20 hrs - Translate

मध्य प्रदेश के बुरहानपुर की बेटी दीपाली माने की महाराष्ट्र के वाशिम में संदिग्ध परिस्थितियों में मौ*त ने पूरे इलाके को झकझोर दिया है। दीपाली की शादी करीब एक साल पहले सेना में तैनात ध्यानेश्वर मदने से हुई थी बुरहानपुर: मध्य प्रदेश के बुरहानपुर की रहने वाली दीपाली माने की गोदभराई के 4 दिन बाद ह*त्या के मामले में उसके फौजी पति और ससुराल पक्ष के कुछ लोगों को पुलिस ने गि*रफ्तार कर लिया है। वहीं दीपाली के परिजनों ने आ*रोपियों को फांसी की स*जा देने की मांग की है। दीपाली ह*त्या के वक्त 7 माह की ग*र्भवती थी। मृतका की पहचान दीपाली माने के रूप में हुई है, जिसकी शादी करीब एक साल पहले वाशिम निवासी सेना के जवान ध्यानेश्वर मदने से हुई थी। परिजनों का आ*रोप है कि शादी के करीब तीन महीने बाद से ही पति उसे प्र*ताड़ित करने लगा था। शादी के तीन महीने बाद प्रताड़ना शुरू

बताया जाता है कि शादी के तीन महीने तक तो सबकुछ ठीक ठाक चला। लेकिन शादी के तीन महीने बाद आ*रोपी पति ध्यानेश्वर मदने ने अपनी कोलकाता पोस्टिंग के दौरान पत्नी को प्रताडित करना शुरू कर दिया। हालांकि दीपाली माने पति की इन ज्यादतियों को नजरअंदाज करती चली गई। लेकिन हद तो तब हो गई जब उसे फिनाईल पिला कर फांसी के फंदे पर लटकाने की नाकाम कोशिश की गई। आ*रोपी फौजी पति ने दीपाली का मोबाइल भी तोड़ डाला।

पीडिता ने पूरा माजरा अपने परिवार वालों को बताया। इसके बाद दोनों परिवार के सदस्यों ने मिलजुल कर सुलह कराई और मामले को शांत कराया। आरोपी पति ध्यानेश्वर मदने के पिता ने अपने समधि अनिल माने को यह विश्वास दिलाया की अब यह मेरी जिम्मेदारी है, कुछ नहीं होगा । इस भरोसे दीपाली माने एक नए भरोसे के साथ अपने ससुराल में रहने लगी। धूमधाम से हुई थी गोदभराई की रस्म

इसी बीच दीपाली के ग*र्भवती होने के सात महीने बीतने पर परिवार गोदभराई के लिए 2 अगस्त को महाराष्ट्र के वाशिम गया। वहां सारे विधि विधान से कार्यक्रम हुए। मायके पक्ष ने दीपाली को बुरहानपुर ले जाने का आग्रह किया लेकिन ससुराल वालों ने मना कर दिया। अचानक दीपाली के परिवार को 6 अगस्त को सूचना मिली की उनकी बेटी गिर कर घा*यल हो गई जब परिवार के लोग वाशिम पहुंचे तो पुलिस ने बताया उनकी बेटी की ह*त्या हो गई है।

पुलिस ने पति, सास-ससुर को किया गि*रफ्तार

दीपाली के परिवार *वालों की शिकायत पर आ*रोपी फौजी पति ध्यानेश्वर मदने, पिता नंदु मदने, माता इंदु मदने के खिलाफ बीएनएस की विभिन्न धाराओ में केस दर्ज कर पुलिस ने सभी को गि*रफ्तार कर लिया है। अब परिवार चाहता है इस अमानवीय कृत पर आ*रोपियों को फां*सी जैसी क*ठोर से क*ठोर स*जा दी जाए ताकि समाज में यह नजीर बने। स्थानीय पार्षद ने भी अपने वार्ड की इस होनहार बालिका की इस अमानवीय रूप से हत्या पर दुख जताते हुए देश की न्याय व्यवस्था से कठोर से कठोर स*जा देने की मांग की है।

