image

image
2 d - Translate

🩺 NEET-PG एडमिशन को लेकर वायरल हो रहा दावा, लेकिन क्या है पूरी सच्चाई?
सोशल मीडिया पर एक दावा तेजी से वायरल हो रहा है कि NEET-PG में 800 में से केवल 1 अंक पाने वाले अभ्यर्थी को हैदराबाद के कामिनेनी एकेडमी ऑफ मेडिकल साइंसेज़ में MS ऑर्थोपेडिक्स में प्रवेश मिल गया।
हालांकि, ऐसे दावों पर बिना आधिकारिक पुष्टि के भरोसा नहीं करना चाहिए। मेडिकल प्रवेश प्रक्रिया मेरिट, पात्रता, आरक्षण, काउंसलिंग नियमों और विभिन्न श्रेणियों के कटऑफ के आधार पर होती है। इसलिए किसी भी वायरल पोस्ट को अंतिम सत्य मानने से पहले आधिकारिक जानकारी की जांच करना जरूरी है।
आपकी राय में ऐसी वायरल खबरों की पहले तथ्य-जांच होनी चाहिए या नहीं? कमेंट में अपनी राय जरूर बताएं।
#neetpg #medicaleducation #viralnews #factcheck #trendingnews #education #hindinews #socialmedia #currentaffairs

image
2 d - Translate

पिता की वृद्धाश्रम में मौत बेटियां बोली 5100 भेज रहे हैं हम नहीं आ सकते....🥹😭😭

image
2 d - Translate

रामायण से लेकर आदिपुरुष तक…
कई कलाकार आए, लेकिन दिल और दिमाग पर सबसे गहरी छाप किस रावण ने छोड़ी? 👑🔥
1️⃣ यश 2️⃣ ओम पुरी 3️⃣ निकितिन धीर 4️⃣ आर्य बब्बर 5️⃣ अखिलेंद्र मिश्रा 6️⃣ तरुण खन्ना 7️⃣ सैफ अली खान 8️⃣ अरविंद त्रिवेदी
आपका वोट किसे? 👇💬

image
2 d - Translate

Alert Indian 🚨🚨
The Food Safety and Standards Authority of India (FSSAI) has ordered Dabur India to stop selling several food products carrying "100 per cent" claims, saying the terminology is ambiguous, unverifiable and potentially misleading to consumers.

The food regulator said on Monday that its prohibition order covered products including honey, apple cider vinegar, virgin coconut oil, sesame oil, cow ghee, coconut water and coconut milk carrying misleading '100 per cent' claims.

image
2 d - Translate

सोशल मीडिया पर जंतर-मंतर और झारखंड के छात्र आंदोलन की तुलना वाली तस्वीरें तेजी से वायरल हो रही हैं। पोस्ट में दावा किया गया है कि जंतर-मंतर पर प्रदर्शनकारियों के लिए बर्गर, पिज्जा और सबवे की व्यवस्था की गई, जबकि झारखंड के छात्र अपने आंदोलन के दौरान सूखी रोटी और भुने चने के सहारे प्रदर्शन करते नजर आए। इस तुलना को लेकर सोशल मीडिया पर लोगों की तीखी प्रतिक्रियाएं देखने को मिल रही हैं।
इन तस्वीरों ने एक बार फिर आंदोलनों के दौरान मिलने वाले समर्थन और संसाधनों को लेकर बहस छेड़ दी है। कई लोग इसे व्यवस्था के अंतर का उदाहरण बता रहे हैं, जबकि अन्य लोग इस तुलना पर अपनी-अपनी राय रख रहे हैं।

#jharkhand #jharkhandprotest #jpsc #jantarmantar #studentprotest #india #socialmedia #viralnews #trending #currentaffairs #newsupdate #publicreaction #students #theyouth #breakingnews

image

2 d - Translate

झारखंड आंदोलन और एमएस धोनी को लेकर उठे सवाल
झारखंड में चल रहे आंदोलन के बीच कुछ प्रदर्शनकारियों ने भारतीय क्रिकेट टीम के पूर्व कप्तान महेंद्र सिंह धोनी से अपनी नाराज़गी जाहिर की है। उनका कहना है कि जब धोनी ने देश को विश्व कप जिताया था, तब पूरे झारखंड और देश ने उनका दिल खोलकर स्वागत किया और उन पर गर्व किया। लेकिन आज जब उनके ही राज्य में लोग अपनी मांगों को लेकर सड़कों पर प्रदर्शन कर रहे हैं, तब धोनी की ओर से कोई प्रतिक्रिया सामने नहीं आई।
एक प्रदर्शनकारी ने कहा कि यदि धोनी किसी कारणवश आंदोलन स्थल पर नहीं आ सकते, तो कम से कम सोशल मीडिया के माध्यम से अपना समर्थन या संवेदना व्यक्त कर सकते हैं। उनका मानना है कि एक लोकप्रिय और सम्मानित व्यक्ति की एक छोटी-सी प्रतिक्रिया भी लोगों का मनोबल बढ़ा सकती है।
हालांकि, यह भी ध्यान रखना जरूरी है कि किसी सार्वजनिक व्यक्ति का किसी आंदोलन पर प्रतिक्रिया देना या न देना उनका व्यक्तिगत निर्णय होता है। इस मुद्दे पर लोगों की राय अलग-अलग हो सकती है।
आपको क्या लगता है? क्या एमएस धोनी को इस मुद्दे पर अपनी प्रतिक्रिया देनी चाहिए, या उन्हें ऐसे मामलों से दूर रहना चाहिए? अपनी राय कमेंट में जरूर बताइए।

image
2 d - Translate

सोनम वांगचुक के प्रति सम्मान की एक अनोखी मिसाल
सोनम वांगचुक के अनुरोध के बाद सामाजिक कार्यकर्ता देवेंद्र नाथ महतो ने अपना तीन दिन का अनशन समाप्त कर दिया। इन तीन दिनों के दौरान उन्होंने अन्न का एक भी दाना ग्रहण नहीं किया और केवल पानी पीकर अपना विरोध जारी रखा। यह फैसला कई लोगों के लिए इस बात का उदाहरण बन गया कि किसी आंदोलन में मतभेद हो सकते हैं, लेकिन आपसी सम्मान और विश्वास सबसे ऊपर होता है।
यह घटना यह भी दिखाती है कि जब किसी व्यक्ति के विचारों और उद्देश्य पर भरोसा होता है, तो उसके अनुरोध का सम्मान करते हुए कठिन से कठिन निर्णय भी लिया जा सकता है। लोकतंत्र में शांतिपूर्ण विरोध और संवाद दोनों का अपना महत्वपूर्ण स्थान है, और यही किसी भी स्वस्थ समाज की पहचान है।
हालांकि, इस घटना को लेकर लोगों की अपनी-अपनी राय हो सकती है। कुछ इसे आपसी सम्मान और एकजुटता का प्रतीक मानते हैं, तो कुछ इसे अलग दृष्टिकोण से देखते हैं।
आपकी इस पूरे घटनाक्रम पर क्या राय है? अपनी प्रतिक्रिया कमेंट में जरूर बताइए।
#sonamwangchuk #devendranathmahato #protest #respect #democracy #india #hindinews #viralnews #facebookpos

image