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भारतीय सिनेमा जगत के सुप्रसिद्ध अभिनेता, निर्माता-निर्देशक एवं दादा साहब फाल्के पुरस्कार से सम्मानित "राज कपूर जी" की पुण्यतिथि पर उन्हें विनम्र श्रद्धांजलि।
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समृद्ध सांस्कृतिक विरासत, गौरवशाली इतिहास एवं असीम संभावनाओं से परिपूर्ण तेलंगाना राज्य के स्थापना दिवस पर समस्त प्रदेशवासियों को हार्दिक शुभकामनाएं।🙏
अपनी अनूठी कला, परंपराओं व कड़े परिश्रम से देश की प्रगति में महत्वपूर्ण योगदान दे रहा यह प्रदेश निरंतर विकास, समृद्धि और खुशहाली के नए शिखर छुए, यही कामना है।
#तेलंगाना_स्थापना_दिवस
शिक्षक खान सर और पत्रकार अंजना ओम कश्यप के बीच चल रहा ऑनलाइन विवाद अब कोचिंग सेंटरों के मुद्दे से हटकर हिंदी वर्तनी (स्पेलिंग) पर आ गया है।
हाल ही में, अंजना ओम कश्यप ने सोशल मीडिया पर कोचिंग सेंटर के कुछ शिक्षकों की आलोचना करते हुए एक पोस्ट की थी। इसके जवाब में खान सर ने उनकी पोस्ट में एक स्पेलिंग की गलती निकाली और तंज कसते हुए कहा कि यूट्यूब शिक्षकों पर सवाल उठाने वालों को पहले अपनी बुनियादी जानकारी ठीक करनी चाहिए।
इन दोनों के बीच हुई यह बहस सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रही है। इस विवाद पर यूजर्स की प्रतिक्रियाएं बंटी हुई हैं। एक तरफ कुछ लोग खान सर के जवाब का समर्थन कर रहे हैं, तो वहीं दूसरी तरफ कुछ यूजर्स का कहना है कि स्पेलिंग की गलती से ज्यादा छात्रों की वास्तविक समस्याओं पर ध्यान दिया जाना चाहिए। शिक्षा से शुरू हुई यह चर्चा अब मीडिया, शिक्षकों और सार्वजनिक जवाबदेही जैसे बड़े मुद्दों में बदल गई है।
जिनके चरणों की रज पाने कान्हा रहते आतुर:
इस पंक्ति का अर्थ है कि जिन श्री कृष्ण की एक झलक पाने के लिए तीनों लोकों के देवी-देवता, ऋषि-मुनि और चराचर जगत तरसता है, वे स्वयं पूर्ण पुरुषोत्तम भगवान श्री कृष्ण, श्री राधा रानी के चरणों की 'रज' (धूल) को अपने माथे पर लगाने के लिए हमेशा व्याकुल (आतुर) रहते हैं। यह कृष्ण के अहंकार-रहित प्रेम और राधा जी के प्रति उनके परम आदर को प्रकट करता है।
ब्रज की राधा ठकुराइन हैं, राधा ही हैं ठाकुर:
'ठकुरानी' या 'ठकुराइन' का अर्थ है स्वामिनी या मालकिन, और 'ठाकुर' का अर्थ है स्वामी या ईश्वर। इस पंक्ति में कहा गया है कि पूरे ब्रजमंडल की असली स्वामिनी और महारानी श्री राधा जी ही हैं। इतना ही नहीं, जो कृष्ण पूरे संसार के 'ठाकुर' (स्वामी) हैं, उन कृष्ण की ठाकुर भी स्वयं राधा रानी ही हैं। अर्थात, श्री कृष्ण भी राधा जी के प्रेम और इच्छा के अधीन होकर ही लीलाएं करते हैं।
निष्कर्ष:
संक्षेप में कहें तो यह दोहा यह संदेश देता है कि ब्रज की भक्ति में प्रेम का स्थान ऐश्वर्य (भगवान की शक्ति) से भी ऊपर है। यहाँ भगवान अपने भक्त और अपनी शक्ति (राधा) के सामने खुद को समर्पित कर देते हैं, जिससे सिद्ध होता है कि राधा और कृष्ण में कोई भेद नहीं है—राधा ही कृष्ण हैं और कृष्ण ही राधा हैं।
राधे राधे
मार्गदर्शक - श्री हित प्रेमानंद गोविंद शरण जी महाराज
प्रेरणास्त्रोत - श्री श्री १०८ श्री स्वामी हरिहरानंद जी महाराज , होलीपुरा