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सुरक्षित सड़कों से लेकर बेहतर वेस्ट मैनेजमेंट तक, वन्यजीवों की सुरक्षा से लेकर भूजल को फिर से ज़िंदा करने तक— इन Civil Servants ने सही मौके का इंतज़ार नहीं किया।
जो था, उसी के साथ काम किया और बदलाव की मिसाल खड़ी कर दी।
National Civil Services Day पर मिलिए ऐसे 5 अधिकारियों से, जो चुपचाप भारत को बेहतर बना रहे हैं।
#nationalcivilservicesday #inspiring
सुरक्षित सड़कों से लेकर बेहतर वेस्ट मैनेजमेंट तक, वन्यजीवों की सुरक्षा से लेकर भूजल को फिर से ज़िंदा करने तक— इन Civil Servants ने सही मौके का इंतज़ार नहीं किया।
जो था, उसी के साथ काम किया और बदलाव की मिसाल खड़ी कर दी।
National Civil Services Day पर मिलिए ऐसे 5 अधिकारियों से, जो चुपचाप भारत को बेहतर बना रहे हैं।
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जो था, उसी के साथ काम किया और बदलाव की मिसाल खड़ी कर दी।
National Civil Services Day पर मिलिए ऐसे 5 अधिकारियों से, जो चुपचाप भारत को बेहतर बना रहे हैं।
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ॐ नमो गंगायै विश्वरुपिणी नारायणी नमो नमः 🙏
वैसाख मास की शुक्ल पक्ष की सप्तमी को गंगा सप्तमी का पर्व मनाया जाता है, इसे गंगा जयंती या गंगा पूजन भी कहा जाता है।
वैसाख मास की शुक्ल पक्ष की सप्तमी को जान्हु ऋषि के कान से प्रवाहित होने के कारण इस दिन को जान्हु सप्तमी भी कहा जाता है, जान्हु ऋषि की पुत्री होने के कारण ही माँ गंगा का एक नाम जान्हवी भी है।
गंगा सप्तमी पूजा विधि:
1. स्नान से दिन की शुरुआत करें: प्रातः काल गंगा नदी में स्नान करें या गंगा जल की कुछ बूंदें अपने स्नान जल में डालें।
2. पूजन सामग्री तैयार करें: माँ गंगा की पूजा के लिए फल, फूल, धूप, दीप, और मिठाई तैयार रखें।
3. माँ गंगा की आरती: स्नान के बाद गंगा माँ की आरती करें और उन्हें पुष्प अर्पित करें।
4. ध्यान और प्रार्थना: शांत मन से ध्यान करें और प्रार्थना में अपने पितरों की शांति के लिए गंगा माँ से आशीर्वाद मांगें।
5. दान का महत्व: जरूरतमंदों को अन्न, वस्त्र या अन्य सामग्री का दान करें।
गंगा सप्तमी के इस दिन उपरोक्त विधियों का पालन करने से आपके जीवन में सुख-समृद्धि का वास होगा और आपके पितरों को मोक्ष की प्राप्ति होगी।