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काली माता के चमत्कारी मंत्र, कुन्जिका स्तोत्र
दुर्गाजी का एक रुप कालीजी है। यह देवी विशेष रुप से शत्रुसंहार, विघ्ननिवारण, संकटनाश और सुरक्षा की अधीश्वरी है।महाकाली भगवती कालिका अर्थात काली के अनेक स्वरुप, अनेक मन्त्र तथा अनेक उपासना विधियां है। यथा-श्यामा, दक्षिणा कालिका (दक्षिण काली) गुह्म काली, भद्रकाली, महाकाली आदि ।
दशमहाविद्यान्तर्गत भगवती दक्षिणा काली
(दक्षिणकालीका) की उपासना की जाती है।इनकी उपासना सुरक्षा, शौर्य, पराक्रम, युद्ध, विवाद और प्रभाव विस्तर के संदर्भ में की जाती है। कालीजी की रुपरेखा भयानक है। देखकर सहसा रोमांच होआता है। पर वह उनका दुष्टदलन रुप है।

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तुलजाभवानी - भवानिअष्टक-उपासना
मां तुलजा जागृत स्वरुप हे ये ध्यान देवे
सर्वमंगल मांगल्ये शिवे सवार्थ साधिके शरण्येत्र्यंबके गौरी नारायणी नमोस्तुते "
महाराष्ट्र के तुलजापुरमे माता तुलजा भवानी का अद्भुत चमत्कारी मंदिर स्थित है। महामाया ने कात्यायनी स्वरूप धारण करके महिषासुर का वध किया और भक्तोंकी भावना स्वीकार कर इस पर्वत पर चिर स्थान लिया। अष्टभुजावाली माता तुलजाभवानी को महिषासुरमर्दिनी नाम से भी जाना जाता है। माता की इस मूर्ति को एक जगह से दूसरी जगह पर भी ले जाया सकता है। इस मंदिर के मुख्य भवन के पूर्व में शयनकक्ष है जिसमे सोने के लिए चांदी से बनाया हुआ पलंग है।
साल में तीन बार माता इस शयनकक्ष में विश्राम करती है। इस तरह की परमपरा केवल इसी मंदिर है अन्य किसी भी जगह पर इस तरह की प्रथा नहीं। इस मन्दिर के गुबंद पर सुन्दर नक्काशी बनायीं गयी है।
माता की मूर्ति की स्थापना श्रीयंत्र पर आदि शंकराचार्यजी ने की थी। देवी की इस मूर्ति की सबसे खास बात यह है की माता की मूर्ति केवल एक ही जगह पर स्थापित नहीं की गयी। इसका मतलब देवी की इस मूर्ति को दूसरी जगह पर भी रखा जा सकता है, देवी की मूर्ति किसी भी दिशा में रखी जा सकती है।
इसलिए इस मूर्ति को चल मूर्ति भी कहा जाता है। साल में तीन बार देवी की मूर्ति को मंदिर के बाहर निकाला जाता है क्यों की साल के तीन दिन काफी विशेष माने जाते है और इन अवसर पर देवी को परिक्रमा करने लिए मंदिर के बाहर निकाला जाता है और मंदिर के चारो तरफ़ माता की मूर्ति को घुमाया जाता है।

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हमारे प्रिय श्री नरेश जी सैनी पूर्व पार्षद वार्ड 01 आप जैसे मिलनसार, हँसमुख और समाज में सबको साथ लेकर चलने वाले सज्जन पुरुष आज हमारे बीच नहीं रहे।
हमारे लिए सबसे बड़ी क्षति है।हमारी टीम का सबसे मजबूत साथी को हमने खो दिया है
आपका स्थान कोई नहीं ले पाएगा 😭
आपका जाना बहुत बड़ी घटना है।
ईश्वर उन्हें अपने श्री चरणों में स्थान दे और उनके परिवार, उनके चाहने वालों को यह है दुख सहन करने की क्षमता दे।
ओम शांति। ओम शांति। ओम शांति।
🙏🙏ॐ शांति ॐ शांति ॐ शांति 🙏🙏

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त्याग, तपस्या एवं पवित्रता की प्रतिमूर्ति जनक नंदनी माता सीता के प्राकट्य दिवस जानकी नवमी की आप सभी को हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएं।

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India’s Home Ministry Decision Sparks Discussion
A significant decision by India’s Home Ministry, led by Amit Shah, has drawn attention regarding relief for certain migrant communities. According to reports, non-Muslim migrants from Afghanistan, Bangladesh, and Pakistan may be allowed to stay in India without requiring valid passports or travel documents, provided they meet specific conditions.
The provision is said to apply to Hindus, Sikhs, Buddhists, Jains, Parsis, and Christians who are believed to have migrated due to religious persecution and entered India before a defined cut-off date. It also includes individuals whose documents have expired or those who arrived without proper documentation.
This move is linked to the framework of the Citizenship Amendment Act, which aims to provide a structured pathway toward citizenship for eligible individuals. Supporters see it as a humanitarian step designed to offer protection and stability to persecuted minorities.
At the same time, the policy continues to be part of ongoing public discussion, reflecting broader debates around citizenship, inclusion, and national policy. It highlights how decisions of this scale carry both social and political significance in shaping the country’s future.
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राष्ट्रीय चेतना के प्रखर स्वर ‘राष्ट्रकवि’ रामधारी सिंह ‘दिनकर’ की पुण्यतिथि पर विनम्र श्रद्धांजलि।

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निस्वार्थ भक्ति और भगवान का ऋण
यह कथा एक ऐसे निस्वार्थ भक्त की है जिसने जीवन भर भगवान का नाम जपा, लेकिन कभी अपने लिए कुछ नहीं माँगा। एक दिन बांके बिहारी मंदिर में भगवान के दर्शन न होने पर वे अत्यधिक व्यथित हो गए। उन्हें लगा कि शायद उनके पाप बढ़ गए हैं, इसलिए वे आत्मग्लानि में यमुना में प्राण त्यागने चल दिए।
तभी अंतर्यामी भगवान ने एक लीला रची। उन्होंने एक कोढ़ी को उस भक्त से आशीर्वाद लेने भेजा। भक्त ने स्वयं को 'पापी' मानते हुए अनमने भाव से कोढ़ी को स्वस्थ होने का आशीर्वाद दिया और चमत्कारिक रूप से वह कोढ़ी ठीक हो गया। उसी क्षण भगवान प्रकट हुए।
भगवान ने प्रकट होकर रहस्य उजागर किया कि भक्त की निष्काम भक्ति के कारण भगवान उन पर 'ऋणी' हो गए थे। भक्त के पुण्य इतने बढ़ गए थे कि भगवान उनके सामने आने में संकोच कर रहे थे। कोढ़ी को आशीर्वाद देकर भक्त ने अपने पुण्यों का कुछ अंश खर्च कर दिया, जिससे भगवान थोड़े ऋण-मुक्त हुए और अपने प्रिय भक्त को दर्शन दे पाए।
सीख: निस्वार्थ भाव से की गई भक्ति भगवान को भी प्रेम के बंधन में बाँध देती है।
राधे राधे
मार्गदर्शक - श्री हित प्रेमानंद गोविंद शरण जी महाराज
प्रेरणास्त्रोत - श्री श्री १०८ श्री स्वामी हरिहरानंद जी महाराज , होलीपुरा

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