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आम आदमी पार्टी (AAP) में हाल ही में हुए बड़े बदलाव के बाद सियासी हलचल तेज हो गई है। पार्टी ने राघव चड्ढा को डिप्टी लीडर के पद से हटाकर अशोक कुमार मित्तल को यह जिम्मेदारी सौंप दी है। इस फैसले के बाद से राजनीतिक गलियारों में कई तरह की चर्चाएं शुरू हो गई हैं।

इसी बीच राघव चड्ढा का एक बयान तेजी से वायरल हो रहा है, जिसमें उन्होंने कहा, “मेरी खामोशी को मेरी हार मत समझना। मुझे खामोश करवाया गया है, लेकिन मैं हारा नहीं हूं।” उनके इस बयान को लेकर सियासी मायने निकाले जा रहे हैं और इसे पार्टी के अंदरूनी हालात से जोड़कर देखा जा रहा है।

पिछले कुछ समय से राघव चड्ढा की चुप्पी और पार्टी के बड़े फैसलों से दूरी को लेकर सवाल उठ रहे थे। ऐसे में यह बयान और भी ज्यादा अहम हो जाता है। हालांकि, पार्टी की ओर से इस बदलाव को लेकर कोई बड़ी आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।

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(Raghav Chadha Statement, AAP Politics, Deputy Leader Removed, Ashok Mittal, Party Reshuffle, Delhi Politics)

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मिडिल ईस्ट में जारी जंग अब एक नए और बेहद खतरनाक मोड़ पर पहुंच चुकी है। ईरान के अंदर अब सिर्फ सैन्य ठिकानों ही नहीं, बल्कि आम नागरिकों से जुड़े इंफ्रास्ट्रक्चर को भी निशाना बनाया जा रहा है।

रिपोर्ट्स के मुताबिक अमेरिका और इज़रायल ने ईरान के कई अहम इलाकों पर एयरस्ट्राइक की है, जिनमें ब्रिज, स्टील प्लांट, अस्पताल और मेडिकल रिसर्च सेंटर शामिल हैं। तेहरान और इस्फ़हान जैसे शहरों में लगातार हमलों से भारी तबाही देखने को मिल रही है।

इन हमलों का असर सिर्फ इमारतों तक सीमित नहीं है, बल्कि हेल्थ सिस्टम, ट्रांसपोर्ट और सप्लाई चेन भी बुरी तरह प्रभावित हो रहे हैं। बताया जा रहा है कि हजारों लोग घायल हुए हैं और बड़ी संख्या में लोगों की जान गई है।

सबसे बड़ी चिंता की बात यह है कि सिविलियन टारगेट्स पर हमले हो रहे हैं, जो अंतरराष्ट्रीय नियमों के खिलाफ माने जाते हैं। जिनेवा कन्वेंशन के अनुसार, अस्पताल, लैब और आम नागरिकों से जुड़े ढांचे पर हमला वॉर क्राइम की श्रेणी में आ सकता है।

वहीं डोनाल्ड ट्रंप के बयान और हमले तेज करने के संकेतों ने स्थिति को और गंभीर बना दिया है। दूसरी तरफ ईरान की सेना भी लगातार जवाबी कार्रवाई कर रही है, जिससे यह साफ है कि यह संघर्ष अभी थमने वाला नहीं है।

#iranwar #middleeastcrisis #worldnews #breakingnews #atcard #aajtaksocial

(Iran War, Middle East Crisis, Airstrike, Civilian Targets, Geneva Convention, War Crimes, US-Israel Attack)

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मिडिल ईस्ट में जारी जंग अब एक नए और बेहद खतरनाक मोड़ पर पहुंच चुकी है। ईरान के अंदर अब सिर्फ सैन्य ठिकानों ही नहीं, बल्कि आम नागरिकों से जुड़े इंफ्रास्ट्रक्चर को भी निशाना बनाया जा रहा है।

