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इटावा में एक सिरफिरे आशिक के हाई वोल्टेज ड्रामे ने सबको हैरान कर दिया, जहाँ अपनी मोहब्बत को पाने के लिए एक युवक जान की बाजी लगाकर मोबाइल टावर पर जा चढ़ा। उसका मकसद सिर्फ अपनी प्रेमिका को घर से बाहर लाना था, जिसके बाद हड़कंप मच गया और पुलिस को मोर्चा संभालना पड़ा। पुलिस ने सूझबूझ दिखाते हुए युवती को मौके पर बुलाया और उसकी एक आवाज पर प्रेमी टावर से नीचे उतर आया। इसके तुरंत बाद दोनों ने बिना देर किए मंदिर में एक-दूसरे को वरमाला पहनाई और हमेशा के लिए एक दूजे के हो गए। हालांकि, युवती के माता-पिता ने इस रिश्ते को ठुकरा दिया, जिसके बाद कानूनी कार्रवाई करते हुए पुलिस ने लड़की को उसके प्रेमी की मां के हवाले कर दिया।
#etawah #lovestory #loversreunited

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They follow caste because they are very religious. Following 'caste' is not wrong for people. In my opinion, their religion is wrong, which has given birth to this notion of caste.

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यह एक प्रेरणादायक कहानी है ❤️। दिल्ली की सड़कों से सामने आई इस कहानी ने सबका दिल जीत लिया है। 12 वर्षीय यह बालक न केवल स्वयं स्कूल जाता है, बल्कि शाम को अपने जैसे जरूरतमंद बच्चों को शिक्षित करने का भी बीड़ा उठाया है। सीमित संसाधनों के बावजूद, पुल के नीचे बैठकर नि:शुल्क शिक्षा प्रदान करना उसकी निस्वार्थ भावना को दर्शाता है। यद्यपि उसके पास न तो बड़ा विद्यालय है और न ही पर्याप्त संसाधन, फिर भी उसका अध्यापन कौशल किसी अनुभवी शिक्षक से कम नहीं है। इस कहानी से यह संदेश मिलता है कि बड़ा बनने के लिए उम्र नहीं, बल्कि बड़ी सोच और संकल्प की आवश्यकता होती है।

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“There is no scope for the development of rational thinking, reason, and independent thought in Hinduism...”

- Babasaheb Dr. Bhimrao Ambedkar (14 April 1891–6 December 1956)

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मेरा नाम मोहनलाल है, बिहार के गया जिले के पोची गांव का रहने वाला हूं। शायद मैं दुनिया का इकलौता इंसान हूं जिसने जिंदा रहते अपनी ही श'व यात्रा देखी। यह सब मैंने मजाक में नहीं, बल्कि एक खास मकसद से किया—जानना चाहता था कि मेरे जाने के बाद लोग मेरे बारे में क्या सोचेंगे।
मेरे कुछ करीबी लोगों को ही इस योजना के बारे में पता था। सारी तैयारियां बिल्कुल असली श'व यात्रा की तरह की गईं—मुझे नहलाया गया, क'फ'न पहनाया गया, ठ'ठरी पर लि'टाया गया और फूल-मालाओं से सजाया गया। मेरी ना'क में रूई र'ख दी गई और मैंने सां'स तक रो'क ली, ताकि कोई शक न करे। जो लोग सच्चाई नहीं जानते थे, वे सच में दुखी थे और रो रहे थे।
जब श'व यात्रा शुरू हुई, तो लोग “राम नाम सत्य है” बोल रहे थे। मैं अंदर ही अंदर मुस्कुरा रहा था और सोच रहा था—“सत्य तो मैं ही हूं, बस थोड़ी देर में उठकर साबित कर दूंगा।” श्म'शान तक पहुंचते-पहुंचते मैंने लोगों की बातें सुनीं—कोई मेरी तारीफ कर रहा था, कोई मेरी अचानक मौत पर हैरान था, तो कोई मेरे बच्चों के बारे में पूछ रहा था। उस पल मुझे एहसास हुआ कि इंसान के जाने के बाद वही याद किया जाता है, जैसा उसने जीवन जिया होता है।
जब दा'ह संस्कार की बारी आई, तो मैं अचानक उठ बैठा। वहां मौजूद लोग हैरान रह गए। मैंने सबको बताया कि यह सब मैंने इसलिए किया ताकि देख सकूं कि मेरी मौत पर कौन आता है और लोग क्या कहते हैं। साथ ही, अपने बनवाए “मुक्तिधाम” श्म'शान घाट का उद्घाटन भी अपने ही “शव” से करना चाहता था।
मेरी जिंदगी में कई उतार-चढ़ाव आए—वायुसेना में 21 साल सेवा देने के बाद गांव में कोचिंग सेंटर शुरू किया। पत्नी के निधन और बच्चों से दूरी ने मुझे अकेला जरूर किया, लेकिन मैंने खुद को समाज सेवा में लगा दिया। पत्नी की याद में अस्पताल बनवाया और अपने पैसों से श्म'शान को “मुक्तिधाम” में बदला।
मैं दशरथ मांझी और गौतम बुद्ध से प्रेरणा लेकर अब ऐसा जीवन जीना चाहता हूं, जिसे याद करके लोग आखिरी समय में भी सिर्फ अच्छी बातें करें।

