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सहजता और सरलता की प्रतिमूर्ति, भारत की माननीय राष्ट्रपति आदरणीया श्रीमती द्रौपदी मुर्मू जी को जन्मदिवस की हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएं।

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ਪੰਜਾਬ ਕਾਂਗਰਸ ਆਬਜ਼ਰਵਰਾਂ ਨੇ ਹਾਈਕਮਾਨ ਨੂੰ ਸੌਂਪੀ ਫੀਡਬੈਕ ਰਿਪੋਰਟ
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ओमान के ‘हिंदू शेख’ कनकसी खिमजी: एक ऐसी शख्सियत जिन्हें दुनिया का इकलौता हिंदू शेख कहा जाता है
दुनिया में जब भी शेख शब्द का नाम लिया जाता है, तो आमतौर पर लोगों के मन में अरब देशों के मुस्लिम शासकों, व्यापारियों या प्रभावशाली परिवारों की छवि उभरती है। लेकिन क्या आप जानते हैं कि दुनिया में एक ऐसे व्यक्ति भी हैं जिन्हें “हिंदू शेख” के नाम से जाना जाता है? जी हां, हम बात कर रहे हैं ओमान के प्रसिद्ध उद्योगपति **शेख कनकसी खिमजी (Kanaksi Khimji)** की, जिन्हें दुनिया का एकमात्र हिंदू शेख माना जाता है।
यह कहानी केवल एक सफल व्यवसायी की नहीं है, बल्कि मेहनत, ईमानदारी, विश्वास और पीढ़ियों तक कायम रिश्तों की कहानी है। कनकसी खिमजी का नाम ओमान के सबसे प्रतिष्ठित परिवारों में गिना जाता है। उनका परिवार मूल रूप से भारत से जुड़ा हुआ है, लेकिन कई पीढ़ियों से ओमान में रहकर वहां के विकास और व्यापार में महत्वपूर्ण योगदान देता आया है।
### भारत से ओमान तक का सफर
खिमजी परिवार की जड़ें भारत के गुजरात और राजस्थान क्षेत्र से जुड़ी मानी जाती हैं। कई दशक पहले उनके पूर्वज व्यापार के उद्देश्य से ओमान पहुंचे थे। उस समय खाड़ी देशों में व्यापार के अवसर बढ़ रहे थे और भारतीय व्यापारी अपनी मेहनत और व्यापारिक समझ के कारण तेजी से पहचान बना रहे थे।
खिमजी परिवार ने भी छोटे स्तर से अपना व्यापार शुरू किया। धीरे-धीरे उन्होंने ईमानदारी, भरोसे और उत्कृष्ट सेवाओं के दम पर ओमान के बाजार में अपनी मजबूत पहचान बना ली। समय के साथ उनका कारोबार कई क्षेत्रों में फैल गया और वे ओमान के सबसे बड़े कारोबारी समूहों में शामिल हो गए।
### खिमजी रामदास समूह की सफलता
आज **Khimji Ramdas Group** ओमान के सबसे बड़े और पुराने व्यावसायिक समूहों में से एक है। यह समूह उपभोक्ता उत्पाद, स्वास्थ्य सेवा, निर्माण, ऊर्जा, यात्रा, लॉजिस्टिक्स, ऑटोमोबाइल और कई अन्य क्षेत्रों में कार्य करता है।
हजारों लोगों को रोजगार देने वाला यह समूह ओमान की अर्थव्यवस्था में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। कंपनी की सफलता का सबसे बड़ा कारण उसके मूल मूल्य हैं—विश्वास, गुणवत्ता और दीर्घकालिक संबंध।
कनकसी खिमजी ने न केवल इस विरासत को आगे बढ़ाया, बल्कि आधुनिक व्यापारिक सोच के साथ इसे नई ऊंचाइयों तक पहुंचाया। उनके नेतृत्व में कंपनी ने कई नए क्षेत्रों में विस्तार किया और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी अपनी पहचान मजबूत की।