रिपोर्ट्स के मुताबिक अमेरिका और इज़रायल ने ईरान के कई अहम इलाकों पर एयरस्ट्राइक की है, जिनमें ब्रिज, स्टील प्लांट, अस्पताल और मेडिकल रिसर्च सेंटर शामिल हैं। तेहरान और इस्फ़हान जैसे शहरों में लगातार हमलों से भारी तबाही देखने को मिल रही है।

इन हमलों का असर सिर्फ इमारतों तक सीमित नहीं है, बल्कि हेल्थ सिस्टम, ट्रांसपोर्ट और सप्लाई चेन भी बुरी तरह प्रभावित हो रहे हैं। बताया जा रहा है कि हजारों लोग घायल हुए हैं और बड़ी संख्या में लोगों की जान गई है।

सबसे बड़ी चिंता की बात यह है कि सिविलियन टारगेट्स पर हमले हो रहे हैं, जो अंतरराष्ट्रीय नियमों के खिलाफ माने जाते हैं। जिनेवा कन्वेंशन के अनुसार, अस्पताल, लैब और आम नागरिकों से जुड़े ढांचे पर हमला वॉर क्राइम की श्रेणी में आ सकता है।

वहीं डोनाल्ड ट्रंप के बयान और हमले तेज करने के संकेतों ने स्थिति को और गंभीर बना दिया है। दूसरी तरफ ईरान की सेना भी लगातार जवाबी कार्रवाई कर रही है, जिससे यह साफ है कि यह संघर्ष अभी थमने वाला नहीं है।

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मिडिल ईस्ट में जारी जंग अब एक नए और बेहद खतरनाक मोड़ पर पहुंच चुकी है। ईरान के अंदर अब सिर्फ सैन्य ठिकानों ही नहीं, बल्कि आम नागरिकों से जुड़े इंफ्रास्ट्रक्चर को भी निशाना बनाया जा रहा है।

रिपोर्ट्स के मुताबिक अमेरिका और इज़रायल ने ईरान के कई अहम इलाकों पर एयरस्ट्राइक की है, जिनमें ब्रिज, स्टील प्लांट, अस्पताल और मेडिकल रिसर्च सेंटर शामिल हैं। तेहरान और इस्फ़हान जैसे शहरों में लगातार हमलों से भारी तबाही देखने को मिल रही है।

इन हमलों का असर सिर्फ इमारतों तक सीमित नहीं है, बल्कि हेल्थ सिस्टम, ट्रांसपोर्ट और सप्लाई चेन भी बुरी तरह प्रभावित हो रहे हैं। बताया जा रहा है कि हजारों लोग घायल हुए हैं और बड़ी संख्या में लोगों की जान गई है।

सबसे बड़ी चिंता की बात यह है कि सिविलियन टारगेट्स पर हमले हो रहे हैं, जो अंतरराष्ट्रीय नियमों के खिलाफ माने जाते हैं। जिनेवा कन्वेंशन के अनुसार, अस्पताल, लैब और आम नागरिकों से जुड़े ढांचे पर हमला वॉर क्राइम की श्रेणी में आ सकता है।

वहीं डोनाल्ड ट्रंप के बयान और हमले तेज करने के संकेतों ने स्थिति को और गंभीर बना दिया है। दूसरी तरफ ईरान की सेना भी लगातार जवाबी कार्रवाई कर रही है, जिससे यह साफ है कि यह संघर्ष अभी थमने वाला नहीं है।

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मिडिल ईस्ट में जारी जंग अब एक नए और बेहद खतरनाक मोड़ पर पहुंच चुकी है। ईरान के अंदर अब सिर्फ सैन्य ठिकानों ही नहीं, बल्कि आम नागरिकों से जुड़े इंफ्रास्ट्रक्चर को भी निशाना बनाया जा रहा है।