image
20 hrs - Translate

महाराष्ट्र के गडचिरोली जिले में एक द@र्दनाक घटना सामने आई है। जप्तलाई गांव स्थित एक सहायता प्राप्त आदि"वासी आवासीय स्कूल के हॉस्टल में रविवार देर रात जह"रीले सांप ने सो रही छात्राओं को ड@स लिया। हादसे में तीन छात्राओं की मौ@त हो गई, जबकि तीन अन्य का अस्पताल में इलाज चल रहा है।
बताया गया कि छात्राएं हॉस्टल में जमीन पर सो रही थीं। रात करीब 12 बजे के आसपास सांप ने उन्हें डस लिया। तीन मृ@त छात्राओं की उम्र 8, 12 और 14 वर्ष बताई गई है। उन्हें त@त्काल अस्पताल ले जाया गया, लेकिन इलाज के दौ@रान उनकी मौ@त हो गई।
हा@दसे में घायल तीन अन्य छात्राओं को गडचिरोली जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया है। उन्हें एंटी-वेनम दिया गया और डॉक्टर लगातार उनकी निगरानी कर रहे हैं। इनमें से एक छात्रा की हालत गं@भीर बताई जा रही है।
घ@टना के बाद हॉस्टल की सुरक्षा व्यवस्था पर भी सवाल उठ रहे हैं। जिला कलेक्टर अविश्यांत पांडा ने मामले की विस्तृत जांच के आदेश दिए हैं। जांच में यह देखा जाएगा कि हॉस्टल में पर्याप्त सुरक्षा इंतजाम थे या नहीं और स्कूल प्रबंधन ने जरूरी सावधानियां बरती थीं या नहीं। प्रशासन ने परिसर की सुरक्षा व्यवस्था का निरीक्षण करने के भी निर्देश दिए हैं।
इस हा@दसे के बाद छात्राओं के परिवारों और स्थानीय लोगों में शोक का माहौल है। प्रशासन का कहना है कि अगर जांच में किसी तरह की ला@परवाही सामने आती है तो जिम्मेदारी तय कर कार्रवाई की जाएगी।

image
20 hrs - Translate

कोरोना में 3 महीने दुकान बंद हुई तो दुकानदार परेशान हो गए थे… इनकी दुकान तो 2014 से ही बंद है, सोचिए कितने परेशान होंगे!

कोरोना के दौरान जब करीब 3 महीने तक दुकानें बंद रहीं, तो दुकानदारों के सामने रोज़गार और परिवार का खर्च चलाने की बड़ी चिंता खड़ी हो गई थी। आमदनी रुक गई थी और हर दिन दुकान खुलने का इंतजार रहता था।

अब इसी बात को राजनीतिक व्यंग्य के तौर पर पेश करते हुए यह तंज कसा जा रहा है कि आम दुकानदार की दुकान तो कुछ महीनों के लिए बंद हुई थी, लेकिन कुछ लोगों की ‘राजनीतिक दुकान’ सालों से बंद पड़ी है।

यानी मुद्दा सिर्फ दुकान बंद होने का नहीं, बल्कि इस बात का है कि जनता के बीच किसकी पकड़ बनी हुई है और किसकी राजनीति पर सवाल उठ रहे हैं।

दुकान कुछ महीने बंद हो तो परेशानी समझ आती है, लेकिन राजनीतिक दुकान सालों से बंद हो तो दर्द थोड़ा ज्यादा होगा!

image
20 hrs - Translate

मध्य प्रदेश के उज्जैन के खाचरौद में अंतरजातीय प्रेम विवाह से नाराज़ परिवार ने बेटी से रिश्ता खत्म करने का ऐलान कर दिया। परिजनों ने घर में बेटी की तस्वीर रखकर ‘गोरनी’ की रस्म निभाई और उसका प्रतीकात्मक दाह संस्कार किया।

परिवार का कहना है कि अब बेटी उनके लिए ‘जीवित होकर भी मृ"त’ है। घटना के बाद अंतरजातीय विवाह और अपनी पसंद से शादी करने की आजादी को लेकर चर्चा छिड़ गई।

image
20 hrs - Translate

मुंबई में फूड सेफ्टी को लेकर प्रशासन की सख्ती का असर अब रेस्टोरेंट की रसोई तक दिखाई देने लगा है।

