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वाराणसी के पांडेपुर स्थित 'सेरेन सोनी प्ले स्कूल' से इंसानियत को तार-तार कर देने वाली घटना सामने आई है। यहाँ नर्सरी में पढ़ने वाले 5 साल के मासूम ने शिक्षिका प्रीति कुशवाहा से शौचालय जाने की इजाजत मांगी लेकिन शिक्षिका ने मना कर दिया। नियंत्रण न रख पाने के कारण बच्चे ने पैंट में ही पेशाब कर दिया। इस बात से आगबबूला हुई शिक्षिका मासूम को दूसरे कमरे में ले गई और रसोई के गैस चूल्हे पर चाकू गर्म करके उसके प्राइवेट पार्ट को दाग दिया।
बच्चे ने घर पहुंचकर रोते हुए जब यह आपबीती सुनाई तो परिजनों के होश उड़ गए। आरोप है कि जब बच्चे के पिता जो कि पेशे से वकील है ने स्कूल प्रशासन और प्रिंसिपल से शिकायत की तो उन्होंने कोई कार्रवाई करने के बजाय धमकी दी। पीड़ित पिता की तहरीर पर पुलिस ने आरोपी शिक्षिका, प्रिंसिपल और स्कूल प्रबंधन के खिलाफ मामला दर्ज कर लिया है और जांच शुरू कर दी है। इस अमानवीय कृत्य के बाद पूरे इलाके में भारी आक्रोश व्याप्त है।

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20 जुलाई को हुए छात्र प्रदर्शन के दौरान पैलेट गन और लाठीचार्ज में घायल हुए छात्रों का कहना है कि उनके शरीर पर लगे घाव जिंदगी भर रहेंगे, लेकिन आंदोलन में शामिल होने का उन्हें कोई पछतावा नहीं है।
कई छात्र अब भी इलाज करा रहे हैं। कुछ की कई सर्जरी हो चुकी हैं, जबकि कुछ की आंखों की रोशनी लौटने की उम्मीद बेहद कम बताई गई है।
वहीं, दिल्ली पुलिस का कहना है कि छात्रों के साथ कोई दुर्व्यवहार नहीं किया गया और बल का प्रयोग केवल प्रदर्शन के हिंसक होने तथा पथराव के बाद किया गया।
तीन सर्जरी के बाद खतरे से बाहर इरशाद
25 वर्षीय इरशाद शेख ने बताया कि उनके चेहरे, गर्दन और शरीर के ऊपरी हिस्से में कई पैलेट लगे थे, जिन्हें निकालने के लिए तीन सर्जरी करनी पड़ी। अब वह खतरे से बाहर हैं।
उन्होंने आगे के इलाज के लिए मध्य प्रदेश के जबलपुर स्थित अपने घर लौटने की योजना फिलहाल टाल दी है, क्योंकि डॉक्टरों ने पोस्ट-ऑपरेटिव जांच के लिए दिल्ली में ही रहने की सलाह दी है।
इरशाद ने कहा कि उनके माता-पिता चाहते हैं कि वह जल्द घर लौट आएं, लेकिन फिलहाल फॉलो-अप जांच पूरी होने तक उन्हें दिल्ली में रहना होगा।
आंदोलन सफल होने का संतोष
इरशाद ने कहा कि इतनी गंभीर चोटों के बावजूद उन्हें आंदोलन में शामिल होने का कोई अफसोस नहीं है। उनका कहना है कि उनके माता-पिता ने हमेशा सिखाया है कि हर घटना किसी अच्छे कारण से होती है।
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🌸 संघर्ष की राह पर चलने वालों की मंज़िल एक दिन सफलता ही होती है। 🌸
आर्थिक तंगी, सीमित संसाधन और कठिन परिस्थितियाँ किसी भी सपने को रोक नहीं सकतीं, यदि इरादे मजबूत हों। इस बेटी ने ट्यूशन पढ़ाकर अपनी पढ़ाई जारी रखी, बिना महंगी कोचिंग के केवल सेल्फ स्टडी और कड़ी मेहनत के दम पर बड़ी प्रतियोगी परीक्षा में सफलता हासिल की। यह उपलब्धि केवल एक परिवार की नहीं, बल्कि उन लाखों युवाओं के लिए प्रेरणा है जो कठिनाइयों के बावजूद अपने सपनों को साकार करने का साहस रखते हैं।
यह कहानी हमें सिखाती है कि सफलता पैसे से नहीं, बल्कि मेहनत, अनुशासन, धैर्य और आत्मविश्वास से मिलती है। हर माता-पिता के त्याग, हर शिक्षक के मार्गदर्शन और हर संघर्षरत विद्यार्थी की मेहनत को यह सफलता सलाम करती है। आइए, ऐसे प्रेरणादायक प्रयासों से सीख लें कि परिस्थितियाँ चाहे जैसी भी हों, अगर लक्ष्य स्पष्ट हो और मेहनत ईमानदार हो, तो मंज़िल अवश्य मिलती है।
सलाम है इस बेटी के जज़्बे, संघर्ष और अद्भुत सफलता को। यह कहानी हर युवा के लिए प्रेरणा का स्रोत है। 🇮🇳👏
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मथुरा यूपी: माँ ने तीन साल के बेटे को मार डाला ! प्रेमी से बात नहीं करने देता था