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ये है शुभंकर मिश्रा नाम पर मत जाओ दलाल जिनको सिर्फ पैसों और व्यूज की भूख हो वो किसी भी स्तर तक गिर सकता है... लगातार वीडियो पर वीडियो बना रहा है प्रेमानंद जी महाराज पर और बिना किसी पुलिस जांच के या बिना किसी पुलिस के statement के खुद न्यायाधीश बनकर फैसला कर रहा है अपने स्टूडियो में बैठकर यहां तक नहीं रुका ये प्रेमानंद जी महाराज के आश्रम को सीधा राम रहीम के आश्रम के साथ जोड़ दिया ये नीच धूर्त सिर्फ व्यूज के लिए इस स्तर तक गिरेगा कभी सोचा ना था
कोई सबूत कुछ भी ना पुलिस के द्वारा कुछ सामने नहीं आया जांच चल रही है तो ये सूअर किस आधार पर न्यायाधीश बन गया पहले ही..... हमें विश्वास है हमारे गुरु जी का इस हादसे से कोई लेना-देना नहीं वो श्री जी के हैं लेकिन इस का विनाश तय है गुरु जी के लिए जो अपराध कर रहा है बिना किसी जांच के आये लगातार वीडियो पर वीडियो बना रहा बदनाम कर रहा इसका दंड ये अवश्य भोगेगा... ऐसा करना गलत है।।
#जय_श्री_राधा_रानी
#shubhankarmishra

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“आज इन दाँतों पर इतना मत इतराओ… वक्त आने पर यही हिसाब, बराबर करेंगे! 😂🦷”

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35 साल के सॉफ्टवेयर इंजीनियर संभव जैन की 2023 में शादी हुई थी, 1 साल के अंदर पत्नी प्रेगनेंट हुई और 7वे महीने में ही बच्चे का जन्म हो गया।
उस बच्चे के लिए शुरुआत के दिनों में होने वाले मेडिकल खर्चे बढ़ रहे थे, और साथ ही संभव पर मानसिक दवाब भी।
धीरे- धीरे खर्चे वेतन से ज्यादा होने लगे और साथ ही पत्नी ने भी तलाक लेने की जिद ठान ली।

आखिरकार 2025 में संभव का तलाक़ तो हो गया, पर इसके साथ ही कोर्ट ने संभव को आदेश दिया कि वो 3 करोड़ गुजारा भत्ता के रूप में पत्नी को दे । उन 3 करोड़ में से 1 करोड़ तो किसी तरह संभव ने अपनी पत्नी को दे दिए थे।
और कुछ समय बाद ही संभव को 1 करोड़ की दूसरी किश्त अपनी पत्नी को देनी थी।
जिंदगी भर साथ निभाने वाले रिश्ते ने तो मुश्किल से पहला साल ही साथ निभाया होगा, क्योंकि दूसरा साल आते- आते उनके बीच झगड़े शुरू हो गए थे।
और फिर तीसरे साल में कोर्ट ने उनके रिश्ते के खत्म होने की पक्की मुहर लगा दी थी।
सोचिए जो इंसान पहले से ही पैसे की तंगी झेल रहा हो, उसे कोर्ट ने और कभी उसकी जीवन संगनी रही उस महिला ने मिलकर पूरी तरह से निचोड़ कर रख दिया था।
अब ऐसी स्थिति में इंसान डिप्रेशन में तो जाएगा ही।
मर्द की भी भावनाएँ आहत होती हैं, ये और बात है कि उसे वो औरतों की तरह आंसुओं में बहा नहीं पाते।
शायद इसी वजह से उनके अंदर घूटन भर जाती है।
अपने अंदर ढेरों परेशानी, कर्जदार के ताने और उनके प्रेशर सबने मिलकर #संभव की उम्मीदों को धराशायी कर दिया होगा तभी तो वो सुपरनोवा सोसाइटी के स्पाइयरा टावर में आकर रूका था।

