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गोवा पुलिस ने एक रूसी नागरिक अलेक्सई लियोनोव (37) को उत्तर गोवा के अरंबोल और मोरजिम इलाकों में दो रूसी महिलाओं की क्रूर हत्या के आरोप में गिरफ्तार किया है। पूछताछ के दौरान आरोपी ने पुलिस को चौंकाने वाला दावा किया कि उसने कुल 15 महिलाओं को "मोक्ष" दिलाया है। उसका कहना है कि उसने उन्हें "मारा नहीं, बल्कि मुक्ति दी"
पुलिस का कहना है कि आरोपी में "साइकोपैथिक" प्रवृत्ति दिख रही है और मामला सीरियल किलिंग की ओर इशारा कर रहा है। उसके फोन में 100+ महिलाओं की फोटोज मिली हैं।
रूसी पर्यटकों के बीच डर का माहौल है, कार्निवल के समय सिक्योरिटी बढ़ाई गई है।
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ओवेसी की पार्टी से पार्षद बनते ही इसने भड़काऊ बयान में कहा — पूरे मुंब्रा को हरे रंग से रंग देंगे
इन लोगों को यहां से भगा देंगे,
आज ये अपनी बात पे यू-टर्न लगा रही
डेमोग्रेफ़ी तेज़ी से बदल रही — इनका एजेंडा बिलकुल साफ़ है
और हम हिंदू कभी जात-पात पे तो कभी महंगाई पे
तो कभी आरक्षण और पेट्रोल-डीजल् पे लड़ते रहते है
लेकिन, असली खतरा हमे किससे है वो कोई नहीं देख पा रहा
हिंदुओ अपने धर्म,संस्कृति,धरोहर,और विचारधारा
का सरंक्षण करना है तो “समय रहते एक हो जाइए”
वकील एपी सिंह का बयान "हाथ बराबर, पैर बराबर, पढ़ाई बराबर, कोचिंग बराबर... फिर आरक्षण किस बात का" सोशल मीडिया पर वायरल हो गया है। उन्होंने जोर देकर कहा कि नौकरियां टैलेंट के आधार पर मिलनी चाहिए, न कि जाति पर। यह बयान आरक्षण व्यवस्था पर सवाल उठाता है, जो भारत में लंबे समय से विवाद का विषय बना हुआ है।
बयान की पृष्ठभूमि
एपी सिंह, जो सुप्रीम कोर्ट के वरिष्ठ वकील हैं, ने एक इवेंट या इंटरव्यू में यह बात कही। उनका तर्क है कि आज के दौर में सभी के पास समान अवसर हैं – कोचिंग, इंटरनेट, शिक्षा। अगर सबकी तैयारी बराबर है, तो आरक्षण क्यों? उन्होंने क्रीमी लेयर को आरक्षण न देने की वकालत की, चाहे वह किसी भी जाति का हो। यह बयान तेलंगाना PSC आरक्षण विवाद के बाद आया, जहां प्रीलिम्स में मेरिट बेस्ड सिलेक्शन पर बहस छिड़ी।
सही दिशा में कदम?
एपी सिंह का विचार आंशिक रूप से सही है। संविधान में आरक्षण सामाजिक न्याय के लिए है, लेकिन 75 साल बाद भी पीढ़ी दर पीढ़ी चलना उचित नहीं। सुप्रीम कोर्ट ने इंद्रा साहनी केस में 50% कैप लगाया, और क्रीमी लेयर OBC के लिए लागू है। SC/ST में भी लागू करने की मांग हो रही है। आज EWS आरक्षण से सामान्य वर्ग को भी कोटा मिला। टैलेंट बेस्ड सिलेक्शन से प्रशासन मजबूत होगा, जैसे UPSC में प्रीलिम्स मेरिट पर होता है।
विरोध और पक्ष
पक्ष: भ्रष्टाचार रुकेगा, योग्य लोग आएंगे। गुजरात, कर्नाटक जैसे राज्यों में सफल मॉडल हैं।
विपक्ष: गांवों में अभी भी असमानता है। आरक्षण हटाने से दलित-आदिवासी पिछड़ जाएंगे। प्रदर्शन हुए, BJP ने इसका विरोध किया।
एपी सिंह का बयान मेहनती युवाओं की फ्रस्ट्रेशन को आवाज देता है। लेकिन पूर्ण समानता के बिना इसे लागू करना कठिन। सरकार को आर्थिक आधार पर आरक्षण बढ़ाना चाहिए।
निष्कर्ष
आरक्षण का मूल उद्देश्य सशक्तिकरण था, न कि स्थायी कोटा। एपी सिंह सही कहते हैं – टैलेंट राज करे। लेकिन बदलाव धीरे-धीरे हो, ताकि कोई वंचित न रहे। यह बहस देश को आगे ले जाएगी।
FAKE NEWS ALERT 🚨 सोशल मीडिया पर फैलाया गया फर्जी दावा
पिछले कुछ दिनों से सोशल मीडिया पर दावा किया जा रहा था कि 9 साल की एक बच्ची ने बच्चे को जन्म दिया है और बच्चे का पिता उसका 11 साल का भाई है। इस दावे के साथ एक वीडियो वायरल किया गया और इसे कैथल (हरियाणा) का बताया गया।
स्थानीय प्रशासन ने किया खंडन
कैथल के DSP ललित कुमार ने मामले पर स्पष्ट बयान देते हुए कहा कि जिले के सभी थानों से जांच करवाई गई है और पुलिस रिकॉर्ड में ऐसा कोई मामला दर्ज नहीं है। प्रशासन ने इसे पूरी तरह फर्जी खबर बताया है।
वीडियो की हकीकत क्या है?
