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एचआईवी पीड़ित महिला की माैत के बाद अंतिम संस्कार के लिए न घरवाले पहुंचे और न ही मायके वाले. पोस्टमार्टम हाउस पर मां के शव को उठाने के लिए 8 वर्षीय बेटा अपनों की राह देखता रहा मगर कोई नहीं आया. सबने फोन बंद कर लिए. इंसानियत को शर्मसार करने वाली यह घटना बृहस्पतिवार की है. बेसहारा भाई-बहन की मदद के लिए पुलिस आगे आई. शुक्रवार को शव का अंतिम संस्कार किया जाएगा. मृतका के पति की भी एक वर्ष पहले एचआईवी से मौत हो चुकी है. यह हृदय विदारक घटना जनपद एटा के थाना जैथरा क्षेत्र के नगला धीरज गांव की है.
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तीर्थनगरी प्रयागराज के माघ मेले में साधुओं और श्रद्धालुओं की भीड़ के बीच, संगम पर एक शख्सियत सबका ध्यान खींच रही है। ' गूगल गोल्डन बाबा ' के नाम से मशहूर, कानपुर के एक संत अपनी अनोखी वेशभूषा के कारण आकर्षण का केंद्र बन गए हैं। वे सिर से पैर तक सोने के गहनों से सजे रहते हैं, चांदी के बर्तनों में खाना खाते हैं और जहां भी जाते हैं, लड्डू गोपाल की सोने की मूर्ति अपने साथ रखते हैं।
इस अनोखे शख्स का नाम मनोज आनंद महाराज है, वह दावा करते हैं कि उन्होंने करीब 5 करोड़ रुपये के सोने और चांदी के गहने पहने हुए हैं। दोनों हाथों में भारी कंगन, हर उंगली में हिंदू देवी-देवताओं की तस्वीरों वाली अंगूठियां, और सोने, चांदी, शंख और रुद्राक्ष के मोतियों से बने कई हार ने मेले में उनकी मौजूदगी को खास बना दिया है।

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ये लो-40 वालों का हाल!
स्वास्थ्य सेवाएं प्रदान करने में भी सरकारों को आरक्षण लागू करना चाहिए आरक्षित वर्ग का डाक्टर अरक्षित वर्ग का ही इलाज करेगा! हम तैयार है हैं हिम्मत किसी सरकार में वोट के दलाल

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वाराणसी: प्रतिबंधित मांझे की बिक्री पर रोक लगाने के पुलिस ने खूब दावे किए। कई थाना क्षेत्रों में छापेमारी कर बरामदगी की और अपनी पीठ खुद ठोंकी। निगरानी के लिए ड्रोन उड़ाने का दावा किया लेकिन कोई इंतजाम काम न आया।
मकर संक्रांति से एक दिन पहले बुधवार को प्रतिबंधित मांझे ने कई राहगीरों के नाक-कान और गला-पलकें तक काटे। खून से तर-बतर राहगीरों को कई टांके लगे और इलाज कराया गया।
लोहता थाना क्षेत्र के चुरामनपुर के रहने वाले जितेंद्र मौर्य बाइक से रामनगर जा रहे थे। सामनेघाट पुल पर चढ़ते समय ही प्रतिबंधित मांझे की चपेट में आ गए। वह जब तक संभलते उनकी दोनों पलक व नाक को धारदार मांझा ने रेत दिया और वह लहूलुहान हो गए। आसपास के लोग उन्हें लेकर रामनगर चिकित्सालय पहुंचे और प्राथमिक उपचार कराया।
वहीं कंदवा की कृति गिरी दुर्गाकुंड से गुजर रही थीं। इसी दौरान प्रतिबंधित मांझा से चपेट में आने से चेहरा जख्मी हो गया। पुलिस ने सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में इलाज के बाद स्वजन को सौंपा। चिरईगांव प्रतिनिधि के अनुसार स्वर्वेद महामंदिर उमरहां से दर्शन कर लौट रहे चंदौली के जिगना चकिया निवासी संतोष कुमार (32 वर्ष) वाराणसी-गाजीपुर मार्ग पर खानपुर के सामने प्रतिबंधित मांझा की चपेट में आ गए।
बाइक जब तक रोकते मांझे ने उनकी नाक रेत दी। प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र पर उपचार के बाद चिकित्सकों ने जिला अस्पताल के लिए रेफर कर दिया।

