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कर्नाटक के बागलकोट स्थित ‘नम्मा क्लिनिक’ की एक मेडिकल ऑफिसर को बिना काम किए महीनों तक वेतन उठाने के गंभीर आरोप में पद से बर्खास्त कर दिया गया है। आरोपी डॉक्टर अंकिता यारगल स्थानीय कांग्रेस विधायक उमेश मेटी की भतीजी बताई जा रही हैं। प्रशासनिक पड़ताल में यह सनसनीखेज खुलासा हुआ कि डॉ. अंकिता 3 मार्च से लेकर सितंबर तक एक दिन भी अस्पताल नहीं पहुंचीं, फिर भी हर माह सत्तर हजार रुपये से अधिक की सरकारी तनख्वाह उनके खाते में जमा होती रही। हैरानी की बात यह है कि इस अवधि में वह अस्पताल से नदारद रहकर एक निजी संस्थान से पीजी की डिग्री पूरी करने में व्यस्त थीं, जिसके चलते आम मरीजों को भारी असुविधाएं झेलनी पड़ीं। बागलकोट जिला पंचायत के मुख्य कार्यकारी अधिकारी गजानन बाले की अगुवाई में इस फर्जीवाड़े की जांच चल रही है और शुरुआती समन पर पेश न होने के बाद उन्हें दोबारा तलब किया गया है। स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों ने साफ कर दिया है कि बिना अनुमति दोहरी गतिविधियों में शामिल रहने के चलते उनसे अनुचित तरीके से ली गई पूरी सैलरी की वसूली की जाएगी और सख्त कानूनी कदम भी उठाए जाएंगे, जिसके तहत उन्हें तुरंत प्रभाव से सेवामुक्त कर दिया गया है।
असम की 'आयरन लेडी' के नाम से पहचानी जाने वाली 2006 बैच की जांबाज IPS अधिकारी संजुक्ता पराशर ने इतिहास रच दिया है। वे अब CRPF की सबसे घातक जंगल कॉम्बैट यूनिट—CoBRA (Commando Battalion for Resolute Action) की कमान संभालने वाली पहली महिला आईजी बन चुकी हैं। नक्सलियों और आतंकवादियों के खात्मे के लिए बनी इस बेहद खतरनाक एलिट फोर्स की ट्रेनिंग इतनी सख्त होती है कि घने जंगलों, दुर्गम पहाड़ियों और जानलेवा हालातों में चुपचाप घुसकर दुश्मनों को ढेर करना ही इनका रोज का काम होता है। अपने करियर के शुरुआती दौर में असम के बीहड़ इलाकों में खुद मोर्चे पर उतरकर आतंकियों की कमर तोड़ने वाली इस निडर अफसर को इस मुकाम तक पहुंचते देखना न सिर्फ भारतीय पुलिस बल के लिए गर्व की बात है, बल्कि यह पूरे देश की महिलाओं के लिए एक मिसाल भी है।
जम्मू से दिल छू लेने वाली प्रेरणादायक कहानी सामने आई है, जहाँ 45 साल की कश्मीरी पंडित महिला रेनू हंस ने अपनी शारीरिक सीमाओं को मात देते हुए 22 साल के लंबे अंतराल के बाद 10वीं की परीक्षा में 82 प्रतिशत शानदार अंक हासिल किए हैं। बोल और सुन पाने में असमर्थ रेनू के इस सफर में उनके 12वीं साइंस के छात्र बेटे नमन कौल ने शिक्षक की भूमिका निभाई और खुद की पढ़ाई के साथ-साथ मां को पूरी लगन से पढ़ाकर इस बड़ी कामयाबी तक पहुँचाया।
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