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मुरली मनहोर ❤️ 🙏

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यूपी में मदरसा शिक्षा को लेकर बड़ा फैसला, सियासत भी तेज...

उत्तर प्रदेश की योगी सरकार ने सुप्रीम कोर्ट के नवंबर 2024 के फैसले के अनुरूप यूपी मदरसा शिक्षा बोर्ड से उच्च शिक्षा (कामिल और फाजिल) से जुड़े अधिकार वापस लेने का फैसला किया है। कैबिनेट की मंजूरी के बाद अब मदरसा बोर्ड केवल 12वीं स्तर तक की शिक्षा और उससे जुड़े कोर्सों का संचालन करेगा, जबकि उच्च शिक्षा से जुड़े कोर्सों के लिए अलग व्यवस्था तैयार की जाएगी।

इस फैसले के साथ ही डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्य के मदरसों को लेकर दिए गए बयान ने राजनीतिक माहौल को और गरमा दिया है। उनके बयान पर समाजवादी पार्टी समेत कई विपक्षी दलों और मुस्लिम संगठनों ने तीखी प्रतिक्रिया दी है। जमीयत उलेमा-ए-हिंद ने बयान की आलोचना करते हुए इसे गैर-जिम्मेदाराना बताया, जबकि विपक्ष ने सरकार पर शिक्षा के मुद्दे को राजनीति से जोड़ने का आरोप लगाया।

वहीं सरकार और अल्पसंख्यक कल्याण विभाग का कहना है कि यह फैसला किसी नई नीति का हिस्सा नहीं, बल्कि सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के पालन में लिया गया है। अधिकारियों के अनुसार, भविष्य में कामिल और फाजिल जैसे कोर्सों को उच्च शिक्षा के अलग ढांचे के तहत संचालित करने की व्यवस्था बनाई जाएगी।

अब यह मा*मला सिर्फ मदरसा शिक्षा तक सीमित नहीं है, बल्कि कानून, शिक्षा और राजनीति—तीनों के बीच बड़ी बहस का विषय बन चुका है। आने वाले समय में इस मुद्दे पर सियासी बयानबाज़ी और चर्चाएं और तेज होने की संभावना है।

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पाकिस्तान हॉकी फेडरेशन (PHF) ने FIH मेंस हॉकी विश्व कप 2026 के लिए अपनी 20 सदस्यीय टीम की घोषणा कर दी है। यह प्रतिष्ठित टूर्नामेंट 15 से 30 अगस्त तक नीदरलैंड्स और बेल्जियम में खेला जाएगा। इस बार सबसे अधिक चर्चा 19 अगस्त को होने वाले भारत और पाकिस्तान के महामुकाबले की है, जिसका दोनों देशों के हॉकी प्रशंसकों को बेसब्री से इंतजार है।
पाकिस्तान की टीम अपना अभियान 15 अगस्त को इंग्लैंड के खिलाफ एम्सटेलवीन में शुरू करेगी। इसके बाद 17 अगस्त को उसका मुकाबला वेल्स से होगा। वहीं 19 अगस्त को भारत और पाकिस्तान आमने-सामने होंगे। दोनों टीमों के बीच होने वाला यह मुकाबला केवल ग्रुप स्टेज का मैच नहीं, बल्कि विश्व हॉकी की सबसे चर्चित प्रतिद्वंद्विताओं में से एक माना जाता है।
भारत और पाकिस्तान के बीच हर मुकाबले में जबरदस्त प्रतिस्पर्धा और रोमांच देखने को मिलता है। ऐसे में विश्व कप के इस हाई-वोल्टेज मैच पर दुनिया भर के हॉकी प्रशंसकों की नजरें रहेंगी। दोनों टीमें जीत के साथ नॉकआउट की राह मजबूत करना चाहेंगी, इसलिए 19 अगस्त का यह मुकाबला टूर्नामेंट के सबसे बड़े आकर्षणों में शामिल माना जा रहा है।

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किसी के बुरे वक्त पर कभी हँसना मत

