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इस आदमी के लिए लाइक करो

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अभिजीत दीपक पर स्याही फेंकने वाली महिला का तीखा बयान
Sharp statement of a woman who throws ink at Abhijit Deepak

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वो ब्राह्मण योद्धा जिसने जीतें जी एक बार भी युद्ध नहीं हारा ...!!
बहरे हो गए मुगल शिकारी सबको ठोका बारी बारी जियो पेशवा जनेऊधारी...!!
श्री मंत बाजीराव बल्लाल भट्ट जी अमर रहे 🔥

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घंटाघर से नगर निगम शाहजहांपुर के रोशनी गोदाम तक पहुंचने वाला मार्ग

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शारदा देवी का जन्म 22 दिसम्वर 1853 को बंगाल प्रान्त स्थित जयरामबाटी नामक ग्राम के एक गरीब ब्राह्मण परिवार में हुआ। उनके पिता रामचन्द्र मुखोपाध्याय और माता श्यामासुन्दरी देवी कठोर परिश्रमी, सत्यनिष्ठ एवं भगवद् परायण थे।

केवल 5 वर्ष की उम्र में इनका विवाह श्री रामकृष्ण से कर दिया गया था। उनका विवाह संबंध अलौकिक था। रामकृष्ण देव हमेशा शारदा देवी को माँ के रूप में ही देखते थे। एक दिन रामकृष्ण देव की मन:स्थिति जानने हेतु माँ शारदा ने उनसे पूछा: 'बताईये तो मैं आपकी कौन हूँ?' रामकृष्ण ने बिना विलंब उत्तर दिया कि, 'जो माँ काली मूर्ति में विराजमान है वहीं माँ आपके रूप में मेरी सेवा कर रही हैं। उनके भक्त मानते हैं कि माँ शारदा और रामकृष्ण देव कई जन्मों से एक दूसरे के सहचारी थे।

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