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🌸 राधा अष्टमी की अनंत मंगलकामनाएं! 🌸
राधा नाम केवल एक नाम नहीं, बल्कि प्रेम, भक्ति और मोक्ष का प्रतीक माना जाता है। पौराणिक मान्यताओं में राधारानी को श्रीकृष्ण की परम प्रिय और दिव्य शक्ति के रूप में वर्णित किया गया है। 🙏💗
“रा” का अर्थ माना गया है पाना और “धा” का अर्थ निर्वाण यानी मोक्ष। इसी भाव से राधा नाम को भक्तिभाव और मुक्ति से जोड़ा जाता है।
इस पावन अवसर पर राधारानी का स्मरण करें और उनके चरणों में प्रेम, भक्ति एवं सुख-समृद्धि की प्रार्थना करें।
धर्म जीवन के प्रारम्भ से अन्त तक साथ रहने वाला शाश्वत तत्व है : डॉ. मोहन राव भागवत
उज्जैन। भगवान महाकाल की नगरी अवन्तिका उज्जयिनी में आयोजित युवा धर्म संसद के उद्घाटन सत्र में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघचालक डॉ. मोहन राव भागवत ने धर्म को जीवन के प्रत्येक पक्ष को दिशा देने वाला शाश्वत तत्व बताते हुए कहा कि धर्म केवल वृद्धावस्था में पढ़ने या समझने का विषय नहीं है, बल्कि मनुष्य के जन्म से मृत्यु तक उसके जीवन का आधार बना रहता है। उन्होंने युवाओं से धर्म को केवल कर्मकाण्ड अथवा किसी सम्प्रदाय विशेष के रूप में न देखकर उसके व्यापक और व्यावहारिक स्वरूप को समझने तथा उसे अपने आचरण में उतारने का आह्वान किया।
धर्म जीवन के प्रारम्भ से अन्त तक साथ रहने वाला शाश्वत तत्व है : डॉ. मोहन राव भागवत
उज्जैन। भगवान महाकाल की नगरी अवन्तिका उज्जयिनी में आयोजित युवा धर्म संसद के उद्घाटन सत्र में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघचालक डॉ. मोहन राव भागवत ने धर्म को जीवन के प्रत्येक पक्ष को दिशा देने वाला शाश्वत तत्व बताते हुए कहा कि धर्म केवल वृद्धावस्था में पढ़ने या समझने का विषय नहीं है, बल्कि मनुष्य के जन्म से मृत्यु तक उसके जीवन का आधार बना रहता है। उन्होंने युवाओं से धर्म को केवल कर्मकाण्ड अथवा किसी सम्प्रदाय विशेष के रूप में न देखकर उसके व्यापक और व्यावहारिक स्वरूप को समझने तथा उसे अपने आचरण में उतारने का आह्वान किया।
धर्म जीवन के प्रारम्भ से अन्त तक साथ रहने वाला शाश्वत तत्व है : डॉ. मोहन राव भागवत
उज्जैन। भगवान महाकाल की नगरी अवन्तिका उज्जयिनी में आयोजित युवा धर्म संसद के उद्घाटन सत्र में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघचालक डॉ. मोहन राव भागवत ने धर्म को जीवन के प्रत्येक पक्ष को दिशा देने वाला शाश्वत तत्व बताते हुए कहा कि धर्म केवल वृद्धावस्था में पढ़ने या समझने का विषय नहीं है, बल्कि मनुष्य के जन्म से मृत्यु तक उसके जीवन का आधार बना रहता है। उन्होंने युवाओं से धर्म को केवल कर्मकाण्ड अथवा किसी सम्प्रदाय विशेष के रूप में न देखकर उसके व्यापक और व्यावहारिक स्वरूप को समझने तथा उसे अपने आचरण में उतारने का आह्वान किया।
धर्म जीवन के प्रारम्भ से अन्त तक साथ रहने वाला शाश्वत तत्व है : डॉ. मोहन राव भागवत
उज्जैन। भगवान महाकाल की नगरी अवन्तिका उज्जयिनी में आयोजित युवा धर्म संसद के उद्घाटन सत्र में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघचालक डॉ. मोहन राव भागवत ने धर्म को जीवन के प्रत्येक पक्ष को दिशा देने वाला शाश्वत तत्व बताते हुए कहा कि धर्म केवल वृद्धावस्था में पढ़ने या समझने का विषय नहीं है, बल्कि मनुष्य के जन्म से मृत्यु तक उसके जीवन का आधार बना रहता है। उन्होंने युवाओं से धर्म को केवल कर्मकाण्ड अथवा किसी सम्प्रदाय विशेष के रूप में न देखकर उसके व्यापक और व्यावहारिक स्वरूप को समझने तथा उसे अपने आचरण में उतारने का आह्वान किया।


