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भारत के प्राचीन मंदिर केवल आस्था के केंद्र नहीं, बल्कि अद्भुत इंजीनियरिंग और वास्तुकला के जीवंत उदाहरण भी हैं। तमिलनाडु के तंजावुर में स्थित बृहदेश्वर मंदिर (राजराजेश्वरम) ऐसा ही एक चमत्कार है, जो करीब 1000 वर्षों से दुनिया को हैरान कर रहा है।
इस मंदिर का सबसे बड़ा रहस्य इसका 216 फीट ऊंचा शिखर है, जिसके शीर्ष पर 80 टन से अधिक वजन का एक विशाल ग्रेनाइट कुंभम (शिखर पत्थर) स्थापित है। उस दौर में न क्रेन थीं और न आधुनिक मशीनें, फिर भी इतना भारी पत्थर इतनी ऊंचाई तक कैसे पहुंचाया गया—यह सवाल आज भी शोधकर्ताओं और इंजीनियरों को आकर्षित करता है।
इतिहासकारों का मानना है कि इसे ऊपर पहुंचाने के लिए लगभग 6 किलोमीटर लंबा मिट्टी का रैंप बनाया गया होगा, जिसके सहारे हाथियों और मजदूरों ने धीरे-धीरे इस विशाल पत्थर को शिखर तक पहुंचाया। हालांकि इसका प्रत्यक्ष प्रमाण उपलब्ध नहीं है, इसलिए इसे एक प्रमुख ऐतिहासिक परिकल्पना माना जाता है।
11वीं शताब्दी में राजराज चोल प्रथम द्वारा निर्मित यह मंदिर पूरी तरह ग्रेनाइट से बना है, जबकि आसपास लगभग 100 किलोमीटर तक ग्रेनाइट की प्राकृतिक खदानें नहीं हैं। गर्भगृह में स्थित लगभग 12 फीट ऊंचा शिवलिंग और एक ही पत्थर से बनी विशाल नंदी प्रतिमा इसकी भव्यता को और भी बढ़ाते हैं।
मंदिर के बारे में यह लोकप्रिय मान्यता भी है कि दोपहर के समय इसके मुख्य शिखर की छाया जमीन पर दिखाई नहीं देती। हालांकि विशेषज्ञों के अनुसार यह प्रभाव मंदिर की ज्यामितीय संरचना, सूर्य की स्थिति और छाया के पड़ने के तरीके से जुड़ा हो सकता है।
#brihadeeswarartemple #thanjavur #tamilnadu #ancientindia #indianhistory #janbal

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🪔 योगिनी एकादशी विशेष: 88 हजार ब्राह्मण भोजन के समान पुण्य देने वाला दिव्य व्रत
🌿 आषाढ़ मास, कृष्ण पक्ष • योगिनी एकादशी — स्मार्त: 10 जुलाई 2026 (शुक्रवार) | वैष्णव: 11 जुलाई 2026 (शनिवार)
मान्‍यता है कि योगिनी एकादशी का व्रत करने से व्रती को सभी पापों से मुक्ति मिल जाती है। साथ ही वह इस लोक के सुख भोगते हुए स्‍वर्ग की प्राप्‍ति करता है। पौराणिक मान्‍यताओं के अनुसार योगिनी एकादशी का व्रत करने से 88 हजार ब्राह्मणों को भोजन कराने का पुण्य प्राप्त होता है।
🟢 योगिनी एकादशी की पूजा विधि
योगिनी एकादशी के उपवास की शुरुआत दशमी तिथि की रात्रि से ही हो जाती है। व्रती को दशमी तिथि की रात्रि से ही तामसिक भोजन का त्याग कर सादा भोजन ग्रहण करना चाहिये और ब्रह्मचर्य का पालन अवश्य करें। हो सके तो जमीन पर ही सोएं। प्रात:काल उठकर नित्यकर्म से निजात पाकर स्नानादि के पश्चात व्रत का संकल्प लें। फिर कुंभस्थापना कर उस पर भगवान विष्णु की मूर्ति रख उनकी पूजा करें। भगवान नारायण की मूर्ति को स्नानादि करवाकर भोग लगायें। पुष्प, धूप, दीप आदि से आरती उतारें। पूजा स्वंय भी कर सकते हैं और किसी विद्वान ब्राह्मण से भी करवा सकते हैं। दिन में योगिनी एकादशी की कथा भी जरुर सुननी चाहिये। इस दिन दान कर्म करना भी बहुत कल्याणकारी रहता है। पीपल के पेड़ की पूजा भी इस दिन अवश्य करनी चाहिये। रात्रि में जागरण करना भी अवश्य करना चाहिये। इस दिन दुर्व्यसनों से भी दूर रहना चाहिये और सात्विक जीवन जीना चाहिये।

