हथकड़ी से लेकर DSP की वर्दी तक का सफर आसान नहीं होता… खासकर तब, जब जिंदगी बार-बार आपको जेल, कोर्ट-कचहरी और अस्पताल के चक्कर लगवाए। जैनेंद्र कुमार निगम की कहानी उसी हिम्मत और जज्बे की मिसाल है, जो हर मुश्किल के सामने डटकर खड़ा होना सिखाती है।
एक समय ऐसा आया जब परिवार पर झूठे मुकदमे, जानलेवा हमले, घर को आग लगाना और जेल जाना उनकी जिंदगी की सच्चाई बन गया। माता-पिता अस्पताल में थे और जैनेंद्र खुद टूट चुके थे। लेकिन उसी अस्पताल में, मां की हथेली पर लिखी एक कसम ने उनकी दिशा बदल दी – “मैं पूरी मेहनत करूंगा और DSP बनकर ही लौटूंगा।”
गरीबी, संघर्ष और बार-बार छूटते मौके उनके हौसले को तोड़ नहीं सके। पुलिस आरक्षक, सब-इंस्पेक्टर और शिक्षक बनने के अवसर हाथ से निकलते गए, फिर भी उन्होंने पढ़ाई नहीं छोड़ी। बीमारी, लॉकडाउन और फर्जी मामलों के बीच भी उन्होंने तैयारी जारी रखी और आखिरकार MPPSC 2023 में सफलता हासिल कर DSP बने।
यह कहानी सिर्फ एक सफलता की नहीं, बल्कि उस भरोसे की है जो खुद पर रखा जाए तो हालात भी हार मान लेते हैं। जैनेंद्र कुमार निगम आज हर उस युवा के लिए प्रेरणा हैं, जो मुश्किलों से डरकर रुकने की सोचता है। याद रखिए, अगर इरादा सच्चा हो, तो दुनिया की कोई ताकत आपको आपकी मंजिल तक पहुंचने से रोक नहीं सकती।
#successstory #inspirationaljourney #nevergiveup