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कलयुग अपनी चरम सीमा पर है 😷

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10 फरवरी 1985 को महाराष्ट्र के नागपुर में एक बच्चे का जन्म हुआ। जन्म के महज तीन दिन बाद ही उसकी मां ने उसे छोड़ दिया। 1 महीने तक वो बच्चा अनाथ आश्रम में रहा और फिर मुंबई घूमने आए डच कपल ने बच्चे को गोद ले लिया। वो उसे अपने साथ नीदरलैंड ले गए।
इस घटना को 41 साल हो गए हैं। नीदरलैंड में बच्चे की परवरिश हुई और आज वो नीदरलैंड के एक शहर का मेयर बन चुका है। उनका नाम है फाल्गुन बिनेनडिज्क, जो 41 साल की उम्र में अपनी मां को ढूंढने के लिए भारत आए हैं।
आधिकारिक रिकॉर्ड्स के अनुसार, फाल्गुन की मां 21 वर्षीय अविवाहित युवती थी, जिसमें समाज के डर से अपने बच्चे को तीन दिन बाद की नागपुर के MSS में छोड़ दिया था। ये जगह अनाथ बच्चों और पीड़ित महिलाओं के लिए है।
MSS की एक नर्स ने बच्चे को नाम दिया था। दरअसल हिंदू कैलेंडर के अनुसार, फरवरी के महीने को फाल्गुन कहा जाता है। बच्चे का जन्म भी फरवरी में हुआ था, जिसके कारण नर्स ने उन्हें फाल्गुन कहना शुरू कर दिया। कुछ हफ्तों बाद फाल्गुन को मुंबई लाया गया, जहां 1 डच कपल ने उन्हें गोद ले लिया।
फाल्गुन नीदरलैंड में ही पले-बढ़े। उन्हें भारत के बारे में कुछ पता नहीं था। उन्होंने सिर्फ भूगोल की किताबों में बने नक्शे में भारत का मानचित्र देखा था। बढ़ती उम्र के साथ फाल्गुन के मन में अपनी असली मां के बारे में जानने की ललक जगी और उन्होंने भारत का रुख कर लिया।
फाल्गुन पहली बार 18 साल की उम्र में 2006 में भारत आए थे। इस दौरान उन्होंने दक्षिण भारत की सैर की थी। मगर, इस बार फाल्गुन ने अलग मकसद से वापसी की है। उन्होंने नागपुर स्थित MSS का दौरा किया।
फाल्गुन के अनुसार मैं हमेशा से एक खुली किताब था। मैंने महाभारत पढ़ी है और मुझे लगता है कि हर कर्ण को कुंती से मिलने का अधिकार है।
बता दें कि फाल्गुन हीमस्टेड शहर के मेयर हैं। हीमस्टेड नीदरलैंड की राजधानी एम्स्टर्डम से महज 30 किलोमीटर की दूरी पर है। फाल्गुन ने अपनी मां को ढूंढने के लिए कई NGO, नगर पालिकाओं और पुलिस की मदद मांगी है। फाल्गुन का कहना है, "मुझे लगता है कि वो अभी तक मुझे छोड़ने के सदमे में होंगी। मैं सिर्फ उनसे मिलकर उन्हें बताना चाहता हूं कि मैं ठीक हूं और खुश हूं। मैं उन्हें एक बार देखना चाहता हूं।"
#fal****

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पंजाब में गुरदासपुर के दीनानगर निवासी एक युवक की इंग्लैंड के बर्मिंघम में संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हो गई है। यह घटना 11 जनवरी को सामने आई। परिवार ने केंद्र और पंजाब सरकार से भी मृतक के शव को भारत वापस लाने के लिए सहायता की गुहार लगाई है। मृतक युवक के पिता पवन कुमार ने बताया कि, उनका 27 वर्षीय बेटा नमन खुल्ल र पांच साल पहले रोजी-रोटी कमाने के लिए इंग्लैंड गया था। वह बर्मिंघम में एक पाकिस्तानी महिला के अधीन डिलीवरी बॉय का काम करता था।
#namankhullardeathcase #punjabiyouth****d

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बेंगलुरु के बाहरी इलाके चंदापुर में दंत चिकित्सा की छात्रा यशस्विनी (23) की आत्महत्या के मामले में जांच ने चौंकाने वाले खुलासे किए हैं।
पुलिस के अनुसार, कॉलेज में त्वचा के रंग और पहनावे को लेकर लेक्चररों द्वारा की गई कथित बेइज्जती से आहत होकर उसने यह कदम उठाया। मामले के सामने आते ही कॉलेज प्रबंधन ने ओरल मेडिसिन एंड रेडियोलॉजी (ओएमआर) विभाग के छह लेक्चररों को बर्खास्त कर दिया है।
परिजनों और सहपाठियों का आरोप है कि यशस्विनी को कक्षा में सार्वजनिक रूप से ताने मारे गए यहां तक कहा गया, काले रंग की लड़की डाक्टर कैसे बन सकती है?
एक दिन आंखों में दर्द के कारण छुट्टी लेने पर उसे सेमिनार प्रस्तुत करने और रेडियोलॉजी केस संभालने से भी रोका गया और कथित तौर पर अपमानजनक भाषा का इस्तेमाल किया गया।

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दिल्ली में ठंड का 20 साल का रिकॉर्ड टूटा, जानें आपके राज्य में कब होगी बारिश और कहां बढ़ेगी ठिठुरन

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अपनी भूख को काबू में रखना अति आवश्यक है....!!🙌🙏🏻
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The Punjab Kings dugout was filled with raw emotion on Tuesday evening as 24-year-old Priyansh Arya lit up the Mullanpur stadium with a breathtaking century against Chennai Super Kings (CSK) in IPL 2025. Yet, it was team co-owner Preity Zinta’s jubilant reaction that truly stole the spotlight—she jumped in celebration, her joy palpable as Arya scripted history.
Arya, a left-handed batter hailing from Delhi, announced his arrival in grand fashion, smashing 103 runs off just 42 deliveries—a knock decorated with seven fours and nine massive sixes.
His blistering innings made him the second iconic 37-ball ton from 2010 remains ahead. As Arya raised his bat after clearing long-on for a six to complete his century, cameras zoomed in on the Punjab Kings camp, where an elated Preity Zinta leapt to her feet, clapping and cheering along with the roaring crowd.
Following Punjab Kings’ 18-run win, tch interview.
"Aapko mai ek din pehle mili thi to aapne ek shabd nahi bola tha, ekdum silent the aur aapne itni zabardast game kheli, so how is it? [I met you a day before and you didn’t say a single word—you were completely silent. And then you played such an incredible game, so how does it feel?]" Preity asked Priyansh.
To which Arya replied with a smile: "Jab hum mile they to mujhe aapki baatein sunne mein about the game, it feels amazing—like an out of the world feeling, a top of the result of a rising journey that’s been turning
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