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ये है मोदी जी की कूटनीति का दम!

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कोविड काल में घर के भीतर शुरू हुआ सूरत की वरेन्या (11 वर्ष) और प्राज्ञिका (8 वर्ष) का यह सफर आज ऐतिहासिक सफलताओं की दास्तान बन चुका है। अपनी बिसात पर चली गई उनकी हर चाल भारत के सुनहरे और विजयी भविष्य की कहानी लिख रही है।

सर्बिया में आयोजित 'फाइड वर्ल्ड स्कूल चेस चैंपियनशिप 2025' में छोटी बहन प्राज्ञिका ने 9 में से 9 अंक हासिल कर विश्व चैंपियन का खिताब जीतकर पूरी दुनिया को चौंका दिया! वरेन्या के मार्गदर्शन और माता-पिता के अतुलनीय त्याग ने इन दोनों बहनों को '230 से अधिक ट्रॉफियों' का मालिक बना दिया है।

उनकी दिनचर्या सुबह 4 बजे शुरू होती है, जिसमें घंटों का कड़ा अभ्यास और मानसिक शक्तिशाली ट्रेनिंग शामिल है। माता-पिता ने अपनी जमापूंजी और समय इन बेटियों के फौलादी सपनों पर दांव पर लगा दिया, जिसका सुखद परिणाम आज पूरा देश देख रहा है। प्राज्ञिका को उनकी अदम्य प्रतिभा के लिए 'प्रधानमंत्री राष्ट्रीय बाल पुरस्कार 2025' से भी नवाजा जा चुका है।

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