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#todaypost #त्रासदी #नेपाल #आपदl

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वाह दीदी वाह!

कृति जी, सवाल सिर्फ इतना है कि जब ईद थी तो आपने सिर से लेकर पैर तक खुद को ढक रखा था, लेकिन रक्षाबंधन के विज्ञापन की शूटिंग में इनरवियर जैसे परिधान में भाई को राखी बांधते हुए नजर आईं।

त्योहार अलग-अलग हो सकते हैं, लेकिन क्या पहनावे और मर्यादा के ये अलग-अलग मापदंड सिर्फ विज्ञापन और धर्म के हिसाब से तय होने चाहिए?

इसे लोग दोहरा व्यवहार क्यों न समझें? सवाल पूछना गलत नहीं है—बस जवाब ईमानदारी से मिलना चाहिए। See less

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🏠 बुजुर्ग माता-पिता को सताया तो संपत्ति से हो सकते हैं बेदखल!

उत्तर प्रदेश की योगी सरकार ने बुजुर्गों के अधिकारों को लेकर बड़ा कदम उठाया है। कैबिनेट ने उत्तर प्रदेश माता-पिता और वरिष्ठ नागरिकों का भरण-पोषण तथा कल्याण नियमावली-2014 में संशोधन को मंजूरी दी है।

नए प्रावधानों के तहत अगर संतान या आश्रित रिश्तेदार बुजुर्गों की देखभाल नहीं करते या उनके साथ दुर्व्यवहार करते हैं, तो वरिष्ठ नागरिक उन्हें अपनी संपत्ति से बेदखल कराने की कार्रवाई कर सकेंगे।

बुजुर्ग अपनी शिकायत जिला मजिस्ट्रेट (DM) के सामने दर्ज करा सकेंगे और 30 दिनों के भीतर सुनवाई पूरी करने का प्रावधान है। जो बुजुर्ग खुद कार्यालय नहीं जा सकते, उनके लिए टोल-फ्री हेल्पलाइन शुरू करने की तैयारी है।

सरकार का कहना है कि इस व्यवस्था का मकसद बुजुर्गों को सुरक्षा, सम्मान और बेहतर जीवन देना है।

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बॉलीवुड के मशहूर निर्देशक कुकू कोहली का नि,धन, फिल्म जगत में शोक

‘फूल और कांटे’ जैसी सुपरहिट फिल्म के निर्देशक कुकू कोहली का मुंबई के कोकिलाबेन धीरूभाई अंबानी अस्पताल में निधन हो गया। बताया गया कि एक दिन पहले ही उनकी सफल स्टेंट प्रक्रिया हुई थी, जिसके बाद अचानक हार्ट अटैक आने से उनका नि,धन हो गया।

कुकू कोहली को अजय देवगन का गॉडफादर भी माना जाता है। उन्होंने साल 1991 में ‘फूल और कांटे’ के जरिए अजय देवगन को बॉलीवुड में लॉन्च किया था। इसके अलावा उन्होंने ‘सुहाग’, ‘हकीकत’ और ‘अनाड़ी नंबर वन’ जैसी फिल्मों का भी निर्देशन किया।

फिल्ममेकर अशोक पंडित ने कुकू कोहली के निधन की पुष्टि की। साल 1990 में उन्होंने अभिनेत्री अरुणा ईरानी से शादी की थी।

फिल्म जगत ने एक प्रतिभाशाली निर्देशक को खो दिया।
ईश्वर दिवंगत आत्मा को शांति प्रदान करें। भावपूर्ण श्रद्धांजलि। See less

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दोनों हाथ नहीं, फिर भी पैर की उंगलियों से बच्चों का भविष्य संवार रहे शिक्षक

झारखंड के धनबाद के गोविंदपुर स्थित उर्दू प्राथमिक विद्यालय में सहायक शिक्षक मो. अकबर अंसारी दोनों हाथ न होने के बावजूद पैर की उंगलियों से ब्लैकबोर्ड पर लिखकर बच्चों को पढ़ाते हैं।

बचपन से दिव्यांगता और सामाजिक तानों का सामना करने के बावजूद उन्होंने पढ़ाई जारी रखी। 1999 में मैट्रिक, 2001 में इंटर और 2009 में IGNOU से ग्रेजुएशन पूरा किया। दिसंबर 2005 से वे इसी स्कूल में लगातार सेवाएं दे रहे हैं।

शुरुआत में 2 हजार रुपये के मानदेय से सफर शुरू करने वाले अकबर अंसारी आज 20 हजार रुपये मानदेय पर पत्नी और तीन बच्चों का पालन-पोषण कर रहे हैं। करीब 20 साल की सेवा के बाद भी उन्हें स्थायी शिक्षक का दर्जा नहीं मिला है।

मुश्किलें कितनी भी हों, हौसला हो तो रास्ता जरूर निकलता है। See less

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