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भारत ने अफगानिस्तान को पारी और 300 रन से हराया
अपने पदार्पण टेस्ट में चमके हरफनमौला मानव सुथार
खेलपथ संवाद
मुल्लांपुर। भारत ने अफगानिस्तान को एकमात्र टेस्ट मैच में पारी और 300 रनों से हराया। भारत ने पहली पारी आठ विकेट पर 564 रन बनाकर घोषित की थी और अफगानिस्तान की पहली पारी तीसरे दिन 152 रन पर ऑलआउट की। भारत को इस तरह 412 रनों की बढ़त हासिल हुई और टीम इंडिया ने अफगानिस्तान को फॉलोऑन दिया। अफगानिस्तान की दूसरी पारी में बल्लेबाजी बेहद खराब रही और टीम 112 रन ही बना सकी। अफगानिस्तान ने दूसरी पारी में नौ विकेट गंवाए क्योंकि अशरफ बल्लेबाजी के लिए नहीं उतरे।

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अपने पदार्पण टेस्ट में चमके हरफनमौला मानव सुथार
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मुल्लांपुर। भारत ने अफगानिस्तान को एकमात्र टेस्ट मैच में पारी और 300 रनों से हराया। भारत ने पहली पारी आठ विकेट पर 564 रन बनाकर घोषित की थी और अफगानिस्तान की पहली पारी तीसरे दिन 152 रन पर ऑलआउट की। भारत को इस तरह 412 रनों की बढ़त हासिल हुई और टीम इंडिया ने अफगानिस्तान को फॉलोऑन दिया। अफगानिस्तान की दूसरी पारी में बल्लेबाजी बेहद खराब रही और टीम 112 रन ही बना सकी। अफगानिस्तान ने दूसरी पारी में नौ विकेट गंवाए क्योंकि अशरफ बल्लेबाजी के लिए नहीं उतरे।

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Radhe Krishna ❤️

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सोशल मीडिया पर दिखावा भारी पड़ सकता है। मध्य प्रदेश के शिवपुरी जिले के मोहनी गांव की एक महिला ने सोने के गहने से लदकर रील बनाई थी। रील में महिला दिखा रही थी कि उसके पास गहने और लग्जरी कारें हैं। रील के आधार पर ही चोरों को सुराग मिल गया। इसके बाद चोरों ने अपना टारगेट फिक्स किया।

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राजा भैया को समर्थन करने वाले कमेंट में हाजिरी दो...
क्या आप राजा भैया के साथ है?

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भारतीय सेना की वरिष्ठ अधिकारी कर्नल सपना राणा देवभूमि हिमाचल प्रदेश की पहली महिला अधिकारी बन गई हैं, जिन्हें आर्मी सर्विस कॉर्प्स (ASC) की एक पूरी बटालियन की कमान संभालने का ऐतिहासिक गौरव प्राप्त होने पर बधाई एवं शुभकामनाएं।

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छोटे भाई को पढ़ाकर फौज तक पहुंचाया, लेकिन 4 महीने बाद ही तिरंगे में लौटा शहीद संतोष वर्मा... अंतिम विदाई में बड़े भाई का दर्द देख हर आंख नम हुई।

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राजस्थान की धरती पर स्थित चितौड़गढ़ केवल एक किला नहीं, बल्कि त्याग, स्वाभिमान और बलिदान का अमर प्रतीक है। इसे "जौहर भूमि" इसलिए कहा जाता है क्योंकि यहां मातृभूमि, धर्म और सम्मान की रक्षा के लिए राजपूत क्षत्राणियों ने तीन बार जौहर किया।

1. प्रथम जौहर (1303 ई.)

जब रानी पद्मिनी के समय अलाउदीन खिलजी ने चित्तौड़गढ़ को घेरा, तब हजारों राजपूत महिलाओं ने सम्मान की रक्षा हेतु जौहर किया और वीरों ने साका कर रणभूमि में प्राण न्यौछावर कर दिए।

2. द्वितीय जौहर (1535 ई.)

रानी कर्णावती के नेतृत्व में बहादुर शाह के आक्रमण के समय फिर से जौहर हुआ और मेवाड़ के वीरों ने अंतिम सांस तक युद्ध किया।

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