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Radhe Krishna ❤️

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Hidden Truth Behind ‘Bahu Humari Rajnikant’ Revealed | Ridhima Pandit | Josh Talks
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****ly to become speaker at Josh Talks- https://forms.gle/d23aj3x7c5BuBjnf6
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Yes, I’m Gay — and Proud of It. | Paras Tomar | Josh Talks
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****ly to become speaker at Josh Talks-
https://forms.gle/d23aj3x7c5BuBjnf6
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That Night, What He Did Broke My Trust | Sonhini Dutta | Josh Talks
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अगर पूछे हीरो कैसा ,
तो बताना ऐसा होता है 🥺
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मां बाप शादी अच्छे घर या धन के चक्कर मे ऐसे इंसान से कर देते हैं।
कभी कभी लालच में बच्चों का भविष्य बर्बाद कर देते हैं।
उम्र का भी लिहाज नहीं है अब इस लड़की कुछ दिन क्या पूरे जीवन पति नहीं बाप बेटी देख के समझा जाएगा।
क्यों ये इंसान किसी तरीके से 40 से कम का नहीं होगा
लड़की 25 से ज्यादा की नहीं होगी।
ये बॉलीबुड की दुनिया एक गरीब मध्यम परिवार की बात है।
जहां इस लड़की को हर जगह सर झुकाना पड़ेगा।
ऐसे करेंगे बाद में लड़की छोड़ चली जाए तो कहेंगे।
दुनिया के लोग की अच्छा नहीं तो करना ही नहीं चाहिए
शादी लेकिन ये उनकी मानसिकता की लड़की को
उत्साह देगी।
तेरे साथ ये अच्छा नहीं लगता फिर यही समाज एक दिन लड़की को ही बुरा कहेगा।
जब कि परिवार को उम्र का ध्यान रखना चाहिए
क्या कहा जाए मजाक बनाए या दुःख समझे?

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उत्तर प्रदेश के मारहरा (एटा) विधानसभा क्षेत्र से मा० विधायक श्री वीरेंद्र सिंह लोधी जी आपको जन्मदिन की हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएं।

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तुलसीदास जी भगवान श्रीजगन्नाथ के दर्शन की अभिलाषा लेकर पुरी पहुँचे, किंतु गर्भगृह में हस्तपादविहीन दारुमूर्ति (हाथ-पैर रहित काष्ठ की मूर्ति) देखकर वे ठिठक गए। उनके मन में टीस उठी कि सौंदर्य की पराकाष्ठा उनके ईष्ट श्रीराम ऐसे कैसे हो सकते हैं? दुखी मन से वे मंदिर के बाहर एक वृक्ष के नीचे बैठ गए और भूखे-प्यासे रात बिताने लगे।
तभी प्रभु स्वयं एक बालक के रूप में उनके पास आए और जगन्नाथ जी का प्रसाद (भात) लेकर आए। तुलसीदास जी ने यह कहकर प्रसाद लेने से मना कर दिया कि वे अपने ईष्ट को भोग लगाए बिना कुछ ग्रहण नहीं करते और जगन्नाथ का यह रूप उन्हें स्वीकार नहीं।
तब उस दिव्य बालक ने उन्हें उन्हीं की 'रामचरितमानस' की चौपाई याद दिलाई— "बिनु पद चलइ सुनइ बिनु काना। कर बिनु कर्म करइ बिधि नाना। आनन रहित सकल रस भोगी। बिनु बानी बकता बड़ जोगी॥" और बताया कि वे निर्गुण ब्रह्म ही यहाँ सगुण रूप में विराजमान हैं। सत्य का बोध होते ही तुलसीदास जी की आँखों से अश्रु बहने लगे। अगली सुबह जब वे पुनः मंदिर गए, तो उन्हें भगवान जगन्नाथ के स्थान पर साक्षात् श्रीराम, लक्ष्मण और जानकी के दर्शन हुए। भगवान ने भक्त की अटूट श्रद्धा के लिए अपना रूप बदल लिया।

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