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भीड़ भरी ट्रेनों में खड़े होने तक की जगह नहीं वाले दृश्य को देखने का आंख अभ्यस्त हो चुका है। ऐसे में अगर कोई ट्रेन की फर्श पर आराम से मच्छरदानी लगाकर सोता नजर आ जाए तो यह दृश्य चौंकाने वाला ही होगा।
दरभंगा से फारबिसगंज के बीच चलने वाली DEMU ट्रेन का एक ऐसा ही वीडियो इन दिनों सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है।वीडियो में एक यात्री ने सीट पर मच्छरदानी लगाकर उसे अपने ‘बेडरूम’ में बदल दिया है। वह न सिर्फ आराम से लेटा है, बल्कि पूरे सुकून के साथ यात्रा करता दिख रहा है। इसे देखकर लोग हैरान भी हैं और मनोरंजन भी ले रहे हैं।
आम तौर पर लोकल ट्रेनों में भीड़ इतनी होती है कि बैठना भी मुश्किल हो जाता है। लेकिन इस रूट की DEMU में कभी-कभी ऐसे दृश्य देखने को मिल जाते हैं, जो यात्रियों के अनुभव को बिल्कुल अलग बना देते हैं।दरभंगा-फारबिसगंज रूट पर यह कोई पहली बार नहीं है। स्थानीय यात्रियों के अनुसार, इस रूट पर सफर अपेक्षाकृत आरामदायक रहता है और लोग अपनी सुविधा के अनुसार यात्रा को ‘कस्टमाइज’ भी कर लेते हैं।
जहां एक ओर यह दृश्य लोगों को मुस्कुराने पर मजबूर कर रहा है, वहीं दूसरी ओर यह सवाल भी खड़ा करता है कि क्या भारतीय रेलवे में यात्रियों को बेहतर और व्यवस्थित सुविधाएं मिल रही हैं या लोग मजबूरी में ऐसे जुगाड़ अपनाने को विवश हैं।
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ਲਾਇਸੈਂਸ ਦੇ ਨਾਮ 'ਤੇ ਏਜੰਟ ਨੇ ਮਾਰੀ ਠੱਗੀ—2000 ਰੁਪਏ ਲੈ ਕੇ ਮੁਕਰਿਆ, ਵੀਡੀਓ ਹੋਈ ਵਾਇਰਲ! 🚨💸😱
ਪੰਜਾਬ ਵਿੱਚ ਲਾਇਸੈਂਸ ਬਣਾਉਣ ਦੇ ਨਾਮ 'ਤੇ ਧੋਖਾਧੜੀ ਦਾ ਵੱਡਾ ਮਾਮਲਾ ਸਾਹਮਣੇ ਆਇਆ ਹੈ। ਇੱਕ ਏਜੰਟ ਨੇ ਬਿਨਾਂ ਟੈਸਟ ਲਾਇਸੈਂਸ ਦਿਵਾਉਣ ਦਾ ਝਾਂਸਾ ਦੇ ਕੇ ਪੈਸੇ ਲਏ ਅਤੇ ਫਿਰ ਮੁਕਰ ਗਿਆ। ਵੀਡੀਓ ਵਾਇਰਲ ਹੋਣ ਤੋਂ ਬਾਅਦ ਲੋਕਾਂ ਵਿੱਚ ਭਾਰੀ ਰੋਸ ਹੈ। ਅਜਿਹੇ ਠੱਗਾਂ ਤੋਂ ਬਚੋ ਅਤੇ ਜਾਗਰੂਕ ਬਣੋ! ✨
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उत्तर प्रदेश के गाजियाबाद में स्मार्ट प्रीपेड मीटर लागू होने के बाद बिजली उपभोक्ताओं की मुश्किलें लगातार बढ़ती जा रही हैं। खासतौर पर सोलर पैनल लगाने वाले उपभोक्ता खुद को ठगा हुआ महसूस कर रहे हैं। लाखों रुपये खर्च कर सोलर सिस्टम लगवाने के बावजूद अब उन्हें हजारों रुपये के बिजली बिल चुकाने पड़ रहे हैं। इस स्थिति ने उपभोक्ताओं में भारी आक्रोश पैदा कर दिया है।
भारतीय रेल आज की तारीख में दुनिया का चौथा सबसे बड़ा रेल नेटवर्क है। भारतीय रेल की ट्रेन में एक इंजन 22 से 24 डिब्बों की रेलगाड़ी 130 किलोमीटर प्रति घंटे की स्पीड से दौड़ती है। लेकिन रेलवे की शुरुआत 1853 में जब हुई थी, तब महज 14 डिब्बे की ट्रेन चलाने के लिए तीन इंजन लगाए गए थे। पूरे ट्रेन में महज 400 खुशनसीब यात्रियों को रेल यात्रा का मौका मिला था।