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🚩 'जगन्नाथ धाम' नाम को लेकर विवाद का सौहार्दपूर्ण समाधान, पुरी की पहचान बरकरार
महाप्रभु जगन्नाथ के करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था से जुड़े एक महत्वपूर्ण मुद्दे का समाधान हो गया है। ओडिशा सरकार की आपत्ति के बाद पश्चिम बंगाल सरकार ने दीघा में बने नए जगन्नाथ मंदिर के नाम के साथ 'धाम' शब्द के इस्तेमाल पर रोक लगा दी है।
ओडिशा का कहना था कि 'जगन्नाथ धाम' सदियों से केवल पुरी की धार्मिक और सांस्कृतिक पहचान रहा है। चार पवित्र धामों में शामिल पुरी को दुनिया भर में 'जगन्नाथ धाम' के नाम से जाना जाता है, इसलिए किसी अन्य स्थान के लिए इस नाम का उपयोग श्रद्धालुओं की भावनाओं को प्रभावित कर सकता है।
विवाद बढ़ने के बाद पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ने मामले में हस्तक्षेप करते हुए स्पष्ट किया कि दीघा के जगन्नाथ मंदिर के नाम के साथ 'धाम' शब्द नहीं जोड़ा जाएगा। इस फैसले का ओडिशा में विभिन्न धार्मिक संगठनों और श्रद्धालुओं ने स्वागत किया है।
अब आधिकारिक रूप से पूरे विश्व में 'जगन्नाथ धाम' की पहचान केवल ओडिशा के पुरी से ही जुड़ी रहेगी, जबकि दीघा का मंदिर अपनी अलग पहचान के साथ श्रद्धालुओं के लिए खुला रहेगा।

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राजधानी पटना में बिस्कोमान भवन में आज शनिवार सुबह आ"ग लग गई। आग भवन की 13वीं मंजिल पर लगी थी। उस समय बिल्डिंग का गार्ड मौजूद था। उसने देखा कि पूरी बिल्डिंग में धुआं भर रहा है तो बाहर निकलकर देखा तो 13वीं मंजिल की खिड़कियों से आग की लपटें दिखाई दीं। इसके बाद उसने पुलिस और फायर ब्रिगेड को इसकी सूचना दी। थोड़ी देर में पुलिस और फायर ब्रिगेड की गाड़ियां बिस्कोमान भवन पहुंच गईं। फायर ब्रिगेड ने करीब 45 मिनट के अंदर आ"ग पर काबू पा लिया गया।

मिली जानकारी के मुताबिक, बिस्कोमान भवन की 13वीं मंजिल में करीब सुबह के 3:45 मिनट से पहले आ"ग लगी थी। जब बिल्डिंगें धुआं होने लगा तब गार्ड ने बिल्डिंग से बाहर निकल देखा तो पता चला कि आ"ग लगी है। इसके बाद फायर ब्रिगेड को आग लगने की जानकारी दी गई।

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उत्‍तर प्रदेश के कलेक्ट्रेट सभागार में उस वक्त हड़कंप मच गया, जब जनता दर्शन में फरियाद लेकर पहुंचे एक बुजुर्ग की बेबसी देख जिलाधिकारी सरनीत कौर ब्रोका का दिल पसीज गया। बरसों से सरकारी दफ्तरों की धूल फांक रहे एक लाचार बुजुर्ग को जब डीएम सरनीत कौर ब्रोका के सख्त तेवर और एसडीएम सदर की 'सुपरमैन' वाली संवेदनशीलता का साथ मिला, तो सालों से अटका काम मिनटों में हो गया। मामला तहसील सदर के गांव छिवलामऊ का है। यहां के रहने वाले बुजुर्ग कंधई लाल अपनी ही जमीन पर कब्जे के लिए दर-दर की ठोकरें खा रहे थे।

दबंगों की नजर और सरकारी लेटलतीफी के बीच फंसे कंधई लाल ने जब अपनी आपबीती डीएम सरनीत कौर ब्रोका को सुनाई, तो डीएम साहब का पारा चढ़ गया। प्रकरण की गंभीरता को भांपते हुए डीएम ने तुरंत ऑन-द-स्पॉट एक्शन लिया और एसडीएम सदर गौतम सिंह को तलब कर फाइल पर तत्काल आर-पार की कार्रवाई के निर्देश दे डाले।

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एलन मस्क की कंपनी स्पेसएक्स (SpaceX) की शुक्रवार को अमेरिकी शेयर मार्केट में नैस्डैक पर ब्लॉकबस्टर लिस्टिंग हुई। इसके बाद मस्क आधिकारिक तौर पर दुनिया के पहले ट्रिलियनेयर (लाख करोड़पति) बन गए हैं। अब मस्क की नेटवर्थ 1 ट्रिलियन डॉलर (95 लाख करोड़ रुपये) से ज्यादा हो गई है। यह संपत्ति इतनी विशाल है कि आम इंसान के लिए इसकी कल्पना करना भी मुश्किल है।

बिजनेस टुडे के मुताबिक अगर किसी व्यक्ति के पास इतनी रकम हो, तो वह दुनिया की सबसे बड़ी कंपनियों को एक झटके में खरीद सकता है, मानवता की सबसे बड़ी समस्याओं को हमेशा के लिए खत्म कर सकता है और फिर भी उसके पास बेहिसाब ऐशो-आराम के लिए पैसे बच जाएंगे। मस्क इपनी रकम से बुर्ज खलीफा, मरीना बे सैंड्स और अबराज अल बैत जैसी दुनिया की सबसे प्रतिष्ठित और महंगी इमारतें खरीद सकते हैं।

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