जगजीत संधू उर्फ भोला (फिल्म में कुलदीप सिंह) शादी के एक दिन बाद भाई जसवंत सिंह खालदा जी की फिल्म की शूटिंग सामने आई। दिलजीत दसंझ ने कहा हमने भोले से कहा था की आज तुम्हारी शूटिंग रोक कर शादी करेंगे लेकिन जगजीत संधू उर्फ भोले ने कहा कि ये फिल्म जल्द से जल्द लोगों तक पहुंचे ताकि पंजाब को सच्चाई पता चल सके सभी पंजाबी कलाकारों ने ये फिल्म पैसे के लिए नहीं बल्कि अपनी जागृत जमीर के लिए की थी, लेकिन सच्ची बातें सरकारों को तलवार की तरह चुभती हैं।
सच दिखाते तो कुछ नहीं होता लेकिन अब सबको पता चल गया है कि सच है और आप पर प्रतिबंध लगा दिया गया है।

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जगजीत संधू उर्फ भोला (फिल्म में कुलदीप सिंह) शादी के एक दिन बाद भाई जसवंत सिंह खालदा जी की फिल्म की शूटिंग सामने आई। दिलजीत दसंझ ने कहा हमने भोले से कहा था की आज तुम्हारी शूटिंग रोक कर शादी करेंगे लेकिन जगजीत संधू उर्फ भोले ने कहा कि ये फिल्म जल्द से जल्द लोगों तक पहुंचे ताकि पंजाब को सच्चाई पता चल सके सभी पंजाबी कलाकारों ने ये फिल्म पैसे के लिए नहीं बल्कि अपनी जागृत जमीर के लिए की थी, लेकिन सच्ची बातें सरकारों को तलवार की तरह चुभती हैं।
सच दिखाते तो कुछ नहीं होता लेकिन अब सबको पता चल गया है कि सच है और आप पर प्रतिबंध लगा दिया गया है।

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नमन माता पिता को जिन्होंने इस वीर को जन्म दिया और जुल्म रोकने के लिए एक बलिदान योद्धा को जन्म दिया 🙏

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पंजाब के युवाओं पर बहुत जुल्म हो रहा था... पुलिस बिना किसी गलती के सिर्फ अपने प्रमोशन के लिए मार देती है... केंद्र के गुलाम लोग पंजाब को बर्बाद करने के लिए हमेशा तैयार रहते हैं... जो भी CM बने पंजाब से नही चलेगा

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घर से मुस्कुराते हुए निकली थी 6 साल की दिव्यांशी...स्कूल वैन के पहियों तले बुझ गई मासूम की जिंदगी #

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1 करोड़ में की थी शाही शादी…14 महीने बाद ही ससुराल से कफ़न में लिपटी आई दीपिका की ला'श #

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चोरी राम मंदिर में भी... चोरी बद्रीनाथ धाम में भी... लेकिन क्या दोनों मामलों की तुलना करना सही होगा? आखिर दोनों घटनाओं में फर्क क्या है, और कहां दान के नाम पर सबसे बड़ा सवाल खड़ा होता है?

देश के दो प्रमुख आस्था केंद्रों से सामने आई चोरी की खबरों ने करोड़ों श्रद्धालुओं को हैरान कर दिया है। जब भगवान के दरबार तक चोरों के हाथ पहुंच जाएं, तो यह सिर्फ एक आपराधिक घटना नहीं रहती, बल्कि सुरक्षा व्यवस्था, जवाबदेही और विश्वास पर भी बड़ा सवाल खड़ा करती है।

हालांकि हर घटना की परिस्थितियां अलग होती हैं। कहीं दान पेटी को निशाना बनाया गया, तो कहीं मंदिर परिसर की सुरक्षा को लेकर सवाल उठे। ऐसे में बिना पूरी जांच और आधिकारिक जानकारी के किसी निष्कर्ष पर पहुंचना उचित नहीं है। हर मामले की सच्चाई सामने आनी चाहिए और यदि कहीं लापरवाही या दोष साबित होता है, तो जिम्मेदार लोगों पर सख्त कार्रवाई भी होनी चाहिए।

धार्मिक स्थल केवल पूजा-अर्चना के स्थान नहीं हैं, बल्कि करोड़ों लोगों की आस्था और विश्वास का केंद्र हैं। यहां चढ़ाया गया हर एक रुपया श्रद्धालुओं की श्रद्धा का प्रतीक होता है। इसलिए इन स्थलों की सुरक्षा, पारदर्शिता और व्यवस्था पर किसी भी तरह का समझौता नहीं होना चाहिए।

अब सबसे बड़ा सवाल यही है—क्या देश के प्रमुख धार्मिक स्थलों की सुरक्षा व्यवस्था को और आधुनिक तथा मजबूत बनाने की जरूरत है? क्या दान और मंदिर प्रबंधन में अधिक पारदर्शिता होनी चाहिए?

आपकी क्या राय है? क्या दोनों मामलों में बड़ा अंतर है या फिर आस्था पर चोट दोनों जगह समान है? अपनी राय कमेंट में जरूर बताइए। 🙏

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