चिकन लॉलीपॉप, मंचूरियन जैसी डिश में इस्तेमाल होने वाले चटख कृत्रिम रंगों को लेकर कई रेस्टोरेंट संचालक सावधानी बरत रहे हैं। बताया जा रहा है कि FDA की सख्ती और अधिकारी तुकाराम मुंढे की कार्रवाई के डर से कई जगह इन रंगों का इस्तेमाल बंद या कम किया गया है।

यह बदलाव भले ही छोटा दिखाई दे, लेकिन इसका सीधा संबंध लोगों की सेहत से है। खाने में अनावश्यक और नियमों के खिलाफ इस्तेमाल होने वाले रंगों पर रोक लगे तो इसका फायदा सीधे ग्राहकों को मिलता है।

सख्त प्रशासन का असर यही होना चाहिए कि नियम सिर्फ कागजों पर न रहें, बल्कि उनका असर लोगों की थाली में भी दिखाई दे।

image
20 hrs - Translate

कांग्रेस सांसद शशि थरूर ने संसद में विपक्ष की ओर से लगातार किए जा रहे हंगामे और कार्यवाही बाधित करने पर सवाल खड़े किए हैं। उन्होंने कहा कि बार-बार सदन ठप करने से विपक्ष को ही नुकसान उठाना पड़ता है, क्योंकि इससे संसद का बहुमूल्य समय और संसाधन व्यर्थ चले जाते हैं।
थरूर का कहना है कि विपक्ष को हंगामे के बजाय संसद के मंच का इस्तेमाल सरकार से सवाल पूछने, जनता से जुड़े अहम मुद्दे उठाने और सत्ता पक्ष को जवाबदेह बनाने के लिए करना चाहिए। उन्होंने संसदीय लोकतंत्र में सार्थक चर्चा, सवाल-जवाब और प्रभावी जांच की जरूरत बताते हुए कहा कि संसद को बाधित करने के बजाय उसका बेहतर तरीके से इस्तेमाल किया जाना चाहिए।

image
20 hrs - Translate

मुंबई के कई रेस्टोरेंट मालिकों ने चि"कन लॉ@लीपॉप और मंचूरियन जैसी डिश में न@कली और केमिकल वाले रंग मिलाना बंद कर दिया है। उन्हें डर है कि आईएएस अधिकारी तुकाराम मुंडे फूड-सेफ्टी नियमों को लेकर उनके खि"लाफ कोई सख्त का"रवाई कर सकते हैं। कचि"कन लालापाप आार मचूरियन परास रह हो
यह बदलाव भले ही छोटा लगे, लेकिन इसका असर बहुत बड़ा है। यह साफ तौर पर दिखाता है कि अगर प्रशासन खाने-पीने के नियमों को लेकर सख्ती दिखाए, तो हमारी थाली तक पहुंचने वाला खाना काफी सुरक्षितऔर सेहतमंद हो सकता है।

