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परिवार मां और बहन ज्योति का कहना है कि प्रियंका ने 9 साल से अफेयर चलाया, और पति को रोज अपमानित किया ("तुम काले हो, मुझे deserve नहीं करते", और आखिर में हत्या करवा दी। इसलिए दोनों को सबसे सख्त सजा (Death Penalty) मिलनी चाहिए।
"सभी आरोपियों को फांसी मिलनी चाहिए। मुझे कुछ नहीं चाहिए, सिर्फ न्याय चाहिए।"
उन्होंने प्रियंका को अपनी बहू बनाकर घर लाने का अफसोस जताया और कहा कि प्रियंका ने उनके बेटे का जीवन नर्क बना रखा था। "फांसी दिलाओ, नहीं तो मैं खुद उनका कत्ल कर दूंगी और जेल चली जाऊंगी।"
मां का दर्द बहुत गहरा है — उन्होंने कहा कि बेटा सोते में मारा गया, इसलिए कोई रियायत नहीं बरती जानी चाहिए।
Playback icon Asha Bhosle passed away on Sunday, April 12, 2026, in Mumbai. She was 92 years old. Bhosle had been admitted to the Breach Candy Hospital on Saturday evening.
Her death was confirmed by Dr Pratit Samdani of Breach Candy Hospital.
Earlier, in an X post shared shortly after Bhosle's hospitalisation, her granddaughter, Zanai Bhosle, had written, "My grandmother, Asha Bhosle, due to extreme exhaustion and suffering a chest infection, has been admitted to hospital and we request you to value our privacy. Treatment is ongoing and hopefully everything will be well and we shall update you positively (sic)."
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A heartfelt moment on the field as players from Royal Challengers Bengaluru and Mumbai Indians wore black armbands to honour the legendary Asha Bhosle after her passing at 92.
Cricket paused to pay tribute to a voice that defined generations, reminding everyone that Asha ji’s legacy lives far beyond music.🙏🏻🕊️
'डीएम मैम, किताबों के दाम बहुत ज्यादा हैं, इन्हें कम करवा दीजिए, क्योंकि हर मां-बाप अमीर नहीं होते'। गंगेश्वरी विकास खंड के देहरी गुर्जर गांव की नौ वर्षीय बच्ची माही इन दिनों अपने 36 सेकेंड के वीडियो के कारण इंटरनेट मीडिया पर छाई है।
उसके भूमिहीन मजदूर पिता सोहित कुमार महंगाई की वजह से बेटी को किताबें नहीं दिला पा रहे हैं। माही की हाथ जोड़कर की गई अपील से ऐसा प्रतीत हो रहा है कि वह अपने दर्द को शब्दों में ढालकर पूरे समाज से सवाल पूछ रही है।
खंड शिक्षा अनिल कुमार ने कहा कि छात्रा की प्रसारित वीडियो की जांच की जा रही है। स्कूल संचालक से भी बात की जाएगी। कस्बे के निजी स्कूल में पढ़ने वाली माही के पिता दिनभर की मेहनत से जो थोड़ी बहुत कमाई होती है, उसी से घर का खर्च और बच्चों की पढ़ाई चलती है।
माही का बड़ा भाई पंछी भी पढ़ाई के लिए अपने मामा के पास गजरौला में रह रहा है। नया शिक्षा सत्र शुरू होते ही माही के लिए किताबें खरीदी गईं। जिनकी कीमत 3,100 रुपये बताई गई। खास बात यह है कि किताबें स्कूल से ही दी गई हैं।
हालांकि, मजदूर पिता अभी इनका भुगतान नहीं कर सका है। सोहित का कहना है यह रकम परिवार के लिए किसी पहाड़ से कम नहीं थी। पिता के चेहरे की चिंता और घर की आर्थिक तंगी ने शायद माही को यह समझा दिया कि पढ़ाई अब सिर्फ मेहनत से नहीं, पैसे से भी जुड़ी हुई है।
शायद इसी दर्द ने बच्ची को कैमरे के सामने लाकर खड़ा कर दिया। न कोई शिकायत, न कोई गुस्सा, उसने सिर्फ एक विनम्र अपील की जो सीधे दिल तक पहुंचती है। लोगों का कहना है यह मासूम गुहार उन तमाम गरीब और मध्यमवर्गीय परिवारों की सच्चाई बन गई है, जो अपने बच्चों को पढ़ाने के लिए हर दिन संघर्ष कर रहे हैं।
लगभग 107 बरस पहले जब पूरा हिंदुस्तान सहम गया था, मौत भी जिंदगी की भीख मांगने लगी थी और धरती ने इंसानी लाशों से अपनी कोख को ढक लिया था। 13 अप्रैल 1919 को बर्बरता की ऐसी पराकाष्ठा पार की गई कि आज भी दीवारों पर उसके निशान नजर आते हैं। आज भी वो निशान देखकर हर कोई सहम जाता है। यह कहानी है जलियांवाला बाग नरसंहार की, जब अंग्रेजों ने भीड़ पर अंधाधुंध गोलियां बरसाई थीं। ये बात और है कि ब्रिटेन ने आज तक भारत में किए अपने इस घृणास्पद कृत्य के लिए माफी नहीं मांगी है।
13 अप्रैल 1919 को अमृतसर शहर में स्थित जलियांवाला बाग में हुई घटना कोई कहानी नहीं, बल्कि वो जख्म है, जो बार-बार यह कहता है कि अंग्रेजी हुकूमत की उस खौफनाक पराकाष्ठा को कभी भूलो मत। कभी माफ मत करो। यह वो इतिहास है, जिसे हम और आप भुला नहीं सकते। यह वो इतिहास है, जिसे कोई झुठला नहीं सकता और कोई बरगला नहीं सकता।