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अंतरराष्ट्रीय योग दिवस के पूर्व भोपाल के टीटी नगर स्टेडियम में आयोजित योगाभ्यास कार्यक्रम में केंद्रीय रक्षा राज्य मंत्री श्री संजय सेठ जी एवं खेल एवं युवा कल्याण मंत्री श्री विश्वास कैलाश सारंग जी सम्मिलित हुए।
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अंतरराष्ट्रीय योग दिवस के पूर्व भोपाल के टीटी नगर स्टेडियम में आयोजित योगाभ्यास कार्यक्रम में केंद्रीय रक्षा राज्य मंत्री श्री संजय सेठ जी एवं खेल एवं युवा कल्याण मंत्री श्री विश्वास कैलाश सारंग जी सम्मिलित हुए।
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अंतरराष्ट्रीय योग दिवस के पूर्व भोपाल के टीटी नगर स्टेडियम में आयोजित योगाभ्यास कार्यक्रम में केंद्रीय रक्षा राज्य मंत्री श्री संजय सेठ जी एवं खेल एवं युवा कल्याण मंत्री श्री विश्वास कैलाश सारंग जी सम्मिलित हुए।
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15th Federation Cup 🏆🏆🏆 65 kg
Bodybuilding & Men Physique Championship 💪💪 12-13june 2026 ludhiana ✌️✌️

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15th Federation Cup 🏆🏆🏆 65 kg
Bodybuilding & Men Physique Championship 💪💪 12-13june 2026 ludhiana ✌️✌️

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15th Federation Cup 🏆🏆🏆 65 kg
Bodybuilding & Men Physique Championship 💪💪 12-13june 2026 ludhiana ✌️✌️

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हनुमान चालीसा भाव यात्रा के गतांक में हमने शंकर सुवन केसरी नंदन चौपाई का भाव समझा था। हमने जाना कि श्रीहनुमानजी केवल बल और पराक्रम के प्रतीक नहीं, बल्कि तेजस्विता, उत्साह, समर्पण और प्रभुकार्य के लिए पूर्णतः समर्पित जीवन के आदर्श हैं। उनका सम्पूर्ण जीवन यह सिखाता है कि जो अपने लिए नहीं, प्रभु और समाज के लिए जीता है, वही वास्तव में वंदनीय बनता है।
पिछली चौपाई थी —
॥ शंकर सुवन केसरी नंदन ।
तेज प्रताप महा जग वंदन ॥
और आज हम हनुमान चालीसा की अत्यंत महत्वपूर्ण चौपाई का भाव समझने का प्रयास करेंगे —
॥ विद्यावान गुनी अति चातुर ।
राम काज करिबे को आतुर ॥
अर्थात — श्रीहनुमानजी महान विद्वान, गुणवान, अत्यंत बुद्धिमान और कार्यकुशल हैं तथा सदैव प्रभु श्रीराम के कार्य के लिए आतुर रहते हैं।
तुलसीदासजी यहाँ केवल हनुमानजी की प्रशंसा नहीं कर रहे… वे हमें यह समझा रहे हैं कि सच्चा भक्त केवल भावुक नहीं होता, बल्कि विद्वान, गुणवान, विवेकशील और कर्मशील भी होता है।
हनुमानजी को भगवान सूर्यदेव से समस्त विद्याओं की प्राप्ति हुई थी। जब उनकी आयु शिक्षा ग्रहण करने योग्य हुई तब माता अंजना और पिता केसरी ने उन्हें गुरु के पास भेजने का निश्चय किया। यद्यपि वे जानते थे कि उनका पुत्र असाधारण है, फिर भी उन्होंने संसार को मर्यादा का संदेश देने के लिए गुरु-शिष्य परंपरा का पालन किया। यही भारतीय संस्कृति की सुंदरता है — महानतम अवतार भी गुरु के चरणों में बैठकर ही ज्ञान ग्रहण करते हैं।
जब हनुमानजी सूर्यदेव के पास पहुँचे और विनम्रता से विद्या देने की प्रार्थना की, तब सूर्यदेव ने कहा — मैं निरंतर आकाश में गतिशील रहता हूँ, रथ से उतर नहीं सकता, तुम्हें शिक्षा कैसे दूँ?
लेकिन हनुमानजी ने तुरंत उत्तर दिया — प्रभो! मैं आपके सम्मुख उड़ते हुए ही शिक्षा ग्रहण कर लूँगा।

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