रिपोर्ट्स के मुताबिक अमेरिका और इज़रायल ने ईरान के कई अहम इलाकों पर एयरस्ट्राइक की है, जिनमें ब्रिज, स्टील प्लांट, अस्पताल और मेडिकल रिसर्च सेंटर शामिल हैं। तेहरान और इस्फ़हान जैसे शहरों में लगातार हमलों से भारी तबाही देखने को मिल रही है।

इन हमलों का असर सिर्फ इमारतों तक सीमित नहीं है, बल्कि हेल्थ सिस्टम, ट्रांसपोर्ट और सप्लाई चेन भी बुरी तरह प्रभावित हो रहे हैं। बताया जा रहा है कि हजारों लोग घायल हुए हैं और बड़ी संख्या में लोगों की जान गई है।

सबसे बड़ी चिंता की बात यह है कि सिविलियन टारगेट्स पर हमले हो रहे हैं, जो अंतरराष्ट्रीय नियमों के खिलाफ माने जाते हैं। जिनेवा कन्वेंशन के अनुसार, अस्पताल, लैब और आम नागरिकों से जुड़े ढांचे पर हमला वॉर क्राइम की श्रेणी में आ सकता है।

वहीं डोनाल्ड ट्रंप के बयान और हमले तेज करने के संकेतों ने स्थिति को और गंभीर बना दिया है। दूसरी तरफ ईरान की सेना भी लगातार जवाबी कार्रवाई कर रही है, जिससे यह साफ है कि यह संघर्ष अभी थमने वाला नहीं है।

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रिपोर्ट्स के मुताबिक अमेरिका और इज़रायल ने ईरान के कई अहम इलाकों पर एयरस्ट्राइक की है, जिनमें ब्रिज, स्टील प्लांट, अस्पताल और मेडिकल रिसर्च सेंटर शामिल हैं। तेहरान और इस्फ़हान जैसे शहरों में लगातार हमलों से भारी तबाही देखने को मिल रही है।

इन हमलों का असर सिर्फ इमारतों तक सीमित नहीं है, बल्कि हेल्थ सिस्टम, ट्रांसपोर्ट और सप्लाई चेन भी बुरी तरह प्रभावित हो रहे हैं। बताया जा रहा है कि हजारों लोग घायल हुए हैं और बड़ी संख्या में लोगों की जान गई है।

सबसे बड़ी चिंता की बात यह है कि सिविलियन टारगेट्स पर हमले हो रहे हैं, जो अंतरराष्ट्रीय नियमों के खिलाफ माने जाते हैं। जिनेवा कन्वेंशन के अनुसार, अस्पताल, लैब और आम नागरिकों से जुड़े ढांचे पर हमला वॉर क्राइम की श्रेणी में आ सकता है।

वहीं डोनाल्ड ट्रंप के बयान और हमले तेज करने के संकेतों ने स्थिति को और गंभीर बना दिया है। दूसरी तरफ ईरान की सेना भी लगातार जवाबी कार्रवाई कर रही है, जिससे यह साफ है कि यह संघर्ष अभी थमने वाला नहीं है।

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रिपोर्ट्स के मुताबिक अमेरिका और इज़रायल ने ईरान के कई अहम इलाकों पर एयरस्ट्राइक की है, जिनमें ब्रिज, स्टील प्लांट, अस्पताल और मेडिकल रिसर्च सेंटर शामिल हैं। तेहरान और इस्फ़हान जैसे शहरों में लगातार हमलों से भारी तबाही देखने को मिल रही है।

इन हमलों का असर सिर्फ इमारतों तक सीमित नहीं है, बल्कि हेल्थ सिस्टम, ट्रांसपोर्ट और सप्लाई चेन भी बुरी तरह प्रभावित हो रहे हैं। बताया जा रहा है कि हजारों लोग घायल हुए हैं और बड़ी संख्या में लोगों की जान गई है।

