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**Fact Check: No Official Confirmation of an Italy-Wide Visa Ban on Pakistani Citizens**
A claim spreading widely on social media says that **Italian Prime Minister Giorgia Meloni** has officially stopped visas for all Pakistani citizens. However, this claim has not been confirmed by any official or credible source.
So far, there has been no formal announcement from the Italian government, the Ministry of Foreign Affairs, EU institutions, or any trusted international authority confirming such a decision.
Italy’s visa system works under **European Union rules**, immigration laws, and diplomatic procedures. A complete visa suspension for citizens of an entire country would be a major policy c****e and would normally come with an official notice, legal document, or public statement.
Until Italian authorities or reliable international media confirm it, this claim should be treated as **unverified**.
#factcheck #italy #giorgiameloni #visapolicy #pakistan #italyvisa #immigration

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मेरठ में SSP अभिनाश पांडेय ने जो कार्यवाही की क्या आप उसका समर्थन करते हो या नहीं?
#सवर्ण #ब्राह्मण #viralpost

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1858 के प्रथम स्वतंत्रता संग्राम के दौरान जब अंग्रेजी सेना ने झांसी किले को चारों ओर से घेर लिया, तब एक ऐसी वीरांगना सामने आई, जिसने अपने अद्भुत साहस और त्याग से इतिहास में अमिट स्थान बना लिया। उनका नाम था झलकारी बाई।

एक साधारण और गरीब परिवार में जन्मी झलकारी बाई अपनी बहादुरी, युद्ध कौशल और निडर स्वभाव के कारण जल्द ही रानी लक्ष्मीबाई की विश्वसनीय सहयोगी बन गईं। वे झांसी की महिला सेना 'दुर्गा दल' की प्रमुख भी थीं और संकट की हर घड़ी में रानी के साथ डटकर खड़ी रहीं।

जब अंग्रेजों ने झांसी किले पर निर्णायक हमला किया, तब झलकारी बाई ने एक असाधारण निर्णय लिया। उन्होंने रानी लक्ष्मीबाई का वेश धारण कर स्वयं को अंग्रेजों के सामने प्रस्तुत कर दिया। अंग्रेज उन्हें ही झांसी की रानी समझते रहे, जबकि इसी दौरान असली रानी लक्ष्मीबाई सुरक्षित निकलकर स्वतंत्रता संग्राम की लड़ाई को आगे बढ़ाने में सफल रहीं।

झलकारी बाई का यह साहस केवल एक रणनीति नहीं था, बल्कि मातृभूमि की रक्षा के लिए दिया गया सर्वोच्च बलिदान था। उनका जीवन इस बात का प्रमाण है कि इतिहास केवल राजाओं और रानियों से नहीं, बल्कि उन गुमनाम वीर-वीरांगनाओं से भी बनता है, जिन्होंने देश के लिए अपना सब कुछ न्योछावर कर दिया।

#jhalkaribai #ranilakshmibai #jhansi #1857revolt #freedomfighter #janbal

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भारत के प्राचीन मंदिर केवल आस्था के केंद्र नहीं, बल्कि अद्भुत इंजीनियरिंग और वास्तुकला के जीवंत उदाहरण भी हैं। तमिलनाडु के तंजावुर में स्थित बृहदेश्वर मंदिर (राजराजेश्वरम) ऐसा ही एक चमत्कार है, जो करीब 1000 वर्षों से दुनिया को हैरान कर रहा है।
इस मंदिर का सबसे बड़ा रहस्य इसका 216 फीट ऊंचा शिखर है, जिसके शीर्ष पर 80 टन से अधिक वजन का एक विशाल ग्रेनाइट कुंभम (शिखर पत्थर) स्थापित है। उस दौर में न क्रेन थीं और न आधुनिक मशीनें, फिर भी इतना भारी पत्थर इतनी ऊंचाई तक कैसे पहुंचाया गया—यह सवाल आज भी शोधकर्ताओं और इंजीनियरों को आकर्षित करता है।
इतिहासकारों का मानना है कि इसे ऊपर पहुंचाने के लिए लगभग 6 किलोमीटर लंबा मिट्टी का रैंप बनाया गया होगा, जिसके सहारे हाथियों और मजदूरों ने धीरे-धीरे इस विशाल पत्थर को शिखर तक पहुंचाया। हालांकि इसका प्रत्यक्ष प्रमाण उपलब्ध नहीं है, इसलिए इसे एक प्रमुख ऐतिहासिक परिकल्पना माना जाता है।
11वीं शताब्दी में राजराज चोल प्रथम द्वारा निर्मित यह मंदिर पूरी तरह ग्रेनाइट से बना है, जबकि आसपास लगभग 100 किलोमीटर तक ग्रेनाइट की प्राकृतिक खदानें नहीं हैं। गर्भगृह में स्थित लगभग 12 फीट ऊंचा शिवलिंग और एक ही पत्थर से बनी विशाल नंदी प्रतिमा इसकी भव्यता को और भी बढ़ाते हैं।
मंदिर के बारे में यह लोकप्रिय मान्यता भी है कि दोपहर के समय इसके मुख्य शिखर की छाया जमीन पर दिखाई नहीं देती। हालांकि विशेषज्ञों के अनुसार यह प्रभाव मंदिर की ज्यामितीय संरचना, सूर्य की स्थिति और छाया के पड़ने के तरीके से जुड़ा हो सकता है।
#brihadeeswarartemple #thanjavur #tamilnadu #ancientindia #indianhistory #janbal

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🪔 योगिनी एकादशी विशेष: 88 हजार ब्राह्मण भोजन के समान पुण्य देने वाला दिव्य व्रत
🌿 आषाढ़ मास, कृष्ण पक्ष • योगिनी एकादशी — स्मार्त: 10 जुलाई 2026 (शुक्रवार) | वैष्णव: 11 जुलाई 2026 (शनिवार)
मान्‍यता है कि योगिनी एकादशी का व्रत करने से व्रती को सभी पापों से मुक्ति मिल जाती है। साथ ही वह इस लोक के सुख भोगते हुए स्‍वर्ग की प्राप्‍ति करता है। पौराणिक मान्‍यताओं के अनुसार योगिनी एकादशी का व्रत करने से 88 हजार ब्राह्मणों को भोजन कराने का पुण्य प्राप्त होता है।
🟢 योगिनी एकादशी की पूजा विधि
योगिनी एकादशी के उपवास की शुरुआत दशमी तिथि की रात्रि से ही हो जाती है। व्रती को दशमी तिथि की रात्रि से ही तामसिक भोजन का त्याग कर सादा भोजन ग्रहण करना चाहिये और ब्रह्मचर्य का पालन अवश्य करें। हो सके तो जमीन पर ही सोएं। प्रात:काल उठकर नित्यकर्म से निजात पाकर स्नानादि के पश्चात व्रत का संकल्प लें। फिर कुंभस्थापना कर उस पर भगवान विष्णु की मूर्ति रख उनकी पूजा करें। भगवान नारायण की मूर्ति को स्नानादि करवाकर भोग लगायें। पुष्प, धूप, दीप आदि से आरती उतारें। पूजा स्वंय भी कर सकते हैं और किसी विद्वान ब्राह्मण से भी करवा सकते हैं। दिन में योगिनी एकादशी की कथा भी जरुर सुननी चाहिये। इस दिन दान कर्म करना भी बहुत कल्याणकारी रहता है। पीपल के पेड़ की पूजा भी इस दिन अवश्य करनी चाहिये। रात्रि में जागरण करना भी अवश्य करना चाहिये। इस दिन दुर्व्यसनों से भी दूर रहना चाहिये और सात्विक जीवन जीना चाहिये।

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