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क्या सच्चा अपनापन घर, पैसे या हैसियत से तय होता है? शायद नहीं… ❤️
ब्राज़ील की यह भावुक कर देने वाली घटना इंसानियत और वफादारी की एक खूबसूरत मिसाल है। बताया जाता है कि एक बेघर व्यक्ति को देर रात इलाज के लिए अस्पताल जाना पड़ा। जब वह अस्पताल के अंदर था, तब उसके चार पालतू कुत्ते बाहर चुपचाप बैठकर उसका इंतज़ार करते रहे।
न कोई शिकायत, न कोई बेचैनी… बस अपने मालिक के लौटने का भरोसा। 🐾❤️
कहानी यह भी बताती है कि वह व्यक्ति खुद मुश्किल हालात में जीवन जी रहा था, फिर भी इन बेजुबानों की देखभाल करता था और अपना भोजन तक उनके साथ साझा करता था। शायद यही प्रेम और दया का वह रिश्ता था, जिसने इन कुत्तों को उसके साथ इतनी गहराई से जोड़ दिया।
जब इलाज के बाद वह बाहर आया, तो वे चारों तुरंत उसके पास दौड़कर लौट आए। यह दृश्य सिर्फ एक कहानी नहीं, बल्कि एक संदेश है—
रिश्ते खून, दौलत या बड़े घरों से नहीं बनते… रिश्ते बनते हैं प्रेम, विश्वास और उस देखभाल से जो हम दूसरों को देते हैं।
जो दिल से प्यार देता है, उसे किसी न किसी रूप में प्यार वापस जरूर मिलता है। ❤️🐶

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बांग्लादेश की पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना ने बुधवार को बड़ा संदेश दिया है। उन्होंने अपने संबोधन में संकेत दिया कि वह दिसंबर में वापस बांग्लादेश जा सकती हैं। शेख हसीना ने बांग्लादेश के मौजूदा हा*लात पर भी चिंता जताई है।

दूसरी ओर, शेख हसीना के बेटे साजीब वाजेद जॉय ने भी बुधवार को दिल्ली में मीडिया के साथ वर्चुअल बातचीत की। इस दौरान साजीब वाजेद ने भारत को आगाह करते हुए बड़ा बयान दिया। उन्होंने कहा कि बांग्लादेश भारत की पूर्वी सीमा पर एक और पाकिस्तान बन गया है। उनका आरोप है कि अगस्त 2024 से बांग्लादेश में राजनीतिक ह*त्या*ओं को कानूनी संरक्षण दिया गया है और आज बांग्लादेश एक 'फेल्ड स्टेट' (विफल देश) बन गया है, जहां कानून-व्यवस्था नाम की कोई चीज नहीं बची है।

'पूरी दुनिया में आतंकी बांग्लादेश से ही आएंगे'

साजीब वाजेद ने मीडिया से बातचीत में कहा, "भारत के लिए सबसे बड़ी चिंता की बात यह है कि पाकिस्तानी खुफिया एजेंसियों, खासकर ISI, को खुली छूट मिल गई है। यहां अल-कायदा के सदस्य सार्वजनिक रैलियां कर रहे हैं और भाषण दे रहे हैं। बांग्लादेश में जो वर्तमान में हो रहा है, वह भारत ही नहीं बल्कि पूरी दुनिया के लिए चिंता का विषय है। अगर इसे अभी नहीं रोका गया, तो आने वाले समय में पूरी दुनिया में आतंकवादी बांग्लादेश से ही आएंगे।"

'बांग्लादेश में अभी भी लोगों की मौ*त हो रही है'

दिल्ली में मीडिया के साथ वर्चुअल बातचीत के दौरान साजीब वाजेद ने कहा, "सभी ने बांग्लादेश में जुलाई 2024 में हुए विरोध प्रदर्शनों के दौरान हुई मौ*तों के बारे में सुना होगा। संयुक्त राष्ट्र (UN) ने मृतकों की संख्या 1,400 बताई, जबकि सरकार ने यह संख्या करीब 800 बताई। बाकी 600 लोग कौन हैं? UN को इनके नाम कहां से मिले? अवामी लीग और हमारे वकीलों ने इस सवाल के जवाब के लिए कई बार UN को पत्र लिखा, लेकिन आज तक हमें कोई नाम नहीं बताया गया। इससे भी ज्यादा गौर करने वाली बात यह है कि UN ने अपने आंकड़ों में केवल 15 अगस्त 2024 तक की अवधि को शामिल किया, जबकि सभी जानते हैं कि बांग्लादेश में उसके बाद भी लोगों की मौत हो रही है।"

साजीब वाजेद ने आगे कहा, "बांग्लादेश में मोहम्मद यूनुस की सरकार ने एक अध्यादेश पारित किया, जो बाद में कानून बन गया। इसे 'इंडेम्निटी बिल' कहा गया। इस कानून के तहत प्रदर्शनकारियों को कानूनी संरक्षण दे दिया गया। उन्हें किसी भी ह*त्या के मा*म*ले में कानूनी का*र्रवाई से बचाया गया, चाहे वह आम नागरिकों की हत्या हो, हमारी पार्टी के सदस्यों की ह*त्या हो या पुलिस अधिकारियों की हत्या। आखिर ह*त्या*ओं, खासकर पुलिस अधिकारियों की ह*त्या के लिए कानूनी सुरक्षा कैसे दी जा सकती है? यह पूरी तरह से मानवाधिकारों के खि*लाफ है।"

