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श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र परिसर के परकोटा के वायव्य कोण पर बने मां भगवती मंदिर के शिखर पर पूज्या साध्वी ऋतंभरा जी ने दुर्गा वाहिनी की पदाधिकारी बहनों के साथ ध्वाजारोहण किया।
इस अवसर पर न्यासीगण, वरिष्ठ पदाधिकारी, अपर संख्या में मातृशक्ति और विशिष्ट जन उपस्थित रहे।
At the north-western corner of the outer precinct of the Shri Ram Janmabhoomi Teerth Kshetra complex, Pujya Sadhvi Ritambhara Ji, along with office-bearer sisters of the Durga Vahini, hoisted the sacred dhwaja atop the shikhara of the Maa Bhagwati Mandir.
On this occasion, trustees, senior office-bearers, a large gathering of women devotees, and other
श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र परिसर के परकोटा के वायव्य कोण पर बने मां भगवती मंदिर के शिखर पर पूज्या साध्वी ऋतंभरा जी ने दुर्गा वाहिनी की पदाधिकारी बहनों के साथ ध्वाजारोहण किया।
इस अवसर पर न्यासीगण, वरिष्ठ पदाधिकारी, अपर संख्या में मातृशक्ति और विशिष्ट जन उपस्थित रहे।
At the north-western corner of the outer precinct of the Shri Ram Janmabhoomi Teerth Kshetra complex, Pujya Sadhvi Ritambhara Ji, along with office-bearer sisters of the Durga Vahini, hoisted the sacred dhwaja atop the shikhara of the Maa Bhagwati Mandir.
On this occasion, trustees, senior office-bearers, a large gathering of women devotees, and other
श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र परिसर के परकोटा के वायव्य कोण पर बने मां भगवती मंदिर के शिखर पर पूज्या साध्वी ऋतंभरा जी ने दुर्गा वाहिनी की पदाधिकारी बहनों के साथ ध्वाजारोहण किया।
इस अवसर पर न्यासीगण, वरिष्ठ पदाधिकारी, अपर संख्या में मातृशक्ति और विशिष्ट जन उपस्थित रहे।
At the north-western corner of the outer precinct of the Shri Ram Janmabhoomi Teerth Kshetra complex, Pujya Sadhvi Ritambhara Ji, along with office-bearer sisters of the Durga Vahini, hoisted the sacred dhwaja atop the shikhara of the Maa Bhagwati Mandir.
On this occasion, trustees, senior office-bearers, a large gathering of women devotees, and other

इस्लाम के आगमन से पहले अरब देशों में बहुदेववाद और मूर्ति पूजा का प्रचलन था। उस दौर में मक्का, मदीना और आसपास के क्षेत्रों में कई जनजातियां अपने-अपने देवी-देवताओं की पूजा करती थीं। मक्का स्थित काबा उस समय भी एक बड़ा धार्मिक केंद्र माना जाता था, जहां 360 मूर्तियां स्थापित थीं और हर जनजाति की अपनी अलग पहचान जुड़ी हुई थी।
प्राचीन अरब की तीन प्रमुख देवियां अल-लात, अल-उज्जा और मनात थीं, जिन्हें लोग ईश्वर की बेटियां मानते थे। मान्यता थी कि ये देवियां सुख, समृद्धि, शक्ति, प्रेम, भाग्य और मृत्यु जैसी शक्तियों की स्वामिनी हैं। अल-लात को धरती और समृद्धि की देवी माना जाता था, अल-उज्जा को युद्ध और शक्ति की देवी, जबकि मनात को भाग्य और मृत्यु की देवी के रूप में पूजा जाता था।
उस समय काबा केवल पूजा का ही नहीं, बल्कि व्यापार और सामाजिक मेल-जोल का भी प्रमुख केंद्र था। यहां विभिन्न जनजातियां धार्मिक आस्था के साथ-साथ व्यापारिक गतिविधियों के लिए भी एकत्रित होती थीं। काबा में मौजूद सबसे प्रमुख देवता हुबल को युद्ध और वर्षा का देवता माना जाता था।
इतिहासकारों के अनुसार, इस्लाम से पहले के इस दौर को ‘जाहिलिया’ का काल कहा जाता है। बाद में पैगंबर मोहम्मद और उनके अनुयायियों ने मक्का पर विजय प्राप्त करने के बाद काबा से सभी मूर्तियों को हटा दिया। इसके साथ ही अरब में बहुदेववाद का अंत हुआ और एकेश्वरवाद यानी केवल एक अल्लाह की इबादत की परंपरा शुरू हुई।
कैलिफ़ोर्निया के 14 वर्षीय भारतीय मूल के श्रेय पारिख ने 2026 Scripps National Spelling Bee का खिताब जीतकर इतिहास रच दिया। फाइनल के रोमांचक स्पेल-ऑफ राउंड में उन्होंने सिर्फ 90 सेकेंड में 32 शब्दों की सही स्पेलिंग बताकर जीत अपने नाम की। श्रेय इससे पहले भी प्रतियोगिता में हिस्सा ले चुके थे, लेकिन इस बार उन्होंने शानदार वापसी करते हुए ट्रॉफी के साथ करीब ₹41.5 लाख की इनामी राशि भी जीती।
• प्रतियोगिता: Scripps National Spelling Bee 2026
• विजेता: श्रेय पारिख
• उम्र: 14 वर्ष
• स्थान: कैलिफ़ोर्निया, अमेरिका
• फाइनल मुकाबला: ईशान गुप्ता के खिलाफ
• स्पेल-ऑफ रिकॉर्ड: 90 सेकेंड में 32 सही शब्द
• ईशान गुप्ता का स्कोर: 25 सही शब्द
• इनाम राशि: $50,000 (करीब ₹41.5 लाख)
• 2024 में श्रेय तीसरे स्थान पर रहे थे
• 2025 में बुखार के कारण क्वालिफाइंग राउंड हार गए थे
• प्रतियोगिता में केवल 8वीं तक के छात्र हिस्सा ले सकते हैं
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