image
20 hrs - Translate

छोटे से गांव में पले-बढ़े, कम उम्र में संभालना पड़ा परिवार; फिर इस जज्बे से बनाई 'सबसे बड़ी अगरबत्ती कंपनी'नई दिल्ली। भारत अगरबत्ती बनाने के मामले में दुनिया में काफी आगे है। भारत के मुख्य प्रोडक्शन हब कर्नाटक (बेंगलुरु और मैसूर), गुजरात और मध्य प्रदेश में हैं। बड़े पैमाने पर उत्पादन करने वाली कई प्रमुख कंपनियां भारत में मौजूद हैं। पर जिस कंपनी का नाम इस लिस्ट में टॉप पर आता है, वो साइकिल प्योर अगरबत्ती (Cycle Pure Agarbatti) I
साइकिल प्योर की गिनती भारत की सबसे पुरानी अगरबत्ती कंपनियों में भी होती है। पर क्या आप जानते हैं कि इस कंपनी की शुरुआत किसने की थी ? आइए जानते हैं।78 साल पहले हुई थी शुरुआत
1948 में मैसूर में एन. रंगा राव ने साइकिल प्योर अगरबत्ती की शुरुआत की थी। 1948 में राव ने एक छोटे से स्थानीय कारोबार से शुरुआत की थी, जो अब बढ़कर ₹1,700 करोड़ से अधिक के सालाना रेवेन्यू वाले ग्लोबल साम्राज्य में बदल गया है। जमीनी स्तर पर स्मार्ट मार्केटिंग, इन-हाउस खुशबू इनोवेशन और पर्यावरण के अनुकूल पैकेजिंग का इस्तेमाल करके, यह दुनिया के सबसे बड़े अगरबत्ती ब्रांड में से एक बन गया। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार इसकी मार्केट हिस्सेदारी 15 फीसदी से अधिक है।खुद का बिजनेस शुरू करना चाहते थे
राव मदुरै के पास वथिराईरुप्पु नाम के एक छोटे से गाँव में पले-बढ़े। कम उम्र से ही उन्हें अपने परिवा की जिम्मेदारी उठानी पड़ी। 1935 में शादी होने के बाद अरवनागाड की कॉर्डाइट फैक्टरी में उन्होंने बुककीपर के तौर पर काम शुरू किया। फिर आया 1947, जब भारत आजाद हुआ। भारत की आजादी से प्रेरित होकर, वे अपना खुद का कुछ शुरू करना चाहते थे।
उन्होंने 1947 में ही मैसूर प्रोडक्ट्स एंड जनरल ट्रेडिंग शुरू की और घर से काम शुरू किया, जो फैक्ट्री की भी भूमिका निभाता था।ऐसे हुआ 'ब्रांड साइकिल' का जन्म
असंगठित क्षेत्र में राव ने भविष्य को ध्यान में रखते हुए अपने बिजनेस को एक "ब्रांड" के तौर पर स्थापित करने का सोचा, जो अपने समय से काफी आगे की सोच थी। इस तरह 'ब्रांड साइकिल' का जन्म हुआ। फिर उन्होंने डिजाइन कॉपीराइट भी हासिल कर लिए। इसके बाद राव के बेटे आर गुरू अपने पिता का साथ देने के लिए बिजनेस में शामिल हुए, जिससे दूसरी पीढ़ी की एंट्री उनके कारोबार में हुई।1960-69 तक क्या-क्या किया ?
1960-69 के दौरान 'साइकिल रत्न' (Cycle Ratna) लॉन्च किया गया। फिर यह 'वैल्यू-फॉर-मनी' सेगमेंट में अपनी तरह का पहला प्रोडक्ट था। जब बाजार में एक पैक की कीमत 25 पैसे थी, तब 'साइकिल सुगंध मल्लिका' (Cycle Sugandha Mallika) को एक प्रीमियम पैक के तौर पर लॉन्च किया गया, जिसकी कीमत 10 स्टिक्स के लिए एकरुपया थी।
यह प्रोडक्ट सफल रहा, जिससे साबित हुआ कि दुनिया की पहली जीरो कार्बन | न्यूट्रल निर्माता कंपनी
इसके बाद कंपनी ने कई और ब्रांड पेश किए और पिछले दशक में ये दुनिया की पहली जीरो कार्बन /न्यूट्रल निर्माता कंपनी भी बनी। अपने-अपने अलग ब्रांड्स और सेवाओं के चलते आज ये NR GROUP बन गया है, जिसके प्रोडक्ट्स में ऑयल, फ्रेग्रेंस भी शामिल हैं।ग्राहक अच्छी क्वालिटी के लिए अधिक पैसे देने को तैयार हैं। दक्षिण भारत में बड़े पैमाने पर वैन ऑपरेशन शुरू किए। यह अगरबत्ती इंडस्ट्री में एक अहम पड़ाव और फाउंडर की मार्केटिंग सोच का सबूत था।

image
20 hrs - Translate

पत्नी ने लगाया मेंटेनेंस केस, ल"कवा ग्र"स्त के बाद भी पति को कोर्ट में पेश होना पड़ा कानपुर से सामने आए एक मामले ने न्यायिक प्रक्रिया और पारिवारिक विवादों को लेकर चर्चा छेड़ दी है। गुजारा भ@त्ता (मेंटेनेंस) से जुड़े एक मामले में एक लक@वाग्रस्त युवक को स्ट्रेचर पर अदालत में पेश किया गया। पत्नी ने अदालत मेंदावा किया था कि पति बीमारी का बहाना बनाकर अस्पताल में रह रहा है और गुजारा भत्ता देने से बचना चाहता है। इसके बाद अदालत में उसकी शारीरिक स्थिति प्रस्तुत की गई परिजनों का कहना है कि युवक को ब्रेन हेमरेज के बाद ल@कवा हो गया था और बीते पांच वर्षों से उसका इलाज चल रहा है। उनका यह भी दावा है कि शादी के कुछ समय बाद ही पत्नी अलग हो गई थी और इलाज में कभी सहयोग नहीं किया। परिवार ने अदालत में मेडिकल दस्तावेज भी पेश किए हैं। मामले में दोनों पक्षों के अपने-अपने दावे हैं और अंतिम निर्णय
अदालत द्वारा साक्ष्यों के आधार पर किया जाएगा।