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भारतीय जनता पार्टी के वरिष्ठ नेता एवं केंद्रीय रक्षा मंत्री श्री Rajnath Singh जी को जन्मदिवस की हार्दिक शुभकामनाएं।

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संकल्प से सिद्धि तक...
जनविश्वास से इतिहास तक

जब नेतृत्व जनता के विश्वास को अपना सबसे बड़ा दायित्व मान ले, तब इतिहास अपने आप बनता है।

जन-जन की सरकार के संकल्प के साथ आगे बढ़ते हुए मुख्यमंत्री श्री Pushkar Singh Dhami जी आज उत्तराखण्ड के सबसे लंबे समय तक मुख्यमंत्री बनने का गौरव प्राप्त कर चुके हैं।

यह केवल एक रिकॉर्ड नहीं, बल्कि उत्तराखण्ड की जनता के विश्वास, निरंतर सेवा और विकास की राजनीति पर लगी मुहर है।

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उत्तराखंड के यशस्वी मुख्यमंत्री श्री Pushkar Singh Dhami जी को राज्य के मुख्य सेवक के रूप में सबसे लंबा और ऐतिहासिक कार्यकाल पूरा करने पर हार्दिक बधाई एवं अनंत शुभकामनाएं।
आपका यह कार्यकाल केवल समय की अवधि नहीं, बल्कि देवभूमि के समग्र विकास, सशक्तिकरण और 'संकल्प से सिद्धि' का एक जीवंत सफर है। हर वर्ग के कल्याण को समर्पित आपकी नीतियां राज्य को एक आदर्श राज्य बना रही हैं। बिना रुके, बिना थके, देवभूमि की सेवा में समर्पित आपके नेतृत्व में उत्तराखंड निरंतर नई ऊँचाइयाँ छू रहा है।

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अब जबकि मेरे द्वारा निभाए जा रहे किरदार की कुछ तस्वीरें मीडिया में आ चुकी हैं, तो मुझे लगा कि आप सबको मैं ख़ुद ही बता दूँ कि मैं किस भूमिका में नज़र आने वाला हूँ।🙏🕉
फ़िल्म ‘ श्री रामभूमि’ में मैं श्री अशोक सिंघल जी की भूमिका निभा रहा हूँ!! एक ऐसे व्यक्तित्व, जिन्होंने श्रीराम जन्मभूमि आंदोलन को अपनी पूरी निष्ठा, दृढ़ संकल्प और समर्पण से दिशा दी। वे केवल एक नेता नहीं, बल्कि प्रभु श्रीराम के अनन्य सेवक थे। उनकी आस्था, उनकी संवेदनशीलता और उनके अटूट विश्वास ने इस आंदोलन को एक नई ऊर्जा दी।
इतिहास के ऐसे व्यक्तित्व को पर्दे पर ईमानदारी और संवेदनशीलता के साथ जीवंत करना मेरे लिए एक बहुत बड़ी ज़िम्मेदारी है। मैं पूरी निष्ठा से अपना सर्वश्रेष्ठ देने की कोशिश करूँगा।
आप सबके आशीर्वाद और शुभकामनाओं की आवश्यकता रहेगी। जय श्री राम! 🙏❤️ #jaishriram

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अब जबकि मेरे द्वारा निभाए जा रहे किरदार की कुछ तस्वीरें मीडिया में आ चुकी हैं, तो मुझे लगा कि आप सबको मैं ख़ुद ही बता दूँ कि मैं किस भूमिका में नज़र आने वाला हूँ।🙏🕉
फ़िल्म ‘ श्री रामभूमि’ में मैं श्री अशोक सिंघल जी की भूमिका निभा रहा हूँ!! एक ऐसे व्यक्तित्व, जिन्होंने श्रीराम जन्मभूमि आंदोलन को अपनी पूरी निष्ठा, दृढ़ संकल्प और समर्पण से दिशा दी। वे केवल एक नेता नहीं, बल्कि प्रभु श्रीराम के अनन्य सेवक थे। उनकी आस्था, उनकी संवेदनशीलता और उनके अटूट विश्वास ने इस आंदोलन को एक नई ऊर्जा दी।
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