसरी” कुश्ती प्रतियोगिता में Abu Bakar Bin Abdullah Bamas ने ऐसा जज़्बा दिखाया, जिसने हर दर्शक को भावुक कर दिया।
टूर्नामेंट के दौरान उन्हें कुल 6 कठिन मुकाबले लड़ने थे। शुरुआती चार मुकाबलों में उन्होंने शानदार जीत दर्ज की। लेकिन सेमीफाइनल में एक खतरनाक दांव के दौरान उनके सिर पर गंभीर चोट लग गई और मैदान पर ही खून बहने लगा।
स्टेडियम में मौजूद लोगों को लगा कि अब उनका सफर यहीं खत्म हो जाएगा। लेकिन असली खिलाड़ी वही होता है, जो मुश्किल समय में खुद को साबित करता है।
सिर्फ आधे घंटे के इलाज और सिर पर पट्टी बंधवाने के बाद अबू बकर दोबारा अखाड़े में उतरे। फाइनल मुकाबले में उन्होंने दर्द और थकान को पीछे छोड़ते हुए अपने प्रतिद्वंद्वी को हराकर लगातार दूसरी बार “तेलंगाना केसरी” का खिताब जीत लिया।
उनकी यह जीत सिर्फ एक ट्रॉफी नहीं, बल्कि उस जिद और जुनून की मिसाल है, जो इंसान को गिरकर भी दोबारा खड़ा होना सिखाती है।

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🌸 ਤੁਹਾਡਾ ਇੱਕ ਵੋਟ ਬਣੇਗਾ ਵਿਕਾਸ ਦੀ ਮਜ਼ਬੂਤ ਨੀਂਹ!
ਆਓ ਮਿਲ ਕੇ ਆਪਣੇ ਵਾਰਡ ਨੂੰ ਬਣਾਈਏ
✨ ਸਾਫ਼-ਸੁਥਰਾ
💧 ਸ਼ੁੱਧ ਪਾਣੀ ਵਾਲਾ
🛣️ ਚੰਗੀਆਂ ਸੜਕਾਂ ਵਾਲਾ
🌳 ਹਰਿਆ-ਭਰਿਆ ਅਤੇ ਸੁਰੱਖਿਅਤ
ਇਸ ਵਾਰੀ MC ਚੋਣਾਂ ਵਿੱਚ ਵਿਕਾਸ, ਭਰੋਸੇ ਅਤੇ ਪਾਰਦਰਸ਼ੀ ਪ੍ਰਸ਼ਾਸਨ ਲਈ ਵੱਧ ਚੜ੍ਹ ਕੇ ਹਿੱਸਾ ਲਓ ਅਤੇ
🪷 ਕਮਲ ਦੇ ਬਟਨ ਨੂੰ ਦਬਾਓ, ਭਾਜਪਾ ਨੂੰ ਜਿਤਾਓ ਵਾਰਡ ਦਾ ਚਹੁੰਮੁਖੀ ਵਿਕਾਸ ਕਰਵਾਓ
#mcelection2026 #mcchonan2026 #warddevelopment #votefordevelopment

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👉❤️यह नेपाल के काठमांडू में पशुपतिनाथ मंदिर परिसर (बागमती नदी के दाहिने तट पर आर्यघाट के पास) में स्थित **"विरूपाक्ष" (Birupakshya)** की अत्यंत प्रसिद्ध और प्राचीन मूर्ति है। स्थानीय भाषा में इन्हें **'कलि' (Kali)** भी कहा जाता है।
यह मूर्ति प्राचीन भारतीय और नेपाली मूर्तिकला का एक अनूठा उदाहरण है। आइए इसके इतिहास और इससे जुड़ी दिलचस्प मान्यताओं को समझते हैं:
### 1. ऐतिहासिक और पुरातात्विक पृष्ठभूमि
* **निर्माण काल* इतिहासकारों और पुरातत्वविदों के अनुसार, यह मूर्ति **लिच्छवि काल (Licchavi Period)** यानी लगभग **5वीं शताब्दी (5th Century CE)** की मानी जाती है। कुछ विद्वान इसे उससे भी पुरानी 'किरात कालीन' कला का हिस्सा मानते हैं।
* **स्थापना* माना जाता है कि लिच्छवि राजा मानदेव की नागा मूल की रानी **'श्री भोगिनी'** ने अपने मातृपक्ष के कुलदेवता या रक्षक देवता की स्मृति में इसे स्थापित करवाया था।

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हरियाणा की बेटी, मानसी लाठर ने 2026 U23 एशियन रेसलिंग चैंपियनशिप में भारत के लिए स्वर्ण पदक जीतकर देश और जाट समाज का नाम रोशन किया है। 🇮🇳🥇
जींद के लजवाना कलां गांव की इस बेटी ने साबित कर दिया कि मेहनत, अनुशासन और संघर्ष का कोई विकल्प नहीं होता।
लेकिन दुख की बात ये है कि आज जब भी कोई जाट युवा खेल, सेना, शिक्षा या किसी भी क्षेत्र में आगे बढ़ता है, तो सोशल मीडिया पर उसे जातिवाद, ट्रोलिंग और नफ़रत का सामना करना पड़ता है।
जाट अगर अपने समाज के खिलाड़ियों पर गर्व करे तो “casteism” कह दिया जाता है, लेकिन बाकी समाज खुलकर अपने लोगों का समर्थन करें तो वो “community support” कहलाता है।
सच्चाई ये है कि दंगल, खेत, बॉर्डर और आंदोलन — हर जगह जाट समाज ने मेहनत और संघर्ष से अपनी पहचान बनाई है।
मेडल मेहनत से आते हैं, ट्विटर की बहसों और गुटखे वाली राजनीति से नहीं।
समाज का सम्मान करना जातिवाद नहीं होता।
किसी की उपलब्धि से जलने की बजाय मेहनत करना सीखो। बिटिया को उज्जवल भविष्य के लिए हार्दिक शुभकामनाएं।
#जाट_समाज #andyjaatbhai #jaatbrand #jaatni #जाट #jaat #jaatcommunity #jaatswag #लाठर

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