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दमोह जिला अस्पताल में मरीज के परिजन से पोंछा लगवाने का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है. वीडियो में फर्श साफ करती दिखाई दे रही महिला मरीज की मां बताई जा रही है. दरअसल, तेजगढ़ क्षेत्र के सिमरिया गांव की रहने वाली 58 वर्षीय हल्की बहू अपने बीमार बेटे का इलाज कराने रात के समय जिला अस्पताल पहुंची थीं. महिला के अनुसार, उनके बेटे को डायरिया की शिकायत थी. बताया जा रहा है कि इलाज के दौरान मरीज द्वारा अस्पताल के फर्श पर गंदगी फैल गई. इसके बाद अस्पताल कर्मियों ने सफाईकर्मी बुलाने के बजाय महिला से ही फर्श साफ करने के लिए कह दिया. #madhyapradesh #videoviral #damoh #mother #viralnews
क्या आपने कभी एक साथ बजते हजारों ढोल-ताशों की गूंज से रोंगटे खड़े कर देने वाले दृश्य की कल्पना की है? महाराष्ट्र की सांस्कृतिक राजधानी पुणे में हाल ही में एक ऐसा ही ऐतिहासिक और भव्य नजारा देखने को मिला, जिसने विश्व कीर्तिमान स्थापित कर दिया है।
उपलब्ध जानकारी के अनुसार, धर्मवीर छत्रपति संभाजी महाराज को समर्पित इस विशेष आयोजन में 151 पथकों के लगभग 5,000 कलाकार एकत्र हुए। कार्यक्रम के दौरान 4,112 ढोल वादकों ने लगातार पांच मिनट तक पूरे अनुशासन और तालमेल के साथ एक ही लय में वादन कर पिछला रिकॉर्ड तोड़ दिया। इस अभूतपूर्व प्रस्तुति ने पूरे माहौल को जोश से भर दिया।
यह ऐतिहासिक उपलब्धि सिर्फ एक रिकॉर्ड भर नहीं, बल्कि महाराष्ट्र की समृद्ध परंपरा, अनुशासन और सामूहिक एकता का शानदार प्रदर्शन है। इतनी बड़ी संख्या में कलाकारों का एक सुर में वादन हमारी जीवंत लोकसंस्कृति की अटूट शक्ति को दर्शाता है।
क्या आपने कभी सफेद बर्फ की मोटी चादर में लिपटे श्री केदारनाथ धाम की अलौकिक सुंदरता को देखा है? सर्दियों के मौसम में उच्च हिमालय में स्थित इस पावन धाम से सामने आए शीतकालीन दृश्य हर श्रद्धालु के मन को शांति और भक्ति से भर रहे हैं।
कड़ाके की ठंड और बर्फबारी के चलते मंदिर परिसर पूरी तरह बर्फ से ढक चुका है। चारों ओर फैली ऊंची बर्फीली चोटियों के बीच खड़ा यह पावन मंदिर बेहद शांत और मनमोहक प्रतीत होता है। सोशल मीडिया पर लोग इन तस्वीरों को देखकर भगवान शिव के इस रूप पर मुग्ध हैं।
कपाट बंद होने के बाद भी श्रद्धालु इन मनभावन दृश्यों के माध्यम से बाबा केदार के अलौकिक स्वरूप के दर्शन कर रहे हैं। प्रकृति का यह श्वेत रूप हिमालय की भव्यता और गहरी आस्था का अद्भुत संगम प्रस्तुत करता है।
क्या आपने कभी दुर्लभ और मनमोहक दिखने वाले गुलाबी रंग के नन्हे हाथी के बच्चे को देखा है? प्रकृति की अद्भुत रचनाओं में शामिल यह प्यारा सा शिशु हाथी अपनी अनोखी रंगत की वजह से लोगों का ध्यान खींच रहा है।
विशेषज्ञों के अनुसार, ऐसे नन्हे हाथियों का यह हल्का गुलाबी रंग त्वचा में बहुत कम पिग्मेंटेशन के कारण होता है। जन्म के बाद जैसे-जैसे ये बड़े होते हैं, इनकी त्वचा के रंग में थोड़ा बदलाव आ सकता है, लेकिन कई हिस्सों में गुलाबीपन बना रहता है। यह नन्हा जीव अपनी मां और पूरे झुंड के करीब रहकर जीवन के जरूरी तरीके सीखता है।
दिलचस्प बात यह है कि हर गुलाबी दिखने वाला हाथी पूरी तरह एल्बिनो नहीं होता। वन्यजीवों की ऐसी दुर्लभ झलकियां प्रकृति की अनूठी विविधता और सुंदरता को बेहद खूबसूरती से दर्शाती हैं।