सबसे बड़ी चिंता की बात यह है कि सिविलियन टारगेट्स पर हमले हो रहे हैं, जो अंतरराष्ट्रीय नियमों के खिलाफ माने जाते हैं। जिनेवा कन्वेंशन के अनुसार, अस्पताल, लैब और आम नागरिकों से जुड़े ढांचे पर हमला वॉर क्राइम की श्रेणी में आ सकता है।

वहीं डोनाल्ड ट्रंप के बयान और हमले तेज करने के संकेतों ने स्थिति को और गंभीर बना दिया है। दूसरी तरफ ईरान की सेना भी लगातार जवाबी कार्रवाई कर रही है, जिससे यह साफ है कि यह संघर्ष अभी थमने वाला नहीं है।

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सबसे ज्यादा चोट तब लगती है जब आप ऊंचाई से ग‍िरते हैं. इसका दर्द आप IAS-IPS की तैयारी में इंटरव्यू तक पहुंचने के बाद भी फेल होने वाले अभ्यर्थी से भी पूछ सकते हैं. ये एक ऐसा मुकाम होता है जहां कोई व्यक्त‍ि पूरी तरह टूट भी सकता है. लेकिन निर्मल पवार एक ऐसे अभ्यर्थी हैं जिनके जीवन में बहुत सी फेलियर रहीं लेकिन उन्होंने खुद को टूटने से बचाया. भले ही आज उनके सामने पहाड़ जैसी चुनौतियां हों, लेकिन उनके भीतर की उम्मीद आज भी जीत के लिए बेताब है.

महाराष्ट्र के सैनिक स्कूल सातारा से पढ़ाई करने वाले न‍िर्मल का शुरुआती सपना सेना में जाने का था. छठी से बारहवीं तक बोर्डिंग स्कूल की अनुशासित जिंदगी ने उनमें सेवा भावना पैदा की. आगे उन्होंने नासिक के केके वाग इंस्टीट्यूट ऑफ इंजीन‍ियर‍िंग से इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग की पढ़ाई पूरी की. इंजीनियरिंग के बाद करियर के कई विकल्प थे, लेकिन उन्होंने UPSC को चुना. वजह साफ थी, समाज में बड़ा बदलाव लाने की इच्छा.

साल 2018 में वह दिल्ली पहुंचे. मुखर्जी नगर और ओल्ड राजेंद्र नगर की लाइब्रेरी, नोट्स और टेस्ट सीरीज के बीच तैयारी शुरू हुई. लेकिन UPSC की असली चुनौती यहीं से शुरू हुई:
2018-19: प्रीलिम्स में असफलता
2020: मेन्स तक पहुंचे लेकिन बात नहीं बनी.
2021-22: प्रीलिम्स और मेन्स का उतार-चढ़ाव जारी रहा.
2023: वो साल जब मंजिल करीब थी. प्रीलिम्स और मेन्स क्लियर कर इंटरव्यू तक पहुंचे. 176 अंक मिले, लेकिन मेरिट में महज 21 अंकों से सपना छूट गया.
2024: एक बार फिर मेन्स की दहलीज पर आकर रुक गए.

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केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने कहा कि कांग्रेस के ये लोग अफवाहें फैलाते हैं कि असम गण परिषद और BJP के बीच का गठबंधन ज़्यादा समय तक नहीं चलेगा. राहुल बाबा, मुंगेरी लाल के सपने मत देखो...असम गण परिषद और BJP के बीच गठबंधन उतना ही निश्चित है, जितना कि सूरज और चांद का उगना.

#amitshah #politics #assam #elections2026 #agp #bjp #hindinews #abpnews

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नरेंद्र मोदी को ये वीडियो देखना चाहिए। देश के असल हालात का पता चल जाएगा।

गैस की किल्लत ऐसी कि लोग लकड़ियां बीनने को मजबूर हैं और उससे खाना बन पा रहा है।

इस आदमी का कहना है 👇

⦁ मैं दिन के 400 रुपए कमाता हूं
⦁ गैस 500 रुपए किलो मिल रही है

गैस खरीदूंगा तो खाऊंगा क्या?