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सात महीने की प्रेगनेंट थी जब मेरे पति की हार्ट अटैक से मौत हो गई। पूरे परिवार ने मुझे घर से निकालने की कोशिश की। ननद बोली कि तेरा बच्चा हमारे घर का नहीं है। देवर ने कहा कि पेट में किसका बच्चा था? आज मेरा बेटा 8 महीने का है, कोई उसे गोद में नहीं लेता। क्या आप लोग मेरे बच्चे को अपना आशीर्वाद देंगे? 😍😎😍 #photo #photography
पठानकोट में 21 वर्षीय पुलिस कांस्टेबल युवराज की मौत ने कई सवाल खड़े कर दिए हैं। मृतक की मां ने बेटे की मौत के लिए एक युवती, उसकी मां और उसके मामा को जिम्मेदार ठहराया है। परिवार का कहना है कि युवराज और युवती के बीच लंबे समय से प्रेम संबंध थे तथा शादी का भरोसा दिया गया था। मां के अनुसार, युवराज को गुरदासपुर बुलाया गया, जहां उसे मानसिक रूप से परेशान किया गया। इसके बाद वह लापता हो गया और पांच दिन बाद उसका शव नहर से बरामद हुआ। मामले में पुलिस ने एक आरोपी को गिरफ्तार कर लिया है, जबकि दो अन्य आरोपियों के खिलाफ भी केस दर्ज किया गया है। परिवार सभी आरोपियों की गिरफ्तारी की मांग को लेकर प्रदर्शन कर रहा है। पुलिस का कहना है कि मामले की हर पहलू से जांच की जा रही है और जांच में सामने आने वाले तथ्यों के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।
यह घटना रात के समय की है। लड़की को कहीं जल्दी जाना था और ट्रेन खुलने ही वाली थी। घबराहट में उसने सामने दिख रहे (AC) कोच में चढ़ गई जबकि उसके पास केवल जनरल क्लास का टिकट था।
जब ट्रेन चल पड़ी, तो थोड़ी देर बाद ऑन-ड्यूटी (TTE) वहां टिकट जांचने पहुंचा। लड़की ने ईमानदारी से स्वीकार किया कि उसके पास जनरल टिकट है और एसी कोच का जुर्माना भरने के लिए उसकी जेब में पैसे नहीं हैं।
इसके बाद, टीटीई ने नियमों का हवाला देते हुए उसे अगले स्टेशन पर ट्रेन से नीचे उतरने को कह दिया। बाहर मूसलाधार बारिश हो रही थी, रात का अंधेरा था और स्टेशन भी काफी हद तक सुनसान था। लड़की अपने बैग और सामान के साथ भारी बारिश के बीच प्लेटफॉर्म पर खड़ी रह गई।
एक अकेली लड़की को आधी रात के समय, मूसलाधार बारिश के बीच किसी अनजान और सुनसान स्टेशन पर छोड़ देना उसकी सुरक्षा के साथ गंभीर खिलवाड़ है।
TTE को थोड़ा संवेदनशील होना चाहिए था। उसे लड़की को जनरल बोगी में शिफ्ट कर देना चाहिए था या ट्रेन के भीतर ही किसी सुरक्षित जगह खड़े रहने की अनुमति देनी चाहिए थी, न कि बारिश में धकेलना चाहिए था।
कई यूजर्स ने Indian Railways को टैग करते हुए इस टीटीई को नौकरी से निकालने (Sack the TTE) तक की मांग की है।
Section 139 (भारतीय रेलवे अधिनियम) के तहत, अकेले यात्रा कर रही किसी भी महिला या नाबालिग को रात के समय (शाम 6 बजे से सुबह 6 बजे के बीच) केवल टिकट न होने के आधार पर किसी भी स्टेशन पर जबरन ट्रेन से नीचे नहीं उतारा जा सकता।
यदि उन्हें उतारना भी पड़े, तो वह केवल बड़े जंक्शनों पर, जहां महिला (RPF) कांस्टेबल मौजूद हो, उनकी देखरेख में ही किया जा सकता है।
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झारखंड के बोकारो शहर में रहने वाले अजय पिछले 45 सालों से अपनी आजीविका कमाने के लिए एक अनूठा तरीका अपना रहे हैं। वे अपनी साइकिल पर ही कार और बाइक धोने की 'चलती-फिरती दुकान' चलाते हैं।
अजय किसी एक स्थायी जगह पर गैरेज या दुकान खोलने के बजाय सीधे लोगों के घर-घर जाते हैं और उनकी गाड़ियों की सफाई करते हैं। उन्होंने अपनी साइकिल पर ही गाड़ी धोने का सारा जरूरी सामान और मशीनरी सेट कर रखी है। पिछले साढ़े चार दशकों से लगातार वे इसी साइकिल के जरिए ग्राहकों को होम सर्विस दे रहे हैं। अजय की इस डोर-टू-डोर सर्विस के कारण स्थानीय लोगों को अपनी गाड़ियां साफ करवाने के लिए किसी सर्विस सेंटर तक जाने की जरूरत नहीं पड़ती। वे घर बैठे ही ग्राहकों की गाड़ियां चमकाने का काम कर रहे हैं, जो आज भी उसी तरीके से जारी है।