Découvrir des postesExplorez un contenu captivant et des perspectives diverses sur notre page Découvrir. Découvrez de nouvelles idées et engagez des conversations significatives
लुधियाना वासियों ने धूमधाम से किया नए साल का स्वागत
#celebrations #ludhiana #ludhianakesari #trending #alert #latestnews #liveupdate #happynewyear2026
#पश्चिम_संस्कृति के लोग क्या कहते क्या हो तुम
अब हम भी कह सकते हैं #तुम_क्या_हो_बै 😁🤣🤣🤣
आज हरिद्वार स्थित सिद्धपीठ दक्षिण काली मंदिर, नीलधारा गंगातट में
परम पूज्य निरंजन पीठाधीश्वर श्री श्री 1008 आचार्य महामण्डलेश्वर स्वामी कैलाशानन्द गिरि जी महाराज के पावन सान्निध्य में आयोजित पंचम संन्यास दीक्षा महोत्सव में सहभागिता का सौभाग्य प्राप्त हुआ।
इस पावन अवसर पर साधु-संतों का आशीर्वाद एवं सान्निध्य प्राप्त कर मन आध्यात्मिक ऊर्जा और शांति से परिपूर्ण हुआ। ऐसे आयोजन हमारी प्राचीन सनातन परंपरा, संस्कृति और आध्यात्मिक चेतना को सुदृढ़ करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
भगवान से प्रार्थना है कि सनातन धर्म की यह महान परंपरा इसी प्रकार निरंतर आगे बढ़ती रहे और समाज को सद्भाव, संयम एवं सेवा के मार्ग पर प्रेरित करती रहे।
Swami Kailashanand Giri ji
आज हरिद्वार स्थित सिद्धपीठ दक्षिण काली मंदिर, नीलधारा गंगातट में
परम पूज्य निरंजन पीठाधीश्वर श्री श्री 1008 आचार्य महामण्डलेश्वर स्वामी कैलाशानन्द गिरि जी महाराज के पावन सान्निध्य में आयोजित पंचम संन्यास दीक्षा महोत्सव में सहभागिता का सौभाग्य प्राप्त हुआ।
इस पावन अवसर पर साधु-संतों का आशीर्वाद एवं सान्निध्य प्राप्त कर मन आध्यात्मिक ऊर्जा और शांति से परिपूर्ण हुआ। ऐसे आयोजन हमारी प्राचीन सनातन परंपरा, संस्कृति और आध्यात्मिक चेतना को सुदृढ़ करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
भगवान से प्रार्थना है कि सनातन धर्म की यह महान परंपरा इसी प्रकार निरंतर आगे बढ़ती रहे और समाज को सद्भाव, संयम एवं सेवा के मार्ग पर प्रेरित करती रहे।
Swami Kailashanand Giri ji
आज हरिद्वार स्थित सिद्धपीठ दक्षिण काली मंदिर, नीलधारा गंगातट में
परम पूज्य निरंजन पीठाधीश्वर श्री श्री 1008 आचार्य महामण्डलेश्वर स्वामी कैलाशानन्द गिरि जी महाराज के पावन सान्निध्य में आयोजित पंचम संन्यास दीक्षा महोत्सव में सहभागिता का सौभाग्य प्राप्त हुआ।
इस पावन अवसर पर साधु-संतों का आशीर्वाद एवं सान्निध्य प्राप्त कर मन आध्यात्मिक ऊर्जा और शांति से परिपूर्ण हुआ। ऐसे आयोजन हमारी प्राचीन सनातन परंपरा, संस्कृति और आध्यात्मिक चेतना को सुदृढ़ करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
भगवान से प्रार्थना है कि सनातन धर्म की यह महान परंपरा इसी प्रकार निरंतर आगे बढ़ती रहे और समाज को सद्भाव, संयम एवं सेवा के मार्ग पर प्रेरित करती रहे।
Swami Kailashanand Giri ji