अगले दिन उसे चेक आउट करना था।
पर संभव तो वहां से लौटने के लिए आया ही नहीं था।
जिस वक्त वो बालकनी से कूदने वाला था, उसे पास के फ्लैट में काम करने वाले एसी मैकेनिक ने रोकने की कोशिश की थी, वो संभव को समझाना भी चाह रहे थे।
पर संभव ने तो वही किया जो उसने पहले से ही तय कर रखा था।
उसने चारों मैकेनिक को डराते हुए कहा था, मुझे छोड़ दो वरना मैं अपने साथ आप सबको लेकर कूद जाऊंगा।
उन लोगों ने भी डर से अपने हाथ पीछे खींच लिए थे।
संभव ने आ*त्*मह*त्*या करने से पहले अपने पापा को भी मैसेज लिखा था कि जब मैं ही नहीं रहूंगा तो कर्जदार आपको भी परेशान नहीं करेंगे।

और फिर संभव ने अपना फोन ऑफ कर लिया था।
माना जिंदगी सौरभ को छल रही थी, पर एकबार वो अपने बूढ़े माँ- बाप के बारे में तो सोच लेता।
उनके लिए तो ये जिंदगी और पहाड़ सी हो जाएगी।
#sambhavjain #supernovabuilding #bhaiyajeenewswale #delhi #viralnews

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हर इंसान अपने आप में खास है, बस अपने हुनर को पहचानने की देर है।

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बीते 29 सितंबर को बडगाम एनकाउंटर में लश्कर-ए-तैयबा का कमांडर मोहम्मद आसिफ उर्फ ​​हाशिम मूसा फौजी मारा गया। सुरक्षा बलों को उसके पास एक ब्लैक डिवाइस मिली। इस पर LoRa Ultra लिखा था। आतंकियों के बाद एडवांस्ड ऑफ-ग्रिड हैंडसेट की बरामदगी से सुरक्षा एजेंसियों के कान खड़े हो गए। इससे पहले ऑपरेशन महादेव में भी आतंकियों के पास से कई एन्क्रिप्टेड LoRa सेट और बिना सिम वाले बर्नर फोन मिले थे। इस मशीन की खासियत है कि यह सिम के बिना ही ऑपरेट होता है और इसके मैसेज को ट्रैक करना मुश्किल है। फॉरेंसिक रिपोर्ट के मुताबिक, यह चीन की टेक्नॉलजी है, जिस पाकिस्तान में बनाया जा रहा है।

आतंकियों के खिलाफ अभियान में भारतीय सुरक्षा बलों को उनकी वॉकी-टॉकी और मोबाइल फोन की लोकेशन से मदद मिलती थी। भारतीय सेना की निगाह से बचने के लिए पाकिस्तान आतंकियों को एडवांस्ड वॉकी-टॉकी देकर बॉर्डर पार भेज रहा है। लॉन्ग रेंज, लो पावर (LoRa) टेक्नोलॉजी वाले इस हैंडसेट के लिए न तो सिम की जरूरत है, न ही टावर या वाई-फाई की। पहले आतंकी मोबाइल फोन के ज़रिए डिजिटल प्रिंट छोड़ते थे। अब लोकेशन ट्रेस करना नामुमकिन है। स्पेक्ट्रम स्कैनर और जैमर से इसे पकड़ नहीं पाता है। इस कम पावर वाली रेडियो फ्रीक्वेंसी का इस्तेमाल कर जंगल में 10-15 किलोमीटर तक टेक्स्ट मैसेज, लाइव जीपीएस कोऑर्डिनेट्स और इमरजेंसी अलर्ट भेजना आसान है। आतंकी इसके जरिये ही पाकिस्तान में बैठे अपने आकाओं से बात करते हैं।

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आंध्र प्रदेश के IT मंत्री नारा लोकेश ने विजयवाड़ा में आयोजित Pan-IIT आंध्र प्रदेश शिखर सम्मेलन 2026 को संबोधित करते हुए कहा कि भारत 10 साल के भीतर विकसित देश बन सकता है। उन्होंने यूरोप और अमेरिका के देशों का उदाहरण देते हुए कहा कि वहां के विकसित देशों को अपने मौजूदा स्तर तक पहुंचने में करीब 100 साल लगे।

#naralokesh #andhrapradesh #viksitbharat

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