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चक्रवात दितवाह के संभावित प्रभाव को देखते हुए तमिलनाडु सरकार पूरी तरह अलर्ट मोड में है। मंत्री ने बताया कि कड्डलोर ज़िले में 1 लाख लोगों के लिए भोजन, सुरक्षित आश्रय और आवश्यक सुविधाओं की तैयारी कर ली गई है। एनडीआरएफ टीमों को तैनात किया गया है और तटीय इलाकों में लगातार मॉनिटरिंग जारी है। प्रशासन ने लोगों से सतर्क रहने और आवश्यक निर्देशों का पालन करने की अपील की है।
जौनपुर की यात्रा : भक्ति, विरासत और मिठास का संगम
जौनपुर की यात्रा धार्मिक श्रद्धा, प्राचीन विरासत और अनूठी मिठास का एक संपूर्ण अनुभव है, जिसकी शुरुआत माँ शीतला चौकिया धाम के पावन दर्शन से होती है, जहाँ माँ की अलौकिक शक्ति और शांत वातावरण भक्तों को गहरे आध्यात्म से जोड़ता है। इस भक्तिमय यात्रा को आगे बढ़ाते हुए, आपको गोमती तट पर स्थित त्रिलोचन महादेव मंदिर में भगवान शिव के दर्शन का सौभाग्य मिलता है, जो मन को भक्ति के गहन अहसास से भर देता है। इन आध्यात्मिक अनुभवों के बाद, जौनपुर की विश्व-प्रसिद्ध, रसीली और बेमिसाल इमरती का स्वाद लेना ही अलग है, जो इस सांस्कृतिक और धार्मिक सफर में ‘स्वाद का साथ’ देकर आपकी जौनपुर यात्रा को यादगार और पूर्ण बना देती है। इसलिए, आज ही अपनी यात्रा की योजना बनाएँ और भक्ति, विरासत और मिठास के इस अद्भुत संगम का स्वयं अनुभव करें!
आदरणीय प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी का ‘मन की बात’ कार्यक्रम कल 30 नवंबर 2025, सुबह 11 बजे प्रसारित होगा।
आप सभी से निवेदन है कि कार्यक्रम अवश्य सुनें और प्रधानमंत्री जी के विचारों को समाजहित में आगे बढ़ाने का संकल्प लें।
📅 दिनांक: 30 नवंबर 2025
⏰ समय: सुबह 11 बजे
📻 प्रसारण माध्यम: रेडियो एवं समाचार चैनल
तस्वीर में दिख रही यह प्यारी बच्ची, सिसिलिया, मिजोरम के एक छोटे से गाँव की है। जहाँ बिजली भी मुश्किल से पहुँचती है। उसके पिता गरीब किसान हैं। इस छोटी सी जान के दिल में छेद था, और हालत बहुत गंभीर थी। इलाज का खर्च इतना था कि परिवार कभी सोच भी नहीं सकता था।
कोलकाता के आर एन टैगोर अस्पताल में बच्ची को लाया गया। इलाज शुरू हुआ, लेकिन खर्च 13 लाख के पार चला गया। दान से कुछ पैसे इकट्ठा हुए, पर लाखों रुपये कम पड़ रहे थे। परिवार के पास सब कुछ खत्म हो चुका था।
तभी डॉ. मृणालेंदु दास (Dr. Mrinalendu Das) सामने आए। एक जाने-माने कार्डियक सर्जन, जिनके लिए यह सिर्फ एक और ऑपरेशन हो सकता था। लेकिन उन्होंने इंसानियत को चुना।
जब उन्होंने परिवार की बेबसी देखी, तो डॉ. दास और अस्पताल प्रशासन ने एक अविश्वसनीय फैसला लिया—उन्होंने पूरे 7,24,892 रुपये का बिल माफ़ कर दिया! जी हाँ, सात लाख से भी ज़्यादा का बिल!
कल्पना कीजिए उस माँ-बाप की खुशी का, जिनके लिए उनके बच्चे की जान दुनिया की सबसे कीमती चीज़ थी, और वह उन्हें दान में मिल गई। आज सिसिलिया स्वस्थ है और अपने घर लौट चुकी है।
डॉ. दास जैसे लोग साबित करते हैं कि इस दुनिया में इंसानियत अभी भी ज़िंदा है। पैसा सब कुछ नहीं होता।
आईये, इस फ़रिश्ते जैसे डॉक्टर और अस्पताल के इस महान कदम के लिए उन्हें सलाम करें। एक लाइक और शेयर तो बनता है, ताकि यह कहानी ज़्यादा से ज़्यादा लोगों तक पहुँचे और दूसरों को भी प्रेरित करे।
इंसानियत के नाम एक ❤️ ज़रूर कमेंट करें।
Sanjukumari
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