बताया जा रहा है कि वायरल वीडियो में एक बच्ची अपने छोटे भाई को गोद में लेकर दुलार कर रही है। निजी पारिवारिक वीडियो को उठाकर बिना सत्यापित किए उस पर झूठे दावे जोड़ दिए गए और बड़े पैमाने पर वायरल कर दिया गया।
सोशल मीडिया पर ‘डिजिटल ज़हर’ का खतरा
ऐसी भ्रामक और सनसनीखेज खबरें न सिर्फ समाज की सोच को दूषित करती हैं बल्कि भविष्य में उन बच्चों की जिंदगी पर भी दाग छोड़ सकती हैं। बच्ची भारत की हो, वियतनाम की हो या किसी और देश की — वह पहले एक मासूम है। ऐसे मामलों में जिम्मेदारी और संवेदनशीलता बेहद जरूरी है।
फर्जी खबर फैलाने वालों पर सवाल
फेक वीडियो को वायरल करने वालों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग भी उठ रही है। डिजिटल प्लेटफॉर्म पर फेक न्यूज़ फैलाने वालों के लिए सख्त कानून और निगरानी की जरूरत लगातार महसूस की जा रही है।
#children
हसीना नाम की महिला को भोपाल कोर्ट से दो साल की सजा हुई है। यह पूरा मामला निकाह के नाम पर धोखे का है। भोपाल के रहने वाले फरियादी तबरेज उल्लाह ने हसीना के साथ 27 मई 2022 को निकाह किया था। निकाह के कुछ दिनों तक सब कुछ ठीक रहा लेकिन हसीना का मिजाज बदलने लगा। इससे आहत होकर तबरेज उल्लाह के भाई ने खुदकुशी कर ली। पूरी खबर पढ़ने के लिए कमेंट बॉक्स में मौजूद लिंक पर क्लिक करें #nbtmp #bhopalcourt #mpnews #haseena #marriage #nikah
लखनऊ के गोसाईंगंज की रहने वाली मीना सोनी की जिंदगी एक रविवार दोपहर हमेशा के लिए बदल गई। 30 जून 2004 को यूपी के बांदा स्थित ससुराल में मीना दोपहर का काम निपटाकर अपने कमरे में आराम कर रही थीं। तभी उनके पति ने सोते समय उनके चेहरे पर तेजाब डाल दिया। तेजाब से उनका चेहरा, आंखें, होंठ और नाक बुरी तरह झुलस गए। ब्लाउज और साड़ी जल गईं। जान बचाने के लिए मीना कपड़े फेंककर सिर्फ पेटीकोट में सड़क पर भागीं। 9 साल की बेटी भी उनके साथ थी, लेकिन लोग तमाशबीन बने रहे, किसी ने मदद नहीं की।
मीना एक प्राइवेट अस्पताल पहुंचीं, जहां उन्हें भर्ती करने से मना कर दिया गया। शरीर ढकने के लिए गमछा मांगने पर भी एक आदमी ने डर के कारण इनकार कर दिया। आखिरकार जिला अस्पताल में उन्हें भर्ती किया गया। तीन दिन बाद उन्हें इलाहाबाद रेफर किया गया, जहां पता चला कि उनके पति ने भी वही तेजाब पीकर आत्म/हत्या की कोशिश की थी। कुछ दिन बाद उसी अस्पताल में पति की मौत हो गई। ससुराल वालों ने न इलाज में मदद की और न ही सहारा दिया।
इलाज के बाद मीना को यह भी एहसास हुआ कि उनका चेहरा हमेशा के लिए बिगड़ चुका है। बच्चों को देखकर डर लगना, खुद का चेहरा शीशे में देखना—यह सब उनके लिए मानसिक यातना बन गया। ससुराल ने रिश्ता तोड़ लिया, तब मीना मायके लौट आईं और एक एनजीओ से जुड़कर काम शुरू किया।
धीरे-धीरे उन्होंने अपने बच्चों को अपने साथ रखा, तीन सर्जरी करवाईं और खुद को संभाला। आज मीना अपने पैरों पर खड़ी हैं। उनके तीनों बच्चे पोस्ट ग्रेजुएट हैं और एक बेटी मॉडलिंग कर रही है। मीना कहती हैं—“चेहरा भले जल गया, लेकिन आज जिंदगी सुकून में है।”