image
20 hrs - Translate

हवा में अचानक 300 फीट नीचे गिरा Air India का विमान ! ऑटोपायलट हुआ डिस्कनेक्ट, एक साथ 3 हाइड्रोलिक फेलियर से मचा हड़कंपइस घटना में 17 यात्री और क्रू सदस्य घायल हुए। विमान को बाद में सुरक्षित तरीके से दिल्ली में उतार लिया गया।
अब इस मामले की जांच में विमान से जुड़ी कई तकनीकी गड़बड़ियों की जानकारी सामने आई है। रिपोर्ट के मुताबिक, घटना के दौरान ऑटोपायलट डिस्कनेक्ट हो गया था, जिसके बाद को-पायलट ने विमान को मैनुअली संभाला। इसके तुरंत बाद फ्लाइट-कंट्रोल से जुड़ा स्टॉल मैसेज भी सामने आया। विमान में कई इंडिकेटर स्विच भी कुछ समय के लिए बंद हुए और इसी दौरान तकनीकी समस्याओं के साथ तेज हवा/टर्बुलेंस का सामना हुआ।
सबसे चौंकाने वाली जानकारी विमान के हाइड्रोलिक सिस्टम को लेकर सामने आई है। रिपोर्ट के अनुसार विमान में तीन हाइड्रोलिक सिस्टम से जुड़ी गड़बड़ियां हुईं। ये सिस्टम विमान के कई महत्वपूर्ण फंक्शंस, जिसमें फ्लाइट कंट्रोल भी शामिल हैं, के लिए बेहद अहम होते हैं। अब जांचकर्ता यह पता लगाने में जुटे हैं कि इन तकनीकी गड़बड़ियों और अचानक 300 फीट नीचे जाने के बीच क्या संबंध था।
फ्लाइट में उस समय 137 यात्री और 8 क्रू सदस्य सवार थे। अचानक विमान के नीचे की तरफ जाने से केबिन में अफरा-तफरी मच गई और कुछ यात्री अपनी सीटों सेउछलकर ऊपर या गलियारे की तरफ जा गिरे। कुल 17 लोगों को चोट लगने की जानकारी सामने आई है, जिनमें चार क्रू सदस्य भी शामिल हैं। कुछ लोगों को गर्दन और रीढ़ से जुड़ी चोटों के कारण अस्पताल में इलाज की जरूरत पड़ी।
मामले को गंभीरता से लेते हुए DGCA ने इसे 'सीरियस इंसिडेंट' के तौर पर वर्गीकृत किया है और Aircraft Accident Investigation Bureau यानी AAIB इसकी जांच कर रहा है। जांच में विमान के फ्लाइट डेटा, कॉकपिट रिकॉर्डिंग और तकनीकी सिस्टम की जानकारी को देखा जाएगा। Airbus के विशेषज्ञ और फ्रांस की विमान दुर्घटना जांच एजेंसी BEA भी भारतीय जांच टीम की मदद करेंगे।
इस घटना के बाद पायलटों की अनिवार्य जांच भी चर्चा में आई है। DGCA के अनुसार पायलट-इन-कमांड के शुरुआती स्क्रीनिंग टेस्ट का परिणाम ऐसा आया जिसे आगे जांच की जरूरत थी। उसका सैंपल कन्फर्मेटरी टेस्ट के लिए भेजा गया है और अंतिम रिपोर्ट का इंतजार है। शुरुआती स्क्रीनिंग अपने आप में किसी नशीले पदार्थ के सेवन की पुष्टि नहीं करती। फिलहाल दोनों पायलटों को उड़ान ड्यूटी से हटा दिया गया है। अब जांच में सबसे बड़ा सवाल यही है कि 300 फीट की अचानक गिरावट

image