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एक गाँव में कृष्णा बाई (सुखिया) नाम की निर्धन वृद्धा रहती थी, जो दूसरों के घरों में काम करके अपना जीवन यापन करती थी। वह भगवान श्रीकृष्ण की अनन्य भक्त थी और प्रतिदिन मेहनत से माला बनाकर उन्हें अर्पित करती थी। उसकी अटूट भक्ति देख भगवान ने उसे स्वप्न में आने वाले प्रलय की चेतावनी दी और गाँव छोड़ने को कहा।
जब कृष्णा बाई गाँव छोड़कर जाने लगी, तो गाँव वालों ने उसका उपहास किया। गाँव की सीमा पर पहुँचते ही भगवान ने उसे याद दिलाया कि वह माला बनाने वाली 'सुई' झोपड़ी में ही भूल आई है। सुई के प्रति भगवान की यह चिंता देख वह पुनः गाँव की ओर दौड़ी और सुई लेकर सुरक्षित बाहर आई। जैसे ही वह और उसे ले जाने वाला भक्त गाड़ीवान सुरक्षित स्थान पर पहुँचे, पूरा गाँव जलमग्न हो गया।
सीख: यह कथा सिखाती है कि भगवान अपने भक्त की छोटी-से-छोटी वस्तु (सुई) तक का ध्यान रखते हैं। जब तक भक्त की एक सुई भी गाँव में थी, भगवान ने प्रलय को रोक कर रखा। उनकी कृपा और सुरक्षा अपने भक्तों पर सदैव बनी रहती है।
मार्गदर्शक - श्री हित प्रेमानंद गोविंद शरण जी महाराज
प्रेरणास्त्रोत - श्री श्री १००८ श्री स्वामी हरिहरानंद जी महाराज , होलीपुरा
विश्व पार्किंसंस दिवस 2026
(World Parkinson's Day)
Theme: "Bridge the Care Gap"
(देखभाल के अंतर को कम करना)
11 अप्रैल
यह दिन डॉ. जेम्स पार्किंसंस के जन्मदिन के उपलक्ष्य में मनाया जाता है, जिन्होंने सबसे पहले इस बीमारी की पहचान की थी।
इस दिन का मुख्य लक्ष्य पार्किंसंस रोग के प्रति लोगों को जागरूक करना और इससे प्रभावित मरीजों की मदद करना है।
𝐖𝐨𝐫𝐥𝐝 𝐏𝐚𝐫𝐤𝐢𝐧𝐬𝐨𝐧’𝐬 𝐃𝐚𝐲
▪️World Parkinson’s Day is being observed today across the globe to raise awareness about Parkinson’s disease, a neurodegenerative disorder.
▪️The theme for this year is “Bridge the Care Gap”. The day aims to educate people about the condition, promote early diagnosis, and advocate for improved care and research.
▪️AIIMS will organise several awareness programmes, including a walkathon and public outreach events on 18 and 19 April.
एक बार हनुमान जी ने माता सीता को अपनी मांग में सिंदूर लगाते हुए देखा। उनके मन में जिज्ञासा हुई और उन्होंने माता से पूछा कि वे ऐसा क्यों कर रही हैं। माता सीता ने मुस्कुराते हुए उत्तर दिया कि यह सिंदूर वे अपने स्वामी भगवान श्री राम की लंबी आयु और अच्छे स्वास्थ्य की कामना के लिए लगाती हैं।
यह सुनकर हनुमान जी ने सोचा कि यदि चुटकी भर सिंदूर लगाने से प्रभु की आयु बढ़ती है, तो क्यों न वे अपने पूरे शरीर पर ही सिंदूर लगा लें? प्रभु श्री राम के प्रति अपनी अटूट भक्ति और प्रेम के कारण उन्होंने अपने पूरे शरीर को सिंदूर से रंग लिया।
जब वे इस अवस्था में सभा में पहुंचे, तो भगवान राम उन्हें देखकर पहले तो चकित हुए और फिर उनके भोलेपन और निस्वार्थ प्रेम को देखकर अत्यंत प्रसन्न हुए।