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What the Supreme Court is saying—how will that play out after the election results? If the margin of victory turns out to be less than the number of removed voters, the election of the winning candidates will be annulled! If not, then how logical is it to talk about applying Bengal’s ‘experiment’ to other states? The importance of the West Bengal elections is so negligible that citizens there can be barred from voting solely on this basis; ‘Vote next time!’

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As long as transactions in cash exceeding ₹100 notes and above ₹1,000 are not stopped,

and laws are not enacted to confiscate 100% of the property of corrupt individuals, terminate their citizenship, and impose life imprisonment/****ing within 01 year,

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खरगोन जिले के महेश्वर की 'महाकुंभ वायरल गर्ल' मोनालिसा लापता हो गई हैं! जी हां, वही मोनालिसा जो अपनी शादी को लेकर चर्चा में आई थीं, अब उनका कोई सुराग नहीं मिल रहा है। इस मामले में तब हड़कंप मच गया जब उनके पति फरमान खान ने सोशल मीडिया पर एक वीडियो जारी किया। फरमान का दावा है कि मोनालिसा भाग गई है और वह उसे ढूंढने के लिए राजस्थान के अजमेर और पुष्कर की गलियों में भटक रहा है।
लेकिन कहानी में ट्विस्ट यहीं खत्म नहीं होता! दूसरी तरफ, मोनालिसा की मां लताबाई ने फरमान पर बेहद गंभीर आरोप लगाए हैं। मां का कहना है कि यह सब एक सोची-समझी साजिश है और फरमान ने ही उनकी बेटी को गायब किया है। परिजनों के मुताबिक, पिछले 15-20 दिनों से मोनालिसा से उनका कोई संपर्क नहीं हुआ है और उसका फोन भी लगातार बंद आ रहा है।
आपको बता दें कि यह मामला पहले से ही कानूनी पेचीदगियों में फंसा हुआ है। हाल ही में जांच एजेंसियों ने खुलासा किया था कि मोनालिसा नाबालिग है, जिसके बाद आरोपी फरमान के खिलाफ महेश्वर थाने में पॉक्सो (POCSO) एक्ट के तहत एफआईआर दर्ज की जा चुकी है। अब इस नए वीडियो ने मामले को और भी रहस्यमयी बना दिया है, जबकि पुलिस इस पूरे घटनाक्रम पर फिलहाल चुप्पी साधे हुए है। आखिर क्या है इस गायब होने के पीछे का सच? क्या यह वाकई फरमान की साजिश है या फिर कहानी कुछ और ही है?

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