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मुगलों ने संभाजी से कहा कि वे यदि अपना पूरा राज्य और सभी किले औरंगजेब को सौप दे, तो औरंगजेब संभाजी की जान बख्श देगा. संभाजी ने इस बात से मना कर दिया. इसके बाद मुगल अपने उस उद्देश्य पर लौट आये, जिसके लिए उन्होंने भारत पर आक्रमण किया था. जिसमे गैर-मुस्लिम को मुस्लिम बनाना और जनता को लूटना और महिलाओं का शील भंग मुख्य कार्य था.
संभाजी ये सब देखकर बहुत आहत हो रहे थे. ऐसे में संभाजी की हालत देख उन्हें फिर से औरंगजेब का ये सन्देश आया, कि वो यदि इस्लाम अपना लेते हैं, तो उन्हें ऐशो-आराम की जिंदगी दी जायेगी. लेकीन संभाजी ने साफ़ कह दिया, कि आलमगीर देश का सबसे बड़ा शत्रु हैं और वो ऐसी कोई संधि नहीं कर सकते, जो उनके राष्ट्र के सम्मान के विपरीत हो.
कठोर यातनाओ के बाद भी ना झुकने पर संभाजी और कलश को कैद से निकालकर घंटी वाली टोपी पहना दी.उनके हाथ में झुनझुना बाँध कर उन्हें ऊँटो से बांध दिया गया और तुलापुर के बाज़ार में घसीटा जाने लगा, मुगल लगातार उनका अपमान कर रहे थे और उन पर थूक रहे थे. उन्हें जबरदस्ती घसीटा जा रहा था, जिसके कारण झुनझुने की आवाज़ को साफ़ सुना जा सकता था.
मुगल अपनी असलियत का परिचय देते हुए, ये सब देखकर क्रूरता से हंस रहे थे और उपहास कर रहे थे. मंत्री कलश भी ऐसे में हार मानाने वालो में से नहीं थे, वो लगातार भगवान का जाप कर रहे थे, जब उनके बाल खीच कर उन्हें इस्लाम कबूलने के लिए कहा जा रहा था, तब भी उन्होंने साफ़ तौर पर इससे ना कह दिया और कहा, कि हिंदुत्व सभी धर्मो से ऊपर सच्चा और शान्ति प्रिय धर्म हैं. मराठाओ के लिए अपने राजा के अपमान को देखना बहुत बड़ी बाध्यता थी.
#sambhajimaharaj #punyatithi #muagal #vskawadh

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धर्मनिष्ठा और राष्ट्रभक्ति के प्रेरणास्रोत, वीर शिरोमणि छत्रपति संभाजी महाराज के बलिदान दिवस पर उन्हें कोटिशः नमन।
अद्वितीय वीरता और मातृभूमि की रक्षा के लिए उनका बलिदान सदैव राष्ट्र और धर्म की सेवा के लिए प्रेरणा प्रदान करते रहेंगे।

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धर्मनिष्ठा और राष्ट्रभक्ति के प्रेरणास्रोत, वीर शिरोमणि छत्रपति संभाजी महाराज के बलिदान दिवस पर उन्हें कोटिशः नमन।
अद्वितीय वीरता और मातृभूमि की रक्षा के लिए उनका बलिदान सदैव राष्ट्र और धर्म की सेवा के लिए प्रेरणा प्रदान करते रहेंगे।

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देश धरम पर मिटने वाला, शेर शिवा का छावा था।
महापराक्रमी परम प्रतापी, एक ही शंभू राजा था।
अद्भुत शौर्य और पराक्रम के प्रतीक, धर्मवीर छत्रपति संभाजी महाराज के बलिदान दिवस पर कोटि-कोटि नमन।
उनका अद्भुत शौर्य और पराक्रम आज भी हमें धर्म और राष्ट्र के प्रति अडिग समर्पण की प्रेरणा देता है।

