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गुजरात के कुओं में पानी अचानक क्यों हिलने लगा? कई लोग इसे चमत्कार मान रहे थे, लेकिन इसके पीछे का असली कारण प्रकृति का अद्भुत विज्ञान है! 🌍💧

​भूमिगत जल का प्रवाह, जल-दबाव (Hydraulic Pressure) और चट्टानों की दरारें मिलकर यह दुर्लभ घटना बनाती हैं। प्रकृति के इन रहस्यों को समझना बहुत ज़रूरी है। आइए अंधविश्वास से बचें और वैज्ञानिक सोच को अपनाएं!

​प्रकृति के इस अद्भुत विज्ञान पर आपके क्या विचार हैं?

#gujaratnews #sciencefacts #naturewonders #waterconservation #factcheck

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10 अगस्त 1932 जब भारतीय हॉकी ने लॉस एंजिल्स में लहराया तिरंगा
भारतीय हॉकी के स्वर्णिम इतिहास में 10 अगस्त का दिन बेहद खास है। वर्ष 1932 में आज ही के दिन लॉस एंजिल्स ओलंपिक में भारतीय पुरुष हॉकी टीम ने स्वर्ण पदक जीतकर लगातार दूसरी बार ओलंपिक चैंपियन बनने का गौरव हासिल किया था। भारत ने इससे पहले 1928 के एम्सटर्डम ओलंपिक में भी स्वर्ण पदक जीता था। हॉकी इंडिया के रिकॉर्ड में 1932 लॉस एंजिल्स ओलंपिक भारत के स्वर्णिम पदकों की सूची में दर्ज है।
लॉस एंजिल्स में भारतीय टीम की कप्तानी लाल शाह बोखारी ने की थी और टीम में महान हॉकी खिलाड़ी मेजर ध्यानचंद भी शामिल थे। फाइनल मुकाबले में भारत ने अमेरिका को 24-1 से करारी शिकस्त देकर स्वर्ण पदक अपने नाम किया।
इस ऐतिहासिक जीत में ध्यानचंद ने अकेले आठ गोल दागकर भारतीय विजय में अहम भूमिका निभाई थी। जबकि उनके भाई रूप सिंह ने 10 गोल किए थे।
यह उपलब्धि उस दौर में भारतीय हॉकी के दबदबे का प्रतीक थी। 1928 में शुरू हुआ ओलंपिक स्वर्णिम अभियान 1932 में भी जारी रहा और इसके बाद 1936 के बर्लिन ओलंपिक में भारत ने लगातार तीसरा स्वर्ण पदक जीता। ध्यानचंद के नेतृत्व में मिली बर्लिन की सफलता ने भारतीय हॉकी के उस स्वर्णिम युग को और ऊंचाई दी।
10 अगस्त की यह ऐतिहासिक उपलब्धि आज भी भारतीय हॉकी के लिए प्रेरणा है।जब मैदान पर भारतीय खिलाड़ियों के कौशल और गोलों की गूंज ने दुनिया को बता दिया था कि हॉकी की दुनिया में भारत का दबदबा कायम है।

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ਸੁਪ੍ਰੀਆ ਸੂਲੇ ਦੀ ਧੀ ਦੇ ਵਿਆਹ ਦੀ ਰਿਸੈਪਸ਼ਨ ਮੌਕੇ PM ਮੋਦੀ , ਅਮਿਤ ਸ਼ਾਹ, ਰਾਹੁਲ ਗਾਂਧੀ ਸਣੇ ਹੋਰ ਬਹੁਤ ਸਾਰੇ ਨੇਤਾ ਹੋਏ ਸ਼ਾਮਲ
#pmnarendramodi #amitshah #rahulgandhi #sharadpawar #supriyasule #daughterreception

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ਸੁਪ੍ਰੀਆ ਸੂਲੇ ਦੀ ਧੀ ਦੇ ਵਿਆਹ ਦੀ ਰਿਸੈਪਸ਼ਨ ਮੌਕੇ PM ਮੋਦੀ , ਅਮਿਤ ਸ਼ਾਹ, ਰਾਹੁਲ ਗਾਂਧੀ ਸਣੇ ਹੋਰ ਬਹੁਤ ਸਾਰੇ ਨੇਤਾ ਹੋਏ ਸ਼ਾਮਲ
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ਸੁਪ੍ਰੀਆ ਸੂਲੇ ਦੀ ਧੀ ਦੇ ਵਿਆਹ ਦੀ ਰਿਸੈਪਸ਼ਨ ਮੌਕੇ PM ਮੋਦੀ , ਅਮਿਤ ਸ਼ਾਹ, ਰਾਹੁਲ ਗਾਂਧੀ ਸਣੇ ਹੋਰ ਬਹੁਤ ਸਾਰੇ ਨੇਤਾ ਹੋਏ ਸ਼ਾਮਲ
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राजस्थान की धरती पर 1971 के भारत-पाकिस्तान युद्ध में लोंगेवाला की लड़ाई भारतीय सैनिकों के अदम्य साहस, नेतृत्व और पराक्रम की ऐसी मिसाल बनी, जिसे देश कभी नहीं भूलेगा।
कर्नल धर्मवीर सिंह की पोस्टिंग 1971 के युद्ध के दौरान लोंगेवाला में थी। विषम परिस्थितियों में भारतीय सेना के बेहद सीमित सैनिक बल ने पाकिस्तानी सेना के बड़े हमले का डटकर मुकाबला किया। उनके साहस, सैन्य नेतृत्व, मानसिक दृढ़ता और अदम्य पराक्रम ने उन्हें लोंगेवाला के वीर नायकों में स्थान दिलाया। उनके योगदान के लिए उन्हें Mentioned in Despatches से सम्मानित किया गया।
कर्नल धर्मवीर सिंह का जन्म 1945 में हरियाणा के घुदानी गांव में हुआ था। वर्ष 1969 में पंजाब रेजीमेंट में कमीशन प्राप्त करने के बाद उन्होंने भारतीय सेना में गौरवपूर्ण सेवा की। उन्होंने 1992 से 1994 तक 23वीं पंजाब बटालियन का नेतृत्व किया और वर्ष 1997 में सेवानिवृत्त हुए।
लोंगेवाला की ऐतिहासिक लड़ाई पर जे.पी. दत्ता की चर्चित फिल्म ‘बॉर्डर’ बनी, जिसमें उनके किरदार को अभिनेता अक्षय खन्ना ने निभाया था।
कर्नल धर्मवीर सिंह का 16 मई 2022 को गुरुग्राम में निधन हो गया, लेकिन राष्ट्र के प्रति उनका समर्पण और लोंगेवाला में उनका साहस सदैव भारतीयों को प्रेरणा देता रहेगा।
देश के इस वीर सपूत को कोटि-कोटि नमन।
उनकी वीरता और बलिदान को भारतवर्ष हमेशा याद रखेगा।

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