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लोगों की परवाह छोड़ गुजरात के सूरत में एक पिता ने बेटी की इज्जत को सर्वोपरि रखा। रमेश वर्मा ने बैंड-बाजे के साथ ससुराल पहुंचकर बेटी प्रिया को विदा कराया, जब ससुराल वालों ने दहेज के लालच में जुल्म किया। रमेश ने कहा, "उम्र भर खिलाऊंगा, पढ़ाऊंगा, लेकिन बेटी का अपमान कभी नहीं सहूंगा। समाज ताने मारे, पर बेटी मेरी राजकुमारी है।"
ससुराल का अत्याचार
25 साल की प्रिया की शादी तीन साल पहले सूरत के व्यापारी परिवार में हुई। शुरू में सब ठीक था, लेकिन सास-ससुर, पति ने दहेज की मांग शुरू कर दी – कार, सोने के जेवर, लाखों रुपये। मारपीट हुई, प्रिया को घर से निकाल दिया। रोती हुई मायके लौटी प्रिया ने पिता से कहा, "पापा, अब नहीं जाऊंगी।" रमेश ने ससुरालवालों से बात की, लेकिन जवाब मिला, "वापस आना है तो 20 लाख लाना।" रमेश का खून खौल गया।
धूमधाम विदाई का फैसला
रविवार को रमेश 50 दोस्तों-रिश्तेदारों के साथ ढोल-नगाड़े, फूलों की माला लेकर ससुराल पहुंचे। प्रिया को दुल्हन की तरह सजाया – मेहंदी, चूड़ा, बिंदी। ससुराल वाले शर्म से पानी-पानी हो गए। रमेश ने कहा, "यह विदाई तुम्हारी औलाद की है। जुल्म का हिसाब भुगतो।" प्रिया ने आंसू भरी मुस्कान से विदा ली। पूरा वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल, करोड़ों व्यूज। रमेश बोले, "40 साल नौकरी की कमाई से बेटी का घर बनाऊंगा।"
समाज और फैंस की तारीफ
फेसबुक-इंस्टाग्राम पर तारीफों की बौछार: "ट्रू फादर!", "बेटी बचाओ का असली चेहरा।" कुछ ने ताने दिए, "ड्रामा है।" रमेश का जवाब, "बेटी का आंसू मेरे लिए सबसे बड़ा दर्द। अब लोग क्या कहेंगे, कोई फर्क नहीं।" प्रिया अब नर्सिंग कोर्स कर रही, नया जीवन शुरू। ससुराल ने तलाक पेपर भेजे, लेकिन रमेश बोले, "खुशी ही सबसे बड़ा बदला।"
पिता का सशक्त संदेश
यह घटना बेटी शोषण के खिलाफ जागरूकता फैला रही। गुजरात-राजस्थान में दहेज के केस बढ़ रहे, लेकिन रमेश जैसा हौसला कम। प्रिया बोली, "पापा मेरे रियल हीरो।" रमेश कहते, "शादी के बाद भी बाप का हक है। बेटी को राज बनाओ, जुल्म मत सहो।" यह कहानी हर पिता को प्रेरित करेगी – समाज के डर से ऊपर उठो, बेटी की इज्जत पहला धर्म!
जम्मू-कश्मीर के उधमपुर जिले में भारतीय सेना ने मानवता की नई मिसाल पेश की है। बर्फ से ढंके गांव के अंदर सेना के जवान दो डॉक्टरों को लेकर पहुंचे और महिला को इलाज उपलब्ध कराया, जिससे उसकी जान बची। पहाड़ियों के बीच बर्फ से ढके गांव में सेना के जवानों ने 24 वर्षीय महिला को आपातकालीन चिकित्सा सहायता प्रदान की। रक्षा प्रवक्ता ने बुधवार को बताया कि प्रसव पीड़ा के बाद महिला को कुछ समस्याएं हुईं और उसकी तबीयत बिगड़ रही थी। ऐसे में सेना के जवान मुश्किल हालातों में मेडिकल टीम को लेकर घर तक पहुंचे।
राजस्थान के एक अभ्यर्थी ने 6 साल की कड़ी मेहनत और 13 असफलताओं के बाद आखिरकार जीत हासिल की। वर्ष 2025 में उसने पुलिस कांस्टेबल, चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी और ड्राइवर तीनों परीक्षाओं में सफलता पाई। आरएसएसबी (RSS अध्यक्ष आलोक राज ने इस कहानी को साझा करते हुए युवाओं को "डटे रहने" की सलाह दी है।
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