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मा*फि*या अतीक अहमद के बेटे अबान अहमद (21) की गुरुवार सुबह एक सड़क हा*द*से में मौ*त हो गई। वह झांसी जेल में बंद अपने बड़े भाई अली अहमद से मिलने जा रहा था। बताया जा रहा है कि झांसी-कानपुर हाईवे पर पूंछ थाना क्षेत्र में अचानक एक जानवर सामने आ गया। उसे बचाने की कोशिश में कार अनियंत्रित होकर डिवाइडर से टकरा गई।

कार में कुल पांच लोग सवार थे। हा*द*से के बाद पुलिस ने सभी घा*य*लों को तत्काल अस्पताल पहुंचाया, जहां डॉक्टरों ने अबान अहमद और उसके दोस्त सोनू को मृ*त घो*षित कर दिया। वहीं उमर अहमद, मोहम्मद जैद और असलम घा*य*ल हुए हैं, जिनका इलाज जारी है।

यह हा*द*सा गुरुवार सुबह करीब 10:30 बजे झांसी-कानपुर हाईवे पर हुआ।

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प्रधानमंत्री आवास योजना का उद्देश्य आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों को पक्का घर उपलब्ध कराना है, लेकिन राजस्थान के बालोतरा जिले से सामने आए एक मामले ने इस योजना के क्रियान्वयन पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। बाड़मेर भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (AC ने धोरीमन्ना पंचायत समिति के जुनाखेड़ा ग्राम पंचायत की ग्राम विकास अधिकारी सपना गुर्जर को 4,500 रुपये की कथित रिश्वत लेते हुए रंगे हाथों गिरफ्तार किया है। आरोप है कि प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत स्वीकृत मकान की तीसरी किस्त जारी कराने के लिए आवश्यक जियो-टैगिंग और ऑनलाइन प्रक्रिया पूरी करने के बदले रिश्वत मांगी गई थी।

तीसरी किस्त जारी करने के नाम पर मांगे गए पैसे .

एसीबी के अनुसार, परिवादी ने शिकायत दर्ज कराई थी कि उसकी पत्नी के नाम स्वीकृत प्रधानमंत्री आवास योजना की अंतिम 60 हजार रुपये की किस्त जारी कराने के लिए ग्राम विकास अधिकारी 5,000 रुपये की रिश्वत मांग रही हैं।
शिकायत में कहा गया कि बिना पैसे दिए जियो-टैगिंग और ऑनलाइन प्रक्रिया आगे नहीं बढ़ाई जा रही थी, जिससे किस्त अटक गई थी।

शिकायत के बाद ACB ने बिछाया जाल

शिकायत मिलने के बाद बाड़मेर एसीबी ने पहले पूरे मामले का सत्यापन किया। जांच के दौरान रिश्वत मांगने के आरोप प्रथम दृष्टया सही पाए जाने के बाद ट्रैप की योजना बनाई गई। इसके बाद एसीबी की टीम ने निगरानी के बीच कार्रवाई करते हुए आरोपी अधिकारी को रिश्वत लेते समय पकड़ लिया।

निजी आवास पर हुई ट्रैप कार्रवाई

एसीबी निरीक्षक देवाराम चौधरी के मुताबिक, ट्रैप कार्रवाई के दौरान ग्राम विकास अधिकारी सपना गुर्जर को उनके निजी आवास पर 4,500 रुपये की रिश्वत स्वीकार करते हुए गिरफ्तार किया गया। कार्रवाई पूरी होने के बाद आरोपी को धोरीमन्ना थाने ले जाया गया, जहां प्रारंभिक पूछताछ की गई।

भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत केस दर्ज

एसीबी ने आरोपी के खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत मामला दर्ज कर लिया है। अब जांच एजेंसी यह पता लगाने में जुटी है कि क्या यह मामला केवल एक लाभार्थी तक सीमित था या प्रधानमंत्री आवास योजना के अन्य लाभार्थियों से भी इसी तरह रिश्वत ली गई थी। जांच के दौरान दस्तावेजों और अन्य साक्ष्यों की भी पड़ताल की जा रही है।

सरकारी योजनाओं में पारदर्शिता पर फिर उठे सवाल

प्रधानमंत्री आवास योजना जैसी कल्याणकारी योजनाओं का उद्देश्य जरूरतमंद परिवारों तक सरकारी सहायता बिना किसी बाधा के पहुंचाना है। ऐसे में यदि किसी अधिकारी द्वारा योजना का लाभ दिलाने के बदले रिश्वत मांगने के आरोप सामने आते हैं, तो यह प्रशासनिक पारदर्शिता और जवाबदेही पर सवाल खड़े करता है। हालांकि इस मामले में आरोपों की अंतिम पुष्टि न्यायिक प्रक्रिया और जांच पूरी होने के बाद ही होगी।

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