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देश की पहली महिला अध्यापिका, नारी शिक्षा एवं महिला सशक्तिकरण की अग्रदूत, महान समाजसेविका सावित्रीबाई फुले जी की पुण्यतिथि पर भाजपा जम्मू-कश्मीर संगठन महामंत्री श्री Ashok Koul, महामंत्री श्री Baldev Singh Billawaria एवं श्री Gopal Mahajan सहित अन्य वरिष्ठ नेताओं ने उन्हें श्रद्धा सुमन अर्पित कर विनम्र श्रद्धांजलि अर्पित की।
उनका जीवन नारी शिक्षा, सामाजिक न्याय और समानता के लिए समर्पित रहा, जो सदैव समाज को प्रेरित करता रहेगा।

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देश की पहली महिला अध्यापिका, नारी शिक्षा एवं महिला सशक्तिकरण की अग्रदूत, महान समाजसेविका सावित्रीबाई फुले जी की पुण्यतिथि पर भाजपा जम्मू-कश्मीर संगठन महामंत्री श्री Ashok Koul, महामंत्री श्री Baldev Singh Billawaria एवं श्री Gopal Mahajan सहित अन्य वरिष्ठ नेताओं ने उन्हें श्रद्धा सुमन अर्पित कर विनम्र श्रद्धांजलि अर्पित की।
उनका जीवन नारी शिक्षा, सामाजिक न्याय और समानता के लिए समर्पित रहा, जो सदैव समाज को प्रेरित करता रहेगा।

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देश की पहली महिला अध्यापिका, नारी शिक्षा एवं महिला सशक्तिकरण की अग्रदूत, महान समाजसेविका सावित्रीबाई फुले जी की पुण्यतिथि पर भाजपा जम्मू-कश्मीर संगठन महामंत्री श्री Ashok Koul, महामंत्री श्री Baldev Singh Billawaria एवं श्री Gopal Mahajan सहित अन्य वरिष्ठ नेताओं ने उन्हें श्रद्धा सुमन अर्पित कर विनम्र श्रद्धांजलि अर्पित की।
उनका जीवन नारी शिक्षा, सामाजिक न्याय और समानता के लिए समर्पित रहा, जो सदैव समाज को प्रेरित करता रहेगा।

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गुरसिमरन सिंह मंड के घर पहुंची NIA की टीम
#niateam #gursimransinghmand #house #latestnews

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टी20 वर्ल्ड कप 2026 जीतने के बाद भारतीय कप्तान सूर्यकुमार यादव, हेड कोच गौतम गंभीर और आईसीसी चेयरमैन जय शाह अहमदाबाद के हनुमान मंदिर में ट्रॉफी लेकर गए थे। इस पर पूर्व क्रिकेटर और टीएमसी सांसद कीर्ति आजाद ने कड़ी आपत्ति जताई। आजाद ने कहा कि भारतीय टीम में कई धर्मों के खिलाड़ी होते हैं और खेल का अपना कोई धर्म नहीं होता।

आजाद के इस बयान पर पूर्व भारतीय क्रिकेटर हरभजन सिंह ने पलटवार किया है। हरभजन ने कहा कि लोगों को आजाद की बातों पर ध्यान नहीं देना चाहिए और खेल व राजनीति को हमेशा अलग रखना चाहिए। उन्होंने सूर्यकुमार और गंभीर का बचाव करते हुए स्पष्ट किया कि यह खिलाड़ियों की व्यक्तिगत आस्था का मामला है। हरभजन ने कहा कि अगर खिलाड़ियों ने मन्नत मांगी थी, तो वे अपनी इच्छा से मंदिर, गुरुद्वारे या किसी भी धार्मिक स्थल पर जाने के लिए पूरी तरह स्वतंत्र हैं। उन्होंने जोर देकर कहा कि खिलाड़ियों की आस्था और उनके कहीं भी जाने पर इस तरह के सवाल नहीं उठाए